आप सब 'पाखी' को बहुत प्यार करते हैं...

गुरुवार, दिसंबर 09, 2010

छोटी बहना के साथ मस्ती और मेरी नई ड्रेस

आपको बताया था न कि अब मैं पोर्टब्लेयर आ गई हूँ. इस समय यहाँ मौसम खूब सुहाना सा है, पर कई बार खूब बारिश होने लगती है. अब फिर से मैं स्कूल जाने लगी हूँ. 11 तारीख को मेरे स्कूल में पैरेंट्स-डे है. मुझे उसमें तितली (Butterfly) बनना है और इसके लिए मैंने अभी से तैयारी शुरू कर दी है. और हाँ, मेरी छोटी बहना भी खूब खुश है. उसके तो ढेर सारे बुलाने वाले नाम हो गए हैं- मम्मा तन्वी कहकर बुलाती हैं तो मैं आइमा. पापा ने अपूर्वा नाम सोच रखा है और मौसी उसे रोजी बुलाती हैं. आजकल तो मेरे सारा समय आइमा के साथ खेलने में ही चला जाता है..खूब मजा आता है उसके साथ खेलने में.
और हाँ, मेरी नई ड्रेस कैसी लग रही है.

बुधवार, दिसंबर 01, 2010

पाखी पहुँची पोर्टब्लेयर....

सभी लोगों को मेरी नमस्ते. अब मैं पोर्टब्लेयर आ गई हूँ. साथ में मम्मी-पापा और छोटी बहना भी.
ये रही हमारी प्यारी सी सिस्टर. यह तो उसकी पहली विमान-यात्रा है.
कित्ती खुश है पोर्टब्लेयर जाने को लेकर.
29 नवम्बर की सुबह हम पोर्टब्लेयर पहुँच गए.कित्ता अच्छा लग रहा है यहाँ आकर. अब तो खूब मस्ती करनी है.


रविवार, नवंबर 28, 2010

मम्मा-पापा की वेडिंग एनिवर्सरी

आज मम्मा-पापा के हैपी वेडिंग डे को 6 साल पूरे हो गए. आज हम लोग ददिहाल से बनारस और फिर कोलकात्ता पहुंचेंगें. लगता है मम्मा-पापा की वेडिंग एनिवर्सरी फ़्लाईट में या कोलकाता में ही मनेगी. पर सबसे बड़ी ख़ुशी वाली बात तो यह है कि कल हम सभी पोर्टब्लेयर में होंगे. मेरी छोटी बहन तो पहली बार पोर्टब्लेयर जा रही है. अब तो खूब मजा आयेगा. अब तो मम्मा-पापा की वेडिंग एनिवर्सरी पोर्टब्लेयर में ही सेलिब्रेट करेंगें !!


( चित्र में मम्मा-पापा की वेडिंग की फोटो है. इसमें मैं नहीं दिख रही हूँ ना. पहले इसके लिए मम्मा-पापा से खूब शिकायत करती थी कि मुझे क्यों नहीं अपनी वेडिंग-फंक्शन में बुलाया....)

मम्मा-पापा को 6th वेडिंग-एनिवर्सरी पर ढेर सारा प्यार और उपहार भी...हम दोनों की तरफ से !!

मंगलवार, नवंबर 23, 2010

नानी और मौसी के साथ मेरी नन्हीं सी बहना..

आपको तो मैंने बताया था ना कि मैं दीदी बन गई हूँ. हर कोई सोचता है कि मेरी प्यारी सी नन्हीं सी बहना को गोद में लेकर प्यार करे. अब देखों ना मौसी का, एक साथ ही दोनों को प्यार दे रही हैं-
और ये रहीं मेरी नानी जी, मेरी बहना को देखकर कित्ती खुश हो रही हैं.

गुरुवार, नवंबर 18, 2010

ननिहाल से ददिहाल...

