आप सब 'पाखी' को बहुत प्यार करते हैं...

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बुधवार, नवंबर 09, 2011

अक्षिता (पाखी) को 'बाल-दिवस' पर 'राष्ट्रीय बाल पुरस्कार'

आप सभी लोगों को सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि वर्ष 2011 हेतु मेरा नाम राष्ट्रीय बाल पुरस्कार (National Child Award) हेतु चयनित हुआ है. यह पुरस्कार मुझे 'कला और ब्लागिंग' (Excellence in the Field of Art and Blogging) के क्षेत्र में उपलब्धि के लिए बाल दिवस, 14 नवम्बर 2011 को विज्ञानं भवन, नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में भारत सरकार की महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती कृष्णा तीर्थ जी द्वारा दिया जायेगा. इसके तहत मुझे 10,000 रूपये नकद राशि, एक मेडल और प्रमाण-पत्र दिया जायेगा.

फ़िलहाल मैं लखनऊ में हूँ और 14 नवम्बर को दिल्ली में यह सम्मान ग्रहण करने के बाद 16 नवम्बर को पोर्टब्लेयर लौट रही हूँ.

इस उपलब्धि पर आप सभी के आशीर्वाद और स्नेह की आकांक्षी हूँ !!

बुधवार, नवंबर 02, 2011

आंध्र प्रदेश से प्रकाशित ईनाडु अख़बार में 'पाखी की दुनिया'


आंध्र प्रदेश से प्रकाशित ईनाडु अख़बार के 25 मई, 2011 अंक में मेरे बारे में प्रकाशित एक रिपोर्ट है. इस अख़बार में लिखी बातों को आप पढ़ सकते हैं. यह हिंदी या अंग्रेजी नहीं तेलुगु भाषा में लिखा है. इसमें मेरे ब्लॉग के बारे में भी लिखा है. आप पढ़ पाइयेगा तो मुझे भी बताइयेगा !!

शुक्रवार, मई 06, 2011

लेखन की अभिमन्यु अक्षिता उर्फ़ पाखी को सलाम

(अख्तर खान 'अकेला' अंकल ने अपने ब्लॉग Akhtar Khan Akela पर आशीर्वचन रूप में मेरे लिए जो कुछ भी लिखा है, बड़ा प्यारा लगा. 'अकेला' अंकल के इस स्नेह और प्यार से अभिभूत हूँ और उनकी यह पोस्ट यहाँ पर साभार आप सभी के साथ शेयर कर रही हूँ)


लेखन की अभिमन्यु अक्षिता उर्फ़ पाखी को मेरा सलाम अर्ज़ है. जी हाँ, एल. के. जी. की एक छोटी सी मासूम बच्ची, जिसके हँसने-खेलने के दिन हो, जिस उम्र के बच्चों को लोग सेंसलेस कहते हैं वही बच्चा अगर अपनी लेखनी, अपने विचारों से, बेस्ट ब्लागर अवार्ड प्राप्त करले, तो बस ख़ुशी से सीना चौड़ा हो जाता है.

अक्षिता (पाखी) का जन्म 25 मार्च, 2007 को हुआ और वर्तमान में वह पोर्टब्लेयर, अंडमान में रह रही हैं. कहते हैं कि अंग्रेजों के ज़माने में यहाँ लोगों को काले पानी की सजा देकर प्रताड़ित किया जाता था और अंडमान-निकोबार केवल इसी सेलुलर जेल के लिए प्रसिद्ध था, लेकिन आज अंडमान-निकोबार और पोर्टब्लेयर को मासूम पाखी पर भी गर्व होने लगा है और अतर्राष्ट्रीय ब्लागिंग की दुनिया अब अक्षिता उर्फ़ पाखी के नाम से जानी जाने लगी है.

