आप सब 'पाखी' को बहुत प्यार करते हैं...
बुधवार, अगस्त 21, 2013
बुधवार, अगस्त 14, 2013
अक्षिता और अपूर्वा का 'स्वतंत्रता दिवस' सेलिब्रेशन
कल स्वतंत्रता दिवस है। इसी दिन देश को आजादी मिली थी। सोचिये कितना अच्छा दिन है यह। हमारे स्कूल में इसे बड़ी धूम-धाम के साथ सेलिब्रेट किया जाता है। मुझे लगता है कि मैं भी जल्दी से बड़ी हो जाऊँ और अपने स्कूल में जाकर झंडारोहण देखूं। अभी तो क्लास सेकेण्ड से ऊपर वालों को ही बुलाया जाता है।
इस बार तो अपूर्वा भी इंडिपेंडेंस-डे सेलिब्रेट करेगी। अभी तो ये प्ले-ग्रुप में हैं। अब तो अपूर्वा राष्ट्र-गान भी गा लेती है।
हमारे यहाँ कैम्पस में भी झंडारोहण होता है. आखिर हमारा घर भी तो पापा के आफिस-कैम्पस में ही है। चारों तरफ तिरंगे झंडे देखकर बड़ा अच्छा लगता है।तिरंगे को सैलूट करना मुझे भाता है। वैसे लोगों को प्रभात फेरी और मार्च-पास्ट करते हुए देखकर मेरा भी मन उसमें शामिल होने को करता है। मैं भी बड़ी हो जाउंगी तो मार्च-पास्ट में भाग लूंगी और सबसे आगे तिरंगा झंडा लेकर चलूंगी।
!! आप सभी लोगों को भी स्वतंत्रता दिवस की बधाइयाँ...जय हिंद !!
शनिवार, अगस्त 10, 2013
तुम जियो हजारों साल ...
दस दिनों के अंतराल में दो हैप्पी बर्थ-डे। 30 जुलाई को ममा का और 10 अगस्त को पापा का जन्म-दिन। वाह, यह तो हमारे लिए सबसे सुन्दर दिन होते हैं और मस्ती भरे भी। पापा को जन्मदिन पर ढेर सारी शुभकामनाएं और प्यार !!
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मंगलवार, जुलाई 30, 2013
दस दिनों के अंतराल में दो हैप्पी बर्थ-डे..
जुलाई और अगस्त के महीने हमारे लिए बेसब्री से इंतजार के होते हैं। दस दिनों के अंतराल में दो हैप्पी बर्थ-डे। 30 जुलाई को ममा का और 10 अगस्त को पापा का जन्म-दिन। वाह, यह तो हमारे लिए सबसे सुन्दर दिन होते हैं और मस्ती भरे भी।
आज तो ममा का हैप्पी-बर्थ डे है। ममा को जन्मदिन पर ढेर सारी बधाइयाँ और प्यार। Many-Many happy returns of the day Mom. U r the best Mom.
पापा को जन्मदिन पर पहले से ही ढेर सारी शुभकामनाएं और प्यार !!
आज तो ममा का हैप्पी-बर्थ डे है। ममा को जन्मदिन पर ढेर सारी बधाइयाँ और प्यार। Many-Many happy returns of the day Mom. U r the best Mom.
पापा को जन्मदिन पर पहले से ही ढेर सारी शुभकामनाएं और प्यार !!
सोमवार, जुलाई 29, 2013
'गगन स्वर' में अक्षिता (पाखी) की रचनाएँ
गाजियाबाद से प्रकाशित 'गगन स्वर' पत्रिका के जून-जुलाई 2013 अंक में मेरी दो बाल-रचनाएँ पढ़ सकते हैं। ये दोनों रचनाएँ इससे पूर्व ताऊ जी डाट काम और परिकल्पना ब्लागोत्सव में प्रकाशित हैं !!
मिल्क पाउडर ही पी जाएँ
दूध पीना मुझे भाता
पर बड़ी परेशान हूँ
किससे मैं शिकायत करूँ
होती बड़ी हैरान हूँ .
दूध वाला ना अच्छा दूध दे
बस पानी की भरमार है
जब उससे करूँ शिकायत
रोये, महँगाई की मार है.
