आप सब 'पाखी' को बहुत प्यार करते हैं...
शुक्रवार, फ़रवरी 24, 2012
गुरुवार, फ़रवरी 23, 2012
अक्षिता (पाखी) का एक और मिल्की टूथ गया..
..अब आप भी भगवन जी से मनाइए कि मेरा नया टूथ जल्दी से आ जाए !!
लेबल:
Growing Akshitaa,
Milky Teeth
गुरुवार, फ़रवरी 16, 2012
सोमवार, फ़रवरी 13, 2012
गुरुवार, फ़रवरी 09, 2012
बुधवार, फ़रवरी 08, 2012
वाह..कितना सुन्दर नेचुरल ब्रिज है !!
यहाँ पर चारों तरफ खूब टूटे हुए कोरल्स बिखरे हुए हैं. लोग बता रहे थे कि सुनामी में यहाँ बहुत नुकसान हुआ.
कुछ कोरल्स और जलीय पौधे तो अभी भी देखे जा सकते हैं.
वाकई यहाँ आकर बहुत अच्छा लगा. आप भी जब कभी अंडमान आयें तो नील आइलैंड जरुर आयें..बहुत मजा आयेगा.
लेबल:
अंडमान-निकोबार की दुनिया,
जानकारी,
ट्रेवलिंग
गुरुवार, जनवरी 26, 2012
प्यारा सा गणतंत्र हमारा

प्यारा-प्यारा देश हमारा.
सारे जग से है ये न्यारा.
कितनी सारी बोली यहाँ पर.
कितनी सारी हैं भाषाएँ.
हम सब सारे मिल-जुल रहते.
मानवता है सार हमारा.
शान कभी न कम हो इसकी.
प्यारा सा गणतंत्र हमारा.
हम बच्चों ने ली है कसम.
चमकेगा ये बनके सितारा.
(यह गीत गणतंत्र दिवस पर आयोजित मेरे स्कूल-फंक्शन के लिए ममा ने तैयार किया है.)
!! गणतंत्र दिवस पर आप सभी को ढेर सारी बधाइयाँ !!
लेबल:
फेस्टिवल-डे,
बाल गीत/कविता
शुक्रवार, जनवरी 20, 2012
अंडमान में बन्दर नहीं पाए जाते...
आपको सुनकर आश्चर्य होगा कि अंडमान में बन्दर नहीं पाए जाते. कानपुर में तो हमारे लान में खूब सारे बन्दर आते थे और पेड़ों और फूलों की डाली पर खेलते और उन्हें तोड़कर भाग जाते थे. जब मैं यहाँ अंडमान में नई-नई आई थी तो बंदरों को न देखकर सोचा कि किसी दूसरे आइलैंड पर रहते होंगें. पर यहाँ अंडमान में तो बन्दर पाए ही नहीं जाते. यहाँ जंगलों में सिर्फ जंगली सूअर और हिरन मिलते हैं. हाथी तो यहाँ मेन-लैंड से लाए गए हैं. 
..पर निकोबार में बन्दर पाए जाते हैं. ये बन्दर निकोबार के लगभग अंतिम छोर कैम्पबेल-बे में पाए जाते हैं. पर ये बन्दर भी बड़े अजीब होते हैं. ये केकड़े (crab) खाते हैं. मैंने तो इन्हें देखा नहीं, पर सोचिये ये कैसे होते होंगें...!!

..पर निकोबार में बन्दर पाए जाते हैं. ये बन्दर निकोबार के लगभग अंतिम छोर कैम्पबेल-बे में पाए जाते हैं. पर ये बन्दर भी बड़े अजीब होते हैं. ये केकड़े (crab) खाते हैं. मैंने तो इन्हें देखा नहीं, पर सोचिये ये कैसे होते होंगें...!!
रविवार, जनवरी 15, 2012
अंडमान-निकोबार द्वीप पर्यटन उत्सव में अक्षिता (पाखी)
जब सारा भारत ठण्ड से ठिठुर रहा होता है, उस संमय अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में मौसम सुहाना होता है. देशी-विदेशी पर्यटकों के लिए यहाँ नवम्बर से फरवरी माह का संमय घूमने और मौज-मस्ती के करने के लिए उम्दा माना जाता है. खूबसूरत समुद्र-तट और लहरों की अठखेलियाँ, प्राकृतिक सौंदर्य, जैव-विविधता के बीच सेलुलर जेल और काला-पानी की ऐतिहासिकता पर्यटकों को रोमांचित करती है. समुद्र में सीप, मोलस्क, रंग-बिरंगी मछलियों के मध्य स्कूबा डाइविंग और स्नोरकलिंग का आनंद एक नए ही जीवन में ले जाता है.
