आप सब 'पाखी' को बहुत प्यार करते हैं...

शुक्रवार, सितंबर 30, 2011

अक्षिता की सिस्टर अपूर्वा 11 माह की


मेरी सिस्टर अपूर्वा (तन्वी) 27 अक्तूबर को पूरे 11 महीने की हो गई. अब तो वह घुटने के बल घर में खूब दौड़ लगाती है. ममा-पापा और मेरी ऊँगली पकड़कर भी दौड़ती है. मुझे तो विश्वास ही नहीं होता कि तन्वी इत्ती जल्दी से बड़ी हो गई. अपनी बोली में ढेर सारी बातें करती रहती है. अब तो लगता है जल्द ही अच्छे से सब कुछ समझने और बोलने लगेगी. अगले महीने तो उसका पहला हैपी बर्थ-डे है. मैं तो अभी से सोचकर बहुत खुश हूँ.
आप भी अपूर्वा (तन्वी) को ढेर सारा प्यार और आशीर्वाद दीजियेगा !!

शनिवार, सितंबर 24, 2011

चाचू का जन्मदिन आया..

आज मेरे चाचू का जन्मदिन है. चाचू का नाम श्री अमित कुमार है. उनका एक ब्लॉग भी है- युवा-मन. चाचू इलाहाबाद में रहकर सिविल-सर्विसेज की तैयारी कर रहे हैं. मैंने तो आज सबसे पहले चाचू को हैपी बर्थ-डे विश किया. चाचू तो बहुत प्यारे हैं. मेरे लिए खूब चाकलेट और बैलून भेजते रहते हैं. यह फोटो तब की है, जब मेरी सिस्टर तान्या पैदा हुई थी और चाचू मिलने आए थे.


चाचू के बारे में ज्यादा जानकारी के लिए यह परिचय पढ़ें-




अमित कुमार यादव : 24 सितम्बर, 1986 को तहबरपुर, आजमगढ़ (उ.प्र.) के एक प्रतिष्ठित परिवार में श्री राम शिव मूर्ति यादव एवं श्रीमती बिमला यादव के सुपुत्र-रूप में जन्म। आरंभिक शिक्षा बाल विद्या मंदिर, तहबरपुर-आजमगढ़, आदर्श जूनियर हाई स्कूल, तहबरपुर-आजमगढ़, राष्ट्रीय इंटर कालेज, तहबरपुर-आजमगढ़ एवं तत्पश्चात इलाहाबाद वि.वि. से 2007में स्नातक और इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (IGNOU) से 2010 में लोक प्रशासन में एम.ए.। फ़िलहाल अध्ययन के क्रम में इलाहाबाद और प्रशासनिक सेवाओं की तैयारी।

अध्ययन और लेखन अभिरुचियों में शामिल. सामाजिक-साहित्यिक-सामयिक विषयों पर लिखी पुस्तकें और पत्र-पत्रिकाएं पढने का शगल, फिर वह चाहे प्रिंटेड हो या अंतर्जाल पर। तमाम पत्र-पत्रिकाओं , पुस्तकों/संकलनों एवं वेब-पत्रिकाओं, ई-पत्रिकाओं और ब्लॉग पर रचनाएँ प्रकाशित। वर्ष 2005 में 'आउटलुक साप्ताहिक पाठक मंच' का इलाहाबाद में गठन और इसकी गतिविधियों के माध्यम से सक्रिय। जुलाई-2006 में प्रतिष्ठित हिंदी पत्रिका 'आउटलुक' द्वारा एक प्रतियोगिता में पुरस्कृत, जो कि शैक्षणिक गतिविधियों से परे जीवन का प्रथम पुरस्कार। ब्लागिंग में भी सक्रियता और सामुदायिक ब्लॉग "युवा-मन" (http://yuva-jagat.blogspot.com) के माडरेटर। 21 दिसंबर 2008 को आरंभ इस ब्लॉग पर 250 के करीब पोस्ट प्रकाशित और 101 से ज्यादा फालोवर।





(चित्र में : हिंदी भवन, दिल्ली में 'हिंदी साहित्य निकेतन', परिकल्पना डाट काम, और नुक्कड़ डाट काम द्वारा आयोजित अंतर्राष्ट्रीय हिंदी ब्लॉगर सम्मलेन में उत्तरांचल के तत्कालीन मुख्यमंत्री डा. रमेश पोखरियाल 'निशंक', वरिष्ठ साहित्यकार डा. रामदरश मिश्र, डा. अशोक चक्रधर इत्यादि द्वारा मेरे लिए 'श्रेष्ठ नन्हीं ब्लागर' सम्मान ग्रहण करते चाचू अमित कुमार यादव)

!! चाचू को जन्मदिन पर खूब बधाई और प्यार !! आप भी चाचू को शुभकामना दीजिएगा !!

