आप सब 'पाखी' को बहुत प्यार करते हैं...

सोमवार, मई 21, 2018

एक शाम चोखी ढाणी, जयपुर में (Chokhi Dhani, The 5 Star Ethnic Village Resort, Jaipur)


इस बार हम पिंक सिटी जयपुर गए तो चोखी ढाणी रिजॉर्ट भी गए। पिछली बार  जब मैं जयपुर आई थी तो यहाँ जाना रह गया था, तभी पापा ने प्रामिस किया था कि समर वेकेशंस में अगली बार हम यहाँ जरूर जायेंगे। जब हम शाम को 7 बजे यहाँ पहुंचे तो हल्की-हल्की बारिश हो रही थी, पर घूमने का आनंद दुगुना हो गया। यहाँ पर हमने खूब इंजोय किया और ढेर सारी पिक्चर्स और सेल्फी भी क्लिक कीं।

राजस्थानी ग्रामीण संस्कृति की विभिन्न झलकियों को अपने में सहेजे यह रिजॉर्ट एक सुखद अनुभव कराता है। यहाँ तो पूरा हाट बाजार बसा हुआ है। मम्मी-पापा ने तो कुल्हड़ में चाय का आनंद लिया तो  मैंने व  अपूर्वा ने आइसक्रीम का।  फिर, पपेट शो, मैजिक शो को खूब इंजोय किया। बाईस्कोप, भूल-भुलैया, साँप-सीढ़ी के खेल के साथ निशानेबाजी के करतब व विभिन्न तरह के झूले का आनंद भी लिया। बोटिंग के साथ-साथ कैमेल व एलिफैंट राइडिंग का लुत्फ़ भी यहाँ लिया जा सकता है। 

राजस्थान का परम्परागत  कालबेलिया डांस और  घूमर डांस भी यहाँ खूब दिखा। इसके बाद तो हम टायर्ड फील करने लगे। हर एक घंटे बाद यहाँ डिनर मिलता है, जिसके लिए एडवांस में ही पास लेना पड़ता है। हम लोग डिनर के लिए गए। रॉयल परिवेश में हमने राजस्थानी थाली का खूब जायका लिया। हल्के संगीत के साथ कैन्डल लाइट डिनर का आनंद ही कुछ और था ।  

डिनर के बाद हमने यहाँ  हल्दीघाटी के युद्ध को देखा, जिसे बहुत सुंदर ढंग से जीवंत किया गया है। फिर, तिरुपति बाला जी व वैष्णो देवी मंदिर भी गए। अंत में कला-ग्राम में हमने राजस्थान के हैंडीक्राफ्ट का भी अवलोकन किया और वहाँ से कुछेक चीजें खरीदीं। 















वाकई घूमने के लिए यह एक शानदार जगह है। आप भी जयपुर जाइए तो चोखी ढाणी (Chokhi Dhani, The 5 Star Ethnic Village Resort, Jaipur) जरूर जाइएगा। 

शनिवार, मई 05, 2018

जोधपुर में सेल्फी प्वाइंट @ I Love Jodhpur

जोधपुर में हम लोगों को रहते हुए तीन साल से भी ज्यादा हो गए हैं।  इस दौरान हम लोगों ने यहाँ खूब इंजॉय किया।  तमाम फोर्ट्स,पैलेसेज़, हवेलीज के साथ-साथ यहाँ के इतिहास और संस्कृति को भी समझने का मौका मिला। जोधपुर वैसे भी टूरिस्ट्स के लिए एक खूबसूरत जगह है। 
हाल ही में जोधपुर, राजस्थान में आने वाले टूरिस्ट्स और यूथ्स को आकर्षित करने हेतु  'शास्त्री सर्किलपार्क' और 'अशोक उद्यान' में सेल्फी प्वाइंट बनाये गए हैं। 'शास्त्री सर्किल' में I Love Jodhpur तो अशोक उद्यान में I Love Sun City लिखा गया है। 
लोगों में इसके साथ अपनी सेल्फी और तस्वीर लेने का क्रेज खूब देखने को मिल रहा है, फिर भला हम कैसे पीछे रहते। मम्मी-पापा और प्यारी सिस्टर अपूर्वा के साथ हमने भी खूब पिक्चर्स लीं।



 आप भी जब जोधपुर घूमने आएं तो इस सेल्फी प्वाइंट पर अपनी पिक्चर जरूर लें। 


Pictures at Selfie Point, Shastri Circle Park, Jodhpur, Rajasthan



मंगलवार, अप्रैल 03, 2018

Akshitaa (Pakhi) for 'Main Hoon Beti Awards - 2018'

नन्ही ब्लॉगर अक्षिता (पाखी) 'Main Hoon Beti Awards - 2018' के लिए नॉमिनेट हुई हैं। अक्षिता भारत की सबसे कम उम्र की "राष्ट्रीय बाल पुरस्कार" विजेता के साथ-साथ नन्ही ब्लॉगर के रूप में भी ख्याति-प्राप्त हैं। कृपया नीचे दिए गए वेब-ब्लॉग लिंक पर जाकर Akshitaa (Pakhi) के समर्थन में लिखकर अपना शुभाशीष और स्नेह दें और इसके लिए अन्य लोगों को भी प्रेरित करें !! 