इंडियन ब्लागिंग(indiblogger.in) पर 78 वीं रैंक लेकर ब्लागिंग में प्रमुख स्थान प्राप्त करने वाली अक्षिता (पाखी) एक तेज़ तर्रार लेखिका और वक्ता श्रीमती आकांक्षा यादव के गर्भ में पली और शायद अभिमन्यु की तरह ही उन्होंने गर्भ में उसे ब्लागिंग का पाठ पढ़ डाला. उनके पिता कृष्ण कुमार यादव जो कि एक बेहतरीन ब्लागर हैं और दोनों लोग मिलकर शब्द-शिखर, शब्द सृजन की ओर, डाकिया डाक लाया, बाल दुनिया, सप्तरंगी प्रेम, उत्सव के रंग के साथ-साथ 'पाखी की दुनिया' में पाखी के बचपन के अनुभवों को ब्लागरों से शेयर कर रहे हैं इनके आचार-विचार और सुझाव इस ब्लागिंग की दुनिया को हसीन बना रहे है. अभी केवल एल. के. जी. में पढ़ रही एक छोटी सी मुन्नी सी बच्ची पाखी की ब्लागिंग को देखें तो आँखें चकित रह जाती हैं और मन सोचने लगता है, 'कोई काम नहीं है मुश्किल जब किया इरादा पक्का!' पाखी देश का ही नहीं बल्कि विश्व का ऐसा नाम है, जिसके माता-पिता पाखी की भावनाओं, विचारों और उसकी गतिविधियों को ब्लागिंग के माध्यम से शेयर कर रहे हैं और ब्लागिंग की दुनिया इस पाखी से प्रभावित है. अभी पिछले दिनों 30 अप्रैल, 2011 को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री ने जब पाखी को सबसे नन्हीं ब्लागर (Best Bay Blooger Award) का अवार्ड दिया, तो पाखी के माता-पिता का सीना गर्व से चौड़ा हो गया, लेकिन हम भी पाखी के अंकल हैं उसकी छोटी बहन तन्वी के अंकल हैं, अत: हमारा भी सीना गर्व से चौड़ा हुआ जाता है और मन करता है कि पंख लगाकर उड़ें और पोर्टब्लेयर पहुँच कर बिटिया पाखी को गोद में लेकर ढेर सारा प्यार कर, ढेर सारा आशीर्वाद देकर वापस लौट आयें और कह दें कि ब्लागिंग की दुनिया की अभिमन्यु 'पाखी' हमारी ब्लागिंग की आन-बान और शान है !!

- अख्तर खान 'अकेला'
कोटा, राजस्थान
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अख्तर खान 'अकेला' : उर्दू, हिन्दी एवं पत्रकारिता में स्नातकोत्तर, विधि स्नातक और PGD जर्नलिज्म : सम्प्रति वकालत के पेशे में तल्लीन : ह्यूमन रिलीफ सोसायटी के महासचिव : अंतर्जाल पर Akhtar Khan Akela ब्लॉग के माध्यम से सक्रिय.

गुरुवार, मई 05, 2011

4 साल की उम्र में इतना बड़ा इनाम सुन हैरान हो जाएंगे आप


4 साल की उम्र में इतना बड़ा इनाम सुन हैरान हो जाएंगे आप...यह मैं नहीं कह रही हूँ, बल्कि आज 5 मई, 2011 के 'दैनिक भास्कर'' अख़बार में प्रकाशित एक रिपोर्ट है. आप भी इसे पूरा पढ़िए.

पोर्ट ब्लेयर. अंडेमान निकोबार द्वीप समूह की चार वर्षीय अक्षिता यादव को हिंदी साहित्य निकेतन परिकल्पना ने बेस्ट बेबी ब्लॉगर अवॉर्ड 2011 से नवाजा है। नई दिल्ली के हिंदी भवन में आयोजित इंटरनेशनल ब्लॉगर कॉन्फ्रेंस में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने अक्षिता को यह अवॉर्ड दिया।

अक्षिता के पिता कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि इस कार्यक्रम में 51 ब्लॉगर्स ने हिस्सा लिया। ‘पाखी की दुनिया’ केजी 1 की छात्रा अक्षिता को नकद इनामी राशि के अलावा प्रमाणपत्र और मोमेंटो दिया गया। कृष्ण कुमार ने बताया अक्षिता को ड्रॉइंग और पेंटिंग में बहुत रुचि है।

जब हमने देखा कि उसकी पेंटिंग में कुछ खास है तो हमने जून 2009 से इन्हें पाखी की दुनिया ब्लॉग पर पोस्ट करना शुरू कर दिया। इस ब्लॉग की लोकप्रियता का पता इसी से लगता है कि यह 100 प्रमुख हिंदी ब्लॉग में से एक है। इसे 140 ब्लॉगर फॉलो कर रहे हैं। राजस्थान के जाने-माने लेखक दीनदयाल शर्मा अक्षिता की प्रतिभा से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने अपनी किताब छुन-छुन के कवर पेज पर उसका फोटो लिया है।

(इसे पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें)

रविवार, मई 01, 2011

अक्षिता (पाखी) को बेस्ट बेबी ब्लागर अवार्ड





कल देर शाम हिंदी भवन, दिल्ली में 'हिंदी साहित्य निकेतन', परिकल्पना डाट काम, और नुक्कड़ डाट काम द्वारा आयोजित अंतर्राष्ट्रीय हिंदी ब्लॉगर सम्मलेन में मुझे 'बेस्ट बेबी ब्लागर अवार्ड' का ख़िताब मिला. यह पुरस्कार उत्तरांचल के मुख्यमंत्री श्री रमेश पोखरियाल 'निशंक' जी द्वारा दिया गया. मेरा मन तो कार्यक्रम में जाने का था, पर पायलट लोगों की हड़ताल के चलते ऐनवक्त पर फ्लाईट कैंसिल हो जाने के चलते मैं वहाँ जा न सकी. मेरा सम्मान वहाँ चाचू अमित कुमार यादव जी ने ग्रहण किया.

