आप सब 'पाखी' को बहुत प्यार करते हैं...

सोमवार, सितंबर 16, 2013

बनारस से काठमांडू की यात्रा

हमने पिछली पोस्ट में अपने काठमांडू जाने की चर्चा की थी। हम 12 सितम्बर को बनारस से काठमांडू निकले। सच कहिये तो यह मेरी पहली विदेश यात्रा हो गई, वैसे लुम्बिनी तक तो हम पहले ही हो आए हैं। एक लम्बे समय बाद एरोप्लेन से यात्रा और काठमांडू के मौसम ने अंडमान की याद दिला दी। तो चलिए, कुछ यादगार पिक्चर आपसे शेयर करते हैं।



लाल बहादुर शास्त्री एयरपोर्ट, बाबतपुर, वाराणसी के वीआईपी लाउंज में ममा और अपूर्वा के साथ।


लाल बहादुर शास्त्री एयरपोर्ट, बाबतपुर, वाराणसी के वीआईपी लाउंज में एयरपोर्ट मैगज़ीन पढने में तल्लीन पापा


बोर्डिंग से पहले लाल बहादुर शास्त्री एयरपोर्ट, बाबतपुर, वाराणसी पर अक्षिता (पाखी).


बोर्डिंग से पहले लाल बहादुर शास्त्री एयरपोर्ट, बाबतपुर, वाराणसी पर पापा।


तो अब यात्रा आरंभ हो गई ...वाराणसी से काठमांडू जाने के लिए तैयार : एयर इण्डिया के विमान में अपूर्वा और अक्षिता (पाखी)


एरोप्लेन से कुछ यूँ दिखा  बाबतपुर का दृश्य।


बादलों के बीच अद्भुत दृश्य।


अब नीचे काठमांडू दिखने लगा है ...खूबसूरत शहर।


वाह, कितनी सुन्दर घाटियाँ (Vallies). इन घाटियों के बीच ही बसी  है नेपाल की राजधानी काठमांडू।


अब तो एरोप्लेन विंडो से काठमांडू पूरा साफ दिखने लगा है। ढेर सारे मकान, गाड़ियाँ और लोग। 


यह लीजिये, हम पहुँच गए नेपाल के काठमांडू स्थित त्रिभुवन इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर।



बाय-बाय एंड थैंक्स एयर इण्डिया।




विमान से उतरकर अब चले हम एयरपोर्ट से बाहर।


...और लीजिये हम पहुँच गए काठमांडू स्थित अपने होटल में।

अब तो हम थक भी गए हैं। कल 13 सितम्बर को हमें 'अंतर्राष्ट्रीय ब्लोगर सम्मलेन' भी तो अटेंड करना है। कल आपको उसकी भी पिक्चर्स दिखायेंगे ...तब तक के लिए गुड-नाईट एंड बाय !!

मंगलवार, सितंबर 10, 2013

काठमांडू में ब्लागर्स सम्मान : आप आ रहे हैं

आप काठमांडू चल रहे हैं ? फ़िलहाल मैंने तो अपना ट्रिप बना लिया है। अंतर्राष्ट्रीय ब्लॉगर सम्मेलन (13-14 सितम्बर, 2013 ) में ममा-पापा का सम्मान और हमारी आउटिंग। एक लम्बा समय हो गया प्लेन की यात्रा किए हुए, इस बार एरोप्लेन का आनंद भी उठाते हैं । जब अंडमान में थे तो एरोप्लेन, सी-प्लेन, हेलीकाप्टर, शिप रोजमर्रा की बातें लगते थे, पर यहाँ तो रोड-जर्नी ही ज्यादा होती है।

पिछले दिनों लुम्बिनी गई थी तो मन में यह आया था कि काठमांडू भी जाएंगे और लीजिये हमारी इच्छा पूरी हो गई। पर दुःख इस बात का है की इसके चलते हमें अपने एक्जाम्स के दो पेपर ड्राप करने होंगें। पर कोई बात नहीं, अन्य पेपर में उसको रिकवर कर लेंगे।