आजकल अपने ननिहाल में नाना-नानी के साथ हूँ. मम्मा और मेरी छोटी बहन तो हैं ही. नाना-नानी के साथ खूब मस्ती करती हूँ. दिन भर धमाचौकड़ी. मेरा ननिहाल सैदपुर (गाजीपुर) में है. यह बनारस के पास है. कल मैं मम्मा और बहना के साथ ददिहाल (आजमगढ़) चली जाउंगी. अब तो पापा भी आने वाले हैं, हम सभी को पोर्टब्लेयर ले जाने के लिए. वह भी सोमवार तक आ जायेंगें. अभी तो बस पैकिंग हो रही है, हर चीज बिखरी हुई है. इधर मेरी पढाई भी काफी डिस्टर्ब हुई है.

मैं तो बहुत खुश हूँ. इतने दिनों में दादा-दादी, नाना-नानी, मौसा-मौसी, चाचू सभी का ढेर सारा प्यार मिला और अब पोर्टब्लेयर जाने की तैयारी. इस महीने के अंत तक हम पोर्टब्लेयर में होंगें. मुझे अपने घर, सायकिल, खिलौनों, टीचर जी और दोस्तों सभी की बहुत याद आती है. यहाँ तो ठण्ड पड़ने लगी है, पर पोर्टब्लेयर में मौसम भी अच्छा है. और हाँ, इस बीच इक अच्छी बात और हो गई कि बनारस और कोलकाता के बीच जेट की सीधी फ्लाईट शुरू हो गई है. अब लखनऊ तक जाने की जरुरत नहीं..!!

रविवार, नवंबर 14, 2010

नेहरू चाचा आओ ना..


आज बाल-दिवस है. मम्मा बता रही थीं कि आज ही हमारे प्रथम प्रधानमंत्री नेहरु चाचा का जन्म हुआ था. वे हम बच्चों से बहुत प्यार करते थे और बच्चे उन्हें प्यार से चाचा कहा करते थे. तभी तो उनका जन्म दिन बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है. आज बाल-दिवस पर पापा की इक प्यारी सी कविता पोस्ट कर रही हूँ. आप बताइयेगा कि यह कैसी लगी-

नेहरू चाचा आओ ना
दुनिया को समझाओ ना
बच्चे कितने प्यारे होते
कोई उन्हें सताए ना ।

नेहरू चाचा आओ ना
मधु मुस्कान दिखाओ ना
तुम गुलाब की खुशबू से
बचपन को महकाओ ना ।

नेहरू चाचा आओ ना
उजियारा फैलाओ ना
देशभक्त हों, पढें-लिखें
ऐसा पाठ पढा़ओ ना ।

नेहरू चाचा आओ ना।

बुधवार, नवंबर 10, 2010

अक्षिता (पाखी) दीदी बन गई...

आज बहुत दिन बाद अपना ब्लॉग देख रही हूँ. अब आप पूछेंगें क्यों....चलिए बता ही देती हूँ. मैं दीदी बन गई हूँ. मेरे घर में मेरी प्यारी सी बहना जो आ गई है. ये रही नन्हीं-मुन्नी प्यारी सी मेरी सिस्टर, जो अब मुझे दीदी कहकर बुलाएगी.
इसका जन्म 27 अक्तूबर, 2010 की रात्रि 11: 10 पर बनारस के हेरिटेज हास्पिटल में हुआ. पहले हम लोग पोर्टब्लेयर से अपने ददिहाल आजमगढ़ गए और फिर ननिहाल सैदपुर (गाजीपुर). और पापा पहुँचे 24 अक्तूबर की रात में. तब तक तो ममा बनारस के हेरिटेज हास्पिटल में एडमिट हो चुकी थीं. साथ में नानी और मौसी भी थीं. ..और हाँ डाक्टर आंटी तो हम लोगों का खूब ख्याल रखती थीं. थीं. उनका नाम था मेजर (डा0) अंजली रानी. दीदी बनने के बाद तो मैं बहुत खुश हूँ. आज तो यह पूरे 15 दिन की हो गई. मुझे लगता है कि कोई प्यारा सा ट्वॉय मिल गया, जिसके साथ खूब खेलूँगी...मस्ती करुँगी. अभी तो सारा दिन कोशिश करती हूँ कि मेरा ट्वॉय मेरी गोद में रहे. अब बस इंतजार है कि कब हम लोग पोर्टब्लेयर पहुंचेंगे. यहाँ तो ठंडी आ चुकी है, वहाँ तो मौसम अभी बहुत प्यारा होगा...अले, मेरा ट्वॉय रो रहा है, मैं तो चली उसे चुप कराने...अब तो उसके बारे में आपको ढेर सारी बातें बताऊन्गी !!

