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सोमवार, जनवरी 23, 2017

नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर शत-शत नमन


नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 120वीं जयंती पर शत-शत नमन। 'तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आज़ादी दूंगा" का आह्वान करने वाले नेताजी की यह प्रतिमा पोर्टब्लेयर (अण्डमान-निकोबार द्वीप समूह) में मरीना पार्क में लगी है। कुछ समय के लिये यह द्वीप नेताजी सुभाषचंद्र बोस की आज़ाद हिन्द फौज के अधीन भी रहा था। नेताजी ने इन द्वीपों का शहीद और स्वराज द्वीप नामकरण किया था।

आज नेताजी की जयंती पर इस बाल कविता का आनंद लीजिये -


वह इस युग का वीर शिवा था,
आज़ादी का मतवाला था।
जन-मन पर शासन था उसका,
दृढ़ तन कोमल मन था उसका।
शासन की मुट्ठी से निकला,
और कभी फिर हाथ ना आया।
शासन के सब यत्न विफ़ल कर,
साफ़ गया वह वीर निकल कर।
वह अफ़गानिस्तान गया था,
जर्मनी औ' जापान गया था।
एकाकी था, सेना लाया,
और विजेता बनकर आया।
काँप उठी थी गोरा-शाही,
नाच उठी चहुँ ओर तबाही।
वह सचमुच का ही नेता था,
रक्त ले आज़ादी देता था।
प्रतिपल ख़तरों ही में रहना,
उसके साहस का क्या कहना।
आशा को थी आशा उस से,
और निराश निराशा उस से।
इम्फल तक वह आ पहुँचा था,
लक्ष्य को सम्मुख देख रहा था।
हा! लकिन दुर्भाग्य हमारा,
छिपा उदय होते ही तारा।
रण का पाँसा पलट गया था,
बिगड़ गया जो काम बना था।
अभी हमें संकट सहना था,
पर-अधीन अभी रहना था।
वाहन लेकर वायुयान का,
और छोड़ कर मोह प्राण का।
चला गया वह समर-भूमि से,
निज भारत की अमर भूमि से।
कौन कहे फिर कहाँ गया वह,
हुआ वहीं का जहाँ गया वह।

@ डॉ. राणा प्रताप सिंह गन्नौरी 'राणा'



बुधवार, अक्टूबर 22, 2014

पावन पर्व दीपावली का


पावन पर्व दीवाली का,
दीपों की बारात लाए।
बम, पटाखे, फुलझड़ी संग,
खुशियों की सौगात लाए।

तोरण द्वार पर सजे अल्पना,
ज्योति का पुंज-हार लाए।

खील-लड्डू का चढ़े प्रसाद,
दिलों में सबके प्यार लाए।

है शुभ मंगलकारी पर्व यह,
इस दिन अयोध्या राम आए।
जल उठी दीपों की बाती,
पुलकित मन पैगाम लाए।

अमावस्या का तिमिर चीरकर,
रोशनी का उपहार लाए।
चारों तरफ सजे रंगोली,
लक्ष्मी-गणेश भी द्वार आए।

( दीपावली के शुभ पर्व पर मम्मी की लिखी एक कविता)

!! आप सभी को दीपावली पर्व पर सपरिवार शुभकामनाएँ !!

रविवार, सितंबर 21, 2014

काश वो बचपन फिर लौट आए


काश वो बचपन फिर लौट आए। वो प्यारे-प्यारे गीत जिनसे बचपन की पहचान जुडी हुई है। जिन्हे हम दिल से गाते-गुनगुनाते थे और खेल खेलते थे। तो वो यादें फिर से ताज़ा कर लीजिये और एक बार फिर से गुनगुनाते हैं।