ममा-पापा को 'परिकल्पना ब्लॉग विभूषण' और 'परिकल्पना साहित्य सम्मान'  मिलने की ख़बर कई अख़बारों में भी प्रकाशित हुई  हैं, आप भी देख-पढ़ सकते हैं। 
   













 http://epaper.jagran.com/ePaperArticle/24-aug-2013-edition-Allahabad-City-page_6-11494-6280-79.html









सोमवार, सितंबर 09, 2013

नन्ही गौरैया


नन्ही गौरैया 
उड़कर आई नन्ही गौरैया
लान में हमारे। 
चूं-चूं करते उसके बच्चे 
लगते कितने प्यारे।

गौरैया रोज तिनका लाती
प्यारा सा घोंसला बनाती।
चूं-चूं करते उसके बच्चे
चोंच से खाना खिलाती।

रविवार, सितंबर 08, 2013

यह सन्डे हफ्ते में सिर्फ एक बार ही क्यों आता है ??

सन्डे का दिन सबसे बढ़िया होता है। फुल-डे मस्ती। पढाई का कोई टेंशन नहीं। 


इस दिन पापा का भी हालिडे होता है, सो खूब घूमना-फिरना। पी वी आर मॉल में शापिंग और मूवी। 


इधर तो हमने कई मूवी देखी। लास्ट वीक 'सत्याग्रह' देखी तो इस बार ''शुद्ध देसी रोमांस". 



कई बार लगता है कि यह सन्डे हफ्ते में सिर्फ एक बार ही क्यों आता है ??

(यह सारी क्लिक हमारे पापा ने की है)

बुधवार, अगस्त 28, 2013

'माखन चोर' आज आयेंगे ...



आज का दिन हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण है। आज कृष्ण जन्माष्टमी है। आज ही तो देर रात माखन चोर श्री कृष्ण का जन्म हुआ था. कृष्ण जी की बाल- लीलाएं तो मुझे बहुत अच्छी लगती हैं। वे भी तो हम बच्चों जैसे ही खूब शरारतें करते थे और फिर उनकी मैया यशोदा कित्ता डांटती थी। लेकिन कृष्ण जी भी कम नहीं थे, अंतत: मैया को अपनी तरफ कर ही लेते थे और फिर गोपियाँ देखती ही रह जाती थीं। 

और हाँ, कृष्ण जन्माष्टमी तो मेरे लिए इसलिए भी और महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि जन्माष्टमी के दिन ही मेरे पापा और नानी जी का भी जन्म हुआ था. पर सबसे अच्छी बात तो यह है कि आज 28 अगस्त को नानी का जन्मदिन और जन्माष्टमी दोनों साथ पड़ रही है...है न डबल ख़ुशी वाली बात। तो चलिए आप भी हमारी इस ख़ुशी में शरीक होइए !!

नानी जी  को जन्मदिन पर ढेर सारी बधाई और प्यार।

इस कृष्ण-जन्माष्टमी पर आप लोग भी मुझे ढेर सारा आशीर्वाद और प्यार दीजियेगा !!

बुधवार, अगस्त 21, 2013

अक्षिता - अपूर्वा का रक्षाबंधन



आज रक्षाबन्धन है। 


 हमने भी अपनी सिस्टर अपूर्वा के साथ इसे सेलिब्रेट किया।


हमने एक-दूसरे को प्यारी-प्यारी राखी बांधी और गिफ्ट भी मिला।



आप सभी को रक्षाबन्धन पर्व पर बधाइयाँ और आपका प्यार व स्नेह तो मिलेगा ही !!


