पाखी की दुनिया
Thursday, February 16, 2012
Monday, February 13, 2012
मिलिए अपूर्वा से...
आज मिलिए मेरी छोटी सिस्टर अपूर्वा (तान्या) से. एक लम्बे समय बाद इनकी फोटो आप सबसे शेयर कर रही हूँ. अपूर्वा अब तो एक साल तीन माह से भी बड़ी हो गई हैं.अब तो अपूर्वा खूब मस्ती करती है. अंडमान में समुद्र किनारे बीच पर खूब दौड़ती है.
यह सारी फोटो हमारी नील द्वीप की यात्रा के दौरान की है !!
Thursday, February 09, 2012
Wednesday, February 08, 2012
वाह..कितना सुन्दर नेचुरल ब्रिज है !!
यहाँ पर चारों तरफ खूब टूटे हुए कोरल्स बिखरे हुए हैं. लोग बता रहे थे कि सुनामी में यहाँ बहुत नुकसान हुआ.
कुछ कोरल्स और जलीय पौधे तो अभी भी देखे जा सकते हैं.
वाकई यहाँ आकर बहुत अच्छा लगा. आप भी जब कभी अंडमान आयें तो नील आइलैंड जरुर आयें..बहुत मजा आयेगा.
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Thursday, January 26, 2012
प्यारा सा गणतंत्र हमारा

प्यारा-प्यारा देश हमारा.
सारे जग से है ये न्यारा.
कितनी सारी बोली यहाँ पर.
कितनी सारी हैं भाषाएँ.
हम सब सारे मिल-जुल रहते.
मानवता है सार हमारा.
शान कभी न कम हो इसकी.
प्यारा सा गणतंत्र हमारा.
हम बच्चों ने ली है कसम.
चमकेगा ये बनके सितारा.
(यह गीत गणतंत्र दिवस पर आयोजित मेरे स्कूल-फंक्शन के लिए ममा ने तैयार किया है.)
!! गणतंत्र दिवस पर आप सभी को ढेर सारी बधाइयाँ !!
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Friday, January 20, 2012
अंडमान में बन्दर नहीं पाए जाते...
आपको सुनकर आश्चर्य होगा कि अंडमान में बन्दर नहीं पाए जाते. कानपुर में तो हमारे लान में खूब सारे बन्दर आते थे और पेड़ों और फूलों की डाली पर खेलते और उन्हें तोड़कर भाग जाते थे. जब मैं यहाँ अंडमान में नई-नई आई थी तो बंदरों को न देखकर सोचा कि किसी दूसरे आइलैंड पर रहते होंगें. पर यहाँ अंडमान में तो बन्दर पाए ही नहीं जाते. यहाँ जंगलों में सिर्फ जंगली सूअर और हिरन मिलते हैं. हाथी तो यहाँ मेन-लैंड से लाए गए हैं. 
..पर निकोबार में बन्दर पाए जाते हैं. ये बन्दर निकोबार के लगभग अंतिम छोर कैम्पबेल-बे में पाए जाते हैं. पर ये बन्दर भी बड़े अजीब होते हैं. ये केकड़े (crab) खाते हैं. मैंने तो इन्हें देखा नहीं, पर सोचिये ये कैसे होते होंगें...!!

..पर निकोबार में बन्दर पाए जाते हैं. ये बन्दर निकोबार के लगभग अंतिम छोर कैम्पबेल-बे में पाए जाते हैं. पर ये बन्दर भी बड़े अजीब होते हैं. ये केकड़े (crab) खाते हैं. मैंने तो इन्हें देखा नहीं, पर सोचिये ये कैसे होते होंगें...!!
Sunday, January 15, 2012
अंडमान-निकोबार द्वीप पर्यटन उत्सव में अक्षिता (पाखी)
जब सारा भारत ठण्ड से ठिठुर रहा होता है, उस संमय अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में मौसम सुहाना होता है. देशी-विदेशी पर्यटकों के लिए यहाँ नवम्बर से फरवरी माह का संमय घूमने और मौज-मस्ती के करने के लिए उम्दा माना जाता है. खूबसूरत समुद्र-तट और लहरों की अठखेलियाँ, प्राकृतिक सौंदर्य, जैव-विविधता के बीच सेलुलर जेल और काला-पानी की ऐतिहासिकता पर्यटकों को रोमांचित करती है. समुद्र में सीप, मोलस्क, रंग-बिरंगी मछलियों के मध्य स्कूबा डाइविंग और स्नोरकलिंग का आनंद एक नए ही जीवन में ले जाता है.