मछली जल की रानी है,
जीवन उसका पानी है।
हाथ लगाओ डर जायेगी
बाहर निकालो मर जायेगी।
************
पोशम्पा भाई पोशम्पा,
सौ रुपये की घडी चुराई।
अब तो जेल मे जाना पडेगा,
जेल की रोटी खानी पडेगी,
जेल का पानी पीना पडेगा।
जेल में ही रहना पड़ेगा।
*********************
आलू-कचालू बेटा कहाँ गये थे,
बन्दर की झोपडी मे सो रहे थे।
बन्दर ने लात मारी रो रहे थे,
मम्मी ने पैसे दिये हंस रहे थे।
**************
मामा मामा भूख लगी है,
खालो बेटा मूँगफली है।
मूँगफली में दाने नहीं,
हम तम्हारे मामा नहीं।
******************
आज सोमवार है,
चूहे को बुखार है।
चूहा गया डाक्टर के पास,
डाक्टर ने लगायी सुई,
चूहा बोला उईईईईई।
************
झूठ बोलना पाप है,
नदी किनारे सांप है।
काली माई आयेगी,
तुमको उठा ले जायेगी।
************
चन्दा मामा दूर के,
पूए पकाये भूर के।
आप खाएं थाली मे,
मुन्ने को दे प्याली में।
************
लाला जी ने केला खाया,
उसका छिलका वहीँ गिराया।
पैर के नीचे छिलका आया,
लाला जी गिरे धडाम।
मुँह  से निकला हाय राम।
********************
तितली उड़ी,
बस मे चढी।
सीट ना मिली,
तो रोने लगी।
ड्राईवर बोला, आजा मेरे पास,
तितली बोली ” हट बदमाश “।
******************
मोटू सेठ,
पलंग पर लेट ,
गाडी आई,
फट गया पेट
**********
....सब हम ही लिख देंगे, कुछ आप भी तो...

(पापा की फेसबुक-वाल से साभार। अच्छा लगा पढ़ना सो आप सभी के साथ शेयर कर रही हूँ)

रविवार, मई 11, 2014

वो परी कोई और नहीं, माँ ही थी


बचपन में
माँ रख देती थी चाॅकलेट
तकिये के नीचे
कितना खुश होता
सुबह-सुबह चाॅकलेट देखकर।
माँ बताया करती 
जो बच्चे अच्छे काम     
करते हैं
उनके सपनों में परी आती
और देकर चली जाती चाॅकलेट।
मुझे क्या पता था
वो परी कोई और नहीं
माँ ही थी।



आज मदर्स डे है।  मेरी मम्मी बहुत प्यारी हैं, केयरिंग हैं और बिना कहे ही मेरी बात समझ जाती हैं।  मेरी मम्मी मेरे जीवन में सबसे महत्वपूर्ण स्थान रखती हैं और उनकी वजह से मैं आज इस दुनिया में हूँ। मैं हर छोटी-बड़ी बात  मम्मी से शेयर करती हैं। जब भी कभी किसी परेशानी या उलझन में होती हूँ तो मम्मी  से बात करके जो सुकून मिलता  है, वह कहीं नहीं। मम्मी  की प्यार भरी डांँट, प्यार, दुलार, मम्मी के हाथ का बना हुआ खाना,  बीमार होने पर रात भर मम्मी  का जगकर गोदी में सर लिए बैठे रहना, हमारी हर छोटी से छोटी जिद को पूरी करना .... सच कहूँ तो ऐसा लगता है जैसे मम्मी भगवान का ही दूसरा रूप है।

(इस खास दिन पर पापा श्री कृष्ण कुमार यादव जी की एक कविता उनके काव्य-संग्रह 'अभिलाषा' से )


शुक्रवार, अप्रैल 04, 2014

स्कूल है रोज जाना

हॉलिडेज़ ख़त्म, 3 अप्रैल से स्कूल शुरू। अब पूरे अप्रैल भर चलेंगी क्लासेज़। नई किताबें, नया जोश। क्योंकि अब हम पहुँच गए हैं क्लॉस 2 में।  लीजिए, इसी बात पर पापा का एक बाल-गीत भी, जिसे उनके बाल-गीत संग्रह 'जंगल में क्रिकेट' से लिया है !!



स्कूल है रोज जाना
स्कूल जाएंगे हम रोजाना,
नहीं करेंगे कोई बहाना।
भूख अगर लग जाए वहाँ, 
टिफिन खोल खाएंगे खाना।


टीचर की सब मानें बात,
मन से करें पढ़ाई।
हम सब बच्चे मिलजुल रहते,
करें न कभी लड़ाई।


पढ़-लिख कर हम बढ़ेंगे आगे,
सपने सच करेंगे।
शिक्षा सब कुछ देगी हमको,
इसका मान करेंगे। 

शुक्रवार, अक्टूबर 04, 2013

'सादर इंडिया' के बाल साहित्य विशेषांक में अक्षिता की रचनाएँ


'सादर इंडिया' ( मासिक, सितम्बर 2013, गुडगाँव से प्रकाशित)  के बाल साहित्य विशेषांक में अक्षिता की तीन रचनाएँ पढ़ सकते हैं।

