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शुक्रवार, अक्टूबर 04, 2013

'सादर इंडिया' के बाल साहित्य विशेषांक में अक्षिता की रचनाएँ


'सादर इंडिया' ( मासिक, सितम्बर 2013, गुडगाँव से प्रकाशित)  के बाल साहित्य विशेषांक में अक्षिता की तीन रचनाएँ पढ़ सकते हैं।

बुधवार, अक्टूबर 02, 2013

मिल्क पाउडर ही पी जाएँ


दूध पीना मुझे भाता
पर बड़ी परेशान हूँ
किससे मैं शिकायत करूँ
होती बड़ी हैरान हूँ। 

दूध वाला ना अच्छा दूध दे
बस पानी की भरमार है 
जब उससे करूँ शिकायत 
रोये, महँगाई की मार है।

दूध में पानी या पानी में दूध
कुछ भी समझ ना आये
इससे अच्छा तो अब
मिल्क पाउडर ही पी जाएँ।

रविवार, सितंबर 29, 2013

'जनसंदेश टाइम्स' में चहकी अक्षिता की 'नन्ही गौरैया'

इधर कई पत्र-पत्रिकाओं में मेरी रचनाएँ और ड्राइंग प्रकाशित हुई हैं।  'जनसंदेश टाइम्स' अख़बार (28 सितम्बर, 2013) के बाल बाड़ी पेज (सा रे ग म, पृष्ठ संख्या-9) पर मेरी (अक्षिता (पाखी) की) एक बाल -कविता 'नन्ही गौरैया' प्रकाशित हुई हैं। इसे आप भी पढ़ सकते हैं।



पर सबसे अच्छी बात तो यह रही कि इसी पेज पर ममा का भी एक आलेख 'इस होनहार बेटी को सलाम' शीर्षक से प्रकाशित हुआ है , जो  कि  उनके ब्लॉग 'शब्द-शिखर' से लिया गया है। 

शनिवार, सितंबर 28, 2013

पकड़ी जाती मेरी शैतानी


छुई-मुई सी मैं गुडिया 
सोच रही नई शैतानी 
पर हमेशा पकड़ी जाती
होती फिर मुझको हैरानी।

मम्मी-पापा की लाडली
करती हूँ अपनी मनमानी
मम्मी बोले बस भी करो
बंद करो अपनी शैतानी।

(चित्र : अपूर्वा)

सोमवार, सितंबर 09, 2013

नन्ही गौरैया


नन्ही गौरैया 
उड़कर आई नन्ही गौरैया
लान में हमारे। 
चूं-चूं करते उसके बच्चे 
लगते कितने प्यारे।

गौरैया रोज तिनका लाती
प्यारा सा घोंसला बनाती।
चूं-चूं करते उसके बच्चे
चोंच से खाना खिलाती।