ऐसे ही खुशनुमा अहसास के बीच जनवरी माह में आरंभ होता है- अंडमान-निकोबार द्वीप पर्यटन उत्सव. उत्सव क्या, मानिये पूरा भारत ही सिमट आता है. भिन्न-भिन्न प्रान्तों की संस्कृति के दर्शन यहाँ करने को मिलते हैं. इस साल मैं भी सपरिवार इस पर्यटन उत्सव में पहुंचा. राजधानी पोर्ट ब्लेयर में आरंभ होने वाला द्वीप पर्यटन उत्सव पांच जनवरी को आरंभ होकर आज पंद्रह जनवरी को ख़त्म होगा. इस उत्सव में जहाँ तमाम सरकारी विभागों की गतिविधियाँ उनके स्टाल पर परिलक्षित होती हैं, वहीँ मुख्यभूमि से मध्य प्रदेश, कर्नाटक, मेघालय, दिल्ली और गोवा जैसे राज्यों के पर्यटन निगम भी अपने स्टॉल लगाकर लोगों को आकर्षित कर रहे हैं. द्वीप महोत्सव का उद्घाटन भले ही उपराज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल भूपेन्द्र सिंह ने एक ही स्थान पर किया हो, पर यह निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है. शाम को सड़कों पर निकालिए तो आपको संगीत की मधुर स्वर-लहरियां अपने चारों तरफ गुंजित होती सुनाई देंगीं. पोर्टब्लेयर के साथ-साथ द्वीपसमूह के अन्य पर्यटक स्थलों पर भी सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन चलता रहता है. इनमें डिगलीपुर, लोंग आइलैंड, नील, हैवलॉक, विम्बर्लीगंज और भातू बस्ती इत्यदि शामिल हैं।आई.टी.एफ. मैदान में आयोजित होने वाला हास्य कवि सम्मेलन तो इस कार्यक्रम की जन है, जहाँ मुख्यभूमि से तमाम चर्चित कवि अपनी रचनाओं से लोगों को बांधने के लिए पहुँचते हैं. स्थानीय कवियों का कवि-समेलन तो होता ही है. तमाम स्कूलों के बच्चे अंतर स्कूल नृत्य प्रतियोगिता में भाग लेकर प्रोत्साहित होते हैं तो सेना और पुलिस की ओर से भी तमाम कार्यक्रम प्रस्तुत किए जाते हैं. रॉक बैंड ‘यूफोरिया’ का प्रदर्शन तो इस बार लाजवाब रहा.
पोर्टब्लेयर में आयोजित द्वीप पर्यटन उत्सव अब इन द्वीपों से बाहर भी अपनी रंगत बिखेरने लगा है. इसीलिए इसे पहली बार राष्ट्रीय प्रसारण में भी शामिल किया गया. उद्घाटन समारोह का दूरदर्शन के राष्ट्रीय चैनल डी.डी. भारती से सीधा प्रसारण किया गया. सभी द्वीपों के अलावा बत्तीस अन्य राष्ट्रों में भी यह सीधा प्रसारण देखा गया. इसके अलावा दूरदर्शन के राष्ट्रीय प्रसारण चैनल डी.डी.वन पर द्वीप पर्यटन उत्सव पर बाइस मिनट की टी.वी.रिपोर्ट भी प्रसारित की गई.
इस बार पहली बार निकोबार में भी द्वीप पर्यटन उत्सव आयोजित किया गया. गौरतलब है कि निकोबार भारत का सबसे दूरस्थ क्षेत्र है और इंदिरा प्वाइंट भी यहीं पर स्थित है. जिला मुख्यालय कार निकोबार में निकोबार पर्यटन महोत्सव सात जनवरी से आरंभ होकर ग्यारह जनवरी तक चला. यहाँ भी पर्यटन उत्सव का उद्घाटन करने उपराज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल भूपेन्द्र सिंह पहुंचे. विभिन्न विभागों के स्टॉल और सांस्कृतिक कार्यक्रमों कि छटा के साथ-साथ निकोबारी संस्कृति को नजदीक से महसूस करने का अपना अलग ही लुत्फ़ है. वैसे भी अंडमान-निकोबार कि जनजातियों में अभी मात्र निकोबारी ही सभ्य हुए हैं, अन्य अभी भी आदिम अवस्था में ही हैं.
Saturday, January 14, 2012
Wednesday, January 11, 2012
मेरा दाँत (teeth) खो गया...
आजकल मैं बहुत टेंशन में हूँ. मेरा एक मिल्की दाँत ( Milky Teeth) कई दिनों से हिल रहा था. मैं भी उसे अपनी जीभ से खूब परेशान करती और सोचती थी कि यह कब बाहर निकलेगा ? मैं अपना दाँत हाथों में लेकर खुद देखना चाहती थी. पर सब गड़बड़ हो गया.
