आप सब 'पाखी' को बहुत प्यार करते हैं...

बुधवार, अप्रैल 07, 2010

पाखी की हैवलॉक द्वीप (Havelock island) यात्रा

पिछले दिनों हम हैवलॉक द्वीप (Havelock island) घूमने गए. अंडमान (Andman)में यह जगह मुझे सबसे अच्छी लगती है, अत: जब भी मन करता है, हम हेलीकाप्टर से वहाँ पहुँच जाते हैं. छुट्टियाँ की छुट्टियाँ और खूब मस्ती व धमाल भी. हैवलॉक द्वीप (Havelock island) सबसे अधिक पर्यटकों के आवागमन वाला और सबसे लोकप्रिय द्वीप है जो पोर्टब्लेयर (Portblair) के उत्तर-पूर्व में लगभग 38 कि0मी0 दूर स्थित है।
हैवलॉक द्वीप (Havelock island) पर हम डॉल्फिन रिसॉर्ट (Dolphin Resorts) में रुके.
डॉल्फिन रिसॉर्ट के सामने ही विजयनगर तट (Vijaynagar beach) है। वहाँ मैंने जमकर धमाल किया.
शाम को हम राधानगर (Radhanagar beach) तट पर गए. यह अंडमान व निकोबार द्वीप समूह (Andaman & Nicobar Islands) का सबसे खूबसूरत तट है. यह तट विदेशी सैलानियों (Foreigner tourists) की पहली पसंद है। यह एशिया का द्वितीय सबसे लम्बा तट है। 2 किलोमीटर लम्बा और औसतन 30-40 मीटर चौड़े राधानगर तट को टाइम मैग्जीन (Time magazine) ने एक सर्वेक्षण में एशिया का सर्वोत्तम समुद्र-तट (Best beach of the Asia) करार दिया है। राधानगर तट तट अत्यंत सुंदर है और सभी प्रकृति प्रेमियों एवं उत्साही व्यक्तियों के लिए आकर्षण का केन्द्र हैं। यहां पर रेत की ढलानें ज्यादातर समकोण पर मिलती है, इससे मिलन बिंदु पर ज्यादा पानी जमा होने की सम्भावना होती हैं। यहां पानी वाकई गहरा हो सकता हैं। इस तट पर उजली रेत, लम्बे पेड़ और सामने से लगातार आती समुद्र की लहरें ऐसा सम्मिश्रण बनाते हैं कि कोई भी उसमें डूबे बिना नहीं रह सकता। वाकई यहाँ पर बड़ा मजा आया.
वहाँ तट पर बैठकर मैंने रेत में चित्रकारी भी की. राधानगर तट पर ठहरने के लिए इस तरह के खूबसूरत हटनुमा रिसॉर्ट भी हैं. राधानगर तट पर शाम को सूरज डूबने (Sun set) का दृश्य भी बड़ा सुहाना होता है.
और हाँ, हैवलॉक (Havelock island) और पोर्टब्लेयर (Portblair) के बीच क्रूज़ (Makruzz) से यात्रा का आनंद कभी न भूलने वाला अनुभव है.
ये देखो हम सबसे पहले आकर क्रूज़ (Makruzz)में बैठ गए.
आप भी कभी अंडमान आयें तो हैवलॉक द्वीप (Havelock island) पर अवश्य जाएँ और राधा नगर तट (Radhanagar beach) पर समुद्र में स्नान और रेत पर मस्ती का मौका न चूकें. इसके बिना अंडमान की यात्रा (Travel) अधूरी है. मेरी तो यह सबसे पसंदीदा जगह बन चुकी है.

















