आप सब 'पाखी' को बहुत प्यार करते हैं...

सोमवार, जून 03, 2024

Shahi Qila Jaunpur Fort : A memorable trip with family

Shahi Qila, also known as Karar Fort or Jaunpur Fort, is a fort built during the 14th century in Jaunpur district of Uttar Pradesh. The fort is located close to the Shahi Bridge on the Gomti river. Constructed by Ibrahim Naib Barbak, a chieftain of Firoz Shah Tughlaq, it was built using the material owned by temples and palaces of the Rathore kings of Kannauj. The fort was destroyed multiple times by rulers, including the Lodhis and the British Empire. It went through extensive renovations and repairs during the rule of the Mughal Empire.
























जौनपुर का पुराना शाही किला एक खूबसूरत पर्यटन स्थल है। अब तो सिर्फ किला के अवशेष बचे हैं, पर इसके अंदर प्राकृतिक छटा देखते ही बनती है। जौनपुर शहर में गोमती नदी के तट पर स्‍थि‍त इस दुर्ग का निर्माण फि‍रोज शाह तुगलक ने 1362 ई. में कराया था। इस किले के प्रवेश द्वार की ऊंचाई 36 फुट है तथा किले के भीतर का गेट 26.5 फुट ऊंचा और 16 फुट चौड़ा है। किला के भीतर एक बड़ा गेट और एक मस्जिद, तुर्की हम्माम, अन्य इमारतें है। हम्माम पर बने ऊंचे,नीचे गुंबद बहुत सुंदर ढंग से बनाये गये हैं। यह एक संरक्षित इमारत है। इस दुर्ग से गोमती नदी एवं जौनपुर शहर का मनोहर दृश्‍य दि‍खायी देता है।

गुरुवार, अप्रैल 27, 2023

Prime Minister Narendra Modi Ji wishes to Akshitaa & Apurva on Happy New Year

भारत के माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने के साथ-साथ ही पत्रों और शुभकामना-पत्रों का जवाब देने में भी उतने ही लाजवाब हैं। इस बार हम दोनों बहनों के नव वर्ष शुभकामना पत्र पर प्रधानमंत्री मोदी जी का खूबसूरत जवाब आया। यह वाकई हमारे लिए धरोहर है। पत्रों की बात ही निराली होती है। सोशल मीडिया और वाट्सएप पर प्राप्त संदेश समय के साथ ओझल हो जाते हैं, पर पत्रों के रूप में प्राप्त संदेश की अपनी अहमियत होती है। उन्हें सहेजने से लेकर, पुस्तकों के रूप में प्रकाशन और आगामी पीढ़ियों तक उनके संचरण में सुविधा होती है। 

Prime Minister Narendra Modi Ji letter to Akshitaa (Pakhi) on Happy New Year

Prime Minister Narendra Modi Ji letter to Apurva on Happy New Year

अक्षिता (पाखी) को भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा नव वर्ष पर प्राप्त संदेश।

अपूर्वा को भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा नव वर्ष पर प्राप्त संदेश।

So Elated & Excited to receive Official but individual appreciation letter to Ms. Akshitaa & Ms. Apurva from our Honourable Prime Minister Shri Narendra Modi Ji as a token of blessings.

Courtesy : Sunbeam School, Varuna, Varanasi

Mandala Art by Akshitaa (Pakhi)


In the ancient Sanskrit language of Hinduism and Buddhism, Mandala means “Circle.” Traditionally, a Mandala is a geometric design or pattern that represents the cosmos or deities in various heavenly worlds.

Mandalas, meaning "Circles" in Sanskrit, are sacred symbols that are used for meditation, prayer, healing and art therapy for both adults and children. Mandalas have been shown in clinical studies to boost the immune system, reduce stress and pain, lower blood pressure, promote sleep and ease depression.

Mandala as an art form first appeared in Buddhist art that were produced in India during the first century B.C.E. These can also be seen in Rangoli designs in Indian households.

