आप सब 'पाखी' को बहुत प्यार करते हैं...

रविवार, मई 20, 2012

सारनाथ में एक दिन...

अपने बनारस-भ्रमण के दौरान मैं 16 मई को सारनाथ घूमने गई. धूप से बचने के लिए हम सुबह ही सुबह वहां पहुँच गए. कुछेक चित्र वहाँ के शेयर कर रही हूँ- अशोक स्तम्भ के शिला-पट्ट के समक्ष. यहीं पर लगा था अशोक स्तम्भ. पर अशोक स्तम्भ अब संग्रहालय में सुरक्षित रखा है.मूल गंध कुटी - यह भगवान बुद्ध के ध्यान-साधना स्थल पर निर्मित मंदिर का भग्नावशेष है. चारों तरफ फैले स्तूपों के भग्नावशेष. धूप बढ़ने लगी है. जल्दी -जल्दी चलते हैं..धमेख स्तूप - यहीं भगवान बुद्ध ने अपना प्रथम धर्मोपदेश दिया था. सारनाथ में बौद्ध अनुयायी काफी संख्या में आते हैं. ऐसे ही एक बुद्धिस्ट के साथ. ...तो कैसी लगी आपको यह सारनाथ-यात्रा. अभी तो सारनाथ से जुडी और भी फोटो और बातें आपके साथ शेयर करनी हैं. जल्द ही नई पोस्ट के साथ फिर हाजिर हूँगी !!

शुक्रवार, मई 18, 2012

गंगा आरती देखी, पर गंगा जी में बिखरी गन्दगी का क्या ??

इस समय हमारी गर्मी की छुट्टियाँ चल रही हैं. इन छुट्टियों के बहाने खूब घूम-फिर भी रही हूँ. 15 -17 मई मैं बनारस घूमने गई. हमारे परिवार के लिए बनारस का बहुत महत्वपूर्ण स्थान है. यहीं सारनाथ में ममा-पापा की सगाई और शादी हुई, तो अपूर्वा का जन्म भी यहीं हेरिटेज हास्पिटल में हुआ. एक लम्बे समय बाद आई तो बनारस में खूब घूमी. 5 मई की शाम मैं ममा-पापा और अपूर्वा के साथ गंगा जी घूमने गई. गंगा जी को इतने नजदीक से मैंने पहली बार देखा. वैसे गंगा जी तो इलाहबाद में भी हैं, पर दूर-दूर तक उनका पता भी नहीं चलता. यहाँ मैंने गंगा आरती भी देखी. मुझे तो यह देखकर बहुत अच्छा लगा. कित्ते सारे लोग जमा थे. गंगा-आरती देखने के लिए हम नाव से गए. इसी बहाने नौका-विहार का भी आनन्द लिया. गंगा जी के किनारे ढेर सारे घाट देखे. पर यहाँ का पानी तो बहुत गन्दा हो चुका है. जब हम अंडमान में थे तो पापा बताते थे कि यहीं बंगाल की खाड़ी में आकर गंगा जी मिलती हैं. वहाँ तो समुद्र का पानी कित्ता साफ था. पर बनारस में गंगा जी की दशा देखकर अच्छा नहीं लगा. पता नहीं जब तक मैं बड़ी हूंगी तो गंगा जी होंगी भी या नहीं. क्या ऐसा नहीं हो सकता कि हम गंगा जी की आरती के साथ-साथ उनकी साफ-सफाई के बारे में भी सोचें.