सोमवार, अप्रैल 05, 2010

पाखी के जन्मदिन से जुड़े लिंक्स

25 मार्च को मेरे जन्म दिन पर तमाम लोगों ने बधाइयाँ और आशीष दिया। कुछ ब्लाग्स पर उस दिन मेरे जन्म दिन को लेकर पोस्ट भी लिखी गईं और बाद में कुछ ब्लाग्स पर इसकी चर्चा भी हुई. यह आप सभी का बड़प्पन और प्यार है. इन सभी ब्लाग्स के लिंक यहाँ साभार दे रही हूँ, ताकि इन्हें एक जगह सहेजा जा सके. यदि कोई लिंक इस सम्बन्ध में छूट गया हो तो जरुर बताइयेगा !!


आज अक्षिता का जन्मदिन है : हिंदी ब्लागरों के जन्मदिन

जन्म-दिवस पर पाखी के लिए उपहार : सरस पायस

नन्हीं-मुन्नी ब्लोगर अक्षिता को जन्म-दिन की शुभकामनायें : ताका-झाँकी


एक परिवार जिसके सभी सदस्य करते हैं ब्लागिंग : नव-सृजन

पाखी को जन्म-दिवस की बधाइयाँ : शब्द सृजन की ओर

हैप्पी बर्थडे टू पाखी : शब्द-शिखर

एक परिवार जिसके सभी सदस्य करते हैं ब्लागिंग : भड़ास

पाखी को जन्मदिन की बधाई : यदुकुल

आज (25 मार्च) मेरा जन्म-दिन है : पाखी की दुनिया

पाखी के जन्म-दिन की झलकियाँ : पाखी की दुनिया

मुस्कानों की सुंदर झाँकी : चर्चा मंच

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चलते-चलते एक नजर इधर भी....

मम्मी मेरी सबसे प्यारी : माँ

मम्मी मेरी सबसे प्यारी : शब्द-शिखर

मैं भी पढ़ना सीख रही हूँ : सरस पायस

मन ललचाती : नन्हा मन

ख़ुशियों की बरसात : चर्चा मंच





शनिवार, अप्रैल 03, 2010

पाखी की जनगणना हो गई और आपकी...

आपकी जनगणना हुई क्या..मेरी तो आज हो गई. मेरे जन्म के बाद पहली बार जनगणना हो रही है, सो पहली बार मैं इसका हिस्सा बनी हूँ. सोचिये मेरे जैसे कितने प्यारे-प्यारे बच्चे/बच्चियाँ इन 10 सालों में आए होंगे और सभी की अब जनगणना होगी. और हाँ, जन्मदिन पर उपहार में मिली मेरी सायकिल को भी जनगणना करने वाली आंटी ने नोट किया. इसके अलावा टी.वी., कंप्यूटर , गाड़ी और भी कई चीजों के बारे में पूछा और नोट किया. अब इंतजार रहेगा कि कब ये गणना पूरी होगी और हमें अपने देश कि वास्तविक जनसँख्या पता चलेगी....एक बात और मैं सोच रही थी कि मैं तो यहाँ उत्तर प्रदेश से आई हूँ और वहाँ भी मेरे दादा-दादी जब जनगणना करने वाले अंकल/आंटी को अपने परिवार के बारे में बताएँगे तो कहीं मेरी गिनती वहाँ भी तो नहीं हो जाएगी, फिर तो मेरे जैसे कितने लोगों की गिनती दो-दो बार हो जाएगी। फ़िलहाल अपनी जनगणना होने से मैं खुश हूँ !!

बुधवार, मार्च 31, 2010

अंडमान में रिमझिम-रिमझिम बारिश

रिमझिम-रिमझिम बारिश तो मुझे बहुत भाती है. आज इन्तजार पूरा हुआ. अंडमान में पहली बारिश आज हुई. कल रात को भूकंप और आज दोपहर में बारिश. भूकंप के समय तो मैं बिस्तर पर कूद रही थी, मुझे लगा कि मेरे कूदने से बिस्तर हिल रहा है. पर कुछ ही क्षण में पता चला कि यह भूकंप जी हैं, जो हमें झूला झुला रहे हैं...फिलहाल बारिश की बातें. अभी तो यहाँ भी थोड़ी-थोड़ी गर्मी पड़ने लगी थी, पर अब बारिश इसी तरह हुई तो मजा आ जायेगा. बारिश में यहाँ घूमने में भी मजा आयेगा. नो गर्मी, नो टेंशन. खूब घुमूंगी और मस्ती करूँगीं !!