इसके लिए 'हिंदी साहित्य निकेतन'के डा. गिरिजाशरण अग्रवाल दादा जी, परिकल्पना डाट काम के श्री रवीन्द्र प्रभात अंकल जी और नुक्कड़ डाट काम के श्री अविनाश वाचस्पति अंकल जी के साथ-साथ आप सभी के आशीर्वाद और स्नेह के लिए ढेर सारा प्यार और आभार !!

उन सभी अंकल और आंटी जी लोगों को भी बधाई, जिन्हें इस सम्मलेन में अवार्ड मिले !!

(अन्य फोटोग्राफ का नजारा यहाँ लें)

शुक्रवार, सितंबर 17, 2010

'शुक्रवार' में चर्चित चेहरे के तहत 'पाखी की दुनिया' की चर्चा...

कल मैंने आपको बताया था कि दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान अख़बार में 'ब्लॉग की क्रिएटिव दुनिया' के तहत भारत मल्होत्रा अंकल ने बच्चों से जुड़े ब्लॉगस की चर्चा की है. इस चर्चा को तो आप सभी लोगों ने पसंद ही किया. पर पापा के दिल्ली में पोस्टेड एक मित्र ने जब यह पढ़ा तो अचरज में पड़ गए. वे मेरे नाम से तो परिचित हैं, पर मेरे ब्लॉग से नहीं. फिर उन अंकल जी ने ही यह बताया कि 'पाखी की दुनिया' का जिक्र तो उन्होंने अन्यत्र भी पढ़ा है. इसके बाद उन अंकल जी ने इसे ढूंढने के लिए मेहनत आरंभ कर दी और 'पाखी की दुनिया' की चर्चा मिली 'शुक्रवार' पत्रिका के 31 जुलाई-6 अगस्त अंक में. इसमें 'चर्चित चेहरे' के तहत 'पाखी की दुनिया' का जिक्र किया गया है. और हाँ, ब्लॉग के साथ-साथ मेरे जन्म-दिन, ममा-पापा और स्कूल के बारे में भी बताया गया है. अब तो चर्चा के फायदे भी पता चल गए. आप भी पढ़िए ना और बताइयेगा कि अपनी नन्हीं पाखी के बारे में पढ़कर आपको कैसा लगा-

(पढने में सुविधा के लिए पूरी रिपोर्ट को हू-ब-हू यहाँ पढ़ सकते हैं- प्रतिभा उम्र की मोहताज नहीं, बशर्तें उसे अनुकूल वातावरण मिले। ऐसे ही वातावरण में पली-बसी अक्षिता (पाखी) को वर्ष 2010 की श्रेष्ठ नन्हीं ब्लॉगर का खिताब मिला है। अक्षिता का 'पाखी की दुनिया' http://pakhi-akshita.blogspot.com/ नाम से ब्लॉग है। 25 मार्च, 2007 को कानपुर में जन्मी अक्षिता वर्तमान में कार्मेल स्कूल, पोर्टब्लेयर में नर्सरी में पढ़ती हैं। अक्षिता के पिता कृष्ण कुमार यादव अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के निदेशक, डाक सेवा पद पर पदस्थ हैं और मम्मी आकांक्षा यादव उप्र के एक कालेज में प्रवक्ता हैं। दोनों ही चर्चित साहित्यकार व सक्रिय ब्लॉगर भी हैं। अक्षिता की रूचि ड्राइंग में भी है. पहले तो उसके मम्मी-पापा ने उसकी ड्राइंग पर ध्यान नहीं दिया, लेकिन बाद में उन्होंने इन चित्रों को ब्लॉग के माध्यम से लोगों तक पहुंचाने की कोशिश की.)

गुरुवार, सितंबर 16, 2010

दैनिक 'हिंदुस्तान' में हम बच्चों के ब्लॉगस की चर्चा....