रविवार, मई 13, 2012

मेरी ममा सबसे प्यारी



आपको पता है आज मदर्स डे है. हर साल मई माह के दूसरे रविवार को यह सेलिब्रेट किया जाता है. मैं तो अपनी ममा से बहुत प्यार करती हूँ.मुझे पता है कई बार मैं उन्हें बहुत परेशान करती हूँ पर ममा कभी बुरा नहीं मानती. मुझे ढेर सारा प्यार-दुलार देती हैं. मेरी ममा सबसे प्यारी हैं.
आज मदर्स डे पर मैंने सुबह जगते ही ममा को विश किया और उन्हें एक प्यारा सा कार्ड और चाकलेट दिया. साथ में प्यारे-प्यारे गुलाब के फूल भी दिया और अपनी एक ड्राइंग भी दी. आज संडे भी है, सो पापा भी घर पर रहेंगे. शाम को हम लोग ढेर सारी जगहें घूमने जायेंगे, और जब थक जायेंगे तो पापा हम लोगों को शानदार डिनर कराएँगे.

वैसे तो ममा से प्यार जताने के लिए किसी खास दिन की जरुरत नहीं, पर आज का दिन तो सिर्फ ममा का है..आज के दिन के लिए ममा को ढेर सारा प्यार और बधाई. U r the best Mama.





मम्मी की दुलारी
मम्मी मेरी सबसे प्यारी,
मैं मम्मी की राजदुलारी।
मम्मी मुझसे प्यार जताती,
अच्छी-अच्छी चीजें लाती।

करती जब भी मैं मनमानी,
मम्मी याद दिलाती नानी।
फिर मम्मी करती है प्यार,
मेरा भी गुस्सा बेकार।

पीछे-पीछे मम्मी आती,
चाकलेट दे मुझे मनाती।
थपकी देकर लोरी गाती,
निंदिया प्यारी मुझको आती।।










(यह बाल-गीत ममा के संग्रह 'चाँद पर पानी' से लिया गया है )

बुधवार, मई 09, 2012

जंगल में हुआ क्रिकेट और चाँद पर बरसा पानी




(आपने कई बार मेरे ब्लॉग 'पाखी की दुनिया' में ममा-पापा की बाल-रचनाएँ पढ़ी होंगीं. अब तो इन सबको मिलकर ममा-पापा का बाल-गीत संग्रह भी आ गया है. ममा का बाल-गीत संग्रह है- 'चाँद पर पानी' और पापा का है- 'जंगल में क्रिकेट'. पिछले दिनों इनका दिल्ली में विमोचन भी हुआ. हमने सोचा तो था कि विमोचन में जाएंगें, पर ऐनवक्त पर पापा की व्यस्तता के चलते न जा सके. इस कार्यक्रम की एक कवरेज आप भी पढ़िए )


"शेर चंद ने उठाया बल्ला, चीता फिर से गली में दुबका. हाथी ने दस्ताने बांधे, चिड़िया लगी है गेंद चमकाने. जंगल में यदि क्रिकेट खेला जाए तो कुछ ऐसा ही होगा. है ना ? और सोचिये चाँद पर यदि बरसेगा पानी तो कैसे कहेंगे दादा-दादी कहानी ? इन बातों पर लिखे गए गीत बच्चों को खूब पसंद आएँगे. दिल्ली में पिछले दिनों ऐसे ही दो बाल-गीत संग्रहों का विमोचन हुआ. "

राष्ट्रभाषा स्वाभिमान न्यास और भारतीय सांस्कृतिक सम्बन्ध परिषद् द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में पूर्व राज्यपाल डा. भीष्म नारायण सिंह और डा. रत्नाकर पाण्डेय (पूर्व सांसद) ने जंगल में क्रिकेट एवं चाँद पर पानी नामक दो पुस्तकों का विमोचन किया.चर्चित साहित्यकार और चिट्ठाकार कृष्ण कुमार यादव और आकांक्षा यादव द्वारा लिखी गई इन दोनों पुस्तकों में 30-30बाल-गीत संगृहीत हैं.


