आप सब 'पाखी' को बहुत प्यार करते हैं...

Thursday, February 16, 2012

अक्षिता की ड्राइंग..


आज देखिये मेरी तीन ड्राइंग.

इसमें कई सारी चीजें मैंने बनाई हैं.

जल्दी से बताइयेगा कि आपने क्या-क्या देखा !!

Monday, February 13, 2012

मिलिए अपूर्वा से...

आज मिलिए मेरी छोटी सिस्टर अपूर्वा (तान्या) से. एक लम्बे समय बाद इनकी फोटो आप सबसे शेयर कर रही हूँ. अपूर्वा अब तो एक साल तीन माह से भी बड़ी हो गई हैं.अब तो अपूर्वा खूब मस्ती करती है. अंडमान में समुद्र किनारे बीच पर खूब दौड़ती है.












यह सारी फोटो हमारी नील द्वीप की यात्रा के दौरान की है !!


Thursday, February 09, 2012

अंडमान में आम खाने के दिन आए..


आजकल अंडमान में आम की बहार है. जहाँ देखिये, वहीँ पेड़ों पर पीले-पीले आम नजर आते हैं.

यहाँ तो कई पेड़ों पर साल भर में तीन बार आम होते हैं. ये आम स्वाद में बड़े मीठे होते हैं.

मैं तो खूब आ खा रही हूँ और मैंगो-शेक का भी मजा ले रही हूँ.

Wednesday, February 08, 2012

वाह..कितना सुन्दर नेचुरल ब्रिज है !!

पिछले दिनों मैं ममा-पापा और अपूर्वा के साथ नील आइलैंड घूमने गई. वहाँ पर एक बीच है-लक्ष्मणपुर बीच. यहाँ पर तो एक बहुत सुन्दर नेचुरल ब्रिज बना हुआ है. इसे देखकर तो मैं बहुत ही प्रसन्न हुई.

यहाँ पर चारों तरफ खूब टूटे हुए कोरल्स बिखरे हुए हैं. लोग बता रहे थे कि सुनामी में यहाँ बहुत नुकसान हुआ.

कुछ कोरल्स और जलीय पौधे तो अभी भी देखे जा सकते हैं.

वाकई यहाँ आकर बहुत अच्छा लगा. आप भी जब कभी अंडमान आयें तो नील आइलैंड जरुर आयें..बहुत मजा आयेगा.

Thursday, January 26, 2012

प्यारा सा गणतंत्र हमारा


प्यारा-प्यारा देश हमारा.
सारे जग से है ये न्यारा.

कितनी सारी बोली यहाँ पर.
कितनी सारी हैं भाषाएँ.
हम सब सारे मिल-जुल रहते.
मानवता है सार हमारा.

शान कभी न कम हो इसकी.
प्यारा सा गणतंत्र हमारा.
हम बच्चों ने ली है कसम.
चमकेगा ये बनके सितारा.

(यह गीत गणतंत्र दिवस पर आयोजित मेरे स्कूल-फंक्शन के लिए ममा ने तैयार किया है.)

!! गणतंत्र दिवस पर आप सभी को ढेर सारी बधाइयाँ !!

Friday, January 20, 2012

अंडमान में बन्दर नहीं पाए जाते...

आपको सुनकर आश्चर्य होगा कि अंडमान में बन्दर नहीं पाए जाते. कानपुर में तो हमारे लान में खूब सारे बन्दर आते थे और पेड़ों और फूलों की डाली पर खेलते और उन्हें तोड़कर भाग जाते थे. जब मैं यहाँ अंडमान में नई-नई आई थी तो बंदरों को न देखकर सोचा कि किसी दूसरे आइलैंड पर रहते होंगें. पर यहाँ अंडमान में तो बन्दर पाए ही नहीं जाते. यहाँ जंगलों में सिर्फ जंगली सूअर और हिरन मिलते हैं. हाथी तो यहाँ मेन-लैंड से लाए गए हैं.
..पर निकोबार में बन्दर पाए जाते हैं. ये बन्दर निकोबार के लगभग अंतिम छोर कैम्पबेल-बे में पाए जाते हैं. पर ये बन्दर भी बड़े अजीब होते हैं. ये केकड़े (crab) खाते हैं. मैंने तो इन्हें देखा नहीं, पर सोचिये ये कैसे होते होंगें...!!

