आप सब 'पाखी' को बहुत प्यार करते हैं...

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सोमवार, मार्च 27, 2023

Nature is the best teacher


Nature is the best teacher.

It is mother of all the creatures.

Nature always gives us the hope,

To climb up in life with any kind of rope.

BY- AKSHITAA🙂


रविवार, मई 10, 2015

माँ से प्यारा कोई नहीं

माँ से प्यारा कोई नहीं।  हम तो हमेशा अपनी मम्मी-पापा  के साथ ही रहते हैं।  जब पापा ऑफिस चले जाते हैं तो फिर मम्मी के साथ ही दिन भर शरारतें और मस्ती। वैसे मां को सम्मानित करने के लिए मई माह के दूसरे रविवार को मदर्स डे मनाया जाता है। पर माँ के लिए एक दिन ही क्यों, हर दिन तो माँ का ही है। माँ हमारी सबसे बेस्ट फ्रेंड भी तो होती हैं, इससे पहले कि हम कोई बात कहें, माँ झट से समझ लेती हैं।  माँ को लेकर पापा जी की एक बाल-कविता भी पढ़िए। 

कितनी प्यारी मेरी मम्मी,
परी सी मुझको लगती है।
अपनी खुशियाँ देखे मुझमें,
हरदम हँसती रहती है।


मम्मी मुझको स्कूल छोड़ती,
फिर आॅफिस चली जाती है।
शाम को फिर लेने आती,
कार में सैर कराती है।


पार्क में और माॅल घुमाती,
चाॅकलेट खिलाती है।
क्लास में मैं रहूँगी अव्वल,
होमवर्क करवाती है।




माँ से प्यारा कोई नहीं 

शुक्रवार, अक्टूबर 24, 2014

एनिमेटेड रंग जमाए है


आजकल एनिमेशन का जमाना है।  जब चाहो, जैसे चाहो, जिसे चाहो .... इसमें ढाल दो और फिर इंजॉय करो।  वैसे हम बच्चों के लिए यह सीखने का अच्छा माध्यम भी है। इसके लिए हम बच्चों की दीवानगी है तो फिर मम्मी-पापा की डांट भी।  आखिर अति हर चीज की बुरी होती है।  आप भी देखिये कि 'पाखी की दुनिया' के लिए भेजी अपनी इस प्यारी कविता में  उमेश चौहान अंकल जी क्या कहते हैं -

कम्प्यूटर के गेम निराले
आई-पैड, पी सी पी वाले,
शुरू करो तो रुका न जाए
मम्मी कितनी डांट पिलाएं,
भूल-भाल कर खाना-पीना
इनके संग छुट्टी भर जीना,
क्या भारत, यू के, यू एस ए,
दुनिया को भरमाए है।
एनिमेटेड रंग जमाए है॥

टेलीविजन-कथाएं बदलीं
फिल्मों की गाथाएं बदलीं,
नए-नए पात्रों के चर्चे
‘छोटा भीम’ सराहें बच्चे,
‘आइस एज’ के किस्से अच्छे
लगते हैं बच्चों को सच्चे,
कृष्ण, गनेशा, हनोमान का
जादू मन को भाए है।
एनिमेटेड रंग जमाए है॥

इनसे कुछ खोया भी हमने
दादी के किस्से अब सपने,
मित्रों के भी जमघट छूटे
नाते-रिश्ते  सिकुड़े,  टूटे,
खेल-कूद का समय नहीं है
जो आभासी, वही सही है,
मन न लगे पढ़ने-लिखने में
लैप-टॉप  ललचाए  है।
एनिमेटेड रंग जमाए है॥

-उमेश कुमार सिंह चौहान (यू. के. एस. चौहान)
सम्पर्क: सी-II/ 195, सत्य मार्ग, चाणक्यपुरी, नई दिल्ली–110021 (मो. नं. +91-8826262223).


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गुरुवार, सितंबर 04, 2014

शिक्षक दिवस पर बाल कविता


कल शिक्षक दिवस है।  चलिए, इस अवसर पर पढ़ते हैं पापा की लिखी एक बाल कविता -

टीचर जी कितनी अच्छी,
सब बच्चों  की प्यारी हो।
नई-नई  बात बताती,
लगती कितनी न्यारी हो।

हम बच्चें करें  पढ़ाई,
चौबीस घंटे तन-मन-धन से।
जब बच्चे मिल करें शरारत,
समझाती हो बड़े जतन से।

पिकनिक पर सबको ले जाती,
ज्ञान का भंडार बढ़ाती।
खेल-खेल में हम सबकोे,
जीवन का सार बताती।






रविवार, अगस्त 24, 2014

मम्मी क्या होने वाला है?