इस अवसर पर पूर्व राज्यपाल डा. भीष्म नारायण सिंह ने कहा कि बाल-साहित्य बच्चों में स्वस्थ संस्कार रोपता है, अत: इसे बढ़ावा दिए जाने क़ी जरुरत है. पूर्व सांसद डा. रत्नाकर पाण्डेय ने इस युगल के बाल-गीत संग्रह क़ी प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि इसमें आज का बचपन है और बीते कल का भी और यही बात इन संग्रह को महत्वपूर्ण बनाती है. कार्यक्रम में राष्ट्रभाषा स्वाभिमान न्यास के संयोजक डा. उमाशंकर मिश्र ने कहा कि यदि युगल दंपत्ति आज यहाँ उपस्थित रहते तो कार्यक्रम कि रौनक और भी बढ़ जाती. गौरतलब है कि अपनी पूर्व व्यस्तताओं के चलते यादव दंपत्ति इस कार्यक्रम में शरीक न हो सके. आभार ज्ञापन उद्योग नगर प्रकाशन के विकास मिश्र द्वारा किया गया.

साभार : हिंदी होम पेज


शुक्रवार, अप्रैल 27, 2012

अपूर्वा हुई डेढ़ साल की..बधाई !!

आज मेरी बहन अपूर्वा पूरे डेढ़ साल की हो गई. पता ही नहीं चला कि समय इत्ती तेजी से कैसे बीत गया. पहले अंडमान और अब इलाहाबाद..

कुछ भी हो अपूर्वा अब मेरी सबसे अच्छी दोस्त बन चुकी है. सुबह मेरे साथ जगती है, मुझे स्कूल छोड़ने जाती है और फिर घर में आकर सो जाती है. रोज मुझे लेने स्कूल भी जाती है. मेरे साथ खूब खेलती है, बातें करती है और ढेर सारा प्यार भी. मेरी बहन तो सबसे प्यारी है और मैं भी इसे खूब प्यार-दुलार करती हूँ.
अपूर्वा के आज डेढ़ साल की होने पर खूब सारा प्यार और बधाई ! आप भी अपूर्वा को अपना प्यार और आशीर्वाद देना न भूलिएगा !!

सोमवार, अप्रैल 23, 2012

....ताकि हर बच्चा पढ़ सके !!

आज विश्व पुस्तक दिवस है. मुझे तो पुस्तकें पढना बहुत अच्छा लगता है. इन पुस्तकों में होती हैं- ढेर सारी प्यारी-प्यारी बातें, राइम और चित्र.वाह...कित्ता मजा आता है. मैं अपनी पुस्तकें खूब अच्छे से रखती हूँ, नहीं तो पुरानी और गन्दी नहीं हो जायेंगीं.अब तो अपूर्वा भी मेरी बुक्स देखकर पढ़ने के लिए जिद करती है. उसे चित्र देखना खूब अच्छा लगता है.
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क्या आप जानते हैं कि हमारे देश में कई लोग ऐसे हैं, जो पढ़ना तो चाहते हैं पर उनके पास पुस्तक खरीदने के लिए पैसे ही नहीं. जब मैं अंडमान से इलाहाबाद आ रही थी तो वहाँ एक अनाथालय में गई थी। इन सभी के मम्मी-पापा नहीं थे। कुछ तो पढ़ना चाहते हैं, पर कोई मदद करने वाला नहीं। फिर मैंने उनके लिए कुछ किताबें खरीदीं और साथ में अपनी तमाम पुरानी पुस्तकों को भी लेकर उन सभी को दे दिया. उस दिन वे बहुत खुश हुए. यह काम मैंने कानपुर से अंडमान जाते समय भी किया था.




आज विश्व पुस्तक दिवस है..आप भी कुछ ऐसा ही कीजिये ताकि हर बच्चा पढ़ सके. अपने घर में पुरानी हो चुकी पुस्तकें रद्दी में बेचने की बजाय उन लोगों तक पहुँचा दीजिये, जिन्हें वाकई इसकी जरुरत हैहै।




और चलते-चलते "विश्व पुस्तक दिवस" पर यह कविता। इसे मेरे पापा ने लिखा है.....





