आप सब 'पाखी' को बहुत प्यार करते हैं...
रविवार, मई 20, 2012
सारनाथ में एक दिन...
शुक्रवार, मई 18, 2012
गंगा आरती देखी, पर गंगा जी में बिखरी गन्दगी का क्या ??
रविवार, मई 13, 2012
मेरी ममा सबसे प्यारी

आज मदर्स डे पर मैंने सुबह जगते ही ममा को विश किया और उन्हें एक प्यारा सा कार्ड और चाकलेट दिया. साथ में प्यारे-प्यारे गुलाब के फूल भी दिया और अपनी एक ड्राइंग भी दी. आज संडे भी है, सो पापा भी घर पर रहेंगे. शाम को हम लोग ढेर सारी जगहें घूमने जायेंगे, और जब थक जायेंगे तो पापा हम लोगों को शानदार डिनर कराएँगे.वैसे तो ममा से प्यार जताने के लिए किसी खास दिन की जरुरत नहीं, पर आज का दिन तो सिर्फ ममा का है..आज के दिन के लिए ममा को ढेर सारा प्यार और बधाई. U r the best Mama.
मम्मी की दुलारी
मम्मी मेरी सबसे प्यारी,
मैं मम्मी की राजदुलारी।
मम्मी मुझसे प्यार जताती,
अच्छी-अच्छी चीजें लाती।
करती जब भी मैं मनमानी,
मम्मी याद दिलाती नानी।
फिर मम्मी करती है प्यार,
मेरा भी गुस्सा बेकार।
पीछे-पीछे मम्मी आती,
चाकलेट दे मुझे मनाती।
थपकी देकर लोरी गाती,
निंदिया प्यारी मुझको आती।।
बुधवार, मई 09, 2012
जंगल में हुआ क्रिकेट और चाँद पर बरसा पानी
(आपने कई बार मेरे ब्लॉग 'पाखी की दुनिया' में ममा-पापा की बाल-रचनाएँ पढ़ी होंगीं. अब तो इन सबको मिलकर ममा-पापा का बाल-गीत संग्रह भी आ गया है. ममा का बाल-गीत संग्रह है- 'चाँद पर पानी' और पापा का है- 'जंगल में क्रिकेट'. पिछले दिनों इनका दिल्ली में विमोचन भी हुआ. हमने सोचा तो था कि विमोचन में जाएंगें, पर ऐनवक्त पर पापा की व्यस्तता के चलते न जा सके. इस कार्यक्रम की एक कवरेज आप भी पढ़िए )
राष्ट्रभाषा स्वाभिमान न्यास और भारतीय सांस्कृतिक सम्बन्ध परिषद् द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में पूर्व राज्यपाल डा. भीष्म नारायण सिंह और डा. रत्नाकर पाण्डेय (पूर्व सांसद) ने जंगल में क्रिकेट एवं चाँद पर पानी नामक दो पुस्तकों का विमोचन किया.चर्चित साहित्यकार और चिट्ठाकार कृष्ण कुमार यादव और आकांक्षा यादव द्वारा लिखी गई इन दोनों पुस्तकों में 30-30बाल-गीत संगृहीत हैं.
साभार : हिंदी होम पेज
शुक्रवार, अप्रैल 27, 2012
अपूर्वा हुई डेढ़ साल की..बधाई !!
सोमवार, अप्रैल 23, 2012
....ताकि हर बच्चा पढ़ सके !!
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क्या आप जानते हैं कि हमारे देश में कई लोग ऐसे हैं, जो पढ़ना तो चाहते हैं पर उनके पास पुस्तक खरीदने के लिए पैसे ही नहीं. जब मैं अंडमान से इलाहाबाद आ रही थी तो वहाँ एक अनाथालय में गई थी। इन सभी के मम्मी-पापा नहीं थे। कुछ तो पढ़ना चाहते हैं, पर कोई मदद करने वाला नहीं। फिर मैंने उनके लिए कुछ किताबें खरीदीं और साथ में अपनी तमाम पुरानी पुस्तकों को भी लेकर उन सभी को दे दिया. उस दिन वे बहुत खुश हुए. यह काम मैंने कानपुर से अंडमान जाते समय भी किया था.