बुधवार, अक्टूबर 02, 2013

मिल्क पाउडर ही पी जाएँ


दूध पीना मुझे भाता
पर बड़ी परेशान हूँ
किससे मैं शिकायत करूँ
होती बड़ी हैरान हूँ। 

दूध वाला ना अच्छा दूध दे
बस पानी की भरमार है 
जब उससे करूँ शिकायत 
रोये, महँगाई की मार है।

दूध में पानी या पानी में दूध
कुछ भी समझ ना आये
इससे अच्छा तो अब
मिल्क पाउडर ही पी जाएँ।

शनिवार, सितंबर 28, 2013

पकड़ी जाती मेरी शैतानी


छुई-मुई सी मैं गुडिया 
सोच रही नई शैतानी 
पर हमेशा पकड़ी जाती
होती फिर मुझको हैरानी।

मम्मी-पापा की लाडली
करती हूँ अपनी मनमानी
मम्मी बोले बस भी करो
बंद करो अपनी शैतानी।

(चित्र : अपूर्वा)

सोमवार, सितंबर 09, 2013

नन्ही गौरैया


नन्ही गौरैया 
उड़कर आई नन्ही गौरैया
लान में हमारे। 
चूं-चूं करते उसके बच्चे 
लगते कितने प्यारे।

गौरैया रोज तिनका लाती
प्यारा सा घोंसला बनाती।
चूं-चूं करते उसके बच्चे
चोंच से खाना खिलाती।

सोमवार, जुलाई 29, 2013

'गगन स्वर' में अक्षिता (पाखी) की रचनाएँ


गाजियाबाद से प्रकाशित 'गगन स्वर' पत्रिका के जून-जुलाई 2013  अंक में मेरी दो बाल-रचनाएँ पढ़ सकते हैं। ये दोनों रचनाएँ इससे पूर्व ताऊ जी डाट काम और परिकल्पना ब्लागोत्सव में प्रकाशित हैं !!


मिल्क पाउडर ही पी जाएँ

दूध पीना मुझे भाता
पर बड़ी परेशान हूँ
किससे मैं शिकायत करूँ
होती बड़ी हैरान हूँ . 

दूध वाला ना अच्छा दूध दे
बस पानी की भरमार है 
जब उससे करूँ शिकायत 
रोये, महँगाई की मार है. 

दूध में पानी या पानी में दूध
कुछ भी समझ ना आये
इससे अच्छा तो अब
मिल्क पाउडर ही पी जाएँ.


 नन्ही गौरैया  

उड़कर आई नन्ही गौरैया 
लान में हमारे। 
चूं-चूं करते उसके बच्चे 
लगते कितने प्यारे। 

गौरैया रोज तिनका लाती 
प्यारा सा घोंसला बनाती। 
चूं-चूं करते उसके बच्चे 
चोंच से खाना खिलाती। 


बुधवार, जून 05, 2013

धरती पर हरियाली लाओ...


आज विश्व पर्यावरण दिवस है। पर्यावरण के लिए पेड़-पौधे बहुत जरुरी हैं। इनके बिना तो सब कुछ सूना है। आज इस दिवस पर , ममा के बाल-गीत संग्रह "चाँद पर पानी'' से एक छोटी सी कविता- 



पेड़-पौधे खूब लगाओ,
धरती पर हरियाली लाओ।

पेड़ हमें छाया-फल देते,
बदले में हैं कुछ नहीं लेते।

पेड़ों पर पक्षी चहचहाते,
हर मौसम में मन हर्षाते।

प्रदूषण को दूर भगाते,
शोषण इनको नहीं सुहाते।

देते सबको जीवन दान,
आओ करें इनका सम्मान।

- आकांक्षा यादव -

रविवार, मई 12, 2013

'माँ' ही तो 'परी' है


आज मदर्स डे है. हर साल मई माह के दूसरे रविवार को यह सेलिब्रेट किया जाता है.वैसे तो ममा से प्यार जताने के लिए किसी खास दिन की जरुरत नहीं, पर आज का दिन तो सिर्फ ममा का है..आज के दिन के लिए ममा को ढेर सारा प्यार और बधाई. U r the best Muma.