प्यारी पुस्तक, न्यारी पुस्तक



ज्ञानदायिनी प्यारी पुस्तक



कला-संस्कृति, लोकजीवन की



कहती है कहानी पुस्तक।




अच्छी-अच्छी बात बताती



संस्कारों का पाठ पढ़ाती



मान और सम्मान बड़ों का



सुन्दर सीख सिखाती पुस्तक।




सीधी-सच्ची राह दिखाती



ज्ञान पथ पर है ले जाती



कर्म और कर्तव्य हमारे



सद्गुण हमें सिखाती पुस्तक।









रविवार, अप्रैल 22, 2012

विश्व पृथ्वी दिवस : अपूर्वा की एक नन्ही सी कोशिश

आज विश्व पृथ्वी दिवस है. पृथ्वी जब तक सुरक्षित है, हम सभी सुरक्षित हैं. इसीलिए हमें पेड़-पौधों की रक्षा करनी चाहिए, क्योंकि ये धरा के आभूषण हैं. लोग कहते भी हैं कि पहले तो पेड़ काटो नहीं और यदि काटना ही पड़े तो एक की जगह दो पेड़ लगाना चाहिए। लगता है हमारी छोटी बहन अपूर्वा को भी यह बात पता है कि आज विश्व पृथ्वी दिवस है. वह सुबह से ही गमले में एक सूखी टहनी को लगाने का प्रयास कर रही है. आखिर जब चारों तरफ हरियाली हो तो फिर यह एक टहनी सूखी कैसे रह सकती है.इसे गमले में लगा देती हूँ.शायद यह दूसरे हरे-भरे पौधों का साथ पाकर फिर से हरा-भरा हो जाये.ऐसा ही कुछ अपूर्वा सोच रही है.चलिए, हम सब लोग भी कुछ ऐसा ही प्रयास करते हैं. शायद पृथ्वी और हरी-भरी हो उठे.


गुरुवार, अप्रैल 19, 2012

नन्हीं कलम नाम है, लेकिन काम बड़ों का करती हूँ....



नन्हीं कलम नाम है,
लेकिन काम बड़ों का करती हूँ.
पथ में जो कुछ दिखता है,
शीतल जल से भरती हूँ.

आज इसी शीर्षक से मुझ पर एक रिपोर्ट दैनिक जागरण ने कवर की है. इस पर मेरे ब्लॉग के बारे में भी बताया गया है. आप भी इसे उपरोक्त इमेज पर क्लिक करके पढ़ सकते हैं.

बुधवार, अप्रैल 18, 2012

'बच्चों की दुनिया' को छोड़ गया आदित्य....

'आदित्य' एक दिन 'बच्चों की दुनिया' को छोड़कर यूँ ही चला जायेगा, किसी ने भी नहीं सोचा था. आदित्य तो हमेशा उर्जावान और प्रकाशमान रहता है, पर इस आदित्य को पता नहीं किसकी नजर लग गई कि वह 8 अप्रैल, 2012 को ना सिर्फ ब्लागिंग जगत बल्कि इस दुनिया को ही अलविदा कह गया. अभी 10 मार्च को तो उसने अपना जन्म-दिन सेलिब्रेट किया था. उसके ब्लॉग पर अंतिम पोस्ट पढ़ी तो बड़ा अजीब सा लगा, समझ में ही नहीं आया कि क्या कहूँ...भगवान जी ने भला उसे अपने पास क्यों इत्ती जल्दी क्यों बुला लिया...?? कहते हैं कि लोग भगवान जी के पास जाकर फिर से नए रूप में धरती पर आते हैं, पर उसमें आदित्य कौन होगा, यह भला कैसे पता चलेगा ??..आदित्य का जाना वाकई दुखद है..हमारी तरफ से विनम्र श्रद्धांजलि !!
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आदित्य के ब्लॉग की अंतिम पोस्ट : अलविदा दोस्तों..

