आप सब 'पाखी' को बहुत प्यार करते हैं...

शनिवार, मार्च 31, 2012

अक्षिता (पाखी) की पहली कविता 'चकमक' में प्रकाशित




अब मैं बड़ी हो गई हूँ. ममा-पापा के साथ-साथ मैं भी कवितायेँ कहने (मैं कहती हूँ और ममा-पापा उसे पन्नों पर लिखते जाते हैं) लगी हूँ. अभी मेरी एक नन्हीं सी कविता 'फुर्र-फुर्र' चकमक (भोपाल से प्रकाशित बाल विज्ञान पत्रिका) के फरवरी-2012 अंक में प्रकाशित हुई है. पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित यह मेरी पहली कविता है. चलिए, आपको भी अपनी यह नन्हीं सी कविता पढ़ाती हूँ-

गिलहरी चढ़ी
पेड़ के उपर
फिर एक
तोता भी आया
फिर एक
कौआ भी आया
दोनों उड़ गए
फुर्र-फुर्र-फुर्र मस्ती से !

सोमवार, मार्च 26, 2012

हिंदुस्तान टाइम्स वुमेन अवार्ड के लिए वोट करें..


मेरी ममा श्रीमती आकांक्षा यादव हिंदुस्तान टाइम्स वुमेन अवार्ड-2012 के लिए नामित हुई हैं. कृपया उन्हें एस.एम्.एस. द्वारा अपना मत देकर विजित बनायें. इसके लिए आपको 54242 पर HTW 73 लिखकर एस.एम्.एस. करना होगा.(HTW और 73 के बीच स्पेस जरुर दीजियेगा). यह प्रक्रिया 28 मार्च तक चलेगी. तदनुसार अपने मित्रों और परिवार-जनों को भी प्रेरित करें !!

रविवार, मार्च 25, 2012

अक्षिता (पाखी) बनी आज बर्थ-डे गर्ल

आज मेरा जन्मदिन है.अंडमान में मैंने अपने दो जन्म-दिन सेलिब्रेट किए और अब फिर से मुख्यभूमि में..इलाहाबाद में. अंडमान के खूबसूरत बीच अभी भी याद आते हैं. यहाँ इलाहाबाद में भी तो गंगा जी हाँ, संगम है..और भी ढेर सारी जगहें. अभी तो सब घूमना बाकी है. पापा आजकल आफिस में बहुत बिजी हैं. आपको इलाहाबाद की ढेर सारी तस्वीरें भी तो दिखानी हैं.फ़िलहाल, आज जन्म-दिन की बातें. आज तो सन्डे भी है. खूब सारी मस्ती और पार्टी तो बनती ही है।


!! जन्मदिन पर आप सभी के प्यार और आशीर्वाद का इंतजार बना रहेगा !!

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आज मेरे जन्म-दिन पर पढ़िए रविकर अंकल जी की यह प्यारी सी कविता, जिसे उन्होंने अपने ब्लॉग दिनेश की टिपण्णी - आपका लिंक पर कृष्णा की संरक्षिता, स्नेहिल आशीर्वाद - शीर्षक से प्रकाशित किया है-

कृष्णा की संरक्षिता, स्नेहिल आशीर्वाद ।
जन्मदिवस की शुभ घडी, बाजे मंगल-नाद ।

बाजे मंगल-नाद, फैलती कीर्ति-पताका ।
रोशन करती नाम, पिता दादा जी माँ का ।

विद्या बुद्धि विवेक, बढ़े हर पाख अक्षिता ।
ताके ईश्वर नेक, कृष्णा की संरक्षिता ।।

शुक्रवार, मार्च 23, 2012

नए साल विक्रम-संवत की बधाइयाँ..

आज से नए साल का आरंभ हो रहा है. मुझे लगता था की अभी जनवरी में ही तो नया साल मनाया था, फिर यह क्यों? ..फिर मुझे ममा ने इस नए साल यानि नव-संवत्सर के बारे में बताया. मुझे तो सोचकर ही कितना अच्छा लगता है कि इसी दिन भगवान ब्रह्मा ने इस सृष्टि की रचना की, सोचकर कितना रोमांच पैदा होता है. मैंने एक बार टेलीविजन पर सम्राट विक्रमादित्य के बारे में देखा था. ममा ने बताया कि यह विक्रम-संवत उन्हीं के द्वारा बनाया हुआ है.

