कल रात का भूकंप भी भयावह था. आधी रात्रि में सभी लोग सो रहे थे कि 1: 28 के करीब चीजें अचानक हिलने आरंभ हो गईं. कुछ लोगों को तो सोने में पता भी नहीं चला. मैं भी सो रही थी और मुझे भी पता नहीं चला. मम्मी की नींद अचानक खुल गई और उन्होंने पापा को भी जगाया. सुबह मुझे भी बताया. मम्मी-पापा सोच ही रहे थे कि बाहर निकलकर खुले में चला जाये तो सेफ होगा, पर इसी बीच भूकंप ख़त्म भी हो गया. मैं तो यह सब सोचकर ही डर गई, पर जब सब बीत जाता है तो कित्ता रोमांच पैदा होता है कि मानो झूला झूल रहे थे. सुबह जगकर चेक किया गया कि घर में कहीं दरार तो नहीं पड़ी, पर कुछ नहीं हुआ था. यहाँ तो घर भी ऐसे ही बनाये जाते हैं कि नुकसान न हो और भूकंप इत्यादि का उन पर प्रभाव न पड़े. सुबह टी. वी. पर देखा तो इस भूकंप तीव्रता 6.6 बताई जा रही थी. वैसे समुद्र के बीच में अवस्थित होने के कारण यहाँ भूकंप आम बात है और जल्दी कोई नुकसान भी नहीं होता. पर डर तो लगता ही है. अच्छा हुआ जो मैं मस्ती से सो रही थी, नहीं तो रात में कित्ता डर लगता !!
आप सब 'पाखी' को बहुत प्यार करते हैं...
मंगलवार, जून 01, 2010
अंडमान में आया भूकंप
कल रात का भूकंप भी भयावह था. आधी रात्रि में सभी लोग सो रहे थे कि 1: 28 के करीब चीजें अचानक हिलने आरंभ हो गईं. कुछ लोगों को तो सोने में पता भी नहीं चला. मैं भी सो रही थी और मुझे भी पता नहीं चला. मम्मी की नींद अचानक खुल गई और उन्होंने पापा को भी जगाया. सुबह मुझे भी बताया. मम्मी-पापा सोच ही रहे थे कि बाहर निकलकर खुले में चला जाये तो सेफ होगा, पर इसी बीच भूकंप ख़त्म भी हो गया. मैं तो यह सब सोचकर ही डर गई, पर जब सब बीत जाता है तो कित्ता रोमांच पैदा होता है कि मानो झूला झूल रहे थे. सुबह जगकर चेक किया गया कि घर में कहीं दरार तो नहीं पड़ी, पर कुछ नहीं हुआ था. यहाँ तो घर भी ऐसे ही बनाये जाते हैं कि नुकसान न हो और भूकंप इत्यादि का उन पर प्रभाव न पड़े. सुबह टी. वी. पर देखा तो इस भूकंप तीव्रता 6.6 बताई जा रही थी. वैसे समुद्र के बीच में अवस्थित होने के कारण यहाँ भूकंप आम बात है और जल्दी कोई नुकसान भी नहीं होता. पर डर तो लगता ही है. अच्छा हुआ जो मैं मस्ती से सो रही थी, नहीं तो रात में कित्ता डर लगता !!
सोमवार, मई 31, 2010
साइंस सिटी पोर्टब्लेयर में पाखी
पोर्टब्लेयर स्थित यह साइंस सिटी कर्बिंस-कोव बीच के रास्ते में पड़ता है. शहर से इसकी दूरी मात्र 4 किलोमीटर है. समुद्र के किनारे थोड़ी ऊंचाई पर स्थित यह साइंस सेंटर भारत का छठवाँ साइंस सिटी सेंटर है. और हाँ, इसी 30 मई को इस साइंस सेंटर ने अपनी स्थापना के 7 वर्ष पूरे कर लिए.
समर वेकेशन में तो यहाँ बच्चे घूब घूमने आते हैं और तमाम क्रिएटिव कोर्सेज भी यहाँ चलते हैं.
अभी कुछ दिन पहले ही यहाँ 3-डी थियेटर भी आरंभ हुआ है.
यहाँ तो बायो टेक्नालाजी के बारे में जानकारी दी गई है. जब बड़ी हो जाऊँगी, फिर समझ में आयेगा.