आप सभी को हम बच्चों के ब्लॉगस तो खूब भाते हैं ना. तभी तो हम लोगों के ममा-पापा हम बच्चों की बातें आपके सामने लाते हैं. कुछ ब्लॉगस तो हम बच्चों के लिए प्यारी-प्यारी कवितायेँ, कहानी और तमाम बातें भी लेकर आते हैं. दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान अख़बार में आज 16 सितम्बर, 2010 को 'ब्लॉग की क्रिएटिव दुनिया' के तहत भारत मल्होत्रा अंकल ने बच्चों से जुड़े ब्लॉगस की चर्चा की है. इसमें हम होंगे कामयाब, पाखी की दुनिया, बाल-दुनिया, अक्षयांशी, BAL SAJAG, सरस पायस , नन्हा मन का उल्लेख किया गया है. इसे आप इस लिंक पर जाकर देख सकते हैं- ब्लॉग की क्रिएटिव दुनिया .फिर भी इसे यहाँ साभार दे रही हूँ-
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दोस्तो, तुम्हें याद होगा कि कुछ समय पहले हमने तुम्हें बताया था कि तुम अपना ब्लॉग कैसे बना सकते हो। जब हमने नेट पर सर्च किया तो पाया कि ऐसे बहुत से ब्लॉग बच्चों के हैं। कुछ बच्चे खुद ही अपने ब्लॉग को अपडेट करते हैं तो कुछ टेक्निकल जानकारी न होने की वजह से अपने पेरेंट्स या फिर किसी बड़े की मदद ले रहे हैं। जब हमने इन ब्लॉग्स को देखा तो वे बेहद रोचक लगे। कोई अपने पिकनिक पिक्चर नेट पर शेयर कर रहा है तो कोई बता रहा है कि किसी परिणाम से पहले उसे कैसा महसूस हुआ। पेंटिंग, कहानी, कविता, जोक्स आदि जो मन करता है, अपने ब्लॉग पर लिख रहे हैं। चलो मिलते हैं ऐसे ही कुछ बच्चों से, जो किसी स्टार से कम नहीं। भारत मल्होत्रा की रिपोर्ट।

दोस्तो, जब तुम इन ब्लॉग्स की सैर करोगे तो पाओगे कि तुम्हारी ही उम्र के बच्चे अपनी क्रिएटिविटी को कैसे दुनिया भर के लोगों तक पहुंचा रहे हैं। इसके साथ ही यहां होंगे कुछ ऐसे ब्लॉग्स, जो तुम्हारे लिये बेहद फायदेमंद होंगे और जिन्हें पढ़ना तुम्हारे लिये फायदे का सौदा होगा। इनमें कविता है, ड्रॉइंग है, मजेदार कहानियां हैं और सीखने को है बहुत कुछ। वे पापा से चॉकलेट मांगते हैं और मम्मी को तंग करते हैं। दादा-दादी के लाडले हैं और नानी के घर जाकर खूब ऊधम भी मचाते हैं। लेकिन इस सबके बाद भी ब्लॉगिंग भी करते हैं। तो चलो आज कुछ ऐसे ही नन्हे ब्लॉगर्स से मिला जाये-
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http://akshaysdream.blogspot.com/
नवीं कक्षा में पढ़ने वाले छात्र अक्षय का यह ब्लॉग है। वह कहते हैं कि ब्लॉग बनाने की प्रेरणा मुझे अपनी मम्मी से मिली। दरअसल मम्मा जब भी कंप्यूटर में ब्लॉग पर कुछ-कुछ टाइप कर रही होती थीं तो मुझे यह देख कर बहुत अच्छा लगा। मैंने मम्मा से कहा कि मुझे भी बताओ कि कैसे आप टाइप कर लेती हैं। एक खास तरह के फॉन्ट पर मम्मा ने टाइप करना मुझे सिखा दिया। फिर क्या था, मैं जो कविताएं कागज पर लिखा करता था, वह मैं अपने ब्लॉग पर करने लगा। 2007 में बने इस ब्लॉग पर मेरी कविताओं के लिए लगातार कमेंट्स आ रहे हैं। इस ब्लॉग पर मैं कविताओं के अलावा ड्रॉइंग भी बनाता हूं। मैंने अपने ब्लॉग का लिंक अपने ऑरकुट अकाउंट पर दिया हुआ है ताकि मेरे दोस्त भी ब्लॉग के लिंक पर क्लिक करें। देखा दोस्तो, अक्षय अपने ब्लॉग को लेकर कितना उत्साहित है।

http://www.pakhi-akshita.blogspot.com/
इस ब्लॉग के बाद नाम आता है अक्षिता यादव का। अक्षिता का प्यार का नाम पाखी है, यानी चिड़िया। उसकी उम्र तो बेहद कम है, लेकिन हिन्दी ब्लॉगिंग में वो एक जाना-पहचाना नाम बन चुकी है। अक्षिता के ब्लॉग पाखी की दुनिया पर क्लिक करके पहुंचा जा सकता है। इसमें उसकी रोजमर्रा की कहानी भी होती है। बात टीचर्स डे मनाने की हो या फिर जन्माष्टमी की खुशियां मनाने की, अक्षिता हर भावना को व्यक्त करने में कामयाब रही है। इसके साथ ही उसके ब्लॉग पर उसके बनाये चित्र भी देखे जा सकते हैं।