मंगलवार, मार्च 30, 2010

पाखी ने बनाया चित्र

ये चित्र मैंने बनाया है. कैसा है...

शुक्रवार, मार्च 26, 2010

पाखी के जन्म-दिन की झलकियाँ

कल 25 मार्च को मेरा जन्म-दिन था. जमकर मस्ती की दिन भर. अभी तो अंडमान में आई हूँ, यहाँ स्कूल में अभी-अभी एडमिशन लिया है..15 अप्रैल से स्कूल खुलेगा..फिर मेरे भी नए-नए दोस्त. फ़िलहाल उनके बिना ही बड़ों के साथ बर्थ-डे का आनंद लिया. केक काटा, मिठाई, चाकलेट और आइस-क्रीम खाई ..साथ में डिनर बाहर होटल में. खूब सारे गिफ्ट भी मिले- प्यारी-प्यारी बार्बी गुड़िया, विडियो गेम, इंग्लिश लर्नर, टैडी बियर, मिकी माउस, पू, डोरा, हवा में उड़ने वाला हेलीकाप्टर, कलरिंग आइटम्स, सुन्दर-सुन्दर ड्रेस, सुन्दर सी गणेश जी की मूर्ति, छुक-छुक ट्रेन, सायकिल, हवाई-जहाज, नन्हाँ सा हाथी, पियानो..और भी बहुत कुछ, जो अभी खोलकर देखना है. आपने बर्थ-डे की कुछ फोटोग्राफ यहाँ लगा रही हूँ, बताइएगा कि कैसी लगीं-

ये रहा मेरा बर्थ-डे केक

अब केक काटने की तैयारी
ये काटा मैंने बर्थ-डे केक
हैपी बर्थ-डे टू पाखी...मम्मा-पापा ने खिलाया केक
अब आई उपहारों की बारी
उपहार में छोटी सी सायकिल भी

अब सभी लोग ग्रुप फोटोग्राफ के लिए तैयार
अरे आप लोग तो छूट गए...एक और ग्रुप फोटोग्राफ कैसी लग रही हैं हम लोग..क्यूट न
बड़े लोगों की बड़ी-बड़ी बातें (चीफ जनरल मैनजर, BSNL श्री डी.पी. परिहार अंकल, भूगोल-रीडर श्री एस. सी. चतुर्वेदी अंकल, पापा श्री के.के. यादव, द्वीप-लहरी के संपादक श्री व्यासमणि त्रिपाठी अंकल, डाक अधीक्षक श्री आदक अंकल)थोड़ी सी आइस-क्रीम मैं भी खा लूं
और ये रही मैं मम्मा-पापा के साथ

( इस पोस्ट की चर्चा मुस्कानों की सुंदर झाँकी (चर्चा मंच-103) के अंतर्गत भी देखें )





















































































गुरुवार, मार्च 25, 2010

बुधवार, मार्च 24, 2010

पोर्टब्लेयर के तीन खूबसूरत म्यूजियम की सैर

इस संडे को मैंने पोर्टब्लेयर (Portblair) में तीन खूबसूरत म्यूजियम देखे, तीनों एक से बढ़कर एक-एन्थ्रोपोलाजिकल म्यूजियम (Anthropological Museum), फिशरीज म्यूजियम (Fishries) और समुद्रिका नेवेल मरीन म्यूजियम (Naval Marine Museum). कहते हैं कि किसी जगह को समझना हो तो म्यूजियम से अच्छा कुछ नहीं हो सकता. एन्थ्रोपोलाजिकल म्यूजियम में मैंने देखा कि हमारे पूर्वज कैसे होते थे.
उनके बर्तन, हथियार इत्यादि भी मैंने देखे. अंडमान-निकोबार की जनजातियों के सम्बन्ध में भी यहाँ पर तमाम मजेदार जानकारियाँ मिलीं.सेंटीनली जनजाति का झोपड़ा भी देखा. आपको पता है सेंटीनली (sentineli) जनजाति से अभी भी लोग सम्बन्ध कायम नहीं कर पाते हैं, वे तीर-धनुष से हमला कर देते हैं।