Sunday, January 15, 2012

अंडमान-निकोबार द्वीप पर्यटन उत्सव में अक्षिता (पाखी)

अंडमान में इन दिनों आइलैंड-फेस्टिवल की धूम है. मैं भी मामा-पापा और अपूर्वा के साथ घूमने गई थी. बड़ा मजा आया. मेरी तरह के ढेर सारे बच्चे वहाँ कार्यक्रम पेश कर रहे थे. कोई परी बना था तो कोई भालू, मोर, तोता, बन्दर, खरगोश, क्रोकोडाइल और बटरफ्लाई. उसके बाद दूसरे राज्यों के कलाकारों द्वारा किया गया नृत्य भी मैंने देखा. ढेर सारे स्टाल पर मैं गई और अपने और अपूर्वा के लिए खूब खिलौने ख़रीदे. फिर खाने-पीने के स्टाल भी तो खूब सजे थे, वहाँ तो खूब मजा आया. ढेर सारी मिठाई, चाकलेट, आइसक्रीम, जूस, चाट, पिज्जा, बर्गर, नूडल्स, पास्ता...सब पर थोडा-थोडा हाथ साफ किया. -इस पर पापा ने भी अपने ब्लॉग पर एक पोस्ट लगाई है, उसे भी पढ़ें-


जब सारा भारत ठण्ड से ठिठुर रहा होता है, उस संमय अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में मौसम सुहाना होता है. देशी-विदेशी पर्यटकों के लिए यहाँ नवम्बर से फरवरी माह का संमय घूमने और मौज-मस्ती के करने के लिए उम्दा माना जाता है. खूबसूरत समुद्र-तट और लहरों की अठखेलियाँ, प्राकृतिक सौंदर्य, जैव-विविधता के बीच सेलुलर जेल और काला-पानी की ऐतिहासिकता पर्यटकों को रोमांचित करती है. समुद्र में सीप, मोलस्क, रंग-बिरंगी मछलियों के मध्य स्कूबा डाइविंग और स्नोरकलिंग का आनंद एक नए ही जीवन में ले जाता है.

ऐसे ही खुशनुमा अहसास के बीच जनवरी माह में आरंभ होता है- अंडमान-निकोबार द्वीप पर्यटन उत्सव. उत्सव क्या, मानिये पूरा भारत ही सिमट आता है. भिन्न-भिन्न प्रान्तों की संस्कृति के दर्शन यहाँ करने को मिलते हैं. इस साल मैं भी सपरिवार इस पर्यटन उत्सव में पहुंचा. राजधानी पोर्ट ब्लेयर में आरंभ होने वाला द्वीप पर्यटन उत्सव पांच जनवरी को आरंभ होकर आज पंद्रह जनवरी को ख़त्म होगा. इस उत्सव में जहाँ तमाम सरकारी विभागों की गतिविधियाँ उनके स्टाल पर परिलक्षित होती हैं, वहीँ मुख्यभूमि से मध्य प्रदेश, कर्नाटक, मेघालय, दिल्ली और गोवा जैसे राज्यों के पर्यटन निगम भी अपने स्टॉल लगाकर लोगों को आकर्षित कर रहे हैं. द्वीप महोत्सव का उद्घाटन भले ही उपराज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल भूपेन्द्र सिंह ने एक ही स्थान पर किया हो, पर यह निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है. शाम को सड़कों पर निकालिए तो आपको संगीत की मधुर स्वर-लहरियां अपने चारों तरफ गुंजित होती सुनाई देंगीं. पोर्टब्लेयर के साथ-साथ द्वीपसमूह के अन्य पर्यटक स्थलों पर भी सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन चलता रहता है. इनमें डिगलीपुर, लोंग आइलैंड, नील, हैवलॉक, विम्बर्लीगंज और भातू बस्ती इत्यदि शामिल हैं।आई.टी.एफ. मैदान में आयोजित होने वाला हास्य कवि सम्मेलन तो इस कार्यक्रम की जन है, जहाँ मुख्यभूमि से तमाम चर्चित कवि अपनी रचनाओं से लोगों को बांधने के लिए पहुँचते हैं. स्थानीय कवियों का कवि-समेलन तो होता ही है. तमाम स्कूलों के बच्चे अंतर स्कूल नृत्य प्रतियोगिता में भाग लेकर प्रोत्साहित होते हैं तो सेना और पुलिस की ओर से भी तमाम कार्यक्रम प्रस्तुत किए जाते हैं. रॉक बैंड ‘यूफोरिया’ का प्रदर्शन तो इस बार लाजवाब रहा.