शुक्रवार, नवंबर 05, 2010

दीवाली का त्यौहार आया...


आज तो दीपावली है. ढेर सारी फुलझड़ियाँ छुड़ाने का दिन. पटाखों से तो मुझे बहुत डर लगता है. उनकी आवाज़ सुनकर तो मैं अपने कान बंद कर लेती हूँ...
और हाँ, आज तो लक्ष्मी-गणेश जी की पूजा भी होगी और फिर ढेर सारी मिठाइयाँ भी. लक्ष्मी-गणेश जी के स्वागत के लिए ही तो घर में सफाई अभियान भी छिड़ा हुआ है. पूजा के बाद ढेर सारे दिए जलाये जायेंगे..कित्ता अच्छा लगता है. मानो सारे तारे ही जमीं पर आ गए हों. उस पर से झिलमिल करती झालरें और मोमबत्तियां...वाह ! मम्मा बता रही थीं की इसी दिन भगवान श्री राम अयोध्या लौटे थे और इस ख़ुशी में अयोध्यावासियों ने दीये जलाकर उनका स्वागत किया था, तभी से दीपावली मनाई जाती है. मैं तो चली दीपावली की तैयारियाँ करने..मतलब ममा का साथ देने।

आप सभी को दीपावली की खूब बधाइयाँ और प्यार !!

बुधवार, अक्टूबर 27, 2010

समुद्र के किनारे पाखी की कलाकारी


यह देखो मैंने समुद्र के किनारे क्या बनाया.
नहीं समझ में आया...अच्छा ये देखिये.
अले वाह, यह तो बन गया...हुर्रे.अब आप भी देख लीजिये. पहले मैंने रेत का टीला बनाया और फिर उसे कोरल्स, सी-शेल, सीप ...और भी बहुत कुछ, से सजाया. अच्छा लग रहा है ना !!

गुरुवार, अक्टूबर 21, 2010

पाखी की इक और ड्राइंग...


..ये रही मेरी एक और ड्राइंग. इसमें मैंने सूरज दादा बनाया, बादल बनाया, फूल बनाये...अले सब मैं ही बता दूंगीं तो आप क्या बताएँगे. अच्छी लगी ना आपको मेरी यह ड्राइंग !!