आजकल हमारे प्राइम मिनिस्टर अंकल मोदी जी गंगा जी को स्वच्छ करने के लिए पहल किये हुए हैं।  इलाहाबाद और बनारस में तो हम अक्सर देखते हैं कि गंगा जी में ढेर सारी गन्दगी फैली हुई है।  सोचिये कि यदि गंगा जी और अन्य नदियों में हम ऐसे ही गन्दगी फैलाते रहेंगे तो फिर स्वच्छ और साफ़ पानी कहाँ से आएगा।  इस गंदे पानी से जो बीमारी फैलती है, वह तो कइयों की मौत का कारण भी बनती है।  जरूरत है कि हम सभी इस और अपनी तरफ से पहल करें और नदियों में गन्दगी न फैलाएँ। इसी सन्दर्भ में श्री उमेश चौहान अंकल जी ने एक सुंदर सी कविता भी 'पाखी की दुनिया' के लिए भेजी है।  आप सब इसे पढ़ें और सोचें -

मम्मी क्या होने वाला है?
गंगाजल कितना काला है?

तुम तो कहती उतर स्वर्ग से
शिव के केशों से गुजरी हैं,
ऊँचे हिम-नद का निर्मल जल
बाँहों में भरकर बहती हैं,
फिर हमने इसके पानी में
क्यों इतना कचरा डाला है? मम्मी क्या होने ……

छिड़क-छिड़ककर जिसके जल को
तुम देवों को नहलाती हो,
पूरे घर को पावन करती
अंत समय भी पिलवाती हो,
उसके जल की इस हालत पर
मेरा मन रोने वाला है। मम्मी क्या होने ……

गंगा ही क्यों सारी नदियों
को हमने गंदा कर डाला,
सूख गए गरमी के सोंते
भू-जल इतना खींच निकाला
कुँए, ताल सब सुखा दिए, अब
पीते जल बोतल वाला हैं। मम्मी क्या होने ……

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उमेश कुमार सिंह चौहान (यू. के. एस. चौहान)
सम्पर्क: सी-II/ 195, सत्य मार्ग, चाणक्यपुरी, नई दिल्ली–110021 (मो. नं. +91-8826262223).

जन्म: 9 अप्रैल, 1959 को उत्तर प्रदेश के लखनऊ जनपद के ग्राम दादूपुर में।
शिक्षा: एम. एससी. (वनस्पति विज्ञान), एम. ए. (हिन्दी), पी. जी. डिप्लोमा (पत्रकारिता व जनसंचार)।

साहित्यिक गतिविधियाँ:

प्रकाशित पुस्तकें: ‘गाँठ में लूँ बाँध थोड़ी चाँदनी’ (प्रेम-गीतों का संग्रह) - सत्साहित्य प्रकाशन, दिल्ली (2001), ‘दाना चुगते मुरगे’ (कविता-संग्रह) - सत्साहित्य प्रकाशन, दिल्ली (2004), ‘अक्कित्तम की प्रतिनिधि कविताएं’  (मलयालम के महाकवि अक्कित्तम की अनूदित कविताओं का संग्रह) - भारतीय ज्ञानपीठ, नई दिल्ली (2009), ‘जिन्हें डर नहीं लगता’ (कविता-संग्रह) - शिल्पायन, दिल्ली (2009), एवं ‘जनतंत्र का अभिमन्यु’ (कविता – संग्रह) - भारतीय ज्ञानपीठ, नई दिल्ली (2012), मई 2013 से हिन्दी दैनिक समाचार-पत्र 'जनसंदेश टाइम्स' (लखनऊ, कानपुर, इलाहाबाद, वाराणसी एवं गोरखपुर से प्रकाशित) में साप्ताहिक स्तम्भ-लेखन

संपादित पुस्तकें: 'जनमंच' (श्री सी.वी. आनन्दबोस के मलयालम उपन्यास 'नाट्टुकूट्टम' का हिन्दी अनुवाद) - शिल्पायन, दिल्ली (2013)

सम्मान: भाषा समन्वय वेदी, कालीकट द्वारा ‘अभय देव स्मारक भाषा समन्वय पुरस्कार’ (2009) तथा इफ्को द्वारा ‘राजभाषा सम्मान’ (2011)