एन्थ्रोपोलाजिकल म्यूजियम के बाद हम लोग फिशरीज म्यूजियम गए. यहाँ अन्दर फोटोग्राफी की अनुमति नहीं है. यहाँ पर ढेर सारी मछलियाँ हैं. इसके अलावा डोल्फिन (Dolphin), शार्क (Shark), व्हेल (Whale) सहित अंडमान के राज्य-जीव समुद्री गाय (Dugong creek) के कंकाल भी यहाँ देखे जा सकते हैं. व्हेल का कंकाल तो इतना विशालकाय था कि मैं दंग रह गई. फिर हम समुद्रिका (नेवेल मरीन म्यूजियम) गए, यह हमारे घर के बगल में ही है.
समुद्रिका (नेवेल मरीन म्यूजियम) में प्रवेश करते ही वहां सबसे पहले व्हेल का विशालकाय कंकाल (Skeleton) दिखा. व्हेल का कंकाल तो इतना विशालकाय था कि मैं दंग रह गई.

खूबसूरत मछलियाँ और प्रवाल (Corals) तो और भी खूबसूरत लगते हैं.ये देखिये कछुए (Turtle) की मोटी खाल. अंडमान में चार तरह के कछुए मिलते हैं, इन्हीं में से ओलिवे-रिडले (Olive Ridley)भी हैं.खूबसूरत सीपियाँ और शंख तो बड़े मनभावन लगे.अंडमान-निकोबार (Andaman & Nicobar Islands) के आदिवासियों का एक चित्र यहाँ भी.भारत के एकमात्र जागृत ज्वालामुखी 'बैरन ज्वालामुखी' (Barren Volcano) का चित्र भी यहाँ दिखा। सुनामी (Tsunami) के दौरान यह पुन : जागृत हुआ था, फ़िलहाल 2006 से शांत है।
...तो मजेदार रहा न मेरा यह म्यूजियम-टूर और आप लोगों को भी मैंने बैठे-बैठे यहाँ की सैर करा दी। आप लोग भी यहाँ आइयेगा तो ये म्यूजियम जरुर घूमने जाइएगा और हाँ, पाखी को नहीं भूलियेगा !!















































































शनिवार, मार्च 20, 2010

मेरी नन्हीं गौरैया

मुझे गौरैया बहुत अच्छी लगती है। उसकी चूं-चूं मुझे खूब भाती है. कानपुर में थी तो हमारे लान में गौरैया आती थीं. उन्हें मैं ढेर सारे दाने खिलाती थी. दाने खाकर वे खुश हो जातीं और फुर्र से उड़ जातीं. हमारे लान में एक पुराना सा बरगद का पेड़ था, उस पर गौरैया व तोते खूब उधम मचाते. वहीँ एक बिल्ली भी थी, वह हमेशा उन्हें खाने की फ़िराक में रहती. उस बिल्ली को देखते ही मैं डंडे से मारने दौड़ती.