पोर्टब्लेयर में आयोजित द्वीप पर्यटन उत्सव अब इन द्वीपों से बाहर भी अपनी रंगत बिखेरने लगा है. इसीलिए इसे पहली बार राष्ट्रीय प्रसारण में भी शामिल किया गया. उद्घाटन समारोह का दूरदर्शन के राष्ट्रीय चैनल डी.डी. भारती से सीधा प्रसारण किया गया. सभी द्वीपों के अलावा बत्तीस अन्य राष्ट्रों में भी यह सीधा प्रसारण देखा गया. इसके अलावा दूरदर्शन के राष्ट्रीय प्रसारण चैनल डी.डी.वन पर द्वीप पर्यटन उत्सव पर बाइस मिनट की टी.वी.रिपोर्ट भी प्रसारित की गई.

इस बार पहली बार निकोबार में भी द्वीप पर्यटन उत्सव आयोजित किया गया. गौरतलब है कि निकोबार भारत का सबसे दूरस्थ क्षेत्र है और इंदिरा प्वाइंट भी यहीं पर स्थित है. जिला मुख्यालय कार निकोबार में निकोबार पर्यटन महोत्सव सात जनवरी से आरंभ होकर ग्यारह जनवरी तक चला. यहाँ भी पर्यटन उत्सव का उद्घाटन करने उपराज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल भूपेन्द्र सिंह पहुंचे. विभिन्न विभागों के स्टॉल और सांस्कृतिक कार्यक्रमों कि छटा के साथ-साथ निकोबारी संस्कृति को नजदीक से महसूस करने का अपना अलग ही लुत्फ़ है. वैसे भी अंडमान-निकोबार कि जनजातियों में अभी मात्र निकोबारी ही सभ्य हुए हैं, अन्य अभी भी आदिम अवस्था में ही हैं.

Saturday, January 14, 2012

मकर संक्रांति पर्व पर बधाइयाँ


!! मकर संक्रांति पर्व पर आप सभी को बधाइयाँ !!



चित्र साभार : वेब दुनिया

Wednesday, January 11, 2012

मेरा दाँत (teeth) खो गया...


आजकल मैं बहुत टेंशन में हूँ. मेरा एक मिल्की दाँत ( Milky Teeth) कई दिनों से हिल रहा था. मैं भी उसे अपनी जीभ से खूब परेशान करती और सोचती थी कि यह कब बाहर निकलेगा ? मैं अपना दाँत हाथों में लेकर खुद देखना चाहती थी. पर सब गड़बड़ हो गया.

कल क्लास-रूम में टिफिन के बाद जब मैं पानी पी रही थी तो मुझे लगा कि मेरा दाँत नहीं है. मैं तो बहुत डर गई कि कहीं यह मेरे पेट में तो नहीं चला गया. ममा स्कूल में लेने आईं तो उन्हें बताया, फिर ममा ने फोन पर पापा को आफिस में बताया. अपने पहले ही मिल्की टीथ को मैं देख भी नहीं पाई और अभी तक यह पता नहीं चल सका है कि वह दाँत कहाँ चला गया...??

Tuesday, January 10, 2012

बीस रूपये के नोट के पीछे किस जगह की फोटो है ??

