आप सब 'पाखी' को बहुत प्यार करते हैं...
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मंगलवार, मार्च 03, 2015
रविवार, जनवरी 25, 2015
शुक्रवार, जनवरी 02, 2015
नए साल के साथ नई दोस्ती का एहसास
एक और साल बीत गया।
बीते साल के जाने का दुःख है तो नए साल के साथ नई दोस्ती का एहसास भी।
नए साल के लिए हमने तो ढेर सारे प्लान बनाये हैं।
नव वर्ष -2015 पर आप सभी को ढेरों बधाई।
नव वर्ष आप सभी के जीवन में ढेरों खुशियाँ, उल्लास और नई उपलब्धियाँ लेकर आए !!
For Last year....
Thanks to those who hated me,
they made me a stronger person.
Thanks to those who loved me,
they made my heart bigger.
Thanks to those who were worried about me,
they let me know that they actually cared.
Thanks to those who left me,
they made me realize that nothing lasts forever.
Thanks to those who entered my life,
they made me who i'm today.
Just want to Thank you all for being there in my life!!
Happy New Year 2015 !!
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शुक्रवार, नवंबर 28, 2014
वाह ! मम्मी-पापा की शादी की दसवीं सालगिरह
Wishing very-very Happy Anniversary to Mummy-Papa. Great...Its 10th anniversary of Mummy-Papa and we are so happy to celebrate this. Love you too much.
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शुक्रवार, नवंबर 14, 2014
बाल दिवस तो हमारे लिए यादगार है
आज बाल दिवस है। चाचा नेहरू का जन्म दिन। आज का दिन तो हमारे लिए और भी यादगार है, क्योंकि इसी दिन वर्ष 2011 में हमें 'राष्ट्रीय बाल पुरस्कार' से सम्मानित किया गया था। यह सम्मान हमें बाल-दिवस पर वर्ष 2011 में 'आर्ट' और 'ब्लॉगिंग' के लिए तत्कालीन महिला व बाल विकास मंत्री कृष्णा तीरथ जी ने विज्ञान भवन, नई दिल्ली में दिया था। संयोगवश आज बाल दिवस है, अत: यादें पुन: ताजा हो गईं !!
अपनी प्यारी सिस्टर अक्षिता के साथ मस्ती।
!! बाल दिवस पर आप सभी को बधाइयाँ !!
शुक्रवार, अक्टूबर 24, 2014
एनिमेटेड रंग जमाए है
आजकल एनिमेशन का जमाना है। जब चाहो, जैसे चाहो, जिसे चाहो .... इसमें ढाल दो और फिर इंजॉय करो। वैसे हम बच्चों के लिए यह सीखने का अच्छा माध्यम भी है। इसके लिए हम बच्चों की दीवानगी है तो फिर मम्मी-पापा की डांट भी। आखिर अति हर चीज की बुरी होती है। आप भी देखिये कि 'पाखी की दुनिया' के लिए भेजी अपनी इस प्यारी कविता में उमेश चौहान अंकल जी क्या कहते हैं -
कम्प्यूटर के गेम निराले
आई-पैड, पी सी पी वाले,
शुरू करो तो रुका न जाए
मम्मी कितनी डांट पिलाएं,
भूल-भाल कर खाना-पीना
इनके संग छुट्टी भर जीना,
क्या भारत, यू के, यू एस ए,
दुनिया को भरमाए है।
एनिमेटेड रंग जमाए है॥
टेलीविजन-कथाएं बदलीं
फिल्मों की गाथाएं बदलीं,
नए-नए पात्रों के चर्चे
‘छोटा भीम’ सराहें बच्चे,
‘आइस एज’ के किस्से अच्छे
लगते हैं बच्चों को सच्चे,
कृष्ण, गनेशा, हनोमान का
जादू मन को भाए है।
एनिमेटेड रंग जमाए है॥
इनसे कुछ खोया भी हमने
दादी के किस्से अब सपने,
मित्रों के भी जमघट छूटे
नाते-रिश्ते सिकुड़े, टूटे,
खेल-कूद का समय नहीं है
जो आभासी, वही सही है,
मन न लगे पढ़ने-लिखने में
लैप-टॉप ललचाए है।
एनिमेटेड रंग जमाए है॥
-उमेश कुमार सिंह चौहान (यू. के. एस. चौहान)
सम्पर्क: सी-II/ 195, सत्य मार्ग, चाणक्यपुरी, नई दिल्ली–110021 (मो. नं. +91-8826262223).