गुरुवार, सितंबर 15, 2011

हिंदी तो मैं भी पढ़ रही हूँ...

आजकल तो जिधर देखो हिंदी-दिवस और पखवाड़े के बैनर ही टंगे नजर आते हैं. जब सुबह मैं स्कूल जाती हूँ तो बीच में कई जगह यह बैनर देखती हूँ. फिर पापा ने बताया कि सितम्बर का पूरा महीना ही हिंदी को लेकर कोई ना कोई कार्यक्रम होता रहता है. कोई 14 सितम्बर से पहले तो कोई बाद में हिंदी पखवाडा और सप्ताह मनाता है. पापा के कार्यालय में भी कल 14 सितम्बर को हिंदी-दिवस मनाया गया.

आजकल तो हमें भी स्कूल में टीचर जी हिंदी पढ़ा रही हैं. मैं भी हिंदी के ढेर सारे वाक्य सीख रही हूँ और कई सारी कवितायेँ भी. जल्द ही आप सभी को सुनाउंगी ...!!


यह स्क्रैप मुझे काफी अच्छा लगा, आप सब भी इसे देखिये..अच्छा लगेगा !!

मंगलवार, सितंबर 06, 2011

पाखी ने भी मनाया टीचर्स-डे

कल शिक्षक दिवस (Teachers day) था. इसे हमने भी अपने स्कूल में सेलिब्रेट किया. हमारी टीचर बहुत प्यारी हैं. रोज हमें नई-नई बातें बताती हैं और ढेर सारे खेल भी खिलाती हैं।
टीचर्स-डे के बारे में उन्होंने बताया कि यह डा0 सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी के जन्म दिन पर मनाया जाता है. डा0 सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी एक अच्छे शिक्षक थे और बाद में भारत के राष्ट्रपति भी बने. उनके जीवन से जुडी और भी कई बातें टीचर जी ने बताईं।

उन्होंने कहा कि यदि हम बच्चे अच्छी तरह से पढाई करेंगें और बड़े होकर नाम कमाएंगे तो उन्हें भी बहुत अच्छा लगेगा. टीचर्स डे पर हम लोगों ने टीचर जी को प्यारे-प्यार फूल, कार्ड्स और गिफ्ट देकर इस दिवस की बधाई दी और हम लोगों को चाकलेट भी खाने को मिली।




गुरुवार, सितंबर 01, 2011

गणेश जी का मोदक

आज तो गणेश-चतुर्थी है. गणेश भगवान जी तो मुझे बहुत प्रिय हैं. कित्ते सारे मोदक (लड्डू) खा जाते हैं. कोई रोकने-टोकने वाला भी नहीं. और हम बच्चे अगर ज्यादा मिठाई खाने लगें तो दांत से लेकर पेट तक ख़राब होने की बात.

..सोचिये गणेश जी को मोदक इत्ता प्रिय क्यों है ? गणेशजी को मोदक यानी लड्डू बहुत प्रिय हैं। इनके बिना गणेशजी की पूजा अधूरी ही मानी जाती है। यह सवाल मैंने ममा-पापा से पूछा और फिर गूगल सर्च द्वारा यह बात पता चली. तो चलिए आप भी जान लीजिए.