आपने कभी 20 रूपये का नोट ध्यान से देखा है. नहीं ना, तो फिर इसका पिछला हिस्सा ध्यान से देखिए. इस पर समुद्र, लाइट-हॉउस और नारियल के पेड़ दिख रहे होंगें. आपको पता है, 20 रूपये की नोट के पीछे अंकित यह फोटो अंडमान में स्थित नार्थ-बे आइलैंड की है. यहाँ का बीच और लाइट-हॉउस बहुत खूबसूरत लगते हैं।


दक्षिण अंडमान की सबसे ऊँची चोटी माउन्टेन हेरियट से इसे देखना तो और भी शानदार लगता है.

Saturday, January 07, 2012

समुद्र के अन्दर का जीवन कैसा होता होगा..

कभी आपने सोचा है कि समुद्र के अन्दर जीवन कैसा होता होगा. ढेर सारी रंग-बिरंगी मछलियाँ, कोरल्स, सीप, मोलस्क, साँप...और भी बहुत कुछ. और सोचिए वे सब कैसे मस्ती करते होंगें. अब मेरी इमेजिनेशन देखिये इस ड्राइंग के माध्यम से. मुझे लगता है कि समुद्र के अन्दर सारे जीव ऐसे ही घूमते होंगें.

Tuesday, January 03, 2012

हिंदुस्तान, दैनिक जागरण और अमर उजाला में ब्लागर अक्षिता और 'पाखी की दुनिया' की चर्चा

(हिंदुस्तान, वाराणसी, 2 दिसंबर 2011 में चर्चा)

(दैनिक जागरण, वाराणसी, 2 दिसंबर 2011 में चर्चा)

(अमर उजाला, वाराणसी, 2 दिसंबर 2011 में चर्चा)

(हिंदुस्तान, वाराणसी, 1 दिसंबर 2011 में चर्चा)


(हिंदुस्तान, वाराणसी, 1 दिसंबर 2011 में चर्चा)

Monday, January 02, 2012

पाखी चली स्कूल..छुट्टियाँ ख़त्म


वर्ष 2011 बीत गया और अब नए साल-2012 का जश्न भी ख़त्म.

क्रिसमस से लेकर नए साल तक की छुट्टियाँ ख़त्म और आज से मेरे स्कूल शुरू हो गए.

अभी मेरा क्लास सुबह 7:30 से 11:30 तक चलता है.

..तो मैं तो चली स्कूल, आखिर पढ़ाई भी तो जरुरी है!!

Sunday, January 01, 2012

नए साल का पहला दिन..


नए साल-2012 का पहला दिन तो खूब मस्ती से बीता. स्कूल की छुट्टियाँ, उस पर से संडे का दिन..सो सबकी छुट्टियाँ.

आज दिन भर मैं खूब घूमी और जब थक गई तो पहुंची अपने फेवरेट फार्चून बे रिसोर्ट. यह अंडमान का एकमात्र 4-स्टार होटल है.

वैसे भी हर संडे को हमारा लंच यहाँ पक्का है, यदि हम पोर्टब्लेयर में हैं.

यहाँ बाहर बैठकर ठंडी हवा में ऱोस आइलैंड और नार्थ-बे आइलैंड को देखना बहुत खूबसूरत लगता है. यहाँ लगी हाथ में तीर-धनुष लिए 'जारवा' की यह स्टैचू तो मुझे बहुत अच्छी लगती है.

यहाँ का खाना काफी लजीज होता है. कभी भी यहाँ आयें तो इनका बुफे-सिस्टम ट्राई करें. एक साथ ढेर सारी वैरायटी... और हम बच्चों को चाहिए ही क्या.


ममा-पापा और अपूर्वा के साथ घूमना वाकई मजेदार रहा..पता ही नहीं चला कि नए साल का पहला दिन कैसे बीत गया. अभी शाम को तो बीच पर भी मस्ती करनी है..तब तक बाय-बाय.

!! आप सभी लोगों को नए साल पर फिर से ढेर सारी बधाइयाँ और प्यार !!





















Saturday, December 31, 2011

2011..बाय-बाय...2012..वेलकम !!

आज वर्ष 2011 का अंतिम दिन है. कल से नया वर्ष-2012 आरंभ हो जायेगा. नए साल के स्वागत के लिए मैंने भी तैयारी कर ली है. आपने तो कर ही ली होगी.
नव वर्ष-2012 पर आप सभी लोगों को ढेरों बधाई और प्यार. ..और हाँ, आपका आशीर्वाद और स्नेह तो मुझे चाहिए ही अब साल भर.