शनिवार, अक्टूबर 16, 2010

नवरात्र और दशहरा...धूमधाम वाले दिन आए

आज नवरात्र का अंतिम दिन है. कित्ती धूमधाम दिखती है चारों तरफ. कहीं माँ दुर्गा की मूर्तियाँ सजी हुई हैं तो बढ़िया-बढ़िया गाने भी बज रहे हैं. घर में तो आजकल फल, मिठाई और फूलों की पूछिये ही नहीं. मैं तो व्रत नहीं रहती पर व्रत वाले फल इत्यादि खाने में बहुत तेज हूँ. मंदिर में जाकर दर्शन भी करना नहीं भूलती. वहाँ तो बहुत भीड़ होती है. जिसे देखो सब माता जी का दर्शन करने आते हैं. मैंने तो माता जी की खूब पूजा की और आशीर्वाद भी माँगा।पिछले साल जब मैं कानपुर थी तो नवरात्र में मम्मी-पापा के साथ माता जी का दर्शन करने मन्दिर गई तो पुजारी जी ने मुझे एक नहीं दो-दो चुनरी ओढाई, गले में माला डाली और ढेर सारा प्रसाद दिया। वह तो मुझे कभी नहीं भूलता. कल तो दशहरा है. मैंने तो पूरी लिस्ट बना ली है कि क्या-क्या खरीदना है और क्या-क्या खाना है. इस मामले में हम बच्चों का कोई सानी नहीं. दशहरे में मुझे रावण से बहुत डर लगता है. उसकी हंसी कित्ती डरावनी होती है-हा..हा..हा..हा..पिछले साल जब मैं कानपुर में थी तो खूब बड़ा सा रावण देखा था और फिर उसे जला दिया गया..कित्ती आतिशबाजी हुई थी. मैंने तो डर कर अपने कान ही बंद कर लिए थे. अब देखिये इस बार क्या करती हूँ. आप सभी लोगों को नवरात्र और दशहरा की बधाई और ऐसे ही मुझे अपना प्यार और आशीर्वाद देते रहिएगा. मैं तो चली सुबह-सुबह मम्मा का हाथ बँटाने और फिर मिठाइयाँ खाने !!

बुधवार, अक्टूबर 13, 2010

'पाखी की दुनिया' के 100 पोस्ट पूरे ..ये मारा शतक !!

वाह, मेरे ब्लॉग 'पाखी की दुनिया' पर 100 पोस्ट पूरी हो गई...ये मारा शतक. इस शतक की ख़ुशी में पापा ने मेरा मुंह मीठा कराया और फिर ये सुन्दर सी तस्वीर आपके लिए...और ये मैंने ममा का मुंह मीठा कराया...
पापा ने मुझे एक प्यारी सी घडी भी दी. यह रात में रोशनी करती है. इसमें दो घोड़े भी बने हुए हैं. ..और हाँ, जब स्विच-ऑन करो तो घोड़ों की आवाज़ भी सुनाई देती है. अब ये मेरे टेबल की शोभा बढ़ाएगी और समय भी बताएगी.
प्यारी है ना ये घोड़ों वाली घडी...और ये खूबसूरत 100 लाल-गुलाब भी...प्यारे-प्यारे. यह आप सभी के लिए, जो मुझे इत्ता प्यार करते हैं. आप मुझे प्यार नहीं करते तो ये शतक कैसे बनता !!

सोमवार, अक्टूबर 11, 2010

फूलों के बीच पाखी

अंडमान में घूमने-फिरने का खूब मजा है. पिछले दिनों मैं मम्मा-पापा के साथ डिगलीपुर गई. पापा ने बताया यह दक्षिण अंडमान का सबसे अंतिम क्षोर है. पापा को आफिस विजिट करने जाना था, सो वह चले गए. फिर मैं गेस्ट-हॉउस से बाहर निकली तो वहां ढेर सारे फूल दिखाई दिए. फिर तो मैंने मम्मा को आवाज़ दी और खूब फोटोग्राफी कराई. वाह, यह पीले-पीले फूल कित्ते अच्छे लग रहे हैं. वह भी ढेर सारे. इन पर तो तितलियाँ भी छिप जायेंगीं. और यह लाला वाला फूल तो ऐसा लग रहा है, जैसे मधुमखी ने अपना घर बनाया हो. यह तो प्यारा सा गुलाब है. सभी फूलों का राजा. मुझे तो बहुत अच्छा लगता है. एक तोड़कर मम्मा को देती हूँ. यह तो रजनीगंधा है...इसकी खुशबू..वाह. यहाँ तो गेंदे के ढेर सारे फूल खिले हुए हैं. एक फोटो यहाँ भी.
अब यहाँ बैठकर थोडा सा आराम भी कर लेती हूँ. चलते-चलते इक स्टाइल यह भी...!!

मंगलवार, अक्टूबर 05, 2010

टेस्टी-टेस्टी केले....