अच्छी-अच्छी बात बताती
सीधी-सच्ची राह दिखाती
रविवार, अप्रैल 22, 2012
विश्व पृथ्वी दिवस : अपूर्वा की एक नन्ही सी कोशिश

गुरुवार, अप्रैल 19, 2012
नन्हीं कलम नाम है, लेकिन काम बड़ों का करती हूँ....
नन्हीं कलम नाम है,
लेकिन काम बड़ों का करती हूँ.
पथ में जो कुछ दिखता है,
शीतल जल से भरती हूँ.
आज इसी शीर्षक से मुझ पर एक रिपोर्ट दैनिक जागरण ने कवर की है. इस पर मेरे ब्लॉग के बारे में भी बताया गया है. आप भी इसे उपरोक्त इमेज पर क्लिक करके पढ़ सकते हैं.
बुधवार, अप्रैल 18, 2012
'बच्चों की दुनिया' को छोड़ गया आदित्य....
'आदित्य' एक दिन 'बच्चों की दुनिया' को छोड़कर यूँ ही चला जायेगा, किसी ने भी नहीं सोचा था. आदित्य तो हमेशा उर्जावान और प्रकाशमान रहता है, पर इस आदित्य को पता नहीं किसकी नजर लग गई कि वह 8 अप्रैल, 2012 को ना सिर्फ ब्लागिंग जगत बल्कि इस दुनिया को ही अलविदा कह गया. अभी 10 मार्च को तो उसने अपना जन्म-दिन सेलिब्रेट किया था. उसके ब्लॉग पर अंतिम पोस्ट पढ़ी तो बड़ा अजीब सा लगा, समझ में ही नहीं आया कि क्या कहूँ...भगवान जी ने भला उसे अपने पास क्यों इत्ती जल्दी क्यों बुला लिया...?? कहते हैं कि लोग भगवान जी के पास जाकर फिर से नए रूप में धरती पर आते हैं, पर उसमें आदित्य कौन होगा, यह भला कैसे पता चलेगा ??..आदित्य का जाना वाकई दुखद है..हमारी तरफ से विनम्र श्रद्धांजलि !!***************************************************
आदित्य के ब्लॉग की अंतिम पोस्ट : अलविदा दोस्तों..
बहुत दिनों बाद पुनः एक नई और अंतिम कहानी के साथ आपके समक्ष प्रस्तुत हो रहा हूँ आशा है मैं आप सभी के दिलों में हमेशा के लिए अपनी जगह बना पाऊँगा...
एक बहुत ही छोटा सा प्यारा सा बच्चा था ३ साल का. वह कभी भी मुसीबतों से घबराता नहीं था. हमेशा मुस्कराता हुआ उसका चेहरा सबको खुश कर देता था. वह अपने घर की एकमात्र संतान जो बिस्तर में ३ साल से था क्योंकि उसकी ब्रेन की दवाइयाँ चल रही थी. उन दवाइयों की वजह से और दिमाग में आने वाले झटकों के कारण वह पूरी तरह से विकसित नहीं हो पा रहा था. इसके बावजूद घर के सभी सदस्य आशा के साथ उसके स्वस्थ होने की उम्मीद में थे. सभी उससे बहुत बहुत प्यार करते थे।
नाना जी, दादा जी और बड़े पापा उसके सबसे प्यारे थे. मम्मी पापा का लाडला, नाना-नानी का दोस्त, बाकि बच्चों का दुलारा वह बच्चा ८ अप्रैल को अस्पताल जाते जाते रास्ते में ही अपना शरीर त्याग दिया. और सबको अकेला छोड़ वह दूसरी शरीर यात्रा के लिए निकल पड़ा.
आप सभी से निवेदन है कि आप भी इस दिवंगत आत्मा के सुन्दर भविष्य के लिए प्रार्थना करें।
क्या आप जानना चाहोगे यह प्यारा बच्चा कौन है?
यह, मैं.... याने आदित्य... आपका प्यारा दोस्त हूँ.....