शक्ति की देवी माँ दुर्गा की आराधना का 'नवरात्र' भी आज से ही प्रारम्भ होता है. पूरे नौ दिनों का हर्षोल्लास. यहाँ तो हमारे घर के सामने ही शानदार मंदिर है, सुबह से ही भजन बज रहे हैं. चारों तरफ ढेर सारी पत्तियां गिरी पड़ी हैं, ममा बता रही थी कि नव संवत्सर में ठंडक के कारण जो जड़-चेतन सभी सुप्तावस्था में पड़े होते हैं, वे सब जाग उठते हैं, गतिमान हो जाते हैं। पत्तियों, पुष्पों को नई ऊर्जा मिलती है। समस्त पेड़-पौधे, पल्लव रंग-विरंगे फूलों के साथ खिल उठते हैं। ऋतुओं के एक पूरे चक्र को संवत्सर कहते हैं।..अब तो मैं बहुत खुश हूँ कि पेड़ों पर भी नई-नई पत्तियाँ दिखेंगीं.

कितना अच्छा लगता है कि हमारे चारों तरफ हर चीज किसी न किसी पर्व और त्यौहार से जुडी हुई है. मैं तो इन्हें पूरा इंजॉय करती हूँ. आप सभी को इस विक्रम संवत के नए वर्ष पर बधाइयाँ और आपका स्नेह और आशीष तो मिलेगा ही !!

गुरुवार, मार्च 22, 2012

विश्व जल दिवस : जल बचाएं

आज विश्व जल दिवस है. चलिए, आप सभी मेरे साथ संकल्प लें कि आज से और अभी से हम पानी को बर्बाद नहीं होने देंगें.
जल की हर बूंद हमारे जीवन और धरती के जीवन के लिए बहुत जरुरी है.

गुरुवार, मार्च 08, 2012

रंग-रंगीली होली आई


आज होली का त्यौहार है. इस बार होली हम इलाहाबाद में मना रहे हैं. खूब रंग खेलेंगें और फिर ढेर सारी गुझिया और कचौरी भी तो खानी है. होली पर पापा ने हमारे लिए यह सुन्दर सी कविता भी रची है-

होली आई, होली आई,
रंग-रंगीली होली आई।
आओ पाखी, आओ तन्वी,
मिलजुल सभी मनाएं होली।

पाखी ने भर ली पिचकारी,
अब देखो किसकी है बारी।
उसने सबको ही रँग डाला,
लाल, गुलाबी, नीला, काला।

अब आई गुलाल की बारी,
संग में गुझिया की तैयारी।
सब मिलकर के गुझिया खाएं,
पाठ प्यार का रोज पढ़ाएं।


होली-पर्व पर अप सभो को रंग भरी बधाइयाँ और आपका प्यार और स्नेह तो मिलेगा ही !!

रविवार, मार्च 04, 2012

इलाहाबाद में एक सप्ताह..


आज हमें इलाहाबाद आए पूरे एक सप्ताह हो गए. एक सप्ताह कैसे बीत गया, पता भी नहीं चला. दिन में पापा का आफिस और शाम को हमारी मस्ती. पापा का आफिस और आवास यहाँ सिविल लाइंस में है, सो शाम होते ही हम सिविल लाइंस घूमने निकल पड़ते हैं. वैसे अभी हम अपने नए घर में शिफ्ट नहीं हुए हैं, वहां पर सफाई का कार्य चल रहा है. यहाँ पापा के निरीक्षण-बंगला में हम लोग ठहरे हुए हैं.

अंडमान में तमाम आइलैंड्स की सैर करते थे, यहाँ पर मॉल में घूमते हैं और खूब खरीददारी करते हैं. पहले दिन मैं यहाँ बिग बाजार गई और मैकडोनाल्ड से अपना मनपसंद हैपी-मील लिया. फिर हम यहाँ के पी. वी. आर. मॉल में भी घूमने गए, मैंने तो खूब खरीददारी की. कल हमने पी. वी. आर. में जोड़ी-ब्रेकर्स मूवी भी देखी...मजेदार लगी यह मूवी. अभी तो मुझे इंतजार है कि कब हम हमने नए घर में शिफ्ट होंगे...!!

शुक्रवार, फ़रवरी 24, 2012

अंडमान को बाय-बाय..