श्रीगणेशजी को मोदकप्रिय कहा जाता है। वे अपने एक हाथ में मोदक पूर्ण पात्र रखते है। मोदक को महाबुद्धि का प्रतीक बताया गया है। शास्त्रों के अनुसार पार्वती देवी को देवताओं ने अमृत से तैयार किया हुआ एक दिव्य मोदक दिया। मोदक देखकर दोनों बालक (स्कन्द तथा गणेश) माता से माँगने लगे। तब माता ने मोदक के प्रभावों का वर्णन कर कहा कि तुममें से जो धर्माचरण के द्वारा श्रेष्ठता प्राप्त करके आयेगा, उसी को मैं यह मोदक दूँगी। माता की ऐसी बात सुनकर स्कन्द ने मयूर पर बैठकर कुछ ही क्षणों में सब तीर्थों का स्नान कर लिया। इधर लम्बोदरधारी गणेशजी माता-पिता की परिक्रमा करके पिताजी के सम्मुख खड़े हो गये। तब पार्वतीजी ने कहा- समस्त तीर्थों में किया हुआ स्नान, सम्पूर्ण देवताओं को किया हुआ नमस्कार, सब यज्ञों का अनुष्ठान तथा सब प्रकार के व्रत, मन्त्र, योग और संयम का पालन- ये सभी साधन माता-पिता के पूजन के सोलहवें अंश के बराबर भी नहीं हो सकते। इसलिये यह गणेश सैकड़ों पुत्रों और सैकड़ों गणों से भी बढ़कर है। अत: देवताओं का बनाया हुआ यह मोदक मैं गणेश को ही अर्पण करती हूँ। माता-पिता की भक्ति के कारण ही इसकी प्रत्येक यज्ञ में सबसे पहले पूजा होगी। तत्पश्चात् महादेवजी बोले- इस गणेश के ही अग्रपूजन से सम्पूर्ण देवता प्रसन्न हों।

..तो चलिए हम सभी गणेश-चतुर्थी के इस त्यौहार को मोदक (लड्डू) खाकर इंजॉय करें और आप सभी का आशीर्वाद तो मुझे मिलेगा ही !!

(मोदक खाने का मन करे तो यहाँ जरुर जाइएगा...)



बुधवार, अगस्त 31, 2011

पाखी पहुँची पैरट आइलैंड




(पिछले दिनों मैं ममा-पापा और तन्वी के साथ पैरट आइलैंड घूमने गई थी. वहाँ मैंने ढेर सारे तोते देखे. इस पर पापा ने एक पोस्ट भी लिखी थी. आप भी पढ़ें-


अंडमान में बहुत सी ऐसी चीजें हैं, जो प्राय: बहुत कम ही लोगों को पता होती हैं. इन्हीं में से एक है-पैरट-आइलैंड. पोर्टब्लेयर से बाराटांग की यात्रा में बहुत कुछ देखने को मिलता है. रास्ते में पाषाण कालीन सभ्यता में रह रहे तीर-धनुष से लैस जारवा आदिवासी, बाराटांग में कीचड़ के ज्वालामुखी, लाइम स्टोन केव. चारों तरफ घने वृक्षों से आच्छादित हरे-भरे जंगल और समुद्र की अठखेलियाँ. समुद्र का सीना चीरते हमारी स्टीमर-बोट शाम को साढ़े चार बजे आगे बढती है, साथ में हमारा परिवार और कुछेक स्टाफ के लोग.