अब यहाँ अंडमान में आ गई हूँ तो उनकी याद आती है. मन करता है कि वे भी उड़ कर यहाँ आ जातीं तो कितना मजा आता. यहाँ हमारे घर के पीछे अंडमान टील हॉउस है. इन दोनों के बीच में खाई है, जहाँ ढेर सारे पेड़-पौधे हैं. रोज शाम को वहां चिड़ियों को देखती हूँ, पर कानपुर वाली गौरैया की अभी भी याद आती है। पता नहीं अब उसे कोई दाना खिलाता भी होगा या नहीं. पापा ने बताया आज 'विश्व गौरैया दिवस' है, तो मुझे अपनी गौरैया की और भी याद आई. मम्मी के साथ मिलकर एक प्यारा सा गीत बनाया. आप भी पढ़ें और अपनी राय दें-

उड़कर आई नन्हीं गौरैया
लान में हमारे।
चूं-चूं करते उसके बच्चे
लगते कितने प्यारे।

गौरैया रोज तिनका लाती
प्यारा सा घोंसला बनाती।
चूं-चूं करते उसके बच्चे
चोंच से खाना खिलाती।

सोमवार, मार्च 15, 2010

शुक्रवार, मार्च 12, 2010

आपका बचा खाना किसी बच्चे की जिंदगी है !!

यह सन्देश किसी ने मेरे मेल पर भेजा था। बड़ा अच्छा सन्देश मिला, सो आप सब भी इस पर गौर करें, आखिरकार बच्चे किसे अच्छे नहीं लगते. बच्चे मन के सच्चे...उन्हें सच्चाई की ओर बढ़ने में आप भी मदद करें क्योंकि पेट की भूख कई बार बच्चों को गलत रास्ते पर ले जाती है. कई बार ब्लॉग के माध्यम से हम दूसरों का भी हित कर सकते हैं, उन्हें कम से कम एक समय की रोटी दे सकते हैं और कभी-कभी जिंदगी भी !!

अगर आगे से कभी आपके घर में पार्टी/समारोह हो और खाना बच जाये या बेकार जा रहा हो तो बिना झिझके आप 1098 (केवल भारत में) पर फ़ोन करें। यह एक मजाक नहीं है। यह चाइल्ड हेल्पलाइन है. वे आयेंगे और भोजन एकत्रित करके ले जायेंगे।
***मदद करने वाले हाथ प्रार्थना करने वाले होंठो से अच्छे होते हैं***
!! कृप्या इस सन्देश को ज्यादा से ज्यादा प्रसारित करें इससे उन बच्चों का पेट भर सकता है !!

बुधवार, मार्च 03, 2010

गुब्बारे और खिलौने सस्ते...हुर्रे.


इस बार बजट में वित्त-मंत्री जी ने गुब्बारे व खिलौने सस्ते कर दिए हैं, सो मेरी तो बल्ले-बल्ले है. ढेर सारे गुब्बारे उड़ाउंगी और प्यारे-प्यारे खिलौने खरीदूंगी. आप भी मेरे साथ खेलना न भूलना !!

सोमवार, मार्च 01, 2010

टेंशन की बात : शेर, बाघ सब गायब


अपने देश में तेजी से बहुत सारे जीव-जंतुओं की संख्या कम होती जा रही है. पता नहीं जब तक हम बड़े होंगें ये देखने को मिलें या नहीं. लगता है कि हम उन्हें सिर्फ पुस्तकों में पढ़ेंगें तथा खिलौने के रूप में खेलेंगें. 2008 में हुई गणना के अनुसार देश में 359 शेर, 1411 बाघ, 2,358 गैंडे और 27,694 हाथी हैं. इसके बाद तो आज 2010 तक इनकी संख्या और भी कम हो गई होगी. इस साल अब तक 05 बाघों की मौत हो चुकी है. हम बच्चों के लिए यह बड़ी चिंता का विषय है कि यदि इसी तरह ये ख़त्म होते रहे तो हम इन्हें कैसे देख पायेंगें. डायनासोर जैसे जानवरों का उदाहरण हमारे सामने है. फ़िलहाल मैं तो अपने टाइगर के साथ खेलकर खुश हूँ, पर यह सब देखकर मेरे साथ मेरा टाइगर भी दुखी हो जाता है...!!