आप सब 'पाखी' को बहुत प्यार करते हैं...

बुधवार, अगस्त 29, 2012

अंतर्राष्ट्रीय हिंदी ब्लागर सम्मलेन, लखनऊ में अक्षिता (पाखी)

'अंतर्राष्ट्रीय हिंदी ब्लागर सम्मलेन' एवं 'परिकल्पना सम्मान समारोह' में नन्हीं ब्लागर अक्षिता (पाखी) भी ममा-पापा और अपूर्वा के साथ पहुंची. 27 अगस्त, 2012 को उमानाथ बाली प्रेक्षागृह, कैसर बाग, लखनऊ में भव्यता के साथ संपन्न हुआ यह सम्मेलन तस्लीम एवं परिकल्पना समूह द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया गया था। पिछले साल हिंदी भवन, नई दिल्ली में प्रथम 'अंतर्राष्ट्रीय हिंदी ब्लागर सम्मलेन' एवं 'परिकल्पना सम्मान समारोह' हुआ था, जिसमें उत्तरांचल के तत्कालीन मुख्यमंत्री डा. रमेश पोखरियाल निशंक मुख्या अतिथि थे और साथ में अशोक चक्रधर, डा. रामदरश मिश्र, प्रभाकर श्रोतिय जैसे विद्वत -जनों की गौरवमयी उपस्थिति.उस समय अक्षिता (पाखी) को 'वर्ष के श्रेष्ठ नन्हा ब्लागर' अवार्ड से सम्मानित किया गया था,पर एन वक़्त पर एयर-इण्डिया के पायलट्स की हड़ताल के चलते अक्षिता (पाखी) कार्यक्रम में शामिल न हो सकी. उस समय अक्षिता पोर्टब्लेयर,अंदमान में थी. इस बार कार्यक्रम लखनऊ में था और अब अक्षिता इलाहबाद में थी, सो भला कैसे चूक सकती थी.