खूबसूरती से रंग भरती है अक्षिता।

अक्षिता अपने मम्मी-पापा के साथ पोर्ट-ब्लेयर में रहती है, लेकिन उसके मम्मी -पापा दोनों ब्लॉगिंग करते हैं। अक्षिता को प्लेयिंग, ड्रॉइंग के साथ-साथ घूमना-फिरना भी बेहद पसंद है, इसके साथ ब्लॉगिंग से तो उसे प्यार है ही। अक्षिता का ब्लॉग बेहद पॉपुलर है और फिलहाल हिन्दी के टॉप 150 ब्लॉगों में से एक है। तुम्हें पता है कि पाखी की तस्वीर तो बच्चों की एक मैगजीन के कवर पर भी छप चुकी है। बहुत पसंद किया जाता है पाखी को। कई अखबारों और पत्र-पत्रिकाओं में पाखी के नाम का जिक्र हो चुका है।

पाखी यह भी कहती है कि ब्लॉगिंग करने से उनके बाकी कामों पर कोई असर नहीं पड़ता। वो पढ़ाई-लिखाई और खेल-कूद के लिये पूरा वक्त निकाल लेती है। ब्लॉग पर उसके काम को देखते हुए उसे एक संस्थान की ओर से 2010 की सर्वश्रेष्ठ नन्ही ब्लॉगर का इनाम भी मिल चुका है। है, न मजेदार बात। हां, एक जरूरी बात, अक्षिता क्यों कि अभी छोटी है, इसलिये अपनी बातें और विचार ब्लॉग पर उतारने के लिये उसे अपने माता-पिता की मदद लेनी पड़ती है।

http://balduniya.blogspot.com/
यूआरएल पर जाकर तुम्हें निराश नहीं होना पड़ेगा। ये ब्लॉग पूरी तरह से तुम्हारे लिये ही हैं। इस पर तुम्हारे लिये ढेरों कवितायें भरी पड़ी हैं। इसके साथ ही कई मजेदार जानकारियां भी हैं, जैसे- हैप्पी बर्थडे गीत की शुरुआत कैसे हुई? फ्रैंडशिप डे के पीछे कौन सी कहानी छुपी है? यह क्यों मनाया जाता है? इसकी शुरुआत कैसे हुई?

इसमें कई रचनायें तो तुम्हारी उम्र के बच्चों की ओर से की गयी हैं। हां, अगर तुम चाहो तो तुम भी अपनी रचना, ड्रॉइंग आदि इस ब्लॉग पर भेज सकते हो, फिर वो तुम्हारे नाम से उसे यहां लगा देंगे। क्यों, है न मजेदार।

http://riddhisingh.blogspot.com/
ब्लॉग देखने में बेहद खूबसूरत लगता है। इसे एक बार देखने से यही लगता है कि कोई बड़ा इस छोटे से बच्चे की भावनाओं को, उसकी बातों को और उसकी शरारतों को तुम तक पहुंचाता है। क्योंकि यह ब्लॉग तुम जैसे ही किसी बच्चे का है, इसलिए वहां कुछ तुम्हें पसंद आए तो कमेंट जरूर करना। मौज-मस्ती से भरपूर यह ब्लॉग तुम्हारा मनोरंजन जरूर करेगा।

http://balsajag.blogspot.com/
बाल सजग एक ऐसा ब्लॉग है, जो बना है सिर्फ तुम बच्चों के लिए। इसकी टीम में सभी मजदूर बच्चे हैं, जो काम करते हैं और साथ ही कवितायें-कहानियां भी कहते हैं। इस ब्लॉग पर आने के बाद तुम्हें अहसास होगा कि भले ही इन बच्चों के पास सुविधाओं की कमी हो, लेकिन टेलेंट की कोई कमी नहीं है। ये बच्चे पेड़ लगाने का मैसेज भी देते हैं और नेताओं पर व्यंग्य भी करते हैं। हां, इनकी भाषा बिल्कुल तुम्हारे जैसी है- सिंपल। इस ब्लॉग पर एक बार आकर देखो, तुम्हें मजा आ जायेगा।

http://saraspaayas.blogspot.com/
इस ब्लॉग को हम लोगों तक पहुंचाने के लिए यह बच्चा अपने पेरेंट्स की मदद लेता है। यह ब्लॉग है रावेंद्र कुमार रवि का, लेकिन है ये तुम्हारे लिये। इसमें कई बच्चों के ब्लॉग के लिंक हैं और साथ ही मजेदार कवितायें भी हैं। इसके साथ ही मजेदार बातें तो हैं ही।

http://nanhaman.blogspot.com/
नन्हा मन इस ब्लॉग का नाम है। ब्लॉग की दुनिया में तुम लोगों के लिये यह एक ऐसा ब्लॉग है, जहां तुम्हारे मनोरंजन का खास ख्याल रखा गया है। और अगर तुम चाहते हो कि तुम्हारी कोई रचना यहां छपे तो nanhaman@gmail.com पर उसे मेल भी कर सकते हो।