आपको केले अच्छे लगते हैं, मुझे तो केला खाना बहुत अच्छा लगता है. यहाँ अंडमान में खूब केले मिलते हैं, पर नन्हें-नन्हें. ये देखिये मैंने केलों का पूरा गुच्छा ही कैसे ले लिया है। पूरे 17 हैं. इनका टेस्ट मेन-लैंड में मिलने वाले केलों से अलग है पर वाकई ये बहुत टेस्टी हैं. ...तो आप भी केले खाइए और खूब सेहत बनाइये।
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केले की बात पर याद आया कि बंदरों को केले बहुत पसंद हैं, पर अंडमान में तो बन्दर होते ही नहीं. यहाँ तो बस निकोबार में बन्दर मिलेंगें और वे केकड़े (Crab) भी खाते हैं. अंडमान के आदिवासी तो खूब केले खाते हैं. आपको जल्द ही उनकी भी फोटो दिखाउंगी ...!!

शनिवार, अक्टूबर 02, 2010

हम बच्चों के प्यारे गाँधी जी

आज गाँधी जी का जन्म दिन है. गाँधी जी को राष्ट्रपिता भी कहा जाता है. हमारी टीचर जी ने हमें गाँधी जी के बारे में ढेर सारी बातें बताईं. यह भी बताया कि गाँधी जी बच्चों से बहुत प्यार करते थे. हमने गाँधी जी की फोटो भी देखी है, जिसमें वे लाठी लेकर चलते हैं. यहाँ पोर्टब्लेयर में भी गाँधी जी की स्टैचू लगी हुई है. टीचर जी यह भी बता रही थीं कि गाँधी जी कभी अंडमान नहीं आए. मुझे यह जानकर अच्छा लगा कि गाँधी जी बच्चों से काफी प्यार करते थे और हम बच्चे भी तो गाँधी जी को दिल से चाहते हैं.

रविवार, सितंबर 26, 2010

डाटर्स-डे पर पाखी की ड्राइंग...

आपको पता है, आज डाटर्स डे (Daughters Day) है. डाटर्स-डे पर मुझे क्या करना है...सोचती हूँ आज ममा-पापा को खूब प्यार करूँ. पर ममा-पापा को तो मैं वैसे भी प्यार करती हूँ, फिर इसके लिए किसी दिन की क्या जरुरत. मैं तो वैसे भी प्यारी बिटिया रानी हूँ. आप लोग भी मुझे कित्ता प्यार करते हैं. पापा ने यह तो बताया कि डाटर्स-डे सितंबर माह के चौथे रविवार को मनाया जाता है, पर क्यों मनाया जाता है, यह नहीं बताया...चलिए कोई बात नहीं, आप सब अपनी इस प्यारी सी नन्हीं पाखी को ढेर सारा प्यार और आशीर्वाद देते रहिएगा, आखिर मैं प्यारी बिटिया रानी जो हूँ.



डाटर्स-डे पर मैंने इक ड्राइंग भी बनाई. इसमें मैंने अपनी जैसी ढेर सारी गर्ल्स बनाईं, ये सब डाटर्स-डे पर खूब मस्ती कर रही हैं. इस पर मैंने अपना व ममा का नाम लिखकर पापा को प्रजेंट कर दिया. पापा को तो यह बहुत पसंद आई, आप भी बताइयेगा कि मेरी यह ड्राइंग आपको कैसी लगी...और हाँ, मुझे ढेर सारा प्यार देना भी ना भूलियेगा !!


मंगलवार, सितंबर 21, 2010

करमाटांग बीच पर मस्ती...