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बुधवार, अक्टूबर 22, 2014
पावन पर्व दीपावली का
पावन पर्व दीवाली का,
दीपों की बारात लाए।
बम, पटाखे, फुलझड़ी संग,
खुशियों की सौगात लाए।
तोरण द्वार पर सजे अल्पना,
ज्योति का पुंज-हार लाए।
खील-लड्डू का चढ़े प्रसाद,
दिलों में सबके प्यार लाए।
है शुभ मंगलकारी पर्व यह,
इस दिन अयोध्या राम आए।
जल उठी दीपों की बाती,
पुलकित मन पैगाम लाए।
अमावस्या का तिमिर चीरकर,
रोशनी का उपहार लाए।
चारों तरफ सजे रंगोली,
लक्ष्मी-गणेश भी द्वार आए।
( दीपावली के शुभ पर्व पर मम्मी की लिखी एक कविता)
!! आप सभी को दीपावली पर्व पर सपरिवार शुभकामनाएँ !!
शनिवार, अक्टूबर 18, 2014
ऐसे मनाएं दीपावली : गरीबी और अशिक्षा का अँधियारा मिटायें
(दीपावली का त्यौहार नजदीक है। हम सभी इसे खूब इंजॉय करते हैं। पर कुछ बातों का ध्यान भी रखना होगा, ताकि इस ख़ुशी में और लोग भी शामिल हो सकें। इस पर दैनिक जागरण, इलाहाबाद संस्करण, 18 अक्टूबर 2014 में प्रकाशित हमारे विचार आप भी पढ़ सकते हैं।)
- अक्षिता (पाखी)
(राष्ट्रीय बाल पुरस्कार विजेता)
इलाहाबाद.
दीपावली रोशनी का त्यौहार है, न कि पटाखों का। इस मौके पर हम खूब दीये जलाएंगे और परिवार के साथ इसे इंजॉय करेंगे। पटाखों से तो बिलकुल दूर रहूँगी।
पटाखों से निकली चिंगारी से तो कई बार लोगों की आँखों की रोशनी भी चली जाती है। इससे प्रदूषण भी बहुत फैलता है।
ऐसे में मैंने संकल्प लिया है कि इस दीपावली पर पटाखों से दूर रहूँगी। जो पैसे हम पटाखों पर खर्च करते हैं, उनसे किसी गरीब या जरूरतमंद की सहायता कर उनके जीवन में रोशनी फैलाएंगे।
- अक्षिता (पाखी)
(राष्ट्रीय बाल पुरस्कार विजेता)
इलाहाबाद.
बुधवार, अक्टूबर 08, 2014
इलाहाबाद में नवरात्र और दशहरा
इलाहाबाद का दशहरा तो बहुत प्रसिद्ध है। यहाँ का नवरात्र और राम लीला भी उतनी ही प्रसिद्ध है। इस बार नवरात्र और दशहरे में हम खूब घूमे और इलाहाबाद के दशहरे के मेले और नवरात्र में माँ दुर्गा जी की पूजा का आनंद लिया। वाकई खूबसूरत और भव्य। आप भी देखिये।
सुन्दर पूजा पंडाल
और माँ दुर्गा जी की भव्य मूर्ति।
सपरिवार पंडाल में।
हीं एफिल टॉवर तो कहीं डिज़्नी लैंड की तर्ज पर सजे पंडाल और मनोरम झाँकियाँ .
और हाँ, भला गुब्बारों के बिना भी कोई मेला।
तो है न आकर्षक और भव्य नवरात्र और दशहरा।
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सोमवार, सितंबर 08, 2014
यदि डाक टिकट पर अपनी फोटो छपे तो …
सुनकर अच्छा लगता है कि डाक टिकट पर अपनी भी फोटो छपे। यदि आप भी ऐसी इच्छा रखते हैं, तो अब यह पूरी हो सकती है। डाक टिकट पर अभी तक आपने गांँधी, नेहरू या ऐसे ही किसी महान विभूति की फोटो देखी होगी। पर अब डाक टिकट पर आप की फोटो भी हो सकती है और ऐसा संभव है डाक विभाग की ’’माई स्टैम्प’’ सेवा के तहत।
वाराणसी प्रधान डाकघर में 6 सितम्बर, 2014 को माई स्टैम्प सेवा का उद्घाटन करते हुए इलाहाबाद परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएँ कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि फिलहाल उत्तर प्रदेश में यह सेवा लखनऊ, आगरा व फतेहपुर सीकरी में उपलब्ध है और अब वाराणसी में। उन्होंने कहा कि माई स्टैम्प की थीम फिलहाल आकर्षक पर्यटन स्थलों पर आधारित रखी गई है। माई स्टैम्प फिलहाल 10 थीम के साथ उपलब्ध है, जिनमें-ग्रीटिंग्स, ताजमहल, लालकिला, कुतुब मीनार, हवा महल, मैसूर पैलेस, फेयरी क्वीन, पोर्ट ब्लेयर द्वीप, अजन्ता की गुफाएँं एवं सेंट फ्रांसिस चर्च शामिल हैं।