इस अवसर पर अक्षिता के मामा-पापा को ’दशक के श्रेष्ठ दम्पत्ति ब्लागर' के सम्मान से भी नवाजा गया. न्यू मीडिया और ब्लागिंग से जुड़े तमाम लोगों से साक्षात् मुलाकात अपने आप में एक अविस्मरनीय अनुभव था. रविन्द्र प्रभात और जाकिर अली 'रजनीश' ने अपने स्तर पर कार्यक्रम की शानदार मेजबानी की और लखनऊ की तहज़ीब से भी लोगों को रूबरू कराया. देश-विदेश से तमाम ब्लागर जुटे, चर्चाएँ हुईं, पुस्तकें-पत्रिकाएं विमोचित हुईं, सम्मान मिले, मुलाकातें हुईं...और अब रह गई खूबसूरत यादें. ऐसे ही कुछेक यादों को हमने भी अपने कैमरे में सहेजा और आप सभी के साथ शेयर कर रहे हैं.(दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का उदघाटन करते वरिष्ठ साहित्यकार उद्भान्त, साथ मे शिखा वार्ष्णेय,गिरीश पंकज,रणधीर सिंह सुमन और रवीन्द्र प्रभात)('दशक के श्रेष्ठ दम्पत्ति ब्लागर’ के रूप में नन्हीं ब्लागर अक्षिता के ममा-पापा आकांक्षा यादव-कृष्ण कुमार यादव को सम्मानित करने की उद्घोषणा करते परिकल्पना समूह के संयोजक रविन्द्र प्रभात)('दशक के श्रेष्ठ दम्पत्ति ब्लागर’ के रूप में नन्हीं ब्लागर अक्षिता के ममा-पापा आकांक्षा यादव-कृष्ण कुमार यादव को सम्मानित करते वरिष्ठ साहित्यकार उद्भ्रांत, पूर्व पुलिस महानिरीक्षक व कथा क्रम के संपादक शैलेन्द्र सागर. साथ में परिलक्षित हैं वरिष्ठ पत्रकार सुभाष राय और लन्दन की पत्रकार और ब्लागर शिखा वार्ष्णेय).('दशक के श्रेष्ठ दम्पत्ति ब्लागर’ के रूप में नन्हीं ब्लागर अक्षिता के ममा-पापा आकांक्षा यादव-कृष्ण कुमार यादव के सम्मान के बाद ब्लागिंग हेतु 'राष्ट्रीय बाल पुरस्कार' विजेता अक्षिता (पाखी) को बुके देकर सम्मानित करते पूर्व पुलिस महानिरीक्षक व कथा क्रम के संपादक शैलेन्द्र सागर)
('दशक के श्रेष्ठ दम्पत्ति ब्लागर’ के रूप में सम्मानित होते नन्हीं ब्लागर अक्षिता के ममा-पापा आकांक्षा यादव-कृष्ण कुमार यादव और साथ में अक्षिता (पाखी). मंच पर दिख रहे हैं- डॉ सुभाष राय, वरिष्ठ साहित्यकार उद्भ्रांत, कथा क्रम के संपादक शैलेंद्र सागर, सुश्री शिखा वार्ष्णेय)( 'दशक के श्रेष्ठ दम्पत्ति ब्लागर’ के रूप में सम्मानित होने के बाद नन्हीं ब्लागर अक्षिता के पापा कृष्ण कुमार यादव का संबोधन. साथ में परिलक्षित हैं कार्यक्रम के संचालक ब्लागर हरीश अरोड़ा)
('दशक के श्रेष्ठ दम्पत्ति ब्लागर’ के रूप में सम्मानित होने के बाद नन्हीं ब्लागर अक्षिता के पापा कृष्ण कुमार यादव का आभार-उद्बोधन और मंचस्थ दिख रहे हैं- डॉ सुभाष राय,सुश्री शिखा वार्ष्णेय,वरिष्ठ साहित्यकार उद्भ्रांत, कथा क्रम के संपादक शैलेंद्र सागर, डॉ अरविंद मिश्रा, गिरीश पंकज)(दशक के ब्लागर के रूप में सम्मानित होने के बाद सभी ब्लागर्स का समूह-फोटोग्राफ. क्रमश : कृष्ण कुमार यादव, आकांक्षा यादव, पूर्णिमा वर्मन, रविन्द्र प्रभात, बी. एस. पाबला, अविनाश वाचस्पति और रवि रतलामी. मंचस्थ दिख रहे हैं- हरीश अरोड़ा, डॉ सुभाष राय, अक्षिता (पाखी), सुश्री शिखा वार्ष्णेय, डॉ अरविंद मिश्रा, वरिष्ठ साहित्यकार उद्भ्रांत, कथा क्रम के संपादक व पूर्व पुलिस महानिरीक्षक शैलेंद्र सागर)(अपूर्वा के साथ नन्हीं ब्लागर अक्षिता की ममा आकांक्षा यादव, अनुभूति-अभिव्यक्ति वेब पत्रिका की संपादक पूर्णिमा वर्मन (संयुक्त अरब अमीरात), 'राष्ट्रीय बाल पुरस्कार' विजेता व पिछले साल 'श्रेष्ठ नन्हीं ब्लागर' से सम्मानित अक्षिता (पाखी), नन्हीं ब्लागर अक्षिता के पापा कृष्ण कुमार यादव (इलाहबाद परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाए) एवं बाल-साहित्यकार डा. जाकिर अली रजनीश)(देश-विदेश से पधारे तमाम ब्लागर्स)(जब ममा-पापा को सम्मान मिला हो तो बेटियों का इठलाना स्वाभाविक है) (अपूर्व परेशां हैं की वटवृक्ष के इस भरी-भरकम ब्लागर विशेषांक में ममा-पापा और बहना का नाम तो है, पर उनका क्यों नहीं...अब लगता है जल्द ही इन्हें भी ब्लागिंग के क्षेत्र में आना पड़ेगा)







बुधवार, अगस्त 22, 2012

सुन्दर-सुन्दर फूल खिले हैं...

आजकल हमारे बंगले के लान में और आस-पास खूब सारे फूल खिले हैं. बारिश के बाद चारों तरफ खूब हरियाली फैली है. (यह रहा हमारे बंगले के सामने का लान) (यह है हमारा स्विंग..खूब मस्ती होती है यहाँ)(यह रहा ममा-पापा का बैडमिन्टन कोर्ट)(अपूर्वा को तो गुलाब बहुत भाते हैं)









सुबह-सुबह इन खिले फूलों को देखना अच्छा लगता है, तो रात में इनकी भीनी-भीनी खुशबू बहुत अच्छी लगती है.यहाँ खूब सारी बर्ड्स और बटर-फ्लाई आती हैं.