बुधवार, अगस्त 14, 2013

अक्षिता और अपूर्वा का 'स्वतंत्रता दिवस' सेलिब्रेशन


कल स्वतंत्रता दिवस है। इसी दिन देश को आजादी मिली थी। सोचिये कितना अच्छा दिन है यह।  हमारे स्कूल में इसे बड़ी धूम-धाम के साथ सेलिब्रेट किया जाता है। मुझे लगता है  कि मैं भी जल्दी से बड़ी हो जाऊँ और अपने स्कूल में जाकर झंडारोहण देखूं। अभी तो क्लास सेकेण्ड से ऊपर वालों को ही बुलाया जाता है।


इस बार तो अपूर्वा भी इंडिपेंडेंस-डे  सेलिब्रेट करेगी। अभी तो ये प्ले-ग्रुप में हैं। अब तो अपूर्वा राष्ट्र-गान भी गा लेती है।


हमारे यहाँ कैम्पस में भी झंडारोहण होता है. आखिर हमारा घर भी तो पापा के आफिस-कैम्पस में ही है। चारों तरफ तिरंगे झंडे देखकर बड़ा अच्छा लगता है।तिरंगे को सैलूट करना मुझे भाता है। वैसे लोगों को प्रभात फेरी और मार्च-पास्ट करते हुए देखकर मेरा भी मन उसमें शामिल होने को करता है। मैं भी बड़ी हो जाउंगी तो मार्च-पास्ट में भाग लूंगी और सबसे आगे तिरंगा झंडा लेकर चलूंगी।

!! आप सभी लोगों को भी स्वतंत्रता दिवस की बधाइयाँ...जय हिंद !!

शनिवार, अगस्त 10, 2013

तुम जियो हजारों साल ...

दस दिनों के अंतराल में दो हैप्पी बर्थ-डे।  30 जुलाई को ममा का और 10 अगस्त को पापा का जन्म-दिन। वाह, यह तो हमारे लिए सबसे सुन्दर दिन होते हैं और मस्ती भरे भी। पापा को जन्मदिन पर ढेर सारी  शुभकामनाएं और प्यार !!












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मंगलवार, जुलाई 30, 2013

दस दिनों के अंतराल में दो हैप्पी बर्थ-डे..










जुलाई और अगस्त के महीने हमारे लिए बेसब्री से इंतजार के होते हैं। दस दिनों के अंतराल में दो हैप्पी बर्थ-डे।  30 जुलाई को ममा का और 10 अगस्त को पापा का जन्म-दिन। वाह, यह तो हमारे लिए सबसे सुन्दर दिन होते हैं और मस्ती भरे भी। 


आज तो ममा का हैप्पी-बर्थ डे है। ममा को जन्मदिन पर ढेर सारी बधाइयाँ और प्यार। Many-Many happy returns of the day Mom. U r the best Mom.

पापा को जन्मदिन पर पहले से ही  ढेर सारी शुभकामनाएं और प्यार !!

सोमवार, जुलाई 29, 2013

'गगन स्वर' में अक्षिता (पाखी) की रचनाएँ


गाजियाबाद से प्रकाशित 'गगन स्वर' पत्रिका के जून-जुलाई 2013  अंक में मेरी दो बाल-रचनाएँ पढ़ सकते हैं। ये दोनों रचनाएँ इससे पूर्व ताऊ जी डाट काम और परिकल्पना ब्लागोत्सव में प्रकाशित हैं !!


मिल्क पाउडर ही पी जाएँ

दूध पीना मुझे भाता
पर बड़ी परेशान हूँ
किससे मैं शिकायत करूँ
होती बड़ी हैरान हूँ . 

दूध वाला ना अच्छा दूध दे
बस पानी की भरमार है 
जब उससे करूँ शिकायत 
रोये, महँगाई की मार है. 

दूध में पानी या पानी में दूध
कुछ भी समझ ना आये
इससे अच्छा तो अब
मिल्क पाउडर ही पी जाएँ.