Friday, December 30, 2011

आज ही के दिन नेता जी ने फहराया था अंडमान में राष्ट्रीय ध्वज

आज का दिन अंडमान में काफी महत्व रखता है. आज सुबह जब मैं पापा के गेस्ट-हॉउस में जा रही थी तो देखा कि नेता जी स्टेडियम के सामने राष्ट्रीय झंडा फहराया जा रहा है. मैंने सोचा कि आज क्यों झंडा फहराया जा रहा है ?

फिर पापा ने बताया कि आज ही के दिन अर्थात 30 दिसंबर को 1943 में आजाद हिंद फ़ौज (Indian National Army) के सुप्रीम कमांडर के रूप में नेताजी सुभाष चन्द्र बोस ने सर्वप्रथम अंडमान में भारतीय राष्ट्रीय ध्वज फहराया था. तब हमारा देश अंग्रेजों का पराधीन था और अंडमान में जापान का कब्ज़ा था. नेता जी यहाँ अंडमान में सेलुलर जेल देखने आए थे और अंडमान-निकोबार को ब्रिटिश शासन से स्वतंत्र पहले क्षेत्र के रूप में घोषित कर उन्होंने यहाँ जिमखाना ग्राउंड (अब नेता जी स्टेडियम) में भारतीय राष्ट्रीय ध्वज फहराया था. नेता जी ने इन द्वीपों को 'शहीद' और 'स्वराज' नाम दिया था. उस समय नेता जी कि सरकार को 9 देशों की सरकार ने मान्यता दी थी. तब से हर साल 30 दिसंबर को यहाँ भारतीय राष्ट्रीय ध्वज फहराकर उस दिन को याद किया जाता है.

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30th December is a significant day in the history of India in general and the Andamans in particular. On this day in the year 1943, Netaji Subhash Chandra Bose hoisted the National Flag for the first time at Port Blair declaring the islands, the first Indian Territory to be liberated from the British rule, renamed them “Saheed” and “Swaraj”. Today the day is celebrated as “Andaman Day”, the day marks the anniversary of the unfurling of the first Indian Tricolour.

Wednesday, December 28, 2011

अब बताइए, पाखी की ड्राइंग में क्या-क्या छुपा है..

एक लम्बे समय से मेरे ब्लॉग पर मेरी ड्राइंग अपलोड ही नहीं की गईं. आप भी सोच रहे होंगे की पाखी की ड्राइंग कहाँ गायब हो गईं. तो ये रहीं मेरी कुछेक नई ड्राइंग..












..अब इन्हें देखकर जल्दी से बताइए कि इनमें क्या-क्या छुपा है !!

Monday, December 26, 2011

सुनामी की याद और निकोबार की यात्रा

अंडमान में पिछले तीन दिनों से खूब बारिश और तूफानी हवाएं चल रही हैं. सभी द्वीपों पर जाने के लिए अधिकतर बोट, हेलीकाप्टर इत्यादि कैंसल हो गए हैं. इस सबके चक्कर में तो क्रिसमस का सारा मजा ही ख़राब हो गया. मेरी छुट्टियाँ हैं, पर कहीं घूमने भी नहीं जा पा रही हूँ.

..आपको पता है 26 दिसंबर 2004 को अंडमान-निकोबार में भयंकर सुनामी आई थी. आज उस घटना को सात साल पूरे हो गए हैं. यहाँ पोर्टब्लेयर के जिस मरीना पार्क में मैं खेलती हूँ, वह भी सुनामी में ध्वस्त हो गया था. अब तो नया पार्क बना है. ऐसे ही यहाँ बहुत सारी चीजें नष्ट हो गईं. पापा बता रहे थे कि सबसे ज्यादा नुकसान निकोबार में हुआ था. मैं तो अभी तक निकोबार नहीं गई हूँ, पर पापा दो बार घूम आए हैं.