दोस्तो, हो सकता है कि तुम्हें अच्छी कहानी, कविता लिखनी आती हो। तुम में से कुछ बच्चे अच्छी पेंटिंग करना भी जानते होंगे। लेकिन जब बात आती है इन सारी चीजों को कंप्यूटर में अपलोड करने की तो हो सकता है तुम्हें इसकी टेक्निकल जानकरी न हो। इस काम के लिए बड़ों की मदद लेने में मत हिचकना। जो बच्चे कंप्यूटर में ब्लांगिग करना चाहते हैं, वे बड़ों को देख-देख एक दिन खुद-ब-खुद एक्सपर्ट हो जाएंगे। हिन्दी में बच्चों के और ब्लॉग्स के लिये क्लिक करें
http://hindikids.feedcluster.com

साभार : Live हिंदुस्तान. com


(प्रकाशित आर्टिकल का चित्र साभार : Hindi Blogs in Media)

गुरुवार, जुलाई 15, 2010

'पाखी की दुनिया' के एक साल और खूबसूरत ख़िताब

हुर्रे..आपको पता है मेरा ब्लॉग एक साल का हो गया. आज मैं आपके साथ अपने ब्लॉग के एक साल होने की ख़ुशी सेलिब्रेट करूँगीं. 'पाखी की दुनिया' ब्लॉग जून, 2009 में आरंभ हुआ था और इसकी पहली पोस्ट 24 जून, 2009 को मैं हूँ पाखी । पर 24 जून तो मुझे याद ही नहीं आया कि मेरा ब्लॉग एक साल का हो गया. पर कोई बात नहीं, इसका बर्थ-डे आज सेलिब्रेट कर लेते हैं. तो ये रहा बर्थ-डे केक. इस ब्लॉग पर अभी तक इस पर कुल 70 पोस्ट प्रकाशित की गई हैं. इस पर मेरे प्यारे ममा-पापा आप लोगों को मेरी गतिविधियों के बारे में बताते रहते हैं। कई बार कुछ रोचक और संदेशप्रद पोस्ट भी प्रकाशित की जाती हैं. आप सभी लोगों को मेरा ब्लॉग अच्छा लगता है, आपके कमेंट्स मुझे और भी अच्छा करने के लिए मोटिवेट करते हैं. चिटठा जगत पर 'पाखी की दुनिया' का सक्रियता क्रमांक 147 है और विभिन्न ब्लॉगों पर इसके 20 हवाले दिए जा चुके हैं. हमारे ब्लॉग को 65 जन अनुसरण करते हैं अर्थात हर एक पोस्ट पर हमें लगभग एक फालोवर मिले. अपने ब्लॉग की साइड में हमने उन ब्लॉगों के लिंक भी लगा रखे हैं, जहाँ हम बच्चों से समबन्धित रचनाएँ, जानकारियाँ मिलती हैं. आप सभी लोगों ने जिस तरह से अपना प्यार-आशीर्वाद-स्नेह दिया है, यूँ ही देतें रहें. और आपके लिए यह केक भी- आप लोगों के आशीर्वाद और प्यार के चलते ही लोकसंघर्ष-परिकल्पना द्वारा आयोजित ब्लागोत्सव-2010 में वर्ष की श्रेष्ठ नन्ही चिट्ठाकारा का ख़िताब भी हमें हासिल हुआ. रवीन्द्र प्रभात अंकल ने लिखा कि- ''एक ऐसी नन्ही ब्लोगर जिसके तेवर किसी परिपक्व ब्लोगर से कम नहीं....जिसकी मासूमियत में छिपा है एक समृद्ध रचना संसार...जो अपने मस्तिस्क की आग को बड़ी होकर पूरी दुनिया के हृदय तक पहुंचाना चाहती है.''..ये रहा वो सम्मान.