पता ही नहीं चला कि अंडमान में कैसे दिन गुजर गए. .पूरे दो साल.. अब पापा का इलाहाबाद के लिए ट्रांसफर हो गया है. हम सब बहुत खुश हैं. खूब मस्ती से पैकिंग कर रहे हैं. अगले हफ्ते हम इलाहाबाद में होंगे. अंडमान में तो हमने खूब मस्ती की, खूब घूमे-फिरे.. अब इलाहाबाद की सैर करेंगें. अंडमान को बाय-बाय !!

गुरुवार, फ़रवरी 23, 2012

अक्षिता (पाखी) का एक और मिल्की टूथ गया..

आजकल मेरे मिल्की टीथ टूटने शुरू हो गए हैं. आज सुबह मेरा दूसरा मिल्की टूथ भी टूट गया. जब मैं सोकर जगी और उस टूथ को हाथ लगाकर चेक किया तो टूटकर बाहर आ गया. यह वाला मिल्की टूथ तो कई दिनों से हिल रहा था. इस बार तो मैंने अपने टूथ को देखा भी कि वह कैसा होता है. पिछली बार तो वह टूटकर स्कूल में कहीं गुम हो गया था...यह है मेरा टूटा हुआ मिल्की टूथ.
इस मिल्की टूथ को ममा ने लान में जमीन के अन्दर डाल दिया. अब मुझे इंतजार है कि मेरा यह वाला मिल्की टूथ कब नया होकर आएगा. वैसे मेरे पहले टूटे हुए टूथ की जगह नया टूथ आ रहा है. उसे देखना बड़ा अच्छा लगता है.

..अब आप भी भगवन जी से मनाइए कि मेरा नया टूथ जल्दी से आ जाए !!

गुरुवार, फ़रवरी 16, 2012

अक्षिता की ड्राइंग..


आज देखिये मेरी तीन ड्राइंग.

इसमें कई सारी चीजें मैंने बनाई हैं.

जल्दी से बताइयेगा कि आपने क्या-क्या देखा !!

सोमवार, फ़रवरी 13, 2012

मिलिए अपूर्वा से...

आज मिलिए मेरी छोटी सिस्टर अपूर्वा (तान्या) से. एक लम्बे समय बाद इनकी फोटो आप सबसे शेयर कर रही हूँ. अपूर्वा अब तो एक साल तीन माह से भी बड़ी हो गई हैं.अब तो अपूर्वा खूब मस्ती करती है. अंडमान में समुद्र किनारे बीच पर खूब दौड़ती है.














यह सारी फोटो हमारी नील द्वीप की यात्रा के दौरान की है !!


गुरुवार, फ़रवरी 09, 2012

अंडमान में आम खाने के दिन आए..


आजकल अंडमान में आम की बहार है. जहाँ देखिये, वहीँ पेड़ों पर पीले-पीले आम नजर आते हैं.

यहाँ तो कई पेड़ों पर साल भर में तीन बार आम होते हैं. ये आम स्वाद में बड़े मीठे होते हैं.

मैं तो खूब आ खा रही हूँ और मैंगो-शेक का भी मजा ले रही हूँ.

बुधवार, फ़रवरी 08, 2012

वाह..कितना सुन्दर नेचुरल ब्रिज है !!

पिछले दिनों मैं ममा-पापा और अपूर्वा के साथ नील आइलैंड घूमने गई. वहाँ पर एक बीच है-लक्ष्मणपुर बीच. यहाँ पर तो एक बहुत सुन्दर नेचुरल ब्रिज बना हुआ है. इसे देखकर तो मैं बहुत ही प्रसन्न हुई.

यहाँ पर चारों तरफ खूब टूटे हुए कोरल्स बिखरे हुए हैं. लोग बता रहे थे कि सुनामी में यहाँ बहुत नुकसान हुआ.

कुछ कोरल्स और जलीय पौधे तो अभी भी देखे जा सकते हैं.

वाकई यहाँ आकर बहुत अच्छा लगा. आप भी जब कभी अंडमान आयें तो नील आइलैंड जरुर आयें..बहुत मजा आयेगा.

गुरुवार, जनवरी 26, 2012

प्यारा सा गणतंत्र हमारा


प्यारा-प्यारा देश हमारा.
सारे जग से है ये न्यारा.

कितनी सारी बोली यहाँ पर.
कितनी सारी हैं भाषाएँ.
हम सब सारे मिल-जुल रहते.
मानवता है सार हमारा.

शान कभी न कम हो इसकी.
प्यारा सा गणतंत्र हमारा.
हम बच्चों ने ली है कसम.
चमकेगा ये बनके सितारा.

