आप सब 'पाखी' को बहुत प्यार करते हैं...

गुरुवार, मार्च 25, 2010

बुधवार, मार्च 24, 2010

पोर्टब्लेयर के तीन खूबसूरत म्यूजियम की सैर

इस संडे को मैंने पोर्टब्लेयर (Portblair) में तीन खूबसूरत म्यूजियम देखे, तीनों एक से बढ़कर एक-एन्थ्रोपोलाजिकल म्यूजियम (Anthropological Museum), फिशरीज म्यूजियम (Fishries) और समुद्रिका नेवेल मरीन म्यूजियम (Naval Marine Museum). कहते हैं कि किसी जगह को समझना हो तो म्यूजियम से अच्छा कुछ नहीं हो सकता. एन्थ्रोपोलाजिकल म्यूजियम में मैंने देखा कि हमारे पूर्वज कैसे होते थे.
उनके बर्तन, हथियार इत्यादि भी मैंने देखे. अंडमान-निकोबार की जनजातियों के सम्बन्ध में भी यहाँ पर तमाम मजेदार जानकारियाँ मिलीं.सेंटीनली जनजाति का झोपड़ा भी देखा. आपको पता है सेंटीनली (sentineli) जनजाति से अभी भी लोग सम्बन्ध कायम नहीं कर पाते हैं, वे तीर-धनुष से हमला कर देते हैं।

एन्थ्रोपोलाजिकल म्यूजियम के बाद हम लोग फिशरीज म्यूजियम गए. यहाँ अन्दर फोटोग्राफी की अनुमति नहीं है. यहाँ पर ढेर सारी मछलियाँ हैं. इसके अलावा डोल्फिन (Dolphin), शार्क (Shark), व्हेल (Whale) सहित अंडमान के राज्य-जीव समुद्री गाय (Dugong creek) के कंकाल भी यहाँ देखे जा सकते हैं. व्हेल का कंकाल तो इतना विशालकाय था कि मैं दंग रह गई. फिर हम समुद्रिका (नेवेल मरीन म्यूजियम) गए, यह हमारे घर के बगल में ही है.
समुद्रिका (नेवेल मरीन म्यूजियम) में प्रवेश करते ही वहां सबसे पहले व्हेल का विशालकाय कंकाल (Skeleton) दिखा. व्हेल का कंकाल तो इतना विशालकाय था कि मैं दंग रह गई.

खूबसूरत मछलियाँ और प्रवाल (Corals) तो और भी खूबसूरत लगते हैं.ये देखिये कछुए (Turtle) की मोटी खाल. अंडमान में चार तरह के कछुए मिलते हैं, इन्हीं में से ओलिवे-रिडले (Olive Ridley)भी हैं.खूबसूरत सीपियाँ और शंख तो बड़े मनभावन लगे.अंडमान-निकोबार (Andaman & Nicobar Islands) के आदिवासियों का एक चित्र यहाँ भी.भारत के एकमात्र जागृत ज्वालामुखी 'बैरन ज्वालामुखी' (Barren Volcano) का चित्र भी यहाँ दिखा। सुनामी (Tsunami) के दौरान यह पुन : जागृत हुआ था, फ़िलहाल 2006 से शांत है।
...तो मजेदार रहा न मेरा यह म्यूजियम-टूर और आप लोगों को भी मैंने बैठे-बैठे यहाँ की सैर करा दी। आप लोग भी यहाँ आइयेगा तो ये म्यूजियम जरुर घूमने जाइएगा और हाँ, पाखी को नहीं भूलियेगा !!















































































शनिवार, मार्च 20, 2010

मेरी नन्हीं गौरैया

मुझे गौरैया बहुत अच्छी लगती है। उसकी चूं-चूं मुझे खूब भाती है. कानपुर में थी तो हमारे लान में गौरैया आती थीं. उन्हें मैं ढेर सारे दाने खिलाती थी. दाने खाकर वे खुश हो जातीं और फुर्र से उड़ जातीं. हमारे लान में एक पुराना सा बरगद का पेड़ था, उस पर गौरैया व तोते खूब उधम मचाते. वहीँ एक बिल्ली भी थी, वह हमेशा उन्हें खाने की फ़िराक में रहती. उस बिल्ली को देखते ही मैं डंडे से मारने दौड़ती.


