आप सब 'पाखी' को बहुत प्यार करते हैं...

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गुरुवार, जून 11, 2015

बारिश का आनंद ...


 जोधपुर में आज झमाझम बारिश का आनंद।  मौसम हुआ सुहाना !!

(चित्र में : अक्षिता (पाखी) और अपूर्वा बारिश का आनंद लेते हुए)

सोमवार, अगस्त 11, 2014

आप भी एक पौधा लगाकर देखिये


10 अगस्त को पापा का जन्मदिन भी था और रक्षाबंधन भी। इस शुभ दिन पर हमने खूब सारे पौधे लगाए। ममा-पापा ने पूरे परिवारजनों से पौधे लगवाए। पापा ने तो बड़ी अच्छी बात कही, ''जब ये पौधे बड़े होकर लहलहाएंगे, उन पर फूल खिलेंगे, फल उगेंगे तो चिड़ियों की चहचहाहट के बीच प्रकृति भी हमें दिल से आशीष देगी !! ''

मुझे तो प्रकृति से बहुत प्यार है।  कई बार सोचती हूँ कि इसके लिए कुछ करूँ।  वाकई पौधरोपण से अच्छा कोई आइडिया नहीं हो सकता।   इस समय तो बारिश का मौसम है, पर इसके बाद  मैं और अपूर्वा सभी पौधों को प्रतिदिन पानी देंगे और  देखेंगे कि ये कैसे बड़े होते हैं !!


आप भी एक पौधा लगाकर देखिये, अच्छा लगेगा !!

शुक्रवार, जून 28, 2013

नन्हा सा, मासूम सा, सकुचाया और शरमाया सा...

बारिश के दिनों में कल शाम को माली जब हमारे लान में स्थित गुड़हल  के पेड़ की छंटाई कर था तो उसे वहां एक चिड़िया का घोंसला दिखा। फिर उसने यह बात  को बताई और जब हमने जाकर देखा तो उस घोंसले में एक चिड़िया का बच्चा था।  


नन्हा सा, मासूम सा, सकुचाया और शरमाया सा ...


नन्हा सा, मासूम सा ...हमें देखते ही अपनी चोंच ऐसे खोलता  मानो भूखा हो।  


एक बारगी हमने सोचा कि  इसे किसी सुरक्षित जगह पर रख दें, पर फिर लगा कि इसकी मां इसे यहाँ न पाकर बहुत परेशान होगी। हमने उसके चारों  तरफ़  पत्तियों का घेरा बनाया, ताकि वह सुरक्षित रहे। कोई पक्षी या जानवर उसे नुकसान न पहुंचा सके। हमने उसके घोंसले में कुछ खाने की चीजें भी  रखवा दी हैं। 

सुबह हमने उसे फिर देखा तो वह अपलक हमें देख रहा था, मानो  कुछ कहना चाहता हो। 

शनिवार, जून 08, 2013

बारिश के दिन

गता है बारिश के दिन आने वाले हैं। आसमां पर छाये बादल और रिमझिम बारिश ने तो अपनी उपस्थिति दर्ज ही करा दी है। कल इलाहाबाद में सुबह-सुबह बारिश हुई तो खूब इंजॉय किया। 


सबकी निगाह बचाकर भीगने का मजा लिया और जब डांट पड़ी तो छाते में।

अपूर्वा ने भी खूब इंजॉय किया। टिप-टिप गिरती बारिश की बूंदों को हथेली में पकड़ने का प्रयास करती।

ये छाता मैं भी ट्राई करती हूँ - अपूर्वा।


पापा भी पीछे नहीं रहे ...

अब तो लगता है कि कितनी जल्दी झमाझम बारिश हो जाए।  

बुधवार, अगस्त 22, 2012

सुन्दर-सुन्दर फूल खिले हैं...

आजकल हमारे बंगले के लान में और आस-पास खूब सारे फूल खिले हैं. बारिश के बाद चारों तरफ खूब हरियाली फैली है. (यह रहा हमारे बंगले के सामने का लान) (यह है हमारा स्विंग..खूब मस्ती होती है यहाँ)(यह रहा ममा-पापा का बैडमिन्टन कोर्ट)(अपूर्वा को तो गुलाब बहुत भाते हैं)









सुबह-सुबह इन खिले फूलों को देखना अच्छा लगता है, तो रात में इनकी भीनी-भीनी खुशबू बहुत अच्छी लगती है.यहाँ खूब सारी बर्ड्स और बटर-फ्लाई आती हैं.

सोमवार, जुलाई 09, 2012

शुरू हो गए स्कूल...