पापा अभी 20 और 21 दिसंबर, 2011 को निकोबार गए थे. वहाँ से वे ढेर सारी तस्वीरें कैमरे में कैद करके लाए. आप भी देखिए-
सुनामी मेमोरियल, निकोबार के मुख्य गेट के समक्ष पापा श्री कृष्ण कुमार यादव जी.
सुनामी मेमोरियल, निकोबार के समक्ष पापा श्री कृष्ण कुमार यादव जी.
सुनामी मेमोरियल, निकोबार के अन्दर प्रदर्शित पट्टिका, जिस पर लिखा है कि आगामी पीढ़ियों को इस विभीषिका को कभी नहीं भूलना चाहिए.
सुनामी मेमोरियल, निकोबार के अन्दर प्रदर्शित पट्टिका, जिस पर उन लोगों के नाम दर्ज हैं, जो सुनामी की भेंट चढ़ गए. इस पर लगभग 700 लोगों के नाम अंकित हैं. इसमें मात्र उन्हीं लोगों के नाम शामिल हैं, जिनका मृत-शरीर पाया गया. जिनका मृत शरीर नहीं पाया गया, उनके बारे में यह पट्टिका मौन है.निकोबारी गाँव में एक निकोबारी-हट में लगी उन लोगों की नाम पट्टिका, जो सुनामी की विभीषिका में ख़त्म हो गए.उक्त नाम-पट्टिका के समक्ष बैठे वृद्ध निकोबारी से जानकारी लेने के बाद पापा श्री कृष्ण कुमार यादव जी.निकोबारी गाँव में निकोबारी-हट के समक्ष पापा श्री कृष्ण कुमार यादव जी.
निकोबारी-हट के अन्दर पापा श्री कृष्ण कुमार यादव जी.
निकोबारी हट के समक्ष पापा श्री कृष्ण कुमार यादव जी. हर निकोबारी कबीले में ऐसी एक हट होती है, जिसे वे सामुदायिक-गृह के रूप में प्रयोग करते हैं. शादी-ब्याह, उत्सव के दौरान मेहमानों के ठहरने के लिए इसका उपयोग किया जाता है. यह दो मंजिला होती है.सुनामी से पहले बनी निकोबारी-झोपड़ियाँ, जो अब नष्टप्राय हो गई हैं. इसके बदले में प्रशासन ने निकोबरियों को नए घर उपलध कराए हैं.सुनामी पश्चात् निकोबरियों को सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए नए मकान.
सुनामी के दौरान पुरानी जेट्टी स्थित समुद्र तट के पास अवस्थित कई मकान इत्यादि ध्वस्त हो गए, पर मुरूगन देवता का यह मंदिर सलामत रहा. यही कारण है कि लोग इस मंदिर के प्रति काफी आस्था रखते हैं.
निकोबार में समुद्र तट के किनारे पड़ी, निकोबारी लोगों द्वारा इस्तेमाल की जाती रहीं डोंगी (बोट). सुनामी के दौरान ये सब ख़राब हो गईं.सुनामी के दौरान निकोबार में काफी नुकसान हुआ. इसी दौरान एक जलयान (Ship) पानी में डूब गया. उसके अवशेष अभी भी देखे जा सकते हैं.निकोबार की पुरानी जेट्टी, जो सुनामी में नष्ट हो गई. अब यहाँ नई जेट्टी बनाने का कार्य चल रहा है.
सुनामी ने यहाँ की प्राकृतिक सम्पदा और जैव विविधता को काफी नुकसान पहुँचाया. समुद्र के किनारे और जंगलों तक में नष्ट हो गई कोरल्स बिखरी पड़ी हैं.ऐसी ही कोरल्स के साथ पापा श्री कृष्ण कुमार यादव जी. अंडमान-निकोबार के समुद्र तट (Beach) अपनी प्राकृतिक सुन्दरता के साथ-साथ मोतियों जैसे चमकते सफ़ेद बालू के लिए भी जाने जाते हैं. इनका आकर्षण ही कुछ अलग होता है.इस आकर्षण का लुत्फ़ उठाते पापा श्री कृष्ण कुमार यादव जी.
निकोबार में एक तट का रमणीक दृश्य.