अले, ये तो मैं सौरमंडल में पहुँच गई. कित्ता अच्छा लग रहा है यहाँ.
मिसाइल तो बढ़िया दिख रही है, एक फोटो यहाँ भी खिंचवा लेती हूँ.
यहाँ कुछ मजेदार एक्टिविटी दिख रही हैं.
अब जरा इस बाल को ट्राई करती हूँ.
अले वाह, यह कित्ता ऊँचा जा रहा है और फिर यहीं आकर गिरेगा.
इस ट्रेन को देखिये तो इसका कोई छोर ही नहीं पता चलता. इनके बीच तमाम शीशे लगे हुए हैं, जिसके चलते यह इत्ती बड़ी लगती है.
और इस नल से तो हमेशा पानी ही निकलता रहता है, पर टब कभी नहीं भरता.
अब मैं भी अपनी दोनों हथेलियाँ इस पर रखकर देखती हूँ कि सुई कहाँ तक पहुँची. यह शरीर के आवेश को मापती है.
जरा इसे भी तो ट्राई करूँ.
ये मेरे पीछे मनुष्य का ब्रेन बनाया गया है. इसे ध्यान से देखो तो समझ में आता है कि यह कैसे कार्य करता होगा.
चलते-चलते इसका भी आनंद ले लूँ .
आप भी पोर्टब्लेयर आयें, तो साइंस-सिटी जरुर घूमने जियेगा !!
बुधवार, मई 26, 2010
सपने में आई परी

परी तो आ नहीं सकती, फिर मैंने मम्मी-पापा को अपने इस सपने पर एक प्यारा सा गीत लिखने को कहा, आप भी पढ़िए न और बताइए कि मेरा सपना, मेरी परी और यह गीत कैसा है-
हाथों में लिए छड़ी
पाखी के संग खूब खेलती
झिलमिल तारों में
सोमवार, मई 24, 2010
अंडमान में आए बारिश के दिन
कभी बारिश आती है, तो कभी जाती है।
बुधवार, मई 19, 2010
नेवी शिप आईएनएस राणा पर एक दिन
कित्ता विशाल था यह जहाज. यह जहाज युद्ध के समय कम आता है और इस पर हेलीकाप्टर भी उतर सकता है. इस पर तोप, रडार, मिसाइल जैसे तमाम टेक्नालाजी लगी हुई हैं ताकि लड़ाई में दुश्मनों को यह जवाब दे सके.
सोमवार, मई 17, 2010
पाखी की पेंटिंग
..और हाँ, ये भी आप बताना कि इसमें मैंने क्या-क्या बनाया है !!शुक्रवार, मई 14, 2010
जब अख़बार में हुई पाखी की चर्चा
अब आप सोचेंगें कि ये बात मुझे कैसे याद आई. पिछले दिनों पापा ने अपने पर प्रलय का इंतजार नाम से एक पोस्ट लिखी, इस पोस्ट की चर्चा जनसत्ता अख़बार में भी हुई. इस लेख में बहुत कुछ मेरी बातें लिखी गई थीं. यह बात मैंने पापा को बताई थीं और अपने इस ब्लॉग पर विश्व पृथ्वी दिवस के अवसर पर लिखी भी थीं. अख़बार में अपने नाम देखकर बहुत अच्छा लगा. और अब जब स्कूल खुलेगा तो अपने टीचर को भी दिखाउंगी, वो भी बहुत खुश होंगीं. आप भी इसे पढ़िएगा-
और हाँ चलते-चलते एक बात और याद आई कि दीनदयाल शर्मा अंकल जी ने अपने टाबर टोली (1-15 मई, 2010 अंक) अख़बार में भी मेरी ड्राइंग लगाई है. साथ में मेरी फोटो और मेरे बारे में भी. आप भी देखिये न और फिर बताइए कि कैसी है- 
बुधवार, मई 12, 2010
मुंडा पहाड़ बीच पर मस्ती
पिछले दिनों जब चिड़िया टापू गई तो वहाँ से आगे मुंडा पहाड़ बीच पर भी गई. दूर-दूर तक फैला समुद्र कित्ता अच्छा लगता है.