कल क्लास-रूम में टिफिन के बाद जब मैं पानी पी रही थी तो मुझे लगा कि मेरा दाँत नहीं है. मैं तो बहुत डर गई कि कहीं यह मेरे पेट में तो नहीं चला गया. ममा स्कूल में लेने आईं तो उन्हें बताया, फिर ममा ने फोन पर पापा को आफिस में बताया. अपने पहले ही मिल्की टीथ को मैं देख भी नहीं पाई और अभी तक यह पता नहीं चल सका है कि वह दाँत कहाँ चला गया...??
Tuesday, January 10, 2012
बीस रूपये के नोट के पीछे किस जगह की फोटो है ??
दक्षिण अंडमान की सबसे ऊँची चोटी माउन्टेन हेरियट से इसे देखना तो और भी शानदार लगता है.
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Saturday, January 07, 2012
समुद्र के अन्दर का जीवन कैसा होता होगा..
Tuesday, January 03, 2012
Monday, January 02, 2012
Sunday, January 01, 2012
नए साल का पहला दिन..
नए साल-2012 का पहला दिन तो खूब मस्ती से बीता. स्कूल की छुट्टियाँ, उस पर से संडे का दिन..सो सबकी छुट्टियाँ.
आज दिन भर मैं खूब घूमी और जब थक गई तो पहुंची अपने फेवरेट फार्चून बे रिसोर्ट. यह अंडमान का एकमात्र 4-स्टार होटल है.
वैसे भी हर संडे को हमारा लंच यहाँ पक्का है, यदि हम पोर्टब्लेयर में हैं.
यहाँ बाहर बैठकर ठंडी हवा में ऱोस आइलैंड और नार्थ-बे आइलैंड को देखना बहुत खूबसूरत लगता है. यहाँ लगी हाथ में तीर-धनुष लिए 'जारवा' की यह स्टैचू तो मुझे बहुत अच्छी लगती है.
ममा-पापा और अपूर्वा के साथ घूमना वाकई मजेदार रहा..पता ही नहीं चला कि नए साल का पहला दिन कैसे बीत गया. अभी शाम को तो बीच पर भी मस्ती करनी है..तब तक बाय-बाय.
!! आप सभी लोगों को नए साल पर फिर से ढेर सारी बधाइयाँ और प्यार !!
Saturday, December 31, 2011
Friday, December 30, 2011
आज ही के दिन नेता जी ने फहराया था अंडमान में राष्ट्रीय ध्वज
आज का दिन अंडमान में काफी महत्व रखता है. आज सुबह जब मैं पापा के गेस्ट-हॉउस में जा रही थी तो देखा कि नेता जी स्टेडियम के सामने राष्ट्रीय झंडा फहराया जा रहा है. मैंने सोचा कि आज क्यों झंडा फहराया जा रहा है ?फिर पापा ने बताया कि आज ही के दिन अर्थात 30 दिसंबर को 1943 में आजाद हिंद फ़ौज (Indian National Army) के सुप्रीम कमांडर के रूप में नेताजी सुभाष चन्द्र बोस ने सर्वप्रथम अंडमान में भारतीय राष्ट्रीय ध्वज फहराया था. तब हमारा देश अंग्रेजों का पराधीन था और अंडमान में जापान का कब्ज़ा था.
नेता जी यहाँ अंडमान में सेलुलर जेल देखने आए थे और अंडमान-निकोबार को ब्रिटिश शासन से स्वतंत्र पहले क्षेत्र के रूप में घोषित कर उन्होंने यहाँ जिमखाना ग्राउंड (अब नेता जी स्टेडियम) में भारतीय राष्ट्रीय ध्वज फहराया था. नेता जी ने इन द्वीपों को 'शहीद' और 'स्वराज' नाम दिया था. उस समय नेता जी कि सरकार को 9 देशों की सरकार ने मान्यता दी थी. तब से हर साल 30 दिसंबर को यहाँ भारतीय राष्ट्रीय ध्वज फहराकर उस दिन को याद किया जाता है.************************************************************************************
30th December is a significant day in the history of India in general and the Andamans in particular. On this day in the year 1943, Netaji Subhash Chandra Bose hoisted the National Flag for the first time at Port Blair declaring the islands, the first Indian Territory to be liberated from the British rule, renamed them “Saheed” and “Swaraj”. Today the day is celebrated as “Andaman Day”, the day marks the anniversary of the unfurling of the first Indian Tricolour.
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Wednesday, December 28, 2011
अब बताइए, पाखी की ड्राइंग में क्या-क्या छुपा है..