निकोबार में नारियल वृक्षों का एक रमणीक दृश्य. निकोबारी नारियल-फल को इकठ्ठा कर मुख्य भूमि भेजते हैं और यह इनकी आय का प्रमुख स्रोत है.
निकोबार में मात्र दो जनजातियाँ पाई जाती हैं-निकोबारी और शौम्पेन. इनमें से निकोबारी अब सभ्य हो चुके हैं. वे बकायदा शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं और तमाम रोजगारों में भी हैं. निकोबारी बालकों के साथ पापा श्री कृष्ण कुमार यादव जी.दितीय विश्व-युद्ध के दौरान अंडमान-निकोबार पर जापानियों का कब्ज़ा रहा. उन्होंने शत्रु-राष्ट्रों से मुकाबले के लिए अंडमान-निकोबार की अवस्थिति के चलते इसे एक महत्वपूर्ण सामरिक क्षेत्र के रूप में इस्तेमाल किया. यहाँ पर अभी भी कई बंकर और तोपों के अवशेष देखे जा सकते हैं. ऐसी ही एक तोप के समक्ष खड़े पापा श्री कृष्ण कुमार यादव जी.1942-45 के दौरान दितीय विश्व युद्ध के समय जापानियों का अंडमान-निकोबार पर कब्ज़ा रहा. इस दौरान उन्हें सबसे ज्यादा भय अंग्रेजी बोलने वालों और शिक्षित लोगों से था. ऐसे लोगों को वे अंग्रेजों का मुखबिर समझते थे. ऐसे तमाम लोगों को जापानियों ने न्रीशन्षता -पूर्वक मौत के घाट उतार दिया. सेंट थामस न्यू कैथेड्रल चर्च, मूस, कार निकोबार के समक्ष ऐसे लोगों की सूची, जिन्हें जापानियों ने ख़त्म कर दिया.
सेंट थामस न्यू कैथेड्रल चर्च, मूस, कार निकोबार के समक्ष बिशप डा. जान रिचर्डसन (1884- 3 जून 1978) की मूर्ति. बिशप डा. जान रिचर्डसन को निकोबरियों को सभ्य बनाने का श्रेय जाता है. भारत सरकार द्वारा पद्मश्री और पद्म भूषण से सम्मानित बिशप जान रिचर्डसन संसद हेतु अंडमान-निकोबार से प्रथम मनोनीत सांसद भी थे.सेंट थामस न्यू कैथेड्रल चर्च, मूस, कार निकोबार के समक्ष बिशप डा. जान रिचर्डसन (1884- 3 जून 1978) की समाधि.सेंट थामस न्यू कैथेड्रल चर्च, मूस, कार निकोबार में एक निकोबारी बालक और अपने मित्र के साथ पापा श्री कृष्ण कुमार यादव जी.
कार-निकोबार में अवस्थित जान रिचर्डसन स्टेडियम. इसका उद्घाटन 15 अप्रैल, 1994 को तत्कालीन प्रधान मंत्री श्री पी. वी. नरसिम्हा राव जी द्वारा किया गया था. अंडमान-निकोबार लोक निर्माण विभाग के अतिथि-गृह में पापा श्री कृष्ण कुमार यादव जी.अंडमान-निकोबार लोक निर्माण विभाग के अतिथि-गृह के समक्ष पापा श्री कृष्ण कुमार यादव जी.कार-निकोबार में किमूस-नाला के ऊपर बने इस 180 फीट के वैली-ब्रिज का उद्घाटन दिसंबर माह में ही अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के मुख्य सचिव श्री शक्ति सिन्हा द्वारा किया गया है. इस पुल के बन जाने से आवागमन में काफी सुविधा उत्पन्न हो गई है.

...तो कैसी लगी यह निकोबार यात्रा. आप जब भी आइयेगा, निकोबार घूमने जरुर जाइएगा. निकोबार जाने के लिए जिला-उपायुक्त से विशेष पास लेने की जरुरत होती है. वहाँ होटल इत्यदि की सुविधा नगण्य ही मानें. पोर्टब्लेयर से हेलीकाप्टर द्वारा एक घंटे और शिप द्वारा कार-निकोबार पहुँचने में लगभग 15-18 घंटे लगते हैं.