रविवार, अगस्त 19, 2012

स्माइल प्लीज़..आज वर्ल्ड फोटोग्राफी डे है !!

आज वर्ल्ड फोटोग्राफी डे है. मुझे तो वैसे भी फोटोग्राफ क्लिक करना बहुत अच्छा लगता है. आज मैंने पापा से फोटोग्राफी की हिस्ट्री के बारे में पूछा तो उन्होंने बताया कि फोटोग्राफी का आरंभ जनवरी, 1839 से माना जाता है. उस समय फ्रांसीसी वैज्ञानिक जोसफ निकफोर और लुईस डाग्युरे ने पहली बार फोटोग्राफी प्रक्रिया की शुरुआत की. फिर क्या था, फ्रेंच अकादमी ऑफ़ साइंस ने १९ अगस्त, १८३९ को डाग्यु रियोटाईप नाम की इस फोटोग्राफी प्रक्रिया के बारे में पहली बार पूरे वर्ल्ड को जानकारी दी...और बस यहीं से 19 अगस्त को 'वर्ल्ड फोटोग्राफी डे' मनाने की भी शुरुआत हो गई...है न मजेदार बात !!

अब तो मैं बड़ी हो गई हूँ. जहाँ भी जाती हूँ खूब सारी पिक्चर्स क्लिक करती हूँ. फिर चाहे वह कैमरे और हैंडी-कैम से हो या ममा-पापा के मोबाईल से हो..मुझे तो फोटोग्राफी करने में बहुत इंजॉय आता है. मैंने खूब सारी फोटो अपने ममा-पापा और सिस्टर की ली हैं. अपने बंगले के लान में में तो खूब सारी फोटो क्लिक करती हूँ. चलिए, आज आप सभी के साथ शेयर करती हूँ-

(यह है हमारे बंगले के लान में खिला फूलों का राजा गुलाब )

(..और यह हैं फलों के राजा आम)

(हमारे बंगले का लान)

(अपने बंगले की छत से ली मैंने सिविल लाइन्स,इलाहाबाद के बड़े चर्च की फोटो)

(यह है हमारे छत पर बैठी गौरैया)
(कन्फ्यूज हो गए न, यह अंडमान-निकोबार की फोटो नहीं है बल्कि हमारे बेड-रूम में लगा वाल-पेपर है)

..तो कैसी लगी आपको मेरी फोटोग्राफी..जल्द ही और भी ढेर सारे फोटोग्राफ के साथ हाजिर हूँगी !!

बुधवार, अगस्त 15, 2012

आजादी का दिन है प्यारा..

आज स्वतंत्रता दिवस है. आज ही के दिन देश को आजादी मिली थी.सोचिये कितना अच्छा दिन है यह. पर हमारे स्कूल में स्वतंत्रता दिवस पर हमें नहीं बुलाया जाता. क्लास 2 से ऊपर वालों को ही बुलाया गया है, ये दिन सेलिब्रेट करने के लिए. कितनी ना-इंसाफी है हमारे साथ. कोई बात नहीं, मैं भी जल्दी से बड़ी हो जाऊँगी तो अपने स्कूल में जाकर झंडारोहण देखूंगी. अब तो मैं राष्ट्र-गान भी गा लेती हूँ. इस बार तो मैं कैम्पस में ही पापा का झंडारोहण देखूंगी. आखिर हमारा घर भी तो पापा के आफिस-कैम्पस में ही है. चारों तरफ तिरंगे झंडे देखकर बड़ा अच्छा लगता है.मैं भी तिरंगे को सैलूट करुँगी. वैसे लोगों को प्रभात फेरी और मार्च-पास्ट करते हुए देखकर मेरा भी मन उसमें शामिल होने को करता है. मैं भी बड़ी हो जाउंगी तो मार्च-पास्ट में भाग लूंगी और सबसे आगे तिरंगा झंडा लेकर चलूंगी. यह रहा हमारा राष्ट्रीय तिरंगा झंडा. आप सभी लोगों को भी स्वतंत्रता दिवस की बधाइयाँ...जय हिंद !!