(यह गीत गणतंत्र दिवस पर आयोजित मेरे स्कूल-फंक्शन के लिए ममा ने तैयार किया है.)

!! गणतंत्र दिवस पर आप सभी को ढेर सारी बधाइयाँ !!

शुक्रवार, जनवरी 20, 2012

अंडमान में बन्दर नहीं पाए जाते...

आपको सुनकर आश्चर्य होगा कि अंडमान में बन्दर नहीं पाए जाते. कानपुर में तो हमारे लान में खूब सारे बन्दर आते थे और पेड़ों और फूलों की डाली पर खेलते और उन्हें तोड़कर भाग जाते थे. जब मैं यहाँ अंडमान में नई-नई आई थी तो बंदरों को न देखकर सोचा कि किसी दूसरे आइलैंड पर रहते होंगें. पर यहाँ अंडमान में तो बन्दर पाए ही नहीं जाते. यहाँ जंगलों में सिर्फ जंगली सूअर और हिरन मिलते हैं. हाथी तो यहाँ मेन-लैंड से लाए गए हैं.
..पर निकोबार में बन्दर पाए जाते हैं. ये बन्दर निकोबार के लगभग अंतिम छोर कैम्पबेल-बे में पाए जाते हैं. पर ये बन्दर भी बड़े अजीब होते हैं. ये केकड़े (crab) खाते हैं. मैंने तो इन्हें देखा नहीं, पर सोचिये ये कैसे होते होंगें...!!

रविवार, जनवरी 15, 2012

अंडमान-निकोबार द्वीप पर्यटन उत्सव में अक्षिता (पाखी)

अंडमान में इन दिनों आइलैंड-फेस्टिवल की धूम है. मैं भी मामा-पापा और अपूर्वा के साथ घूमने गई थी. बड़ा मजा आया. मेरी तरह के ढेर सारे बच्चे वहाँ कार्यक्रम पेश कर रहे थे. कोई परी बना था तो कोई भालू, मोर, तोता, बन्दर, खरगोश, क्रोकोडाइल और बटरफ्लाई. उसके बाद दूसरे राज्यों के कलाकारों द्वारा किया गया नृत्य भी मैंने देखा. ढेर सारे स्टाल पर मैं गई और अपने और अपूर्वा के लिए खूब खिलौने ख़रीदे. फिर खाने-पीने के स्टाल भी तो खूब सजे थे, वहाँ तो खूब मजा आया. ढेर सारी मिठाई, चाकलेट, आइसक्रीम, जूस, चाट, पिज्जा, बर्गर, नूडल्स, पास्ता...सब पर थोडा-थोडा हाथ साफ किया. -इस पर पापा ने भी अपने ब्लॉग पर एक पोस्ट लगाई है, उसे भी पढ़ें-



जब सारा भारत ठण्ड से ठिठुर रहा होता है, उस संमय अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में मौसम सुहाना होता है. देशी-विदेशी पर्यटकों के लिए यहाँ नवम्बर से फरवरी माह का संमय घूमने और मौज-मस्ती के करने के लिए उम्दा माना जाता है. खूबसूरत समुद्र-तट और लहरों की अठखेलियाँ, प्राकृतिक सौंदर्य, जैव-विविधता के बीच सेलुलर जेल और काला-पानी की ऐतिहासिकता पर्यटकों को रोमांचित करती है. समुद्र में सीप, मोलस्क, रंग-बिरंगी मछलियों के मध्य स्कूबा डाइविंग और स्नोरकलिंग का आनंद एक नए ही जीवन में ले जाता है.