दूध में पानी या पानी में दूध
कुछ भी समझ ना आये
इससे अच्छा तो अब
मिल्क पाउडर ही पी जाएँ.
दूध पीना मुझे भाता
पर बड़ी परेशान हूँ
किससे मैं शिकायत करूँ
होती बड़ी हैरान हूँ .
दूध वाला ना अच्छा दूध दे
बस पानी की भरमार है
जब उससे करूँ शिकायत
रोये, महँगाई की मार है.
दूध में पानी या पानी में दूध
कुछ भी समझ ना आये
इससे अच्छा तो अब
मिल्क पाउडर ही पी जाएँ.
नन्ही गौरैया
उड़कर आई नन्ही गौरैया
लान में हमारे।
चूं-चूं करते उसके बच्चे
लगते कितने प्यारे।
गौरैया रोज तिनका लाती
प्यारा सा घोंसला बनाती।
चूं-चूं करते उसके बच्चे
चोंच से खाना खिलाती।
उड़कर आई नन्ही गौरैया
लान में हमारे।
चूं-चूं करते उसके बच्चे
लगते कितने प्यारे।
गौरैया रोज तिनका लाती
प्यारा सा घोंसला बनाती।
चूं-चूं करते उसके बच्चे
चोंच से खाना खिलाती।
गुरुवार, जुलाई 25, 2013
'चाकलेट' जैसी स्वीट क्यों नहीं होती है 'ग्रीन चिली'
आजकल अपूर्वा के स्कूल में फल और सब्जियों को पहचानना (Know the Fruits and Vegetables) सिखाया जा रहा है।अपूर्वा जब भी घर के लॉन में जाती हैं तो सब्जियों के पौधों को देखती हैं और फिर उन्हें पहचानकर बेहद खुश होती हैं।
ये है ग्रीन कलर की लेडी-फिंगर। मुझे और दीदी को यह वेजिटेबल खाना बहुत अच्छा लगता है।
यह है गोलू-मोलू सा ब्रिंजल। इसे देखकर लगता है जैसे जोकर ने अपनी कैप इसके ऊपर लगा दी है। ममा-पापा को इसका भर्ता खाना बहुत अच्छा लगता है।
ग्रीन चिली ....इसे देखते ही मैं भाग जाती हूँ। मैं सोचती हूँ कि यह इत्ती तीखी क्यों होती है, चाकलेट जैसी स्वीट क्यों नहीं ? पर मेरी मौसी को यह बहुत पसंद है।
!! आज के लिए इत्ता ही काफी है। अब स्कूल जाकर मिस को बताउंगी !!
लेबल:
इलाहाबाद से,
प्रकृति और पर्यावरण,
माई फेमिली,
Apurva
मंगलवार, जुलाई 23, 2013
अपूर्वा का फूल का पौधा
पिछले दिनों अपूर्वा के स्कूल में वन महोत्सव मनाया गया। अपूर्वा इसे लेकर काफी उत्साहित थीं। अपूर्वा को उस दिन स्कूल एक फ्लावर-प्लांट लेकर जाना था। अपूर्वा खुद हम लोगों के साथ नर्सरी जाकर एक प्यारा सा फूल का पौधा लाई और उसे लेकर खुश होती रहीं।
अपूर्वा का अपने स्कूल में यह पहला सोशल-फंक्शन था, सो ये उस दिन खूब मन से स्कूल गईं। पर स्कूल से लौटते समय दुखी भी हो गईं कि अब उनका फूल का पौधा स्कूल में ही रह जाएगा, इनके साथ नहीं रहेगा।
यह रहा अपूर्वा के स्कूल में लगा पोस्टर, जो पेड़-पौधों और वन के संरक्षण के बारे में बताता है !!