आज से मेरी छुट्टियाँ ख़त्म स्कूल शुरू हो गया. दो माह की इन छुट्टियों में मैंने खूब मस्ती की और घूमी-फिरी. कई नई जगहें भी देखने को मिलीं और नई-नई बातें भी सीखने को मिलीं. यहाँ इलाहाबाद में तो इत्ती गर्मी पड़ रही थी कि पूछिये मत. अब जाकर बारिश ने राहत दी है. इसी गर्मी के चलते तो हम लोगों का स्कूल खुलना भी टलता रहा. पर अब बारिश के साथ ही स्कूल भी खुल गए.पहले दिन ही हम बच्चों ने क्लास में खूब धमा-चौकड़ी की. एक दूसरे से हम लोगों ने पूछा कि कौन कहाँ-कहाँ घूमने गया था. अभी तो मुझे यहाँ क्लास ज्वाइन किए हुए ज्यादा दिन नहीं हुए हैं, पर कुछेक दोस्त तो बन ही गई हैं. सब लोग अपने बारे में बता रहे थे, मैंने भी बताया. पर इसका मतलब यह थोड़े ही कि पढाई बिलकुल नहीं हुई. पढाई भी हुई, क्लास-वर्क भी हुआ और होम-वर्क भी मिला. अब तो खूब मन से पढना है. अगले साल मुझे क्लास-I में जो जाना है !!

सोमवार, अक्टूबर 11, 2010

फूलों के बीच पाखी

अंडमान में घूमने-फिरने का खूब मजा है. पिछले दिनों मैं मम्मा-पापा के साथ डिगलीपुर गई. पापा ने बताया यह दक्षिण अंडमान का सबसे अंतिम क्षोर है. पापा को आफिस विजिट करने जाना था, सो वह चले गए. फिर मैं गेस्ट-हॉउस से बाहर निकली तो वहां ढेर सारे फूल दिखाई दिए. फिर तो मैंने मम्मा को आवाज़ दी और खूब फोटोग्राफी कराई. वाह, यह पीले-पीले फूल कित्ते अच्छे लग रहे हैं. वह भी ढेर सारे. इन पर तो तितलियाँ भी छिप जायेंगीं. और यह लाला वाला फूल तो ऐसा लग रहा है, जैसे मधुमखी ने अपना घर बनाया हो. यह तो प्यारा सा गुलाब है. सभी फूलों का राजा. मुझे तो बहुत अच्छा लगता है. एक तोड़कर मम्मा को देती हूँ. यह तो रजनीगंधा है...इसकी खुशबू..वाह. यहाँ तो गेंदे के ढेर सारे फूल खिले हुए हैं. एक फोटो यहाँ भी.
अब यहाँ बैठकर थोडा सा आराम भी कर लेती हूँ. चलते-चलते इक स्टाइल यह भी...!!

बुधवार, जुलाई 28, 2010

बारिश और रेनकोट...Rain-Rain go away..

यहाँ अंडमान में तो खूब बारिश हो रही है. सुबह स्कूल जाती हूँ तो बारिश होती है और शाम को बारिश के चलते पार्क में भी मस्ती नहीं हो पा रही है. कई बार इत्ती तेज हवाएं होती हैं कि अम्ब्रेला भी किसी काम का नहीं. अब तो मैंने रेन-कोट ले लिया है और इसे पहनकर स्कूल जाती हूँ. बारिश ख़त्म होगी तो फिर से पार्क में मस्ती....Rain-Rain go away
Come again another day
Little Pakhi wants to play
Rain-Rain go away.

सोमवार, मई 24, 2010

अंडमान में आए बारिश के दिन

आजकल अंडमान में खूब बारिश हो रही है. जब देखो तब बिजली कड़कने लगती है और बादल गरजने लगते हैं. कित्ता डर लगता है, बिजली की गडगडाहट सुनकर. पर इन सबके बीच छाता लेकर घूमने का मजा ही कुछ और है.

कभी बारिश आती है, तो कभी जाती है।

जब तेज हवा चलती है तो ऐसे लगता है कि मेरी छतरी तो गई. मेरे साथ-साथ पेड़-पौधे और ये गुलमोहर के फूल भी बारिश का मजा ले रहे हैं. अब देखिये, बारिश में भीगा-भीगा पोर्टब्लेयर भी कित्ता सुन्दर लगता है.



बुधवार, मार्च 31, 2010

अंडमान में रिमझिम-रिमझिम बारिश

रिमझिम-रिमझिम बारिश तो मुझे बहुत भाती है. आज इन्तजार पूरा हुआ. अंडमान में पहली बारिश आज हुई. कल रात को भूकंप और आज दोपहर में बारिश. भूकंप के समय तो मैं बिस्तर पर कूद रही थी, मुझे लगा कि मेरे कूदने से बिस्तर हिल रहा है. पर कुछ ही क्षण में पता चला कि यह भूकंप जी हैं, जो हमें झूला झुला रहे हैं...फिलहाल बारिश की बातें. अभी तो यहाँ भी थोड़ी-थोड़ी गर्मी पड़ने लगी थी, पर अब बारिश इसी तरह हुई तो मजा आ जायेगा. बारिश में यहाँ घूमने में भी मजा आयेगा. नो गर्मी, नो टेंशन. खूब घुमूंगी और मस्ती करूँगीं !!

शनिवार, जुलाई 11, 2009

बारिश के दिन

बारिश का मौसम हो तो घूमने का मजा ही कुछ अलग है. मुझे बारिश में भीगने का मन करता है, पर मम्मी-पापा ऐसा नहीं करने देते. जब भी बाहर निकलो हाथ में अम्ब्रेला थमा देते हैं. अब ये भी कोई बात हुई. बस सोच रही हूँ, कहाँ मम्मी-पापा इधर-उधर हों और मैं उनकी निगाहों से बचकर बारिश में भीगने का मजा लूं !!