अक्षिता अब क्लास 6 में : नया क्लास, नई बुक्स, नए दोस्त, नई टीचर्स...



आज का दिन दिन मेरे लिए बहुत खास है। आज मैं नई क्लास में प्रमोट हो गई हूँ । अब मैं क्लास-6 की स्टूडेंट हूँ । मेरी प्यारी सिस्टर अपूर्वा भी अब क्लास 2 में आ गई है। 


स्कूल का पहला दिन कितना महत्वपूर्ण होता है । नई टीचर्स, नए दोस्त और उससे भी बढ़कर नई-नई बुक्स। क्लास 6 में तो स्लेबस भी ज्यादा है, सो ज्यादा पढ़ना भी पड़ेगा। नई क्लास के लिए आप सभी की प्यार भरी विशेज़ भी तो मिलेंगी।

रविवार, अप्रैल 01, 2018

Save the Environment : पेड़-पौधे लगाएं, धरती को कूल बनाएँ

अप्रैल माह की शुरुआत के साथ ही गर्मियाँ भी आरंभ हो गई हैं। अप्रैल की शुरुआत ही "अप्रैल फूल" बनाने के साथ होती है । पर अब जरूरत है कि लोगों को "अप्रैल फूल" बनाने के बजाय एक पेड़ लगाकर इसे "अप्रैल कूल" के रूप में मनाया जाए। हम सबकी यह  एक छोटी सी मुहिम धरती को "कूल" बनाने में मददगार हो सकती है।



Instead of making "April Fool", plant at least one tree and make "April Cool".

This small campaign of your's may help making this earth "Cool".

गुरुवार, नवंबर 30, 2017

अपूर्वा दिखेंगी 'बाल साहित्य की धरती' बाल पत्रिका के कवर पेज पर

हमारी प्यारी सिस्टर अपूर्वा का एक मनमोहक चित्र, उत्तराखंड से प्रकाशित हिंदी बाल पत्रिका 'बाल साहित्य की धरती' (वर्ष 1, अंक 7, नवंबर 2017,  सम्पादक-श्री रावेन्द्र कुमार रवि) के कवर पेज पर लगाया गया है। 
अपूर्वा की यह खूबसूरत तस्वीर माउन्ट आबू में ली गई थी, जिसमें ये स्थानीय ड्रेस में नजर आ रही हैं। आप सभी का स्नेह और प्यार भी अपूर्वा को मिलना चाहिए।  

मंगलवार, नवंबर 14, 2017

बाल दिवस पर विशेष : अक्षिता (पाखी) को सबसे कम उम्र में ”राष्ट्रीय बाल पुरस्कार” पाने का गौरव

बाल दिवस की बात हो तो उन बाल प्रतिभाओं का जिक्र  भी जरूरी हो जाता है, जिन्होंने कम उम्र में ही सफलता के नये कीर्तिमान रचे। भारत सरकार द्वारा हर साल 14 नवम्बर को विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट उपलब्धि हासिल करने वाले बच्चों को ’राष्ट्रीय बाल पुरस्कार’ प्रदान किये जाते हैं। चार वर्ष से पन्द्रह वर्ष की आयु-वर्ग के बच्चे इस पुरस्कार को प्राप्त करने के पात्र हैं। पर इसे सबसे कम उम्र में प्राप्त करने का गौरव जोधपुर में रह रही अक्षिता (पाखी) को प्राप्त है। वर्ष 2011 में मात्र 4 साल 8 माह की आयु में ही अक्षिता को  'कला’ और ’ब्लॉगिंग’ के लिए भारत सरकार  द्वारा बाल दिवस पर  ’राष्ट्रीय बाल पुरस्कार’ से  विज्ञान भवन  में नवाजा गया। अक्षिता ने इसे जहाँ सबसे कम उम्र में पाने का कीर्तिमान बनाया, वहीं ब्लॉगिंग के लिए भी भारत सरकार द्वारा राजकीय स्तर पर प्रथम सम्मान-पुरस्कार पाने का गौरव प्राप्त किया। यही नहीं, इससे पूर्व अक्षिता को नई दिल्ली में अप्रैल, 2011 में हुए अंतर्राष्ट्रीय ब्लॉगर सम्मेलन में उत्तराखंड के तत्कालीन मुख्यमंत्री डा. रमेश पोखरियाल ”निशंक” द्वारा ‘श्रेष्ठ नन्ही ब्लॉगर‘ के सम्मान से भी नवाजा जा चुका है।


 हैपी आवर्स  स्कूल, जोधपुर  में कक्षा 5  की छात्रा अक्षिता बड़ी होकर आई.ए.एस ऑफिसर बनने की तमन्ना रखती है।  उसके  पिता श्री कृष्ण कुमार यादव राजस्थान पश्चिमी क्षेत्र, जोधपुर के निदेशक डाक सेवाएं पद पर पदस्थ हैं व मम्मी श्रीमती आकांक्षा एक कालेज में प्रवक्ता रही हैं। दोनों ही जन चर्चित साहित्यकार व सक्रिय ब्लॉगरभी हैं।