ऐसे ही खुशनुमा अहसास के बीच जनवरी माह में आरंभ होता है- अंडमान-निकोबार द्वीप पर्यटन उत्सव. उत्सव क्या, मानिये पूरा भारत ही सिमट आता है. भिन्न-भिन्न प्रान्तों की संस्कृति के दर्शन यहाँ करने को मिलते हैं. इस साल मैं भी सपरिवार इस पर्यटन उत्सव में पहुंचा. राजधानी पोर्ट ब्लेयर में आरंभ होने वाला द्वीप पर्यटन उत्सव पांच जनवरी को आरंभ होकर आज पंद्रह जनवरी को ख़त्म होगा. इस उत्सव में जहाँ तमाम सरकारी विभागों की गतिविधियाँ उनके स्टाल पर परिलक्षित होती हैं, वहीँ मुख्यभूमि से मध्य प्रदेश, कर्नाटक, मेघालय, दिल्ली और गोवा जैसे राज्यों के पर्यटन निगम भी अपने स्टॉल लगाकर लोगों को आकर्षित कर रहे हैं. द्वीप महोत्सव का उद्घाटन भले ही उपराज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल भूपेन्द्र सिंह ने एक ही स्थान पर किया हो, पर यह निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है. शाम को सड़कों पर निकालिए तो आपको संगीत की मधुर स्वर-लहरियां अपने चारों तरफ गुंजित होती सुनाई देंगीं. पोर्टब्लेयर के साथ-साथ द्वीपसमूह के अन्य पर्यटक स्थलों पर भी सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन चलता रहता है. इनमें डिगलीपुर, लोंग आइलैंड, नील, हैवलॉक, विम्बर्लीगंज और भातू बस्ती इत्यदि शामिल हैं।आई.टी.एफ. मैदान में आयोजित होने वाला हास्य कवि सम्मेलन तो इस कार्यक्रम की जन है, जहाँ मुख्यभूमि से तमाम चर्चित कवि अपनी रचनाओं से लोगों को बांधने के लिए पहुँचते हैं. स्थानीय कवियों का कवि-समेलन तो होता ही है. तमाम स्कूलों के बच्चे अंतर स्कूल नृत्य प्रतियोगिता में भाग लेकर प्रोत्साहित होते हैं तो सेना और पुलिस की ओर से भी तमाम कार्यक्रम प्रस्तुत किए जाते हैं. रॉक बैंड ‘यूफोरिया’ का प्रदर्शन तो इस बार लाजवाब रहा.
पोर्टब्लेयर में आयोजित द्वीप पर्यटन उत्सव अब इन द्वीपों से बाहर भी अपनी रंगत बिखेरने लगा है. इसीलिए इसे पहली बार राष्ट्रीय प्रसारण में भी शामिल किया गया. उद्घाटन समारोह का दूरदर्शन के राष्ट्रीय चैनल डी.डी. भारती से सीधा प्रसारण किया गया. सभी द्वीपों के अलावा बत्तीस अन्य राष्ट्रों में भी यह सीधा प्रसारण देखा गया. इसके अलावा दूरदर्शन के राष्ट्रीय प्रसारण चैनल डी.डी.वन पर द्वीप पर्यटन उत्सव पर बाइस मिनट की टी.वी.रिपोर्ट भी प्रसारित की गई.
इस बार पहली बार निकोबार में भी द्वीप पर्यटन उत्सव आयोजित किया गया. गौरतलब है कि निकोबार भारत का सबसे दूरस्थ क्षेत्र है और इंदिरा प्वाइंट भी यहीं पर स्थित है. जिला मुख्यालय कार निकोबार में निकोबार पर्यटन महोत्सव सात जनवरी से आरंभ होकर ग्यारह जनवरी तक चला. यहाँ भी पर्यटन उत्सव का उद्घाटन करने उपराज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल भूपेन्द्र सिंह पहुंचे. विभिन्न विभागों के स्टॉल और सांस्कृतिक कार्यक्रमों कि छटा के साथ-साथ निकोबारी संस्कृति को नजदीक से महसूस करने का अपना अलग ही लुत्फ़ है. वैसे भी अंडमान-निकोबार कि जनजातियों में अभी मात्र निकोबारी ही सभ्य हुए हैं, अन्य अभी भी आदिम अवस्था में ही हैं.
शनिवार, जनवरी 14, 2012
बुधवार, जनवरी 11, 2012
मेरा दाँत (tooth) खो गया...
आजकल मैं बहुत टेंशन में हूँ. मेरा एक मिल्की दाँत ( Milky tooth) कई दिनों से हिल रहा था. मैं भी उसे अपनी जीभ से खूब परेशान करती और सोचती थी कि यह कब बाहर निकलेगा ? मैं अपना दाँत हाथों में लेकर खुद देखना चाहती थी. पर सब गड़बड़ हो गया.