                                                           (चित्र में : ममा, मैं और अपूर्वा)

 मैं तो अपनी ममा से बहुत प्यार करती हूँ. इस मदर्स डे पर हम बनारस में हैं और मैं पापा के साथ मिलकर ममा को कोई सरप्राइज गिफ्ट दूंगी।

कहते हैं माँ 'परी' का दूसरा रूप होती है। आज मदर्स डे पर आप सबके साथ पापा की एक छोटी व प्यारी सी कविता 'परी' शेयर कर रही हूँ !

बचपन में
माँ रख देती थी चाकलेट
तकिये के नीचे
कितना खुश होता
सुबह-सुबह चाकलेट देखकर।
माँ बताया करती 
जो बच्चे अच्छे काम     
करते हैं
उनके सपनों में परी आती
और देकर चली जाती चाकलेट।
मुझे क्या पता था
वो परी कोई और नहीं
माँ ही थी।





शुक्रवार, दिसंबर 14, 2012

मछली जल की रानी है


पिछली पोस्ट में मैंने अपने एक्वेरियम के बारे में बताया था। कि कैसे मैंने ढेर सारी मछलियाँ रखी हैं और उनकी केयर भी करती हूँ। आज आपको मछली रानी को लेकर स्कूल में पढाई गई राइम बताती हूँ। इसे स्कूल में सुनकर हमें खूब हँसी आती थी।अब इसे हमने अपनी सिस्टर अपूर्वा को भी सिखा दिया है, वह भी खूब मन से गाती है। आप भी पढ़िए-


मछली जल की रानी है।
जीवन उसका पानी है।

हाथ लगाओ तो
डर जाती है।

बाहर निकालो तो
मर जाती है।

कुकर में डालो तो
पक जाती है।

दो दिन रखो तो
सड़ जाती है।

मंगलवार, अक्टूबर 02, 2012

बच्चों के बापू...


देश के प्यारे गाँधी बाबा,
बच्चों के बापू कहलाए।
सत्य-अहिंसा की नीति से,
देश को आजादी दिलवाए।
 
सूरज से चमकें बापू जी,
कभी न हिम्मत हारे थे।
अंग्रेजों को मार भगाया,
पीछे-पीछे सारे थे।
 
हम बच्चों के प्यारे बापू,
सपनों में जब आते हैं।
सत्य, अहिंसा, दया, धर्म,
देश-प्रेम का पाठ पढ़ाते हैं।
 
(आज राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी जी का जन्मदिन है. इस दिन पर पढ़िए पापा की यह प्यारी सी कविता)

शनिवार, सितंबर 08, 2012

अब सबका अधिकार है पाना...


शिक्षा है अनमोल खजाना,
इसको कोई भूल न जाना।
विद्या और संस्कार है देती,
अब सबका अधिकार है पाना।

शिक्षित हो आगे बढ़ें हम,
जग में नाम कमाएंगे।
प्रगति पथ पर हो अग्रसर,
सुंदर काम कर जाएंगे।

शिक्षा देती है संस्कार,
बन विनम्र करें उपकार।
सद्गुण सारे अपनाएं,
उजियारा फिर फैलाएं।

पुस्तकों से परे भी सोचें,
सब शिक्षित खुशहाल बनें।
ज्ञान को आपस में बाँटें,
भारत अपना महान बने।

(आज 8 सितम्बर को विश्व शिक्षा दिवस है. पढने, पढ़ाने और लोगों को इस तरफ प्रेरित करने का दिन. आज के इस दिन पर पापा श्री कृष्ण कुमार यादव जी की यह खास कविता)

शनिवार, जुलाई 28, 2012

पाखी की बिल्ली




पाखी ने बिल्ली पाली.
सौंपी घर की रखवाली.

फिर पाखी बाज़ार गयी.
लाये किताबें नयी-नयी.

तनिक देर जागी बिल्ली.
हुई तबीयत फिर ढिल्ली.

लगी ऊंघने फिर सोयी.
सुख सपनों में थी खोयी.


मिट्ठू ने अवसर पाया.
गेंद उठाकर ले आया.

गेंद नचाना मन भाया.
निज करतब पर इठलाया.


घर में चूहा आया एक.
नहीं इरादे उसके नेक.

चुरा मिठाई खाऊँगा.
ऊधम खूब मचाऊँगा.


आहट सुन बिल्ली जागी.
चूहे के पीछे भागी.

झट चूहे को जा पकड़ा.
भागा चूहा दे झटका.


बिल्ली खीझी, खिसियाई.
मन ही मन में पछताई.