लेबल:
प्रकृति और पर्यावरण,
स्कूल की बातें,
Apurva
सोमवार, जुलाई 08, 2013
हालिडेज़ ख़त्म, बारिश में स्कूल शुरू
गर्मी की छुट्टियों के बाद स्कूल फिर से शुरू हो गए। गर्मी की छुट्टियाँ कैसे बीत गईं, पता भी नहीं चला चला। इस बार तो रेनी-सीजन भी जल्द आ गया। थोड़ी-मोड़ी बारिश तो अच्छी लगती , है पर ज्यादा बारिश तो पूरा मजा ही कर देती है। जहाँ देखिये गड्ढों में पानी भरे नजर आते हैं, पूरा ड्रेनेज जाम हो जाता है और फिर चरों तरफ गन्दगी और रोग। ऐसे में बारिश के मौसम में स्कूल जाना सारा मजा किरकिरा देता है।
...पर अपने स्कूल दोस्तों से मिलने और नई क्लास टीचर से मिलना, नई-नई बुक्स और ढेर सारी नई बातें ...ये सब बातें स्कूल में कितनी अच्छी लगती हैं। मेरा स्कूल तो फ्राईडे, 5 जुलाई को ही खुल गया और अपूर्वा का आज 8 जुलाई को। मैं क्लास-I में तो अपूर्वा अभी प्ले ग्रुप में। फोरनून में स्कूल में मस्ती और आफ्टरनून में घर में मस्ती !!
रविवार, जून 30, 2013
आकाश में तारों के बीच से गुजरते हुए अद्भुत दुनिया की सैर
आकाश में तारों के बीच से गुजरते हुए उनकी अद्भुत दुनिया की सैर करना कितना अच्छा लगता है। यह हमने महसूस किया आनंद भवन, इलाहाबाद स्थित जवाहर प्लेनेटेरियम (Planetarium) की यात्रा करके।
जवाहर प्लेनेटेरियम के अन्दर प्रवेश से पहले ही हमें बताया गया कि अगर आप अंतरिक्ष में गए बगैर ही खगोलीय दुनिया की तमाम जानकारियों से लैस होना चाहते हैं तो जवाहर प्लेनेटेरियम आपका बेहतर दोस्त हो सकता है। इसकी मदद से आप रोचक, रोमांचक तरीके से आकाश में तारों के बीच से गुजरते हुए उनकी अद्भुत दुनिया की सैर कर सकते हैं। नई विषयवस्तु पर तैयार दो नए सूचनाप्रद और मनोरंजक कार्यक्रम खगोलीय दुनिया के रहस्यों को सरल तरीके से समझाएंगे।
फिर तो हम तुरंत इस यात्रा के लिए तैयार हो गए। प्लेनेटेरियम के अन्दर जाकर अपनी-अपनी कुर्सियों पर बैठ गए और कुछेक देर बाद ही आरंभ हुई झिलमिल तारों के साथ एक सुन्दर सैर। पहले चरण में ‘जर्नी टू इनफिनीटी’ में पृथ्वी से आगे गहन अंतरिक्ष की यात्रा कराई गई। तारों के बीच से गुजरना बेहद रोमांचक अनुभव लगा।
गौरतलब है कि ‘जर्नी टू इनफिनीटी’ उसी अमेरिकी कंपनी की ओर से तैयार की गई है जिसकी मदद से पिछले दिनों प्लेनेटेरियम को नया और आधुनिक रूप मिला। यहाँ प्लेनेटेरियम टीम ने इसका हिन्दी अनुवाद करते हुए रिकार्डिंग, वायसओवर से लेकर प्रोसेसिंग तक से इसे नया रूप दिया।
दूसरे चरण में ‘तारों की सैर’ में 88 तारामंडलों में से कई के बारे में जानकारी दी गई । इसके तहत तारों को पहचानने के तरीके और विशेष तारों की दुनिया से जुड़ी जानकारियां भी दी गईं।
यहाँ आप अपने को अन्तरिक्ष यात्री (Astronaut) के रूप में भी देख सकते हैं। यह भी एक रोचक अनुभव रहा।
जवाहर प्लेनेटेरियम के बाहर एक मिसाइल को भी दर्शाया गया है।
अर्थात खेल-खेल में बच्चों को सीखने को यहाँ बहुत कुछ है।
वाकई जवाहर प्लेनेटेरियम में तारों के साथ यह सैर एक खूबसूरत अनुभव रहा। अक्षिता और अपूर्वा तो बेहद रोमांचित थीं।
लेबल:
इलाहाबाद से,
जानकारी,
ट्रेवलिंग,
फन एंड मस्ती,
ममा की बातें
शनिवार, जून 29, 2013
इलाहाबाद में आनन्द भवन की यात्रा
