पिछले रविवार को मैं ममा-पापा और तन्वी के साथ हैवलाक घूमने गई थी तो वहाँ एलीफैंट-राइडिंग का भी मजा लिया. पहले जो जब मुझे पता चला कि संडे को राधानगर बीच पर एलीफैंट-राइडिंग नहीं होती है तो मैं बहुत उदास हो गई. फिर पापा ने वहाँ के DFO अंकल से बात करके एलीफैंट-राइडिंग की व्यवस्था कराई.
यह तो मेरी पहली एलीफैंट-राइडिंग थी, सो डर भी लग रहा था की कहीं हाथी-राजा मुझे गिरा न दें.
पर ममा-पापा के रहते डर कैसा...
महावत जी भी तो साथ-साथ चल रहे थे..
कित्ता मजा आ रहा है जंगल के बीच से गुजरते हुए...और हाथी के बड़े-बड़े कान देखकर तो और भी मजा आ रहा था.पर नीचे देखो तो कित्ता डर भी लग रहा था.
एलीफैंट-राइडिंग में तो मुझे बहुत मजा आया...अब तो जब भी हैवलाक जाउंगी, इसका मजा लूंगी. चल मेरे हाथी...