अगर न दिन में सो जाती.
खो अवसर ना पछताती.

******

रविवार, मई 13, 2012

मेरी ममा सबसे प्यारी



आपको पता है आज मदर्स डे है. हर साल मई माह के दूसरे रविवार को यह सेलिब्रेट किया जाता है. मैं तो अपनी ममा से बहुत प्यार करती हूँ.मुझे पता है कई बार मैं उन्हें बहुत परेशान करती हूँ पर ममा कभी बुरा नहीं मानती. मुझे ढेर सारा प्यार-दुलार देती हैं. मेरी ममा सबसे प्यारी हैं.
आज मदर्स डे पर मैंने सुबह जगते ही ममा को विश किया और उन्हें एक प्यारा सा कार्ड और चाकलेट दिया. साथ में प्यारे-प्यारे गुलाब के फूल भी दिया और अपनी एक ड्राइंग भी दी. आज संडे भी है, सो पापा भी घर पर रहेंगे. शाम को हम लोग ढेर सारी जगहें घूमने जायेंगे, और जब थक जायेंगे तो पापा हम लोगों को शानदार डिनर कराएँगे.

वैसे तो ममा से प्यार जताने के लिए किसी खास दिन की जरुरत नहीं, पर आज का दिन तो सिर्फ ममा का है..आज के दिन के लिए ममा को ढेर सारा प्यार और बधाई. U r the best Mama.





मम्मी की दुलारी
मम्मी मेरी सबसे प्यारी,
मैं मम्मी की राजदुलारी।
मम्मी मुझसे प्यार जताती,
अच्छी-अच्छी चीजें लाती।

करती जब भी मैं मनमानी,
मम्मी याद दिलाती नानी।
फिर मम्मी करती है प्यार,
मेरा भी गुस्सा बेकार।

पीछे-पीछे मम्मी आती,
चाकलेट दे मुझे मनाती।
थपकी देकर लोरी गाती,
निंदिया प्यारी मुझको आती।।










(यह बाल-गीत ममा के संग्रह 'चाँद पर पानी' से लिया गया है )

बुधवार, मई 09, 2012

जंगल में हुआ क्रिकेट और चाँद पर बरसा पानी




(आपने कई बार मेरे ब्लॉग 'पाखी की दुनिया' में ममा-पापा की बाल-रचनाएँ पढ़ी होंगीं. अब तो इन सबको मिलकर ममा-पापा का बाल-गीत संग्रह भी आ गया है. ममा का बाल-गीत संग्रह है- 'चाँद पर पानी' और पापा का है- 'जंगल में क्रिकेट'. पिछले दिनों इनका दिल्ली में विमोचन भी हुआ. हमने सोचा तो था कि विमोचन में जाएंगें, पर ऐनवक्त पर पापा की व्यस्तता के चलते न जा सके. इस कार्यक्रम की एक कवरेज आप भी पढ़िए )


"शेर चंद ने उठाया बल्ला, चीता फिर से गली में दुबका. हाथी ने दस्ताने बांधे, चिड़िया लगी है गेंद चमकाने. जंगल में यदि क्रिकेट खेला जाए तो कुछ ऐसा ही होगा. है ना ? और सोचिये चाँद पर यदि बरसेगा पानी तो कैसे कहेंगे दादा-दादी कहानी ? इन बातों पर लिखे गए गीत बच्चों को खूब पसंद आएँगे. दिल्ली में पिछले दिनों ऐसे ही दो बाल-गीत संग्रहों का विमोचन हुआ. "

राष्ट्रभाषा स्वाभिमान न्यास और भारतीय सांस्कृतिक सम्बन्ध परिषद् द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में पूर्व राज्यपाल डा. भीष्म नारायण सिंह और डा. रत्नाकर पाण्डेय (पूर्व सांसद) ने जंगल में क्रिकेट एवं चाँद पर पानी नामक दो पुस्तकों का विमोचन किया.चर्चित साहित्यकार और चिट्ठाकार कृष्ण कुमार यादव और आकांक्षा यादव द्वारा लिखी गई इन दोनों पुस्तकों में 30-30बाल-गीत संगृहीत हैं.