डाक निदेशक श्री कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि माई स्टैम्प सेवा का लाभ उठाने के लिए एक फार्म भरकर उसके साथ अपनी फोटो और रूपय 300/-जमा करने होते हैं। एक शीट में कुल 12 डाक-टिकटों के साथ फोटो लगाई जा सकती है। इसके लिए आप अपनी अच्छी तस्वीर डाक विभाग को दे सकते हैं, जो उसे स्कैन करके आपकी खूबसूरत डाक-टिकट बना देगा। श्री यादव ने कहा कि यदि कोई तत्काल भी फोटो खिंचवाना चाहे तो उसके लिए भी प्रबंध किया गया है। पाँंच रुपए के डाक-टिकट, जिस पर आपकी तस्वीर होगी, वह देशभर में कहीं भी भेजी जा सकती है। इस पर सिर्फ जीवित व्यक्तियों की ही तस्वीर लगाई जा सकती है।
डाक निदेशक कृष्ण कुमार यादव ने इसके व्यावहारिक पहलुओं की ओर इंगित करते हुए कहा कि किसी को उपहार देने का इससे नायब तरीका शायद ही हो। इसके लिए जेब भी ज्यादा नहीं ढीली करनी पड़ेगी, मात्र 300 रूपये में 12 डाक-टिकटों के साथ आपकी खूबसूरत तस्वीर। अब आप इसे चाहें अपने परिवारजनों को दें, मित्रों को या फिर अपने किसी करीबी को। यही नहीं अपनी राशि के अनुरूप भी डाक-टिकट पसंद कर उस पर अपनी फोटो लगवा सकते हैं। आप किसी से बेशुमार प्यार करते हैं, तो इस प्यार को बेशुमार दिखाने का भी मौका है।
माई स्टैम्प स्कीम के आरंभ के बारे में बताते हुए निदेशक डाक सेवाएँ कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि दुनिया के कुछेक देशों में माई स्टैम्प सुविधा पहले से ही लागू है, पर भारत में इसका प्रचलन नया है। वर्ष 2011 में नई दिल्ली में विश्व डाक टिकट प्रदर्शनी (12-18 फरवरी 2011) के आयोजन के दौरान इसे औपचारिक रूप से लांच किया गया। उसके बाद इसे अन्य प्रमुख शहरों में भी जारी किया गया और लोगों ने इसे हाथों-हाथ लिया। नतीजन देखते ही देखते हजारों लोगों ने डाक टिकटों के साथ अपनी तस्वीर लगाकर इसका लुत्फ उठाया। इसकी लोकप्रियता के मद्देनजर इसे अब वाराणसी में भी आरंभ किया जा रहा है।
( पापा श्री कृष्ण कुमार जी के हवाले से विभिन्न अख़बारों में प्रकाशित यह रोचक खबर आप सभी की जानकारी के लिए शेयर कर रही हूँ।आशा है आपको पसंद आएगी)
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रविवार, अगस्त 24, 2014
मम्मी क्या होने वाला है?
आजकल हमारे प्राइम मिनिस्टर अंकल मोदी जी गंगा जी को स्वच्छ करने के लिए पहल किये हुए हैं। इलाहाबाद और बनारस में तो हम अक्सर देखते हैं कि गंगा जी में ढेर सारी गन्दगी फैली हुई है। सोचिये कि यदि गंगा जी और अन्य नदियों में हम ऐसे ही गन्दगी फैलाते रहेंगे तो फिर स्वच्छ और साफ़ पानी कहाँ से आएगा। इस गंदे पानी से जो बीमारी फैलती है, वह तो कइयों की मौत का कारण भी बनती है। जरूरत है कि हम सभी इस और अपनी तरफ से पहल करें और नदियों में गन्दगी न फैलाएँ। इसी सन्दर्भ में श्री उमेश चौहान अंकल जी ने एक सुंदर सी कविता भी 'पाखी की दुनिया' के लिए भेजी है। आप सब इसे पढ़ें और सोचें -
मम्मी क्या होने वाला है?
गंगाजल कितना काला है?
तुम तो कहती उतर स्वर्ग से
शिव के केशों से गुजरी हैं,
ऊँचे हिम-नद का निर्मल जल
बाँहों में भरकर बहती हैं,
फिर हमने इसके पानी में
क्यों इतना कचरा डाला है? मम्मी क्या होने ……
छिड़क-छिड़ककर जिसके जल को
तुम देवों को नहलाती हो,
पूरे घर को पावन करती
अंत समय भी पिलवाती हो,
उसके जल की इस हालत पर
मेरा मन रोने वाला है। मम्मी क्या होने ……
गंगा ही क्यों सारी नदियों
को हमने गंदा कर डाला,
सूख गए गरमी के सोंते
भू-जल इतना खींच निकाला
कुँए, ताल सब सुखा दिए, अब
पीते जल बोतल वाला हैं। मम्मी क्या होने ……
*********************************************************
उमेश कुमार सिंह चौहान (यू. के. एस. चौहान)
सम्पर्क: सी-II/ 195, सत्य मार्ग, चाणक्यपुरी, नई दिल्ली–110021 (मो. नं. +91-8826262223).