बहुत दिनों बाद पुनः एक नई और अंतिम कहानी के साथ आपके समक्ष प्रस्तुत हो रहा हूँ आशा है मैं आप सभी के दिलों में हमेशा के लिए अपनी जगह बना पाऊँगा...



एक बहुत ही छोटा सा प्यारा सा बच्चा था ३ साल का. वह कभी भी मुसीबतों से घबराता नहीं था. हमेशा मुस्कराता हुआ उसका चेहरा सबको खुश कर देता था. वह अपने घर की एकमात्र संतान जो बिस्तर में ३ साल से था क्योंकि उसकी ब्रेन की दवाइयाँ चल रही थी. उन दवाइयों की वजह से और दिमाग में आने वाले झटकों के कारण वह पूरी तरह से विकसित नहीं हो पा रहा था. इसके बावजूद घर के सभी सदस्य आशा के साथ उसके स्वस्थ होने की उम्मीद में थे. सभी उससे बहुत बहुत प्यार करते थे।



नाना जी, दादा जी और बड़े पापा उसके सबसे प्यारे थे. मम्मी पापा का लाडला, नाना-नानी का दोस्त, बाकि बच्चों का दुलारा वह बच्चा ८ अप्रैल को अस्पताल जाते जाते रास्ते में ही अपना शरीर त्याग दिया. और सबको अकेला छोड़ वह दूसरी शरीर यात्रा के लिए निकल पड़ा.


उस प्यारे से छोटे बच्चे के परिजन उसके अगले शरीर यात्रा में सुन्दर और स्वस्थ शरीर की कामना करते हुए उसे आशीर्वाद दिए।



आप सभी से निवेदन है कि आप भी इस दिवंगत आत्मा के सुन्दर भविष्य के लिए प्रार्थना करें।



क्या आप जानना चाहोगे यह प्यारा बच्चा कौन है?
यह, मैं.... याने आदित्य... आपका प्यारा दोस्त हूँ.....
आप सभी से बिछुड़ते मुझे बहुत दुःख हो रहा है पर एक सुन्दर और स्वस्थ शरीर की कल्पना से मुझे आशा की एक किरण नज़र आ रही है.
एक ऐसा स्वस्थ शरीर मुझे चाहिए जिससे मैं इस सुन्दर सृष्टि के लिए और मानवता के लिए कार्य कर सकूँ.......



आप सभी ने मुझे बहुत सा प्यार और आशीर्वाद दिया उन सबके लिए मैं आप सभी का शुक्र गुजार हूँ.....



आप सभी स्वस्थ और प्रसन्न रहें इसी कामना के साथ आपका प्यारा आदित्य आप सभी से विदा लेता है।



अलविदा प्यारे दोस्तों!
आपका प्यारा, नन्हां आदित्य

मंगलवार, अप्रैल 17, 2012

वाह..क्या आम हैं !!

मुझे तो आम खाना बहुत अच्छा लगता है. अंदमान में तो साल भर में दो-तीन बार आम होते थे, पर यहाँ इलाहाबाद में अब जाकर आम के दर्शन हुए हैं
जब हम आपने घर में शिफ्ट हुए तो आम के पेड़ों पर सिर्फ बौर थीं, और आज जाकर देखा तो खूब सारे आम आ गए हैं.
फलों के राजा आम को इत्ते करीब से मैंने पहली बार देखा है. अब तो लगता है , जल्दी से ये बड़े होकर पीले-पीले हो जाएँ, फिर इन्हें खूब खाऊन्गी.


!! मेरे मुंह में तो इन्हें देखकर ही पानी आ रहा है !!