इस अवसर पर पूर्व राज्यपाल डा. भीष्म नारायण सिंह ने कहा कि बाल-साहित्य बच्चों में स्वस्थ संस्कार रोपता है, अत: इसे बढ़ावा दिए जाने क़ी जरुरत है. पूर्व सांसद डा. रत्नाकर पाण्डेय ने इस युगल के बाल-गीत संग्रह क़ी प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि इसमें आज का बचपन है और बीते कल का भी और यही बात इन संग्रह को महत्वपूर्ण बनाती है. कार्यक्रम में राष्ट्रभाषा स्वाभिमान न्यास के संयोजक डा. उमाशंकर मिश्र ने कहा कि यदि युगल दंपत्ति आज यहाँ उपस्थित रहते तो कार्यक्रम कि रौनक और भी बढ़ जाती. गौरतलब है कि अपनी पूर्व व्यस्तताओं के चलते यादव दंपत्ति इस कार्यक्रम में शरीक न हो सके. आभार ज्ञापन उद्योग नगर प्रकाशन के विकास मिश्र द्वारा किया गया.

साभार : हिंदी होम पेज


सोमवार, अप्रैल 23, 2012

....ताकि हर बच्चा पढ़ सके !!

आज विश्व पुस्तक दिवस है. मुझे तो पुस्तकें पढना बहुत अच्छा लगता है. इन पुस्तकों में होती हैं- ढेर सारी प्यारी-प्यारी बातें, राइम और चित्र.वाह...कित्ता मजा आता है. मैं अपनी पुस्तकें खूब अच्छे से रखती हूँ, नहीं तो पुरानी और गन्दी नहीं हो जायेंगीं.अब तो अपूर्वा भी मेरी बुक्स देखकर पढ़ने के लिए जिद करती है. उसे चित्र देखना खूब अच्छा लगता है.
***********************
क्या आप जानते हैं कि हमारे देश में कई लोग ऐसे हैं, जो पढ़ना तो चाहते हैं पर उनके पास पुस्तक खरीदने के लिए पैसे ही नहीं. जब मैं अंडमान से इलाहाबाद आ रही थी तो वहाँ एक अनाथालय में गई थी। इन सभी के मम्मी-पापा नहीं थे। कुछ तो पढ़ना चाहते हैं, पर कोई मदद करने वाला नहीं। फिर मैंने उनके लिए कुछ किताबें खरीदीं और साथ में अपनी तमाम पुरानी पुस्तकों को भी लेकर उन सभी को दे दिया. उस दिन वे बहुत खुश हुए. यह काम मैंने कानपुर से अंडमान जाते समय भी किया था.




आज विश्व पुस्तक दिवस है..आप भी कुछ ऐसा ही कीजिये ताकि हर बच्चा पढ़ सके. अपने घर में पुरानी हो चुकी पुस्तकें रद्दी में बेचने की बजाय उन लोगों तक पहुँचा दीजिये, जिन्हें वाकई इसकी जरुरत हैहै।




और चलते-चलते "विश्व पुस्तक दिवस" पर यह कविता। इसे मेरे पापा ने लिखा है.....





प्यारी पुस्तक, न्यारी पुस्तक



ज्ञानदायिनी प्यारी पुस्तक



कला-संस्कृति, लोकजीवन की



कहती है कहानी पुस्तक।




अच्छी-अच्छी बात बताती



संस्कारों का पाठ पढ़ाती



मान और सम्मान बड़ों का



सुन्दर सीख सिखाती पुस्तक।




सीधी-सच्ची राह दिखाती



ज्ञान पथ पर है ले जाती



कर्म और कर्तव्य हमारे



सद्गुण हमें सिखाती पुस्तक।









शनिवार, मार्च 31, 2012

अक्षिता (पाखी) की पहली कविता 'चकमक' में प्रकाशित




अब मैं बड़ी हो गई हूँ. ममा-पापा के साथ-साथ मैं भी कवितायेँ कहने (मैं कहती हूँ और ममा-पापा उसे पन्नों पर लिखते जाते हैं) लगी हूँ. अभी मेरी एक नन्हीं सी कविता 'फुर्र-फुर्र' चकमक (भोपाल से प्रकाशित बाल विज्ञान पत्रिका) के फरवरी-2012 अंक में प्रकाशित हुई है. पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित यह मेरी पहली कविता है. चलिए, आपको भी अपनी यह नन्हीं सी कविता पढ़ाती हूँ-

गिलहरी चढ़ी
पेड़ के उपर
फिर एक
तोता भी आया
फिर एक
कौआ भी आया
दोनों उड़ गए
फुर्र-फुर्र-फुर्र मस्ती से !