मैन्ग्रोव-क्रीक के बीच से गुजरते हुए शाम की समुद्री हवाएँ ठण्ड का अहसास कराती हैं. जैसे-जैसे हम आगे बढ़ते हैं, आस-पास दसियों छोटे-छोटे द्वीप दिखने लगते हैं. मौसम सुहाना सा हो चला है. गंतव्य नजदीक है. आखिर हम पैरट-आइलैंड के करीब पहुँच ही जाते हैं. बोट को धीमे-धीमे वह किनारे लगाता है. उतरने की कोई जगह नहीं, बोट में बैठकर ही नजारा लेना है.
बिटिया पाखी चारों तरफ टक-टकी सी निगाह लगाए हुए है. बार-बार पूछती है कि तोते कब दिखेंगें. कानपुर में हमारे आवास-प्रांगन में एक विशाल वट वृक्ष था, शाम को उस पर अक्सर ढेर सारे तोते आते थे. तोतों की टें-टें सुनना मनोरंजक लगता था.
...चारों तरफ ठहरी हुई शांति, समुद्र भी मानो थक कर आराम कर रहो हो. एक-दो मछुहारे नाव के साथ मछली पकड़ते दिख जाते हैं. अचानक एक चीख सी पूरे माहौल का सन्नाटा तोड़ती है. हम चौंकते हैं कि क्या हुआ ? नाविक ने बताया कि जंगल में किसी ने हिरण का शिकार कर पकड़ लिया है. यद्यपि यहाँ हिरण को मारना जुर्म है, पर ये तथाकथित शिकारी जंगलों में कुत्तों के साथ जाते हैं और कुत्ते दौड़कर हिरण को पकड़ लेते हैं. अंडमान में अवैध रूप से हिरण के मांस की बिक्री कई बार सुनने को मिलती है. यह भी एक अजीब बात है की यहाँ के आदिवासी हिरणों को पवित्र आत्मा मानते हैं और उनका शिकार नहीं करते, पर बाहर से आकर बसे लोग हिरणों के शिकार में अवैध रूप से लिप्त हैं.
पैरट आईलैंड वास्तव में समुद्र के बीच मैंग्रोव की झाड़ियों पर अवस्थित है. यहाँ कोई जमीन नहीं, इसीलिए चाहकर भी बोट से नहीं उतर सकते. इन मैंग्रोव की झाड़ियों को तोतों ने कुतर-कुतर कर सम बना दिया है, ताकि उन्हें किसी प्रकार की असुविधा न हो. दूर से देखने पर यह हरे रंग का गलीचा लगता है. न तो एक पत्ती ऊपर, न एक पत्ती नीचे. वाकई, प्रकृति का अद्भुत नजारा....तभी एक तोते की टें-टें सुनाई दी. वह चारों तरफ एक चक्कर मरता है, फिर आवाज़ देता है-टें-टें. यह इशारा था सभी तोतों को बुलाने का. तभी दूसरी दिशा से आते दो तोते दिखाई दिए..टें-टें. फिर तो देखते ही देखते चारों तरफ से तोतों का झुण्ड दिखने लगा. बमुश्किल 15 मिनट के भीतर हजारों तोते आसमान में दिखने लगे. आसमान में कलाबाजियाँ करते, विभिन्न तरह की आकृति बनाते, एक झुण्ड से दुसरे झुण्ड में मिलते और फिर बड़ा झुण्ड बनाते तोते मानो अपनी एकता और कला का जीवंत प्रदर्शन कर रहे हों.
सबसे बड़ा अजूबा तो यह था कि कोई भी तोता मैंग्रोव पर नहीं बैठता, बस उसके चारों तरफ चक्कर लगाता और फिर आसमान में कलाबाजियाँ, मानो सब एक अनुशासन से बंधे हुए हों...और देखते ही देखते सारे तोते मैंग्रोव की झाड़ियों पर उतर गए. हरे रंग के मैंग्रोव पर हरे-हरे तोते, सब एकाकार से हो गए थे. चूँकि हमने उन्हें वहाँ उतरते देखा था, अत: उनकी उपस्थिति का भान हो रहा था. कोई सोच भी नहीं सकता कि मैंग्रोव की इन झाड़ियों पर हजारों तोते उपस्थित हैं. न जाने कितने द्वीपों से और दूर-दूर से ये तोते आते हैं और पूरी रात एक साथ बिताने के बाद फिर अगली सुबह मोती की तरह बिखरे द्वीपों की सैर पर निकल जाते हैं.

(पापा द्वारा लिखी गई इक पोस्ट)

सोमवार, अगस्त 22, 2011

माख्नन चोर श्री कृष्ण का जन्म दिन आया..


आज कृष्ण जन्माष्टमी है। आज ही तो देर रात माख्नन चोर श्री कृष्ण का जन्म हुआ था.जन्माष्टमी हमारे यहाँ खूब अच्छे से मनाई जाती है. मैं भी देर रात तक जगकर आज कृष्ण-जन्मोत्सव देखूंगी. कृष्ण जी की बाल-लीलाएं तो मुझे बहुत अच्छी लगती हैं. वे भी तो हम बच्चों जैसे ही खूब शरारतें करते थे और फिर उनकी मैया यशोदा कित्ता डांटती थी. लेकिन कृष्ण जी भी कम नहीं थे, अंतत: मैया को अपनी तरफ कर ही लेते थे और फिर गोपियाँ देखती ही रह जाती थीं।

और हाँ, कृष्ण जन्माष्टमी तो मेरे लिए इसलिए भी और महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि जन्माष्टमी के दिन ही मेरे पापा और नानी जी का भी जन्म हुआ था.



इस कृष्ण-जन्माष्टमी पर आप लोग मुझे ढेर सारा आशीर्वाद और प्यार दीजियेगा !!