आप सभी से बिछुड़ते मुझे बहुत दुःख हो रहा है पर एक सुन्दर और स्वस्थ शरीर की कल्पना से मुझे आशा की एक किरण नज़र आ रही है.
एक ऐसा स्वस्थ शरीर मुझे चाहिए जिससे मैं इस सुन्दर सृष्टि के लिए और मानवता के लिए कार्य कर सकूँ.......
आप सभी ने मुझे बहुत सा प्यार और आशीर्वाद दिया उन सबके लिए मैं आप सभी का शुक्र गुजार हूँ.....
आप सभी स्वस्थ और प्रसन्न रहें इसी कामना के साथ आपका प्यारा आदित्य आप सभी से विदा लेता है।
अलविदा प्यारे दोस्तों!
आपका प्यारा, नन्हां आदित्य
मंगलवार, अप्रैल 17, 2012
वाह..क्या आम हैं !!
जब हम आपने घर में शिफ्ट हुए तो आम के पेड़ों पर सिर्फ बौर थीं, और आज जाकर देखा तो खूब सारे आम आ गए हैं.
रविवार, अप्रैल 08, 2012
ये रहा अक्षिता (पाखी) का सन-ग्लास
मंगलवार, अप्रैल 03, 2012
शनिवार, मार्च 31, 2012
अक्षिता (पाखी) की पहली कविता 'चकमक' में प्रकाशित

गिलहरी चढ़ी
पेड़ के उपर
फिर एक
तोता भी आया
फिर एक
कौआ भी आया
दोनों उड़ गए
फुर्र-फुर्र-फुर्र मस्ती से !
सोमवार, मार्च 26, 2012
हिंदुस्तान टाइम्स वुमेन अवार्ड के लिए वोट करें..
मेरी ममा श्रीमती आकांक्षा यादव हिंदुस्तान टाइम्स वुमेन अवार्ड-2012 के लिए नामित हुई हैं. कृपया उन्हें एस.एम्.एस. द्वारा अपना मत देकर विजित बनायें. इसके लिए आपको 54242 पर HTW 73 लिखकर एस.एम्.एस. करना होगा.(HTW और 73 के बीच स्पेस जरुर दीजियेगा). यह प्रक्रिया 28 मार्च तक चलेगी. तदनुसार अपने मित्रों और परिवार-जनों को भी प्रेरित करें !!
रविवार, मार्च 25, 2012
अक्षिता (पाखी) बनी आज बर्थ-डे गर्ल
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आज मेरे जन्म-दिन पर पढ़िए रविकर अंकल जी की यह प्यारी सी कविता, जिसे उन्होंने अपने ब्लॉग दिनेश की टिपण्णी - आपका लिंक पर कृष्णा की संरक्षिता, स्नेहिल आशीर्वाद - शीर्षक से प्रकाशित किया है-
कृष्णा की संरक्षिता, स्नेहिल आशीर्वाद ।
जन्मदिवस की शुभ घडी, बाजे मंगल-नाद ।
बाजे मंगल-नाद, फैलती कीर्ति-पताका ।
रोशन करती नाम, पिता दादा जी माँ का ।
विद्या बुद्धि विवेक, बढ़े हर पाख अक्षिता ।
ताके ईश्वर नेक, कृष्णा की संरक्षिता ।।
शुक्रवार, मार्च 23, 2012
नए साल विक्रम-संवत की बधाइयाँ..