आज हम आनंद भवन गए। इलाहाबाद आए हुए हमें एक साल से ज्यादा हो गया। कई बार जाने के लिए पापा से कहा, पर आज जाकर पापा को समय मिला। इसे मैं इसलिए भी देखना चाहती थी कि यह हम बच्चों के प्यारे चाचा नेहरु से जुड़ा हुआ है। पंडित जवाहर लाल नेहरु ही देश के प्रथम प्रधानमंत्री भी थे।
वाकई यह बहुत खुबसूरत और विशाल है। यहाँ नेहरु जी और उनके परिवार से सम्बंधित तमाम चीजें रखी हुई हैं।
इंदिरा गाँधी और फ़िरोज़ गाँधी जी का विवाह भी यहीं हुआ था।
यहाँ नेहरु जी और उनके परिवार से सम्बंधित तमाम चीजें रखी हुई हैं। उनका बेड रूम, लिविंग रूम, स्टडी रूम, और मीटिंग हाल इत्यादि को चारों तरफ शीशे से पारदर्शी रूप में सुरक्षित गया है, ताकि लोग बाहर से आसानी से देख सकें।
आनंद भवन में एक चित्र प्रदर्शनी भी लगी हुई है, जहाँ नेहरु जी से सम्बंधित महत्वपूर्ण घटनाओं को अंकित किया गया है।
आज तो मौसम भी बहुत अच्छा था। ...स्कूल की भी हालिदेज़ चल रही हैं। हमने तो खूब इंजॉय किया !!
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इलाहाबाद से,
जानकारी,
ट्रेवलिंग,
फन एंड मस्ती,
माई फेमिली
शुक्रवार, जून 28, 2013
नन्हा सा, मासूम सा, सकुचाया और शरमाया सा...
बारिश के दिनों में कल शाम को माली जब हमारे लान में स्थित गुड़हल के पेड़ की छंटाई कर था तो उसे वहां एक चिड़िया का घोंसला दिखा। फिर उसने यह बात को बताई और जब हमने जाकर देखा तो उस घोंसले में एक चिड़िया का बच्चा था।
नन्हा सा, मासूम सा, सकुचाया और शरमाया सा ...
नन्हा सा, मासूम सा ...हमें देखते ही अपनी चोंच ऐसे खोलता मानो भूखा हो।
एक बारगी हमने सोचा कि इसे किसी सुरक्षित जगह पर रख दें, पर फिर लगा कि इसकी मां इसे यहाँ न पाकर बहुत परेशान होगी। हमने उसके चारों तरफ़ पत्तियों का घेरा बनाया, ताकि वह सुरक्षित रहे। कोई पक्षी या जानवर उसे नुकसान न पहुंचा सके। हमने उसके घोंसले में कुछ खाने की चीजें भी रखवा दी हैं।
सुबह हमने उसे फिर देखा तो वह अपलक हमें देख रहा था, मानो कुछ कहना चाहता हो।
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प्रकृति और पर्यावरण,
बारिश के दिन
रविवार, जून 16, 2013
आज का दिन तो सिर्फ पापा का है
आज फादर्स डे है. हर साल जून माह के तीसरे रविवार को यह सेलिब्रेट किया जाता है.वैसे तो पापा से प्यार जताने के लिए किसी खास दिन की जरुरत नहीं, पर आज का दिन तो सिर्फ पापा का है..आज के दिन के लिए
पापा को ढेर सारा प्यार और बधाई. U r the best Papa.
मैं तो अपने पापा से बहुत प्यार करती हूँ। पापा भी हमें बहुत प्यार करते हैं। मेरी जुबान से कुछ निकलने की देरी नहीं, ये मेरी हर फरमाइश पूरी करते हैं। न जाने कित्ती बार अपनी जिद मैंने पापा से पूरी करवाई है, बाद में लगा कि मैं गलत थी। पर पापा ने कभी भी बुरा नहीं माना।
तभी तो मेरे लिए पापा सिर्फ पापा नहीं बेस्ट फ्रेंड भी हैं। आज तो मैं ममा और अपूर्वा के साथ मिलकर पापा को कोई सरप्राइज गिफ्ट दूंगी।
I Love u papa too much. U r the best papa.
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पापा की बातें,
माई फेमिली,
माई फेवरेट,
स्पेशल-डे
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