कल क्लास-रूम में टिफिन के बाद जब मैं पानी पी रही थी तो मुझे लगा कि मेरा दाँत नहीं है. मैं तो बहुत डर गई कि कहीं यह मेरे पेट में तो नहीं चला गया. ममा स्कूल में लेने आईं तो उन्हें बताया, फिर ममा ने फोन पर पापा को आफिस में बताया. अपने पहले ही मिल्की टूथ को मैं देख भी नहीं पाई और अभी तक यह पता नहीं चल सका है कि वह दाँत कहाँ चला गया...??
लेबल:
टेंशन की बात,
Growing Akshitaa,
Milky Teeth
मंगलवार, जनवरी 10, 2012
बीस रूपये के नोट के पीछे किस जगह की फोटो है ??
दक्षिण अंडमान की सबसे ऊँची चोटी माउन्टेन हेरियट से इसे देखना तो और भी शानदार लगता है.
लेबल:
अंडमान-निकोबार की दुनिया,
जानकारी
शनिवार, जनवरी 07, 2012
समुद्र के अन्दर का जीवन कैसा होता होगा..
मंगलवार, जनवरी 03, 2012
सोमवार, जनवरी 02, 2012
रविवार, जनवरी 01, 2012
नए साल का पहला दिन..
नए साल-2012 का पहला दिन तो खूब मस्ती से बीता. स्कूल की छुट्टियाँ, उस पर से संडे का दिन..सो सबकी छुट्टियाँ.
आज दिन भर मैं खूब घूमी और जब थक गई तो पहुंची अपने फेवरेट फार्चून बे रिसोर्ट. यह अंडमान का एकमात्र 4-स्टार होटल है.
वैसे भी हर संडे को हमारा लंच यहाँ पक्का है, यदि हम पोर्टब्लेयर में हैं.
यहाँ बाहर बैठकर ठंडी हवा में ऱोस आइलैंड और नार्थ-बे आइलैंड को देखना बहुत खूबसूरत लगता है. यहाँ लगी हाथ में तीर-धनुष लिए 'जारवा' की यह स्टैचू तो मुझे बहुत अच्छी लगती है.
ममा-पापा और अपूर्वा के साथ घूमना वाकई मजेदार रहा..पता ही नहीं चला कि नए साल का पहला दिन कैसे बीत गया. अभी शाम को तो बीच पर भी मस्ती करनी है..तब तक बाय-बाय.
!! आप सभी लोगों को नए साल पर फिर से ढेर सारी बधाइयाँ और प्यार !!
शनिवार, दिसंबर 31, 2011
शुक्रवार, दिसंबर 30, 2011
आज ही के दिन नेता जी ने फहराया था अंडमान में राष्ट्रीय ध्वज
आज का दिन अंडमान में काफी महत्व रखता है. आज सुबह जब मैं पापा के गेस्ट-हॉउस में जा रही थी तो देखा कि नेता जी स्टेडियम के सामने राष्ट्रीय झंडा फहराया जा रहा है. मैंने सोचा कि आज क्यों झंडा फहराया जा रहा है ?फिर पापा ने बताया कि आज ही के दिन अर्थात 30 दिसंबर को 1943 में आजाद हिंद फ़ौज (Indian National Army) के सुप्रीम कमांडर के रूप में नेताजी सुभाष चन्द्र बोस ने सर्वप्रथम अंडमान में भारतीय राष्ट्रीय ध्वज फहराया था. तब हमारा देश अंग्रेजों का पराधीन था और अंडमान में जापान का कब्ज़ा था.
नेता जी यहाँ अंडमान में सेलुलर जेल देखने आए थे और अंडमान-निकोबार को ब्रिटिश शासन से स्वतंत्र पहले क्षेत्र के रूप में घोषित कर उन्होंने यहाँ जिमखाना ग्राउंड (अब नेता जी स्टेडियम) में भारतीय राष्ट्रीय ध्वज फहराया था. नेता जी ने इन द्वीपों को 'शहीद' और 'स्वराज' नाम दिया था. उस समय नेता जी कि सरकार को 9 देशों की सरकार ने मान्यता दी थी. तब से हर साल 30 दिसंबर को यहाँ भारतीय राष्ट्रीय ध्वज फहराकर उस दिन को याद किया जाता है.************************************************************************************
30th December is a significant day in the history of India in general and the Andamans in particular. On this day in the year 1943, Netaji Subhash Chandra Bose hoisted the National Flag for the first time at Port Blair declaring the islands, the first Indian Territory to be liberated from the British rule, renamed them “Saheed” and “Swaraj”. Today the day is celebrated as “Andaman Day”, the day marks the anniversary of the unfurling of the first Indian Tricolour.
लेबल:
अंडमान-निकोबार की दुनिया,
जानकारी,
स्पेशल-डे
बुधवार, दिसंबर 28, 2011
अब बताइए, पाखी की ड्राइंग में क्या-क्या छुपा है..
सदस्यता लें
संदेश (Atom)
