यहाँ शाम को बीच पर जमकर नहाना कित्ता अच्छा लगता है. फिर हलकी-हलकी ठण्ड भी लगने लगती है.
किनारे रेत में चित्रकारी करना तो मुझे खूब भाता है.
और ये मैंने रेत का महल बनाया.
आप भी जब कभी अंडमान आयें तो चिड़िया टापू देखने के बाद शाम को मुंडा पहाड़ बीच पर जरुर जाकर मस्ती करें !!
रविवार, मई 09, 2010
मम्मी मेरी सबसे प्यारी (आज मदर्स डे)
आज मदर्स डे पर मैंने सुबह जगते ही मम्मी को विश किया और उन्हें एक प्यारा
सा कार्ड और चाकलेट दिया. साथ में प्यारे-प्यारे गुलाब के फूल भी दिया और अपनी एक ड्राइंग भी दी. आज संडे भी है, सो पापा भी घर पर रहेंगे. शाम को हम लोग मरीना पार्क घूमने जायेंगे, जहाँ मैं खूब झूले झूलूँगी, स्लैडिंग करुँगी, सी-सा पर मस्ती करुँगी, हैंगिंग राड और स्प्रिंगी हार्स इंजॉय करुँगी. समुद्र के किनारे दूर तक घुमूंगी और बोटिंग भी करुँगी. और जब थक जायेंगे तो पापा हम लोगों को किसी रेस्तरां में शानदार डिनर कराएँगे.मेरी मम्मी बहुत बढ़िया है। मुझे पता है कई बार मैं उन्हें बहुत परेशान करती हूँ पर मम्मी कभी बुरा नहीं मानती. मुझे ढेर सारा प्यार-दुलार देती हैं. मेरी मम्मी सबसे प्यारी हैं.

मैं मम्मी की राजदुलारी।
मम्मी प्यार खूब जताती,
अच्छी-अच्छी चीजें लाती।
करती जब मैं खूब धमाल,
तब मम्मी खींचे मेरे कान।
मम्मी से हो जाती गुस्सा,
पहुँच जाती पापा के पास।
पीछे-पीछे तब मम्मी आती,
चाॅकलेट देकर मुझे मनाती।
थपकी देकर लोरी सुनाती,
मम्मी की गोद में मैं सो जाती।
गुरुवार, मई 06, 2010
जब पाखी बनी खरगोश (Rabbit)
मंगलवार, मई 04, 2010
आ गई गर्मी की छुट्टियाँ
रविवार, मई 02, 2010
वैशाखनंदन सम्मान प्रतियोगिता में पाखी
लेखिका परिचय :
नाम- अक्षिता
निक नेम - पाखी
जन्म- 25 मार्च, 2007 (कानपुर)
मम्मी-पापा - श्रीमती आकांक्षा - श्री कृष्ण कुमार यादव
अध्ययनरत - नर्सरी, कार्मेल स्कूल, पोर्टब्लेयर
रुचियाँ - प्लेयिंग, डांसिंग, ड्राइंग, बाल कवितायेँ पढ़ना व लिखना, ब्लागिंग
मूल निवास - तहबरपुर, आजमगढ़ (यू.पी.)
वर्तमान पता - द्वारा- श्री कृष्ण कुमार यादव, निदेशक डाक सेवा, अंडमान-निकोबार द्वीप समूह, पोर्टब्लेयर-744101
ई-मेल- akshita_06@rediffmail.com ब्लॉग- पाखी की दुनिया
मिल्क पाउडर ही पी जाएँ
दूध पीना मुझे भाता
पर बड़ी परेशान हूँ
किससे मैं शिकायत करूँ
होती बड़ी हैरान हूँ ।
दूध वाला ना अच्छा दूध दे
बस पानी की भरमार है
जब उससे करूँ शिकायत
रोये, महँगाई की मार है।
दूध में पानी या पानी में दूध
कुछ भी समझ ना आये
इससे अच्छा तो अब
मिल्क पाउडर ही पी जाएँ।
अच्छी लगी ना मेरी ये कविता..अब आप भी ये बात ताऊ जी को वैशाखनंदन सम्मान प्रतियोगिता में : कु0 अक्षिता (पाखी) लिंक पर जाकर बता आइये !!