Monday, December 26, 2011
सुनामी की याद और निकोबार की यात्रा
अंडमान में पिछले तीन दिनों से खूब बारिश और तूफानी हवाएं चल रही हैं. सभी द्वीपों पर जाने के लिए अधिकतर बोट, हेलीकाप्टर इत्यादि कैंसल हो गए हैं. इस सबके चक्कर में तो क्रिसमस का सारा मजा ही ख़राब हो गया. मेरी छुट्टियाँ हैं, पर कहीं घूमने भी नहीं जा पा रही हूँ.
..आपको पता है 26 दिसंबर 2004 को अंडमान-निकोबार में भयंकर सुनामी आई थी. आज उस घटना को सात साल पूरे हो गए हैं. यहाँ पोर्टब्लेयर के जिस मरीना पार्क में मैं खेलती हूँ, वह भी सुनामी में ध्वस्त हो गया था. अब तो नया पार्क बना है. ऐसे ही यहाँ बहुत सारी चीजें नष्ट हो गईं. पापा बता रहे थे कि सबसे ज्यादा नुकसान निकोबार में हुआ था. मैं तो अभी तक निकोबार नहीं गई हूँ, पर पापा दो बार घूम आए हैं.
पापा अभी 20 और 21 दिसंबर, 2011 को निकोबार गए थे. वहाँ से वे ढेर सारी तस्वीरें कैमरे में कैद करके लाए. आप भी देखिए-
..आपको पता है 26 दिसंबर 2004 को अंडमान-निकोबार में भयंकर सुनामी आई थी. आज उस घटना को सात साल पूरे हो गए हैं. यहाँ पोर्टब्लेयर के जिस मरीना पार्क में मैं खेलती हूँ, वह भी सुनामी में ध्वस्त हो गया था. अब तो नया पार्क बना है. ऐसे ही यहाँ बहुत सारी चीजें नष्ट हो गईं. पापा बता रहे थे कि सबसे ज्यादा नुकसान निकोबार में हुआ था. मैं तो अभी तक निकोबार नहीं गई हूँ, पर पापा दो बार घूम आए हैं.
पापा अभी 20 और 21 दिसंबर, 2011 को निकोबार गए थे. वहाँ से वे ढेर सारी तस्वीरें कैमरे में कैद करके लाए. आप भी देखिए-
निकोबार में समुद्र तट के किनारे पड़ी, निकोबारी लोगों द्वारा इस्तेमाल की जाती रहीं डोंगी (बोट). सुनामी के दौरान ये सब ख़राब हो गईं.
सुनामी ने यहाँ की प्राकृतिक सम्पदा और जैव विविधता को काफी नुकसान पहुँचाया. समुद्र के किनारे और जंगलों तक में नष्ट हो गई कोरल्स बिखरी पड़ी हैं.ऐसी ही कोरल्स के साथ पापा श्री कृष्ण कुमार यादव जी.
निकोबार में एक तट का रमणीक दृश्य.
निकोबार में नारियल वृक्षों का एक रमणीक दृश्य. निकोबारी नारियल-फल को इकठ्ठा कर मुख्य भूमि भेजते हैं और यह इनकी आय का प्रमुख स्रोत है.
निकोबार में मात्र दो जनजातियाँ पाई जाती हैं-निकोबारी और शौम्पेन. इनमें से निकोबारी अब सभ्य हो चुके हैं. वे बकायदा शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं और तमाम रोजगारों में भी हैं. निकोबारी बालकों के साथ पापा श्री कृष्ण कुमार यादव जी.
सेंट थामस न्यू कैथेड्रल चर्च, मूस, कार निकोबार के समक्ष बिशप डा. जान रिचर्डसन (1884- 3 जून 1978) की मूर्ति. बिशप डा. जान रिचर्डसन को निकोबरियों को सभ्य बनाने का श्रेय जाता है. भारत सरकार द्वारा पद्मश्री और पद्म भूषण से सम्मानित बिशप जान रिचर्डसन संसद हेतु अंडमान-निकोबार से प्रथम मनोनीत सांसद भी थे.
...तो कैसी लगी यह निकोबार यात्रा. आप जब भी आइयेगा, निकोबार घूमने जरुर जाइएगा. निकोबार जाने के लिए जिला-उपायुक्त से विशेष पास लेने की जरुरत होती है. वहाँ होटल इत्यदि की सुविधा नगण्य ही मानें. पोर्टब्लेयर से हेलीकाप्टर द्वारा एक घंटे और शिप द्वारा कार-निकोबार पहुँचने में लगभग 15-18 घंटे लगते हैं.
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