 नन्ही गौरैया  

उड़कर आई नन्ही गौरैया 
लान में हमारे। 
चूं-चूं करते उसके बच्चे 
लगते कितने प्यारे। 

गौरैया रोज तिनका लाती 
प्यारा सा घोंसला बनाती। 
चूं-चूं करते उसके बच्चे 
चोंच से खाना खिलाती। 


गुरुवार, जुलाई 25, 2013

'चाकलेट' जैसी स्वीट क्यों नहीं होती है 'ग्रीन चिली'

आजकल अपूर्वा के स्कूल में फल और सब्जियों को पहचानना (Know the Fruits and Vegetables) सिखाया जा रहा है।अपूर्वा जब भी घर के लॉन में जाती हैं तो सब्जियों के पौधों को देखती हैं और फिर उन्हें पहचानकर बेहद खुश होती हैं। 



ये है ग्रीन कलर की लेडी-फिंगर। मुझे और दीदी को यह वेजिटेबल खाना बहुत अच्छा लगता है।




यह है गोलू-मोलू सा ब्रिंजल। इसे देखकर लगता है जैसे जोकर ने अपनी कैप इसके ऊपर लगा दी है। ममा-पापा को इसका भर्ता खाना बहुत अच्छा लगता है।


ग्रीन चिली ....इसे देखते ही मैं भाग जाती हूँ। मैं सोचती हूँ कि यह इत्ती तीखी क्यों होती है, चाकलेट जैसी स्वीट क्यों नहीं ? पर मेरी मौसी को यह बहुत पसंद है।

!! आज के लिए इत्ता ही काफी है। अब स्कूल जाकर मिस को बताउंगी  !!

मंगलवार, जुलाई 23, 2013

अपूर्वा का फूल का पौधा

पिछले दिनों अपूर्वा  के स्कूल में वन महोत्सव मनाया गया। अपूर्वा इसे लेकर काफी उत्साहित थीं। अपूर्वा को उस दिन स्कूल एक फ्लावर-प्लांट लेकर जाना था।  अपूर्वा खुद हम  लोगों  के साथ  नर्सरी जाकर एक प्यारा सा  फूल का पौधा लाई और उसे लेकर खुश होती रहीं।


अपूर्वा का अपने स्कूल  में यह पहला सोशल-फंक्शन था, सो ये उस दिन खूब मन से स्कूल गईं। पर स्कूल  से लौटते समय दुखी भी हो गईं कि अब उनका फूल का पौधा स्कूल में ही रह जाएगा, इनके साथ नहीं रहेगा।


यह रहा अपूर्वा के स्कूल में लगा पोस्टर, जो पेड़-पौधों और वन के संरक्षण के बारे में बताता है !!

सोमवार, जुलाई 08, 2013

हालिडेज़ ख़त्म, बारिश में स्कूल शुरू


गर्मी की छुट्टियों के बाद स्कूल फिर से शुरू हो गए। गर्मी की छुट्टियाँ कैसे बीत गईं, पता  भी नहीं चला चला। इस बार  तो रेनी-सीजन    भी  जल्द आ गया। थोड़ी-मोड़ी बारिश  तो अच्छी  लगती , है  पर ज्यादा बारिश  तो पूरा मजा ही  कर देती  है। जहाँ देखिये गड्ढों में   पानी भरे नजर आते हैं, पूरा ड्रेनेज जाम  हो जाता है और फिर चरों तरफ गन्दगी और रोग। ऐसे में बारिश के मौसम में स्कूल जाना सारा मजा किरकिरा देता है। 

...पर  अपने स्कूल दोस्तों से मिलने और नई  क्लास टीचर से मिलना, नई-नई बुक्स और ढेर सारी नई  बातें ...ये सब बातें स्कूल में कितनी अच्छी  लगती हैं। मेरा स्कूल  तो फ्राईडे, 5 जुलाई को  ही  खुल गया और अपूर्वा  का  आज 8 जुलाई को। मैं क्लास-I में तो अपूर्वा  अभी प्ले ग्रुप में। फोरनून में स्कूल में मस्ती और आफ्टरनून में घर में मस्ती !!