ऐसे ही खुशनुमा अहसास के बीच जनवरी माह में आरंभ होता है- अंडमान-निकोबार द्वीप पर्यटन उत्सव. उत्सव क्या, मानिये पूरा भारत ही सिमट आता है. भिन्न-भिन्न प्रान्तों की संस्कृति के दर्शन यहाँ करने को मिलते हैं. इस साल मैं भी सपरिवार इस पर्यटन उत्सव में पहुंचा. राजधानी पोर्ट ब्लेयर में आरंभ होने वाला द्वीप पर्यटन उत्सव पांच जनवरी को आरंभ होकर आज पंद्रह जनवरी को ख़त्म होगा. इस उत्सव में जहाँ तमाम सरकारी विभागों की गतिविधियाँ उनके स्टाल पर परिलक्षित होती हैं, वहीँ मुख्यभूमि से मध्य प्रदेश, कर्नाटक, मेघालय, दिल्ली और गोवा जैसे राज्यों के पर्यटन निगम भी अपने स्टॉल लगाकर लोगों को आकर्षित कर रहे हैं. द्वीप महोत्सव का उद्घाटन भले ही उपराज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल भूपेन्द्र सिंह ने एक ही स्थान पर किया हो, पर यह निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है. शाम को सड़कों पर निकालिए तो आपको संगीत की मधुर स्वर-लहरियां अपने चारों तरफ गुंजित होती सुनाई देंगीं. पोर्टब्लेयर के साथ-साथ द्वीपसमूह के अन्य पर्यटक स्थलों पर भी सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन चलता रहता है. इनमें डिगलीपुर, लोंग आइलैंड, नील, हैवलॉक, विम्बर्लीगंज और भातू बस्ती इत्यदि शामिल हैं।आई.टी.एफ. मैदान में आयोजित होने वाला हास्य कवि सम्मेलन तो इस कार्यक्रम की जन है, जहाँ मुख्यभूमि से तमाम चर्चित कवि अपनी रचनाओं से लोगों को बांधने के लिए पहुँचते हैं. स्थानीय कवियों का कवि-समेलन तो होता ही है. तमाम स्कूलों के बच्चे अंतर स्कूल नृत्य प्रतियोगिता में भाग लेकर प्रोत्साहित होते हैं तो सेना और पुलिस की ओर से भी तमाम कार्यक्रम प्रस्तुत किए जाते हैं. रॉक बैंड ‘यूफोरिया’ का प्रदर्शन तो इस बार लाजवाब रहा.

पोर्टब्लेयर में आयोजित द्वीप पर्यटन उत्सव अब इन द्वीपों से बाहर भी अपनी रंगत बिखेरने लगा है. इसीलिए इसे पहली बार राष्ट्रीय प्रसारण में भी शामिल किया गया. उद्घाटन समारोह का दूरदर्शन के राष्ट्रीय चैनल डी.डी. भारती से सीधा प्रसारण किया गया. सभी द्वीपों के अलावा बत्तीस अन्य राष्ट्रों में भी यह सीधा प्रसारण देखा गया. इसके अलावा दूरदर्शन के राष्ट्रीय प्रसारण चैनल डी.डी.वन पर द्वीप पर्यटन उत्सव पर बाइस मिनट की टी.वी.रिपोर्ट भी प्रसारित की गई.

इस बार पहली बार निकोबार में भी द्वीप पर्यटन उत्सव आयोजित किया गया. गौरतलब है कि निकोबार भारत का सबसे दूरस्थ क्षेत्र है और इंदिरा प्वाइंट भी यहीं पर स्थित है. जिला मुख्यालय कार निकोबार में निकोबार पर्यटन महोत्सव सात जनवरी से आरंभ होकर ग्यारह जनवरी तक चला. यहाँ भी पर्यटन उत्सव का उद्घाटन करने उपराज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल भूपेन्द्र सिंह पहुंचे. विभिन्न विभागों के स्टॉल और सांस्कृतिक कार्यक्रमों कि छटा के साथ-साथ निकोबारी संस्कृति को नजदीक से महसूस करने का अपना अलग ही लुत्फ़ है. वैसे भी अंडमान-निकोबार कि जनजातियों में अभी मात्र निकोबारी ही सभ्य हुए हैं, अन्य अभी भी आदिम अवस्था में ही हैं.

शनिवार, जनवरी 14, 2012

मकर संक्रांति पर्व पर बधाइयाँ


!! मकर संक्रांति पर्व पर आप सभी को बधाइयाँ !!



चित्र साभार : वेब दुनिया

बुधवार, जनवरी 11, 2012

मेरा दाँत (tooth) खो गया...


आजकल मैं बहुत टेंशन में हूँ. मेरा एक मिल्की दाँत ( Milky tooth) कई दिनों से हिल रहा था. मैं भी उसे अपनी जीभ से खूब परेशान करती और सोचती थी कि यह कब बाहर निकलेगा ? मैं अपना दाँत हाथों में लेकर खुद देखना चाहती थी. पर सब गड़बड़ हो गया.

कल क्लास-रूम में टिफिन के बाद जब मैं पानी पी रही थी तो मुझे लगा कि मेरा दाँत नहीं है. मैं तो बहुत डर गई कि कहीं यह मेरे पेट में तो नहीं चला गया. ममा स्कूल में लेने आईं तो उन्हें बताया, फिर ममा ने फोन पर पापा को आफिस में बताया. अपने पहले ही मिल्की टूथ को मैं देख भी नहीं पाई और अभी तक यह पता नहीं चल सका है कि वह दाँत कहाँ चला गया...??