हिंदू धर्म और बौद्ध धर्म की प्राचीन संस्कृत भाषा में, मंडला का अर्थ "चक्र" है। परंपरागत रूप से, एक मंडल एक ज्यामितीय डिजाइन या पैटर्न है जो विभिन्न स्वर्गीय संसारों में ब्रह्मांड या देवताओं का प्रतिनिधित्व करता है। मंडला कला का अंतिम उद्देश्य एक केंद्र बिंदु पर शांति, प्रतिबिंब और ऊर्जा की एकाग्रता को बढ़ावा देना है। मंडल आर्ट एक प्रकार की आर्ट है जिसमें बारीक पैटर्न को सिमेट्री में बनाया जाता है। लेकिन सबसे महत्वपूर्ण है कि हर पैटर्न अंत में एक विशाल गोलाकार का हिस्सा बनता है। मंडल का शुरुआती बिंदु और अंतिम पैटर्न गोल ही होता है। मंडल आर्ट ब्रह्माण्ड‍ को दर्शाती है, जहां लाखों अलग-अलग पैटर्न अंततः गोले में समा जाते हैं।

सोमवार, मार्च 27, 2023

Nature is the best teacher


Nature is the best teacher.

It is mother of all the creatures.

Nature always gives us the hope,

To climb up in life with any kind of rope.

BY- AKSHITAA🙂


बुधवार, फ़रवरी 08, 2023

Ghats of Varanasi : वाराणसी के गंगा घाट

वाराणसी के गंगा घाटों की खूबसूरती देखते बनती है। हल्की ठंड के बीच देर शाम को शरीर को सिहराती हवाएँ और इनके बीच गंगा में बोटिंग बेहद सुकून देती है। 











खिड़किया घाट, राजघाट से लेकर असि घाट तक अर्द्धचंद्राकार आकार में फैले 88 घाटों का विस्तृत नजारा देखते बनता है। शाम को घाटों पर विशेषकर दशाश्वमेध घाट पर होने वाली गंगा आरती इसे और भी दिव्यता प्रदान करती है।

मंगलवार, फ़रवरी 07, 2023

Varanasi (Kashi) : सुबह-ए-बनारस

वाराणसी या बनारस (जिसे काशी के नाम से भी जाना जाता है) दुनिया के सबसे पुराने जीवित शहरों में से एक है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, काशी नगरी की स्थापना भगवान शिव ने लगभग 5,000 वर्ष पूर्व की थी। वाराणसी अपनी प्राचीन विरासत के साथ-साथ अध्यात्म, साहित्य, संस्कृति, कला और उत्सवों के लिए भी जाना जाता है। ज्ञान, दर्शन, संस्कृति, देवताओं के प्रति समर्पण, भारतीय कला और शिल्प यहाँ सदियों से फले-फूले हैं। 


वाराणसी की संस्कृति का गंगा नदी, श्री काशी विश्वनाथ मन्दिर एवं इसके धार्मिक महत्त्व से अटूट रिश्ता है। वाराणसी के गंगा घाटों की खूबसूरती देखते बनती है। बनारस की शाम मशहूर है तो यहाँ की सुबह-ए-बनारस भी उतनी ही प्रसिद्ध है। गंगा घाटों पर बोटिंग बेहद सुकून देती है। नमो घाट (खिड़किया घाट), राजघाट से लेकर असि घाट तक अर्द्धचंद्राकार आकार में फैले 88 घाटों का विस्तृत नजारा देखते बनता है। शाम को घाटों पर होने वाली गंगा आरती इसे और भी दिव्यता प्रदान करती है।







 वाराणसी को प्रायः ‘मंदिरों का शहर’, ‘भारत की धार्मिक राजधानी’, ‘भगवान शिव की नगरी’, ‘दीपों का शहर’, ‘ज्ञान नगरी’ आदि विशेषणों से संबोधित किया जाता है। बौद्ध एवं जैन धर्म में भी इस नगर को पवित्र माना जाता है। तभी तो प्रसिद्ध अमरीकी लेखक मार्क ट्वेन लिखते हैं, “बनारस इतिहास से भी पुरातन है, परंपराओं से पुराना है, किंवदंतियों (लीजेन्ड्स) से भी प्राचीन है और जब इन सबको एकत्र कर दें, तो उस संग्रह से भी दोगुना प्राचीन है।”