 अक्षिता के पिता श्री कृष्ण कुमार यादव बताते हैं कि, अक्षिता को शुरू से ही ड्राइंग बनाना बहुत अच्छा लगता है। उसके बनाए चित्रों को सहेजने और अक्षिता की गतिविधियों को ब्लॉग के माध्यम से  लोगों के सामने प्रस्तुत करने के  विचारस्वरुप  24 जून 2009 को  “पाखी की दुनिया” (http://pakhi-akshita.blogspot.in/ ) नाम से अक्षिता का ब्लॉग अस्तित्व में आया। देखते ही देखते करीब एक लाख से अधिक हिन्दी ब्लॉगों में इस ब्लॉग की रेटिंग बढ़ती गई और आज इस ब्लॉग पर 460  से भी ज्यादा पोस्ट प्रकाशित हो चुकी हैं और 260  से ज्यादा लोग इसका अनुसरण करते हैं। इस ब्लॉग पर अकल्पनीय प्रतिक्रियाएं  प्राप्त हुईं और 100 से ज्यादा देशों में इसे देखा-पढ़ा जाता है। अक्षिता और उसका ब्लॉग ‘पाखी की दुनिया‘ फेसबुक (https://www.facebook.com/AkshitaaSingh/ ) पर भी उपलब्ध है, जहाँ 1883  लोग इसे पसंद करते हैं।

अक्षिता को देश-दुनिया में तमाम सम्मान भी प्राप्त हुए हैं। अंतर्राष्ट्रीय ब्लॉगर सम्मेलन, श्री लंका (25 मई 2015) में उसे ”परिकल्पना कनिष्ठ सार्क ब्लॉगर सम्मान” से सम्मानित किया जा चुका है। विभिन्न मंचों पर महिला एवं बाल विकास मंत्री, भारत सरकार, श्रीमती कृष्णा तीरथ, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री डा. रमेश पोखरियाल ”निशंक”, केंद्रीय हिंदी संस्थान के उपाध्यक्ष डा. अशोक चक्रधर, फिल्म अभिनेत्री शबाना आजमी, सांसद डिम्पल यादव और दबंग फेम म्यूजिक-कम्पोजर वाजिद खान भी इस नन्ही ब्लॉगर को सम्मानित कर चुके हैं।  

 21वीं सदी टेक्नालाजी की है। आज बच्चा कलम बाद में पकड़ता है, मोबाइल, टेलीवीजिन कम्प्यूटर व लैपटॉप पर हाथ पहले से ही फिराने लगता है। ऐसे में नन्ही प्रतिभा अक्षिता (पाखी) को देखकर यही कहा जा सकता है कि प्रतिभा उम्र की मोहताज नहीं, बशर्तें उसे अनुकूल वातावरण व परिवेश मिले। अक्षिता (पाखी) को श्रेष्ठ नन्ही ब्लॉगर और सबसे कम उम्र में राष्ट्रीय बाल पुरस्कार मिलना यह दर्शाता है कि बच्चों में आरंभ से ही सृजनात्मक-शक्ति निहित होती है। उसे इग्नोर करना या बड़ों से तुलना करने की बजाय यदि उसे बाल-मन के धरातल पर देखा जाय तो उसे पल्लवित-पुष्पित किया जा सकता है।









अक्षिता को सबसे कम उम्र में ”राष्ट्रीय बाल पुरस्कार” पाने का गौरव,
डाक निदेशक कृष्ण कुमार यादव व आकांक्षा यादव की पुत्री अक्षिता ने नन्ही ब्लॉगर के रूप में प्राप्त की ख्याति

सोमवार, नवंबर 13, 2017

Mehrangarh Fort in Jodhpur : जोधपुर में मेहरानगढ़ का किला

जोधपुर में मेहरानगढ़ का किला बहुत प्रसिद्ध है।  यहाँ न सिर्फ देश-विदेश से ढेर सारे टूरिस्ट्स आते हैं, बल्कि तमाम फिल्मों की शूटिंग भी यहाँ होती है। 


 ठण्ड के दिनों में यहाँ घूमने का आनद ही कुछ और है।


 यहाँ पर स्थित तोपें उस दौर की याद दिलाती हैं।  


यहाँ के म्युज़ियम में ढेर सारी खूबसूरत चीजें हैं।   

'सन सिटी' और 'ब्लू सिटी' के नाम से मशहूर जोधपुर नगर को राजस्थान के बीचोंबीच होने से राजस्थान का दिल भी कहते हैं। 12 मई 1459 को राव जोधा ने मेहरानगढ़ दुर्ग की नींव रखी। इसके साथ ही जोधपुर बसना शुरू हुआ। 

हम भी पूरी फेमिली के साथ मेहरानगढ़ घूमने गए।  वाकई बड़ा आनंद आया। 

कहते हैं कि मेहरानगढ़  कुतुब मीनार की ऊंचाई से भी ऊंचा है। जब भी जोधपुर आईये, तो मेहरानगढ़ देखना न भूलियेगा !!