शुक्रवार, अगस्त 10, 2012

पापा का जन्मदिन और 'कृष्ण-जन्माष्टमी'

आज का दिन हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण है. आज कृष्ण जन्माष्टमी है। आज ही तो देर रात माख्नन चोर श्री कृष्ण का जन्म हुआ था. कृष्ण जी की बाल- लीलाएं तो मुझे बहुत अच्छी लगती हैं. वे भी तो हम बच्चों जैसे ही खूब शरारतें करते थे और फिर उनकी मैया यशोदा कित्ता डांटती थी. लेकिन कृष्ण जी भी कम नहीं थे, अंतत: मैया को अपनी तरफ कर ही लेते थे और फिर गोपियाँ देखती ही रह जाती थीं. और हाँ, कृष्ण जन्माष्टमी तो मेरे लिए इसलिए भी और महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि जन्माष्टमी के दिन ही मेरे पापा और नानी जी का भी जन्म हुआ था. पर सबसे अच्छी बात तो यह है कि आज 10 अगस्त को पापा का जन्मदिन और जन्माष्टमी दोनों साथ पड़ रही है..है न डबल ख़ुशी वाली बात. तो चलिए आप भी हमारी इस ख़ुशी में शरीक होइए !!

पापाजी को जन्मदिन पर ढेर सारी बधाई और प्यार.

इस कृष्ण-जन्माष्टमी पर आप लोग भी मुझे ढेर सारा आशीर्वाद और प्यार दीजियेगा !!

गुरुवार, अगस्त 09, 2012

दशक के श्रेष्ठ ब्लॉगर ममा-पापा को बधाई...

(ममा-पापा को परिकल्पना समूह द्वारा 'दशक के श्रेष्ठ ब्लॉगर दंपति' हेतु चयनित किया गया है. इस अवसर पर उन्हीं के ब्लॉग से एक पोस्ट साभार लगा रही हूँ...ममा-पापा को ढेर सारी बधाई और प्यार.)
ब्लागिंग के क्षेत्र में अप्रतिम योगदान हेतु इलाहाबाद परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएँ कृष्ण कुमार यादव और उनकी पत्नी आकांक्षा यादव को 'दशक के श्रेष्ठ ब्लॉगर दंपति' का सम्मान प्रदान किए जाने हेतु चयनित किया गया है। परिकल्पना समूह की तरफ से अन्तराष्ट्रीय स्तर पर दिए जाने वाले इस सम्मान के तहत हिंदी ब्लोगिंग में दशक के सर्वाधिक चर्चित पाँच ब्लागर और पाँच ब्लॉग के साथ-साथ दशक के श्रेष्ठ चर्चित ब्लोगर दंपत्ति के रूप में कृष्ण कुमार-आकांक्षा यादव का चयन किया गया है.

कृष्ण कुमार यादव जहाँ 'शब्द-सृजन की ओर' और 'डाकिया डाक लाया' ब्लॉग के माध्यम से सक्रिय हैं, वहीँ आकांक्षा यादव 'शब्द-शिखर' ब्लॉग के माध्यम से. इसके अलावा इस युगल-दंपत्ति द्वारा सप्तरंगी प्रेम, बाल-दुनिया और उत्सव के रंग ब्लॉगों का भी युगल सञ्चालन किया जाता है. उपरोक्त सम्मान की घोषणा करते हुए संयोजकों ने लिखा कि- ''कृष्ण कुमार यादव ने 'डाकिया डाक लाया' ब्लॉग के माध्यम से डाक विभाग की सुखद अनुभूतियों से पाठकों को रूबरू कराने का बीड़ा उठाया तो आकांक्षा यादव ने 'शब्द-शिखर' के माध्यम से साहित्य के विभिन्न आयामों से रूबरू कराने का। एक स्वर है तो दूसरी साधना। हिन्दी ब्लोगजगत में जूनून की हद तक सक्रिय इस ब्लॉगर दंपति ने हिंदी ब्लागिंग को कई नए आयाम दिए हैं.''