रविवार, अप्रैल 08, 2012

ये रहा अक्षिता (पाखी) का सन-ग्लास

आजकल तो इलाहाबाद में खूब गर्मी पड़ रही है. कहाँ अंडमान का सुहाना मौसम और अब इलाहाबाद की गर्मी.एक तो सूरज दादा सबको परेशान किये हुए हैं, वहीँ सिविल लाइंस, जहाँ हमारा आवास है, बाहर निकलिए तो खूब सारे गड्ढे खुदे हुए हैं. इत्ती धूल उडती है कि अब आँखों का ख्याल तो करना ही पड़ेगा. इसीलिए मैंने भी एक खूबसूरत सन-ग्लास ले लिया है. अब देखती हूँ, सूरज दादा कैसे परेशान करते हैं या धूल कैसे मेरी आँखों में जाती है !!

(ये सारी फोटो हमारे आवास के लान की हैं )

मंगलवार, अप्रैल 03, 2012

अक्षिता (पाखी) पहुँची के. जी. II में

चलिए आज आपको एक अच्छी खबर सुनाती हूँ. अब मैं के.जी.-II (प्रेप) में चली गई हूँ. आज स्कूल में मेरा पहला दिन था.बड़ा अच्छा लगा, पर सब कुछ नया. इलाहाबाद में मेरे स्कूल का नाम है- गर्ल्स हाई स्कूल एंड कालेज, इलाहाबाद.
अब आपको अपने स्कूल के बारे में ढेर सारी बातें बताऊन्गी.

शनिवार, मार्च 31, 2012

अक्षिता (पाखी) की पहली कविता 'चकमक' में प्रकाशित




अब मैं बड़ी हो गई हूँ. ममा-पापा के साथ-साथ मैं भी कवितायेँ कहने (मैं कहती हूँ और ममा-पापा उसे पन्नों पर लिखते जाते हैं) लगी हूँ. अभी मेरी एक नन्हीं सी कविता 'फुर्र-फुर्र' चकमक (भोपाल से प्रकाशित बाल विज्ञान पत्रिका) के फरवरी-2012 अंक में प्रकाशित हुई है. पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित यह मेरी पहली कविता है. चलिए, आपको भी अपनी यह नन्हीं सी कविता पढ़ाती हूँ-

गिलहरी चढ़ी
पेड़ के उपर
फिर एक
तोता भी आया
फिर एक
कौआ भी आया
दोनों उड़ गए
फुर्र-फुर्र-फुर्र मस्ती से !

सोमवार, मार्च 26, 2012

हिंदुस्तान टाइम्स वुमेन अवार्ड के लिए वोट करें..


मेरी ममा श्रीमती आकांक्षा यादव हिंदुस्तान टाइम्स वुमेन अवार्ड-2012 के लिए नामित हुई हैं. कृपया उन्हें एस.एम्.एस. द्वारा अपना मत देकर विजित बनायें. इसके लिए आपको 54242 पर HTW 73 लिखकर एस.एम्.एस. करना होगा.(HTW और 73 के बीच स्पेस जरुर दीजियेगा). यह प्रक्रिया 28 मार्च तक चलेगी. तदनुसार अपने मित्रों और परिवार-जनों को भी प्रेरित करें !!

रविवार, मार्च 25, 2012

अक्षिता (पाखी) बनी आज बर्थ-डे गर्ल

आज मेरा जन्मदिन है.अंडमान में मैंने अपने दो जन्म-दिन सेलिब्रेट किए और अब फिर से मुख्यभूमि में..इलाहाबाद में. अंडमान के खूबसूरत बीच अभी भी याद आते हैं. यहाँ इलाहाबाद में भी तो गंगा जी हाँ, संगम है..और भी ढेर सारी जगहें. अभी तो सब घूमना बाकी है. पापा आजकल आफिस में बहुत बिजी हैं. आपको इलाहाबाद की ढेर सारी तस्वीरें भी तो दिखानी हैं.फ़िलहाल, आज जन्म-दिन की बातें. आज तो सन्डे भी है. खूब सारी मस्ती और पार्टी तो बनती ही है।


!! जन्मदिन पर आप सभी के प्यार और आशीर्वाद का इंतजार बना रहेगा !!