जन्म: 9 अप्रैल, 1959 को उत्तर प्रदेश के लखनऊ जनपद के ग्राम दादूपुर में।
शिक्षा: एम. एससी. (वनस्पति विज्ञान), एम. ए. (हिन्दी), पी. जी. डिप्लोमा (पत्रकारिता व जनसंचार)।
साहित्यिक गतिविधियाँ:
प्रकाशित पुस्तकें: ‘गाँठ में लूँ बाँध थोड़ी चाँदनी’ (प्रेम-गीतों का संग्रह) - सत्साहित्य प्रकाशन, दिल्ली (2001), ‘दाना चुगते मुरगे’ (कविता-संग्रह) - सत्साहित्य प्रकाशन, दिल्ली (2004), ‘अक्कित्तम की प्रतिनिधि कविताएं’ (मलयालम के महाकवि अक्कित्तम की अनूदित कविताओं का संग्रह) - भारतीय ज्ञानपीठ, नई दिल्ली (2009), ‘जिन्हें डर नहीं लगता’ (कविता-संग्रह) - शिल्पायन, दिल्ली (2009), एवं ‘जनतंत्र का अभिमन्यु’ (कविता – संग्रह) - भारतीय ज्ञानपीठ, नई दिल्ली (2012), मई 2013 से हिन्दी दैनिक समाचार-पत्र 'जनसंदेश टाइम्स' (लखनऊ, कानपुर, इलाहाबाद, वाराणसी एवं गोरखपुर से प्रकाशित) में साप्ताहिक स्तम्भ-लेखन
संपादित पुस्तकें: 'जनमंच' (श्री सी.वी. आनन्दबोस के मलयालम उपन्यास 'नाट्टुकूट्टम' का हिन्दी अनुवाद) - शिल्पायन, दिल्ली (2013)
सम्मान: भाषा समन्वय वेदी, कालीकट द्वारा ‘अभय देव स्मारक भाषा समन्वय पुरस्कार’ (2009) तथा इफ्को द्वारा ‘राजभाषा सम्मान’ (2011)
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सन्देश
सोमवार, अगस्त 18, 2014
एक साथ कित्ती खुशियाँ
कृष्ण जन्माष्टमी का दिन तो हमें बहुत अच्छा लगता है। एक तरफ भगवान कृष्ण जी का जन्मोत्सव, वहीँ जन्माष्टमी हमारे परिवार के लिए इसलिए भी और महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि जन्माष्टमी के दिन ही पापा और नानी जी का भी जन्म हुआ था।
...है न ट्रिपल ख़ुशी वाली बात। तो चलिए आप भी हमारी इस ख़ुशी में शरीक होइए !!
(चित्र में : बेटियों अक्षिता और अपूर्वा के साथ केक काटते पापा श्री कृष्ण कुमार यादव। साथ में दादा जी। )
आज माखनचोर आयेंगे
आज का दिन हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण है। आज कृष्ण जन्माष्टमी है। आज ही तो देर रात माखन चोर श्री कृष्ण का जन्म हुआ था। कृष्ण जी की बाल- लीलाएं तो मुझे बहुत अच्छी लगती हैं। वे भी तो हम बच्चों जैसे ही खूब शरारतें करते थे और फिर उनकी मैया यशोदा कित्ता डांटती थी। लेकिन कृष्ण जी भी कम नहीं थे, अंतत: मैया को अपनी तरफ कर ही लेते थे और फिर गोपियाँ देखती ही रह जाती थीं।
वैसे इस बार दही हांडी में 12 साल तक के बाल गोपालों के भाग लेने पर पाबन्दी लगने के बाद कुछ लोग उदास भी हैं। पर मुझे लगता है कि यह सही कदम उठाया गया है। दही हांडी पिरामिड में ऊपर के तीन से चार थर में छोटे छोटे बच्चों को चढ़ाया जाता है और जब थर गिरता है तो बच्चों को गंभीर चोटें आती हैं। इसके चलते कई की मृत्यु हो जाती है तो कई अपंग हो जाते हैं। अब सोचिये कि क्या यह सब बाल कृष्ण को अच्छा लगेगा। जीवन से बढ़कर कुछ भी नहीं है।
!! कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक बधाइयाँ।
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