पिछले दिनों मम्मा-पापा के साथ मायाबंदर घूमने गई तो वहाँ का करमाटांग बीच भी देखा. लोग बता रहे थे कि सुनामी ने इस बीच को काफी नुकसान पहुँचाया. रास्ते में मैंने एक घर ऐसा भी देखा जो सुनामी के चलते पूरा जमीन में घुस गया था.यहाँ पर हम बच्चों के लिए एक अच्छा पार्क भी था, जो अब तो ख़राब हो चुका है. फिर भी मुझे यहाँ मस्ती करने से कौन रोक सकता है.मैंने वहाँ पर झूले का भी मजा लिया.और मेरा यह अंदाज़ आपको कैसा लगा. जरा इस नारियल के पेड़ पर तो चढ़ कर देखूं. कित्ता मोटा है, मैं तो इसे पकड़ भी नहीं सकती. कित्ती धूप लग रही है. जरा यहाँ चढ़कर भी तो समुद्र को देख लूं कि कित्ता बड़ा है. बड़ा मजा आया यहाँ...खूब मस्ती की, झूला झूला, खूब दौड़ी पेड़ों के बीच, पर बीच पर नहा नहीं पाई क्योंकि सूरज दादा परेशान कर रहे थे और तट पर पानी भी खूब नहीं दिख रहा था.

शुक्रवार, सितंबर 17, 2010

'शुक्रवार' में चर्चित चेहरे के तहत 'पाखी की दुनिया' की चर्चा...

कल मैंने आपको बताया था कि दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान अख़बार में 'ब्लॉग की क्रिएटिव दुनिया' के तहत भारत मल्होत्रा अंकल ने बच्चों से जुड़े ब्लॉगस की चर्चा की है. इस चर्चा को तो आप सभी लोगों ने पसंद ही किया. पर पापा के दिल्ली में पोस्टेड एक मित्र ने जब यह पढ़ा तो अचरज में पड़ गए. वे मेरे नाम से तो परिचित हैं, पर मेरे ब्लॉग से नहीं. फिर उन अंकल जी ने ही यह बताया कि 'पाखी की दुनिया' का जिक्र तो उन्होंने अन्यत्र भी पढ़ा है. इसके बाद उन अंकल जी ने इसे ढूंढने के लिए मेहनत आरंभ कर दी और 'पाखी की दुनिया' की चर्चा मिली 'शुक्रवार' पत्रिका के 31 जुलाई-6 अगस्त अंक में. इसमें 'चर्चित चेहरे' के तहत 'पाखी की दुनिया' का जिक्र किया गया है. और हाँ, ब्लॉग के साथ-साथ मेरे जन्म-दिन, ममा-पापा और स्कूल के बारे में भी बताया गया है. अब तो चर्चा के फायदे भी पता चल गए. आप भी पढ़िए ना और बताइयेगा कि अपनी नन्हीं पाखी के बारे में पढ़कर आपको कैसा लगा-

(पढने में सुविधा के लिए पूरी रिपोर्ट को हू-ब-हू यहाँ पढ़ सकते हैं- प्रतिभा उम्र की मोहताज नहीं, बशर्तें उसे अनुकूल वातावरण मिले। ऐसे ही वातावरण में पली-बसी अक्षिता (पाखी) को वर्ष 2010 की श्रेष्ठ नन्हीं ब्लॉगर का खिताब मिला है। अक्षिता का 'पाखी की दुनिया' http://pakhi-akshita.blogspot.com/ नाम से ब्लॉग है। 25 मार्च, 2007 को कानपुर में जन्मी अक्षिता वर्तमान में कार्मेल स्कूल, पोर्टब्लेयर में नर्सरी में पढ़ती हैं। अक्षिता के पिता कृष्ण कुमार यादव अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के निदेशक, डाक सेवा पद पर पदस्थ हैं और मम्मी आकांक्षा यादव उप्र के एक कालेज में प्रवक्ता हैं। दोनों ही चर्चित साहित्यकार व सक्रिय ब्लॉगर भी हैं। अक्षिता की रूचि ड्राइंग में भी है. पहले तो उसके मम्मी-पापा ने उसकी ड्राइंग पर ध्यान नहीं दिया, लेकिन बाद में उन्होंने इन चित्रों को ब्लॉग के माध्यम से लोगों तक पहुंचाने की कोशिश की.)