मंगलवार, जनवरी 10, 2012

बीस रूपये के नोट के पीछे किस जगह की फोटो है ??

आपने कभी 20 रूपये का नोट ध्यान से देखा है. नहीं ना, तो फिर इसका पिछला हिस्सा ध्यान से देखिए. इस पर समुद्र, लाइट-हॉउस और नारियल के पेड़ दिख रहे होंगें. आपको पता है, 20 रूपये की नोट के पीछे अंकित यह फोटो अंडमान में स्थित नार्थ-बे आइलैंड की है. यहाँ का बीच और लाइट-हॉउस बहुत खूबसूरत लगते हैं।


दक्षिण अंडमान की सबसे ऊँची चोटी माउन्टेन हेरियट से इसे देखना तो और भी शानदार लगता है.

शनिवार, जनवरी 07, 2012

समुद्र के अन्दर का जीवन कैसा होता होगा..

कभी आपने सोचा है कि समुद्र के अन्दर जीवन कैसा होता होगा. ढेर सारी रंग-बिरंगी मछलियाँ, कोरल्स, सीप, मोलस्क, साँप...और भी बहुत कुछ. और सोचिए वे सब कैसे मस्ती करते होंगें. अब मेरी इमेजिनेशन देखिये इस ड्राइंग के माध्यम से. मुझे लगता है कि समुद्र के अन्दर सारे जीव ऐसे ही घूमते होंगें.

मंगलवार, जनवरी 03, 2012

हिंदुस्तान, दैनिक जागरण और अमर उजाला में ब्लागर अक्षिता और 'पाखी की दुनिया' की चर्चा

(हिंदुस्तान, वाराणसी, 2 दिसंबर 2011 में चर्चा)

(दैनिक जागरण, वाराणसी, 2 दिसंबर 2011 में चर्चा)

(अमर उजाला, वाराणसी, 2 दिसंबर 2011 में चर्चा)

(हिंदुस्तान, वाराणसी, 1 दिसंबर 2011 में चर्चा)


(हिंदुस्तान, वाराणसी, 1 दिसंबर 2011 में चर्चा)

सोमवार, जनवरी 02, 2012

पाखी चली स्कूल..छुट्टियाँ ख़त्म


वर्ष 2011 बीत गया और अब नए साल-2012 का जश्न भी ख़त्म.

क्रिसमस से लेकर नए साल तक की छुट्टियाँ ख़त्म और आज से मेरे स्कूल शुरू हो गए.

अभी मेरा क्लास सुबह 7:30 से 11:30 तक चलता है.

..तो मैं तो चली स्कूल, आखिर पढ़ाई भी तो जरुरी है!!

रविवार, जनवरी 01, 2012

नए साल का पहला दिन..


नए साल-2012 का पहला दिन तो खूब मस्ती से बीता. स्कूल की छुट्टियाँ, उस पर से संडे का दिन..सो सबकी छुट्टियाँ.

आज दिन भर मैं खूब घूमी और जब थक गई तो पहुंची अपने फेवरेट फार्चून बे रिसोर्ट. यह अंडमान का एकमात्र 4-स्टार होटल है.

वैसे भी हर संडे को हमारा लंच यहाँ पक्का है, यदि हम पोर्टब्लेयर में हैं.

यहाँ बाहर बैठकर ठंडी हवा में ऱोस आइलैंड और नार्थ-बे आइलैंड को देखना बहुत खूबसूरत लगता है. यहाँ लगी हाथ में तीर-धनुष लिए 'जारवा' की यह स्टैचू तो मुझे बहुत अच्छी लगती है.

यहाँ का खाना काफी लजीज होता है. कभी भी यहाँ आयें तो इनका बुफे-सिस्टम ट्राई करें. एक साथ ढेर सारी वैरायटी... और हम बच्चों को चाहिए ही क्या.


ममा-पापा और अपूर्वा के साथ घूमना वाकई मजेदार रहा..पता ही नहीं चला कि नए साल का पहला दिन कैसे बीत गया. अभी शाम को तो बीच पर भी मस्ती करनी है..तब तक बाय-बाय.

!! आप सभी लोगों को नए साल पर फिर से ढेर सारी बधाइयाँ और प्यार !!