सोमवार, जुलाई 12, 2010

वर्ष की श्रेष्ठ नन्ही चिट्ठाकारा : अक्षिता (पाखी)

अक्षिता पाखी हिंदी ब्लॉग जगत की एक ऐसी मासूम चिट्ठाकारा, जिसकी कविताओं और रेखाचित्र से ब्लोगोत्सव की शुरुआत हुयी और सच्चाई यह है कि उसकी रचनाओं की प्रशंसा हिंदी के कई महत्वपूर्ण चिट्ठाकारों से कहीं ज्यादा हुयी । यदि अक्षिता को ब्लोगोत्सव का सुपर स्टार कहा जाए तो शायद न कोई अतिश्योक्ति होगी और न शक की गुंजाईश ही । इसीलिए उसे ब्लोगोत्सव की टीम ने "वर्ष की श्रेष्ठ नन्ही चिट्ठाकारा" का खिताब देते हुए सम्मानित करने का निर्णय लिया है । "जानिये अपने सितारों को" के अंतर्गत आज प्रस्तुत है उनसे पूछे गए कुछ व्यक्तिगत प्रश्नों के उत्तर-

(१) पूरा नाम :
अक्षिता



(३) वर्तमान पता :
द्वारा श्री कृष्ण कुमार यादव, निदेशक डाक सेवाएँ, अंडमान-निकोबार द्वीप समूह, पोर्टब्लेयर-744101

(३) ई मेल का पता :
akshita_06@rediffmail.com

(३) टेलीफोन/मोबाईल न। :
09476046232

(४) प्रमुख व्यक्तिगत ब्लॉग :
पाखी की दुनिया (http://pakhi-akshita.blogspot.com/)

(५) अपने ब्लॉग के अतिरिक्त अन्य ब्लॉग पर गतिविधियों का विवरण :
ब्लागोत्सव में ड्राइंग व बाल-कविता
(http://utsav.parikalpnaa.com/2010/04/blog-post_8277.html),
ताऊजी डाट काम पर बाल-कविता
(http://www.taauji.com/2010/05/blog-post_02.html),
सरस प्यास पर मेरी ड्राइंग और उस पर लिखा गया शिशु गीत

(६) अपने ब्लॉग के अतिरिक्त आपको कौन कौन सा ब्लॉग पसंद है ?
शब्द-शिखर, शब्द सृजन की ओर, उड़न तश्तरी, परिकल्पना, माँ, सरस पायस, ब्लागोत्सव-2010, उत्सव के रंग, डाकिया डाक लाया, आदित्य, माधव, नन्हा मन, बाल सजग, दीन दयाल शर्मा, बाल संसार, फुलबगिया, नन्हें सुमन, बाल सभा, बाल उद्यान, युवा-मन, सप्तरंगी प्रेम, नन्हे मुन्हे, नव सृजन, गीत सहित ढेर सारे।

(७) ब्लॉग पर कौन सा विषय आपको ज्यादा आकर्षित करता है?
बच्चों से जुडी रचनाएँ, ड्राइंग, चर्चा इत्यादि ।

(८) आपने ब्लॉग कब लिखना शुरू किया ?
जून, २००९

(९) यह खिताब पाकर आपको कैसा महसूस हो रहा है ?
बहुत अच्छा लग रहा है।

(१०) क्या ब्लोगिंग से आपकेमें अथवा अन्य आवश्यक कार्यों में अवरोध उत्पन्न नहीं होता ?
नहीं।

(११) ब्लोगोत्सव जैसे सार्वजनिक उत्सव में शामिल होकर आपको कैसा लगा ?
बहुत अच्छा।

(१२) आपकी नज़रों में ब्लोगोत्सव की क्या विशेषताएं रही ?
बड़ों के साथ-साथ बच्चों की रचनाएँ इत्यादि भी प्रस्तुत करना।
(१३) ब्लोगोत्सव में वह कौन सी कमी थी जो आपको हमेशा खटकती रही ?
कोई नहीं।

(१४) ब्लोगोत्सव में शामिल किन रचनाकारों ने आपको ज्यादा आकर्षित किया ?
सबने, सबकी रचनाएँ अच्छी लगी ....!

(१५) किन रचनाकारों की रचनाएँ आपको पसंद नहीं आई ?
कहा न , सबकी रचनाएँ बहुत अच्छी थी ....!

(१६) क्या इस प्रकार का आयोजन प्रतिवर्ष आयोजित किया जाना चाहिए ?
हाँ , मगर बच्चों की भागीदारी ज्यादा होनी चाहिए

(१७) आप कुछ अपने व्यक्तिगत जीवन के बारे में बताएं :
मेरा नाम अक्षिता है। मम्मी-पापा मुझे प्यार से 'पाखी' नाम से बुलाते हैं।मेरा जन्म 25 मार्च, 2007 को को कानपुर में हुआ। मेरा पैतृक स्थान आजमगढ़ है, फ़िलहाल अपने मम्मी-पापा के साथ पोर्टब्लेयर में हूँ। यहाँ में कारमेल स्कूल में नर्सरी में पढ़ती हूँ। मेरी रुचियाँहैं- प्लेयिंग, डांसिंग, ड्राइंग, ट्रेवलिंग, ब्लागिंग, अच्छी-अच्छी रचनाएँ पढना व उन्हें समझने की कोशिश करना।