गौरतलब है कि यादव दम्पति की सुपुत्री अक्षिता (पाखी) को पिछले साल हिंदी भवन, नई दिल्ली में 'श्रेष्ठ नन्हीं ब्लागर' सम्मान से सम्मानित किया गया था तो 14 नवम्बर, 2012 को विज्ञान भवन, नई दिल्ली में भारत सरकार द्वारा अक्षिता को आर्ट और ब्लागिंग के लिए 'राष्ट्रीय बाल पुरस्कार' भी प्रदान किया गया. मात्र साढ़े चार साल की उम्र में राष्ट्रीय बाल पुरस्कार प्राप्त कर अक्षिता ने जहाँ भारत की सबसे कम उम्र की बाल पुरस्कार विजेता होने का सौभाग्य प्राप्त किया, वहीँ पहली बार भारत सरकार द्वारा किसी ब्लागर को कोई राजकीय सम्मान दिया गया. फ़िलहाल अक्षिता गर्ल्स हाई स्कूल, इलाहाबाद में प्रेप में पढ़ती है.

उपरोक्त सम्मान दिनांक 27.08.2012 को लखनऊ के क़ैसर बाग स्थित राय उमानाथ बली प्रेक्षागृह में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय ब्लॉगर सम्मेलन मे प्रदान किया जायेगा. इस अंतर्राष्ट्रीय ब्लॉगर सम्मेलन का आयोजन तस्लीम व परिकल्पना समूह कर रहा है । इस समारोह में देश व विदेश के तमाम चर्चित ब्लॉगर जुटेंगे और नए मीडिया जैसे कि ब्लॉग, वेबसाईट, वेब पोर्टल,सोशल नेटवर्किंग साइट इत्यादि के सामाजिक सरोकार पर भी बात करेंगे ।

(साभार : विभिन्न समाचार-पत्रों में प्रकाशित समाचार)
************************************************************************************










(ब्लागिंग के क्षेत्र में अप्रतिम योगदान हेतु हमें (कृष्ण कुमार यादव और आकांक्षा यादव)'दशक के श्रेष्ठ ब्लॉगर दंपति' का सम्मान प्रदान किए जाने हेतु चयनित किया गया है। परिकल्पना समूह की तरफ से अन्तराष्ट्रीय स्तर पर दिए जाने वाले इस सम्मान के तहत हिंदी ब्लोगिंग में दशक के सर्वाधिक चर्चित पाँच ब्लागर और पाँच ब्लॉग के साथ-साथ दशक के श्रेष्ठ चर्चित ब्लोगर दंपत्ति के रूप में कृष्ण कुमार-आकांक्षा यादव का चयन किया गया है...इस सम्मान-उपलब्धि के पीछे आप सभी का योगदान है. आप सभी के स्नेह और सहयोग के लिए आभार.'ब्लॉग-पुरुष' रवीन्द्र प्रभात जी को इस आयोजन के लिए कोटिश: साधुवाद !!)

रविवार, अगस्त 05, 2012

फ्रैंडशिप-डे पर बधाई ...


!! आज फ्रैंडशिप-डे है. आप सभी को इस दिन पर ढेर सारी बधाई और प्यार !!

गुरुवार, अगस्त 02, 2012

यह रही हमारी प्यारी राखी..

आज रक्षाबंधन का त्यौहार है और स्कूल में भी हाली-डे है, सो दुगुनी मस्ती. इस दिन के लिए मैंने कई राखियाँ खरीदीं. ममा-पापा के लिए, अपनी बहन अपूर्वा के लिए. सुबह-ही-सुबह सबको मैंने राखी बाँधी. एक राखी अपने टेडी-बियर को भी बाँधी. बड़ा अच्छा लगा. अपूर्वा ने भी मुझे राखी बाँधी और ममा-पापा ने भी. ममा ने सबकी आरती उतारी और हमने खूब मिठाइयाँ खाई. मैं तो अपनी सिस्टर अपूर्वा को खूब प्यार करती हूँ और वह मुझे. मैंने उसे राखी बांधी तो उसने मुझे प्यारा सा हग दिया.
आज हमें ढेर सारी चाकलेट और आइसक्रीम भी मिली..वाह आपके भी मुँह में पानी आ रहा है न.आप सभी को रक्षा-बंधन पर्व पर हार्दिक शुभकामनायें.
***************************************************************



!! रक्षा बंधन पर्व की बधाइयाँ !!