बुधवार, अगस्त 17, 2011

स्कूल में बाँधी पौधों को राखी...


कल 16 अगस्त को मेरे स्कूल में रक्षा-बंधन मनाया गया. पर यह रक्षाबंधन थोडा अलग था, क्योंकि हम सभी ने पौधों को रक्षाबंधन बाँधकर उनकी रक्षा का संकल्प लिया. टीचर जी ने बताया कि पौधे हमारे जीवन और पर्यावरण के लिए बहुत जरुरी हैं. यदि ये ही नहीं रहेंगें तो हम सब भी नहीं रहेंगें.

हम लोगों ने यह भी वादा किया कि खेल-खेल में भी कोई पेड़-पौधों की पत्तियाँ नहीं तोड़ेगा, आखिर उन्हें भी तो दर्द होता होगा. कितना अच्छा लग रहा था, सब पौधे मानो राखी पहनकर कित्ते खुश दिखाई दे रहे थे.

चलिए, आप सब भी हमारे साथ संकल्प लीजिये कि किसी पेड़-पौधे को अब नुकसान नहीं पहुँचायेंगें !!

(चित्र में : यह हंसते हुए फूल आप सभी के लिए)

मंगलवार, अगस्त 16, 2011

ले. गवर्नर द्वारा आयोजित स्वागत-समारोह (Reception) में पाखी

कल 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस पर मैं पहली बार अंडमान-निकोबार के ले. गवर्नर द्वारा आयोजित स्वागत-समारोह (Reception) में शामिल हुई. कित्ते लोग थे वहाँ, ढेर सारे लोग आए थे. पर मेरी तरह के बच्चे बहुत कम दिखे वहाँ. वहाँ पर मैंने उन बुजुर्ग लोगों को भी देखा, जिन्होंने देश की आजादी में हिस्सा लिया था.

जब हम लोग पहुंचे तो काफी लोग आ चुके थे. कुछ ही देर बाद ले. गवर्नर श्री भूपेंद्र सिंह अंकल जी आंटी के साथ आए. उन्होंने सभी को हाथ जोड़कर नमस्ते की. फिर राष्ट्र-गान की धुन बजने लगी, मैं तो तुरंत सावधान खड़ी हो गई. इसके बाद ले. गवर्नर जी सबसे एक-एक कर मिले. मुझसे भी मिले और मैंने उन्हें नमस्ते किया. कैमरा ले जाने की मनाही थी, नहीं तो अच्छी सी फोटो भी क्लिक कर लेती. जब वो आगे बढ़ गए तो ममा-पापा के साथ घूमती हुई मैं इधर-उधर खूब देखती. इस बीच पापा के ढेर सारे दोस्तों से भी पहली बार मिली.

सबसे अंत में आई खाने की बारी. पता नहीं यह क्यों सबसे अंत में होता है ? मैंने तो खूब मस्ती की, खूब समोसे और पकौड़े खाए.बाहर खूब बारिश भी हो रही थी.कार्यक्रम के अंत में फिर से राष्ट्र-गान की धुन बजी. पर मुझे यह देखकर बहुत अच्छा लगा कि कई लोग तो मुझे पहले से ही जानते थे, आखिर अख़बारों और टी. वी. पर पहले से फोटो जो देखी थी!!

(चित्र में ले. गवर्नर श्री भूपेंद्र सिंह)

सोमवार, अगस्त 15, 2011

आज है प्यारा स्वतंत्रता दिवस

आज स्वतंत्रता दिवस है. आज ही के दिन देश को आजादी मिली थी.इस अवसर पर स्कूल में फ्राईडे को फैंसी ड्रेस कम्पटीशन भी था. हम लोगों ने काफी इंजॉय किया. अब तो मैं राष्ट्र-गान भी गा लेती हूँ. आज पापा के साथ झंडारोहण देखने जरुर गई. चारों तरफ तिरंगे झंडे देखकर बड़ा अच्छा लगा. मैंने भी तिरंगे को सैलूट किया. लोगों को मार्च-पास्ट करते हुए देखकर तो मेरा भी मन उसमें शामिल होने को कर रहा था. मैं भी बड़ी हो जाउंगी तो मार्च-पास्ट में भाग लूंगी और सबसे आगे तिरंगा झंडा लेकर चलूंगी