(१८) चिट्ठाकारी से संवंधित क्या कोई ऐसा संस्मरण है जिसे आप इस अवसर पर सार्वजनिक करना चाहती हैं ?
ब्लोगिंग में कई ऐसे लोग हैं, जिनसे न तो मैं कभी मिली या फोन पर बात की। पर उनका स्नेह देखकर लगता है कि मानो हम उन्हें लम्बे समय से जानते हों। इसी क्रम में बाल साहित्यकार व ब्लोगर दीनदयाल शर्मा अंकल जी ने अपनी बाल-गीतों की पुस्तक 'चूं-चूं' के कवर पेज पर मेरा फोटो लगाया, यह मेरे लिए यादगार पल रहेगा। ऐसे ही एक दिन मेरी ममा के ब्लॉग 'शब्द-शिखर' पर समीर लाल अंकल जी ने टिपण्णी की कि आज पाखी मुँह क्यों फुलाए हुए है, मैंने लिखा कि आज तक आपने मेरे लिए कोई कविता नहीं लिखी और शाम तक समीर अंकल जी ने प्यारी सी कविता लिखकर मेल कर दी। ऐसे ही रावेन्द्र कुमार 'रवि' अंकल जी ने मेरी ड्राइंग पर एक शिशु-गीत ही रच दिया. दो बातें ब्लागोत्सव-२०१० से जुडी हुई कभी नहीं भूलूंगी -पहली, जब पहली बार मैंने इस ब्लॉग उत्सव के बारे में सुना था तो बड़ी उदास हुई थी कि हम बच्चों के लिए वहाँ कुछ नहीं है। फिर मैंने आपको लिखा कि- हम बच्चे इसमें अपनी ड्राइंग या कुछ भेज सकते हैं कि नहीं। जवाब में आप ने लिखा कि अक्षिता जी! क्षमा कीजिएगा बच्चों के लिए तो मैंने सोचा ही नहीं जबकि बिना बच्चों के कोई भी अनुष्ठान पूरा ही नही होता, इसलिए आप और आपसे जुड़े हुए समस्त बच्चों को इसमें शामिल होने हेतु मेरा विनम्र निवेदन है...यह पढ़कर अच्छा लगा कि एक नन्हीं सी बच्ची की बातों को आपने कितने गंभीरता से लिया और बच्चों की इंट्री भी इस उत्सव में सुनिश्चित हो गई. ब्लागोत्सव में पहले दिन ही ''कला दीर्घा में आज : अक्षिता(पाखी) की अभिव्यक्ति'' और उस पर प्राप्त ढेर सारे कमेन्ट देखकर मन प्रफुल्लित हो गया. इन सब संस्मरणों को मैं नहीं भूल सकती।

(19) अपनी कोई पसंदीदा रचना की कुछ पंक्तियाँ सुनाएँ :
गौरैया रोज तिनका लाती
प्यारा सा घोंसला बनाती।
चूं-चूं करते उसके बच्चे
चोंच से खाना खिलाती।

आपका भी बहुत-बहुत आभार अंकल !
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बहुत बहुत धन्यवाद पाखी .....इस अवसर पर ऋग्वेद की दो पंक्तियां आपको समर्पित है कि - ‘‘आयने ते परायणे दुर्वा रोहन्तु पुष्पिणी:। हृदाश्च पुण्डरीकाणि समुद्रस्य गृहा इमें ।।’’अर्थात आपके मार्ग प्रशस्त हों, उस पर पुष्प हों, नये कोमल दूब हों, आपके उद्यम, आपके प्रयास सफल हों, सुखदायी हों और आपके जीवन सरोवर में मन को प्रफुल्लित करने वाले कमल खिले।

(परिकल्पना ब्लॉग उत्सव की टीम ने आपकी प्यारी व लाडली अक्षिता (पाखी) को "वर्ष की श्रेष्ठ नन्ही चिट्ठाकारा" का खिताब देते हुए सम्मानित करने का निर्णय लिया है । इसके लिए रवीन्द्र प्रभात अंकल और सभी लोगों को ढेर सारा प्यार और धन्यवाद. आप सभी अपना प्यार, स्नेह और आशीर्वाद यूँ ही बनाये रहें....और हाँ, इस बात को ब्लागोत्सव- 2010 में सितारों की महफ़िल में आज अक्षिता पाखी शीर्षक से पढना ना भूलें और प्यार के रूप में अपने कमेन्ट भी दीजियेगा.)