अब यहाँ अंडमान में आ गई हूँ तो उनकी याद आती है. मन करता है कि वे भी उड़ कर यहाँ आ जातीं तो कितना मजा आता. यहाँ हमारे घर के पीछे अंडमान टील हॉउस है. इन दोनों के बीच में खाई है, जहाँ ढेर सारे पेड़-पौधे हैं. रोज शाम को वहां चिड़ियों को देखती हूँ, पर कानपुर वाली गौरैया की अभी भी याद आती है। पता नहीं अब उसे कोई दाना खिलाता भी होगा या नहीं. पापा ने बताया आज 'विश्व गौरैया दिवस' है, तो मुझे अपनी गौरैया की और भी याद आई. मम्मी के साथ मिलकर एक प्यारा सा गीत बनाया. आप भी पढ़ें और अपनी राय दें-

उड़कर आई नन्हीं गौरैया
लान में हमारे।
चूं-चूं करते उसके बच्चे
लगते कितने प्यारे।

गौरैया रोज तिनका लाती
प्यारा सा घोंसला बनाती।
चूं-चूं करते उसके बच्चे
चोंच से खाना खिलाती।

सोमवार, मार्च 15, 2010

शुक्रवार, मार्च 12, 2010

आपका बचा खाना किसी बच्चे की जिंदगी है !!

यह सन्देश किसी ने मेरे मेल पर भेजा था। बड़ा अच्छा सन्देश मिला, सो आप सब भी इस पर गौर करें, आखिरकार बच्चे किसे अच्छे नहीं लगते. बच्चे मन के सच्चे...उन्हें सच्चाई की ओर बढ़ने में आप भी मदद करें क्योंकि पेट की भूख कई बार बच्चों को गलत रास्ते पर ले जाती है. कई बार ब्लॉग के माध्यम से हम दूसरों का भी हित कर सकते हैं, उन्हें कम से कम एक समय की रोटी दे सकते हैं और कभी-कभी जिंदगी भी !!

अगर आगे से कभी आपके घर में पार्टी/समारोह हो और खाना बच जाये या बेकार जा रहा हो तो बिना झिझके आप 1098 (केवल भारत में) पर फ़ोन करें। यह एक मजाक नहीं है। यह चाइल्ड हेल्पलाइन है. वे आयेंगे और भोजन एकत्रित करके ले जायेंगे।
***मदद करने वाले हाथ प्रार्थना करने वाले होंठो से अच्छे होते हैं***
!! कृप्या इस सन्देश को ज्यादा से ज्यादा प्रसारित करें इससे उन बच्चों का पेट भर सकता है !!

बुधवार, मार्च 03, 2010

गुब्बारे और खिलौने सस्ते...हुर्रे.


इस बार बजट में वित्त-मंत्री जी ने गुब्बारे व खिलौने सस्ते कर दिए हैं, सो मेरी तो बल्ले-बल्ले है. ढेर सारे गुब्बारे उड़ाउंगी और प्यारे-प्यारे खिलौने खरीदूंगी. आप भी मेरे साथ खेलना न भूलना !!

सोमवार, मार्च 01, 2010

टेंशन की बात : शेर, बाघ सब गायब


अपने देश में तेजी से बहुत सारे जीव-जंतुओं की संख्या कम होती जा रही है. पता नहीं जब तक हम बड़े होंगें ये देखने को मिलें या नहीं. लगता है कि हम उन्हें सिर्फ पुस्तकों में पढ़ेंगें तथा खिलौने के रूप में खेलेंगें. 2008 में हुई गणना के अनुसार देश में 359 शेर, 1411 बाघ, 2,358 गैंडे और 27,694 हाथी हैं. इसके बाद तो आज 2010 तक इनकी संख्या और भी कम हो गई होगी. इस साल अब तक 05 बाघों की मौत हो चुकी है. हम बच्चों के लिए यह बड़ी चिंता का विषय है कि यदि इसी तरह ये ख़त्म होते रहे तो हम इन्हें कैसे देख पायेंगें. डायनासोर जैसे जानवरों का उदाहरण हमारे सामने है. फ़िलहाल मैं तो अपने टाइगर के साथ खेलकर खुश हूँ, पर यह सब देखकर मेरे साथ मेरा टाइगर भी दुखी हो जाता है...!!

रविवार, फ़रवरी 28, 2010

मजेदार है होली का रंग-बिरंगा त्यौहार

पिछले साल मैंने होली कानपुर में खेली, इस बार अंडमान में खेलूँगी. पहले मैं सोचती थी कि यहाँ पर पिचकारी, रंग, गुलाल नहीं मिलेगा पर ऐसा नहीं है. मैंने तो इस बार दो पिचकारी खरीदी है. उसमें ढेर सारे रंग भरकर सुबह-सुबह मम्मी-पापा को रंगना है. और हाँ होली की गुझिया भी मिलेगी. कितना मजेदार है न होली का यह रंग-बिरंगा त्यौहार. आप सब मुझे होली पर ढेर सारा प्यार दीजिये !!