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आज मेरे जन्म-दिन पर पढ़िए रविकर अंकल जी की यह प्यारी सी कविता, जिसे उन्होंने अपने ब्लॉग दिनेश की टिपण्णी - आपका लिंक पर कृष्णा की संरक्षिता, स्नेहिल आशीर्वाद - शीर्षक से प्रकाशित किया है-

कृष्णा की संरक्षिता, स्नेहिल आशीर्वाद ।
जन्मदिवस की शुभ घडी, बाजे मंगल-नाद ।

बाजे मंगल-नाद, फैलती कीर्ति-पताका ।
रोशन करती नाम, पिता दादा जी माँ का ।

विद्या बुद्धि विवेक, बढ़े हर पाख अक्षिता ।
ताके ईश्वर नेक, कृष्णा की संरक्षिता ।।

शुक्रवार, मार्च 23, 2012

नए साल विक्रम-संवत की बधाइयाँ..

आज से नए साल का आरंभ हो रहा है. मुझे लगता था की अभी जनवरी में ही तो नया साल मनाया था, फिर यह क्यों? ..फिर मुझे ममा ने इस नए साल यानि नव-संवत्सर के बारे में बताया. मुझे तो सोचकर ही कितना अच्छा लगता है कि इसी दिन भगवान ब्रह्मा ने इस सृष्टि की रचना की, सोचकर कितना रोमांच पैदा होता है. मैंने एक बार टेलीविजन पर सम्राट विक्रमादित्य के बारे में देखा था. ममा ने बताया कि यह विक्रम-संवत उन्हीं के द्वारा बनाया हुआ है.

शक्ति की देवी माँ दुर्गा की आराधना का 'नवरात्र' भी आज से ही प्रारम्भ होता है. पूरे नौ दिनों का हर्षोल्लास. यहाँ तो हमारे घर के सामने ही शानदार मंदिर है, सुबह से ही भजन बज रहे हैं. चारों तरफ ढेर सारी पत्तियां गिरी पड़ी हैं, ममा बता रही थी कि नव संवत्सर में ठंडक के कारण जो जड़-चेतन सभी सुप्तावस्था में पड़े होते हैं, वे सब जाग उठते हैं, गतिमान हो जाते हैं। पत्तियों, पुष्पों को नई ऊर्जा मिलती है। समस्त पेड़-पौधे, पल्लव रंग-विरंगे फूलों के साथ खिल उठते हैं। ऋतुओं के एक पूरे चक्र को संवत्सर कहते हैं।..अब तो मैं बहुत खुश हूँ कि पेड़ों पर भी नई-नई पत्तियाँ दिखेंगीं.

कितना अच्छा लगता है कि हमारे चारों तरफ हर चीज किसी न किसी पर्व और त्यौहार से जुडी हुई है. मैं तो इन्हें पूरा इंजॉय करती हूँ. आप सभी को इस विक्रम संवत के नए वर्ष पर बधाइयाँ और आपका स्नेह और आशीष तो मिलेगा ही !!

गुरुवार, मार्च 22, 2012

विश्व जल दिवस : जल बचाएं

आज विश्व जल दिवस है. चलिए, आप सभी मेरे साथ संकल्प लें कि आज से और अभी से हम पानी को बर्बाद नहीं होने देंगें.
जल की हर बूंद हमारे जीवन और धरती के जीवन के लिए बहुत जरुरी है.