सोमवार, जुलाई 30, 2012

ममा का हैपी बर्थ-डे

आज 30 जुलाई को ममा का हैपी बर्थ-डे है. पहले तो सोचा था कि स्कूल से आकर ममा का बर्थ-डे सेलिब्रेट करेंगें, पर सुबह-सुबह मैसेज आया कि आज रेनी-डे के चलते हालीडे है...हुर्रे. अब तो दुगुना इन्जोय्मेंट. कल वैसे भी सन्डे था. ममा के बर्थ-डे का मुझे बेसब्री से इंतजार रहता है. आखिर हो भी क्यों न, आखिर मेरी ममा इत्ती प्यारी और केयरिंग जो है. पर आज तो मुझे ही ममा की केयर करनी पड़ेगी. इलाहबाद आने के बाद ममा का पहला बर्थ-डे हम लोग सेलिब्रेट कर रहे हैं. इस समय यहाँ दादू और चाचू भी आए हुए हैं.Many-many Happy Returns of the day to Sweet Mumma from Akshitaa & Apoorva !!

शनिवार, जुलाई 28, 2012

पाखी की बिल्ली




पाखी ने बिल्ली पाली.
सौंपी घर की रखवाली.

फिर पाखी बाज़ार गयी.
लाये किताबें नयी-नयी.

तनिक देर जागी बिल्ली.
हुई तबीयत फिर ढिल्ली.

लगी ऊंघने फिर सोयी.
सुख सपनों में थी खोयी.


मिट्ठू ने अवसर पाया.
गेंद उठाकर ले आया.

गेंद नचाना मन भाया.
निज करतब पर इठलाया.


घर में चूहा आया एक.
नहीं इरादे उसके नेक.

चुरा मिठाई खाऊँगा.
ऊधम खूब मचाऊँगा.


आहट सुन बिल्ली जागी.
चूहे के पीछे भागी.

झट चूहे को जा पकड़ा.
भागा चूहा दे झटका.


बिल्ली खीझी, खिसियाई.
मन ही मन में पछताई.

अगर न दिन में सो जाती.
खो अवसर ना पछताती.

******

सोमवार, जुलाई 09, 2012

शुरू हो गए स्कूल...

आज से मेरी छुट्टियाँ ख़त्म स्कूल शुरू हो गया. दो माह की इन छुट्टियों में मैंने खूब मस्ती की और घूमी-फिरी. कई नई जगहें भी देखने को मिलीं और नई-नई बातें भी सीखने को मिलीं. यहाँ इलाहाबाद में तो इत्ती गर्मी पड़ रही थी कि पूछिये मत. अब जाकर बारिश ने राहत दी है. इसी गर्मी के चलते तो हम लोगों का स्कूल खुलना भी टलता रहा. पर अब बारिश के साथ ही स्कूल भी खुल गए.पहले दिन ही हम बच्चों ने क्लास में खूब धमा-चौकड़ी की. एक दूसरे से हम लोगों ने पूछा कि कौन कहाँ-कहाँ घूमने गया था. अभी तो मुझे यहाँ क्लास ज्वाइन किए हुए ज्यादा दिन नहीं हुए हैं, पर कुछेक दोस्त तो बन ही गई हैं. सब लोग अपने बारे में बता रहे थे, मैंने भी बताया. पर इसका मतलब यह थोड़े ही कि पढाई बिलकुल नहीं हुई. पढाई भी हुई, क्लास-वर्क भी हुआ और होम-वर्क भी मिला. अब तो खूब मन से पढना है. अगले साल मुझे क्लास-I में जो जाना है !!

शनिवार, जुलाई 07, 2012

आज 'मैंगो डे' है...

आपको आम अच्छे लगते हैं...आखिर किसे अच्छे नहीं लगेंगें. फलों का रजा आम तो मुझे बहुत पसंद है. अंडमान में तो साल भर में तीन बार आम की फसल होती थी, खूब आम खाती थी. यहाँ इलाहाबाद में भी खूब आम खा रही हूँ. दो आम के पेड़ तो हमारे लान में ही लगे हुए हैं. उनके सारे आम तोड़कर हजम कर चुकी हूँ. आम को बौर से लेकर अमिया और फिर पीले-पीले पकना देखना बड़ा अच्छा लगा. इसी बहाने मैंने यह भी जाना कि आम की फसल पैदा कैसे होती है.
आपको पता है कि आज 'मैंगो-डे' है. लेकिन इसका मतलब यह थोड़े ही है कि इसे सिर्फ आज के दिन ही खाना है. जब भी मन में आए, खूब आम खाइए..मैं तो चली आम खाने ...!!