शनिवार, फ़रवरी 27, 2010

ये देखो मेरी गुड़िया

***ये देखो मेरी गुड़िया, कैसी लगी आपको. जरुर बताना. इसको भी इक गीत सुनाना***

शुक्रवार, फ़रवरी 19, 2010

पाखी उड़ी हेलीकाप्टर पर

अंडमान में हेवलाक दीप सबसे लम्बा और सबसे खूबसूरत है. 11 फरवरी को मैं मम्मी-पापा के साथ वहाँ घूमने गई. वहाँ जाने के लिए हेलीकाप्टर व शिप ही साधन हैं. मैंने पापा से कहा कि हम हेलीकाप्टर से जायेंगें और पापा ने हम लोगों को हेलीकाप्टर से सैर कराई.
पाखी पहुँची हेलीपैड पर

ये चले हम लोग हेलीकाप्टर में बैठने

और उड़ा हमारा हेलीकाप्टर
हेलीकाप्टर से नीचे का दृश्य
और हम लोग पहुँच गए हेवलाक









सोमवार, फ़रवरी 15, 2010

वंडूर बीच पर पाखी की मस्ती

आजकल मम्मी-पापा के साथ अंडमान-निकोबार में हूँ. अभी पापा की यहाँ पोस्टिंग हुई है, सो मेरी मस्ती है. खूबसूरत बीच पर जाना और धमाल करने का तो कब से इंतजार था, अब इसे खूब इंजॉय कर रही हूँ. पिछले दिनों पोर्टब्लेयर स्थित वंडूर बीच पर गई और जमकर मस्ती की.











































सोमवार, फ़रवरी 08, 2010

सेलुलर जेल की सैर पाखी के साथ




मैं मम्मी-पापा के साथ सेलुलर जेल, पोर्टब्लेयर घूमने गई. वहां से कुछ चित्र आपके लिए भी लाई हूँ...और हाँ यदि ज्यादा चित्र देखने हों तो मेरी मम्मी के ब्लॉग शब्द-शिखर पर देख पायेंगें !!





















सोमवार, फ़रवरी 01, 2010

बच्चे होते फूल समान

**मुझे फूल बहुत अच्छे लगते हैं. लोग कहते हैं कि हम बच्चे भी फूल के समान हैं, फिर तो हम बच्चे भी लोगों को बहुत अच्छे लगते होंगें**



गुरुवार, जनवरी 21, 2010

साइंस सिटी कोलकात्ता में मस्ती

पिछले दिनों मम्मी-पापा के साथ पोर्टब्लेयर जाते समय कोलकात्ता में एक दिन के लिए रुकी. वहाँ मैंने साइंस सिटी जाकर खूब मस्ती की।
रोड-ट्रेन का मजा लिया, इवाल्यूशन पार्क में रोबो जानवर देखे। कितना डरावना लग रहा था डायनासोर उस अँधेरे में और तरह-तरह की आवाजें। और भी कई तरह के जानवर दिखे वहाँ. कोरल रीफ पर मैंने खूबसूरत शो भी देखा. कई नई जानकारियां मिलीं। मिरर-मैजिक तो बड़ा मजेदार रहा. अपने को कई रूप में देखना कितना दिलचस्प लगा।
मैंने वहाँ रोप-वे (केबल-कार) का भी आनंद लिया और जब थक गई तो बढ़िया आइसक्रीम भी खाई.





शनिवार, जनवरी 16, 2010

रानी लक्ष्मीबाई के झाँसी किले में

पिछले दिनों मम्मी-पापा के साथ झाँसी गई थी. वहाँ मैंने रानी लक्ष्मीबाई का किला भी देखा. यह जगह मुझे बहुत सुन्दर लगी. आजकल रानी लक्ष्मीबाई (मनु) पर सीरियल भी देख रही हूँ, सो इससे और भी अच्छा लगा.

(ये रही कड़क बिजली तोप पर मेरी सवारी )
(यहीं से बहादुर रानी लक्ष्मीबाई ने अपने पुत्र के साथ किले से अपने घोड़े पर बैठकर छलांग लगाई थी)
(इस शिव-मंदिर में रानी लक्ष्मीबाई रोज पूजा करती थीं)

शुक्रवार, जनवरी 01, 2010

नए साल के टिप्स

!! सोच रही हूँ कि नए साल पर इनमें से कुछ करने का प्रयास करूँ !!