गुरुवार, मार्च 08, 2012

रंग-रंगीली होली आई


आज होली का त्यौहार है. इस बार होली हम इलाहाबाद में मना रहे हैं. खूब रंग खेलेंगें और फिर ढेर सारी गुझिया और कचौरी भी तो खानी है. होली पर पापा ने हमारे लिए यह सुन्दर सी कविता भी रची है-

होली आई, होली आई,
रंग-रंगीली होली आई।
आओ पाखी, आओ तन्वी,
मिलजुल सभी मनाएं होली।

पाखी ने भर ली पिचकारी,
अब देखो किसकी है बारी।
उसने सबको ही रँग डाला,
लाल, गुलाबी, नीला, काला।

अब आई गुलाल की बारी,
संग में गुझिया की तैयारी।
सब मिलकर के गुझिया खाएं,
पाठ प्यार का रोज पढ़ाएं।


होली-पर्व पर अप सभो को रंग भरी बधाइयाँ और आपका प्यार और स्नेह तो मिलेगा ही !!

रविवार, मार्च 04, 2012

इलाहाबाद में एक सप्ताह..


आज हमें इलाहाबाद आए पूरे एक सप्ताह हो गए. एक सप्ताह कैसे बीत गया, पता भी नहीं चला. दिन में पापा का आफिस और शाम को हमारी मस्ती. पापा का आफिस और आवास यहाँ सिविल लाइंस में है, सो शाम होते ही हम सिविल लाइंस घूमने निकल पड़ते हैं. वैसे अभी हम अपने नए घर में शिफ्ट नहीं हुए हैं, वहां पर सफाई का कार्य चल रहा है. यहाँ पापा के निरीक्षण-बंगला में हम लोग ठहरे हुए हैं.

अंडमान में तमाम आइलैंड्स की सैर करते थे, यहाँ पर मॉल में घूमते हैं और खूब खरीददारी करते हैं. पहले दिन मैं यहाँ बिग बाजार गई और मैकडोनाल्ड से अपना मनपसंद हैपी-मील लिया. फिर हम यहाँ के पी. वी. आर. मॉल में भी घूमने गए, मैंने तो खूब खरीददारी की. कल हमने पी. वी. आर. में जोड़ी-ब्रेकर्स मूवी भी देखी...मजेदार लगी यह मूवी. अभी तो मुझे इंतजार है कि कब हम हमने नए घर में शिफ्ट होंगे...!!

शुक्रवार, फ़रवरी 24, 2012

अंडमान को बाय-बाय..


पता ही नहीं चला कि अंडमान में कैसे दिन गुजर गए. .पूरे दो साल.. अब पापा का इलाहाबाद के लिए ट्रांसफर हो गया है. हम सब बहुत खुश हैं. खूब मस्ती से पैकिंग कर रहे हैं. अगले हफ्ते हम इलाहाबाद में होंगे. अंडमान में तो हमने खूब मस्ती की, खूब घूमे-फिरे.. अब इलाहाबाद की सैर करेंगें. अंडमान को बाय-बाय !!

गुरुवार, फ़रवरी 23, 2012

अक्षिता (पाखी) का एक और मिल्की टूथ गया..

आजकल मेरे मिल्की टीथ टूटने शुरू हो गए हैं. आज सुबह मेरा दूसरा मिल्की टूथ भी टूट गया. जब मैं सोकर जगी और उस टूथ को हाथ लगाकर चेक किया तो टूटकर बाहर आ गया. यह वाला मिल्की टूथ तो कई दिनों से हिल रहा था. इस बार तो मैंने अपने टूथ को देखा भी कि वह कैसा होता है. पिछली बार तो वह टूटकर स्कूल में कहीं गुम हो गया था...यह है मेरा टूटा हुआ मिल्की टूथ.
इस मिल्की टूथ को ममा ने लान में जमीन के अन्दर डाल दिया. अब मुझे इंतजार है कि मेरा यह वाला मिल्की टूथ कब नया होकर आएगा. वैसे मेरे पहले टूटे हुए टूथ की जगह नया टूथ आ रहा है. उसे देखना बड़ा अच्छा लगता है.

..अब आप भी भगवन जी से मनाइए कि मेरा नया टूथ जल्दी से आ जाए !!