आज से नए साल का आरंभ हो रहा है. मुझे लगता था की अभी जनवरी में ही तो नया साल मनाया था, फिर यह क्यों? ..फिर मुझे ममा ने इस नए साल यानि नव-संवत्सर के बारे में बताया. मुझे तो सोचकर ही कितना अच्छा लगता है कि इसी दिन भगवान ब्रह्मा ने इस सृष्टि की रचना की, सोचकर कितना रोमांच पैदा होता है. मैंने एक बार टेलीविजन पर सम्राट विक्रमादित्य के बारे में देखा था. ममा ने बताया कि यह विक्रम-संवत उन्हीं के द्वारा बनाया हुआ है.शक्ति की देवी माँ दुर्गा की आराधना का 'नवरात्र' भी आज से ही प्रारम्भ होता है. पूरे नौ दिनों का हर्षोल्लास. यहाँ तो हमारे घर के सामने ही शानदार मंदिर है, सुबह से ही भजन बज रहे हैं. चारों तरफ ढेर सारी पत्तियां गिरी पड़ी हैं, ममा बता रही थी कि नव संवत्सर में ठंडक के कारण जो जड़-चेतन सभी सुप्तावस्था में पड़े होते हैं, वे सब जाग उठते हैं, गतिमान हो जाते हैं। पत्तियों, पुष्पों को नई ऊर्जा मिलती है। समस्त पेड़-पौधे, पल्लव रंग-विरंगे फूलों के साथ खिल उठते हैं। ऋतुओं के एक पूरे चक्र को संवत्सर कहते हैं।..अब तो मैं बहुत खुश हूँ कि पेड़ों पर भी नई-नई पत्तियाँ दिखेंगीं.
कितना अच्छा लगता है कि हमारे चारों तरफ हर चीज किसी न किसी पर्व और त्यौहार से जुडी हुई है. मैं तो इन्हें पूरा इंजॉय करती हूँ. आप सभी को इस विक्रम संवत के नए वर्ष पर बधाइयाँ और आपका स्नेह और आशीष तो मिलेगा ही !!
गुरुवार, मार्च 22, 2012
गुरुवार, मार्च 08, 2012
रंग-रंगीली होली आई

आज होली का त्यौहार है. इस बार होली हम इलाहाबाद में मना रहे हैं. खूब रंग खेलेंगें और फिर ढेर सारी गुझिया और कचौरी भी तो खानी है. होली पर पापा ने हमारे लिए यह सुन्दर सी कविता भी रची है-
होली आई, होली आई,
रंग-रंगीली होली आई।
आओ पाखी, आओ तन्वी,
मिलजुल सभी मनाएं होली।
पाखी ने भर ली पिचकारी,
अब देखो किसकी है बारी।
उसने सबको ही रँग डाला,
लाल, गुलाबी, नीला, काला।
अब आई गुलाल की बारी,
संग में गुझिया की तैयारी।
सब मिलकर के गुझिया खाएं,
पाठ प्यार का रोज पढ़ाएं।
होली-पर्व पर अप सभो को रंग भरी बधाइयाँ और आपका प्यार और स्नेह तो मिलेगा ही !!
रविवार, मार्च 04, 2012
इलाहाबाद में एक सप्ताह..
आज हमें इलाहाबाद आए पूरे एक सप्ताह हो गए. एक सप्ताह कैसे बीत गया, पता भी नहीं चला. दिन में पापा का आफिस और शाम को हमारी मस्ती. पापा का आफिस और आवास यहाँ सिविल लाइंस में है, सो शाम होते ही हम सिविल लाइंस घूमने निकल पड़ते हैं. वैसे अभी हम अपने नए घर में शिफ्ट नहीं हुए हैं, वहां पर सफाई का कार्य चल रहा है. यहाँ पापा के निरीक्षण-बंगला में हम लोग ठहरे हुए हैं.
अंडमान में तमाम आइलैंड्स की सैर करते थे, यहाँ पर मॉल में घूमते हैं और खूब खरीददारी करते हैं. पहले दिन मैं यहाँ बिग बाजार गई और मैकडोनाल्ड से अपना मनपसंद हैपी-मील लिया. फिर हम यहाँ के पी. वी. आर. मॉल में भी घूमने गए, मैंने तो खूब खरीददारी की. कल हमने पी. वी. आर. में जोड़ी-ब्रेकर्स मूवी भी देखी...मजेदार लगी यह मूवी. अभी तो मुझे इंतजार है कि कब हम हमने नए घर में शिफ्ट होंगे...!!
शुक्रवार, फ़रवरी 24, 2012
गुरुवार, फ़रवरी 23, 2012
अक्षिता (पाखी) का एक और मिल्की टूथ गया..
..अब आप भी भगवन जी से मनाइए कि मेरा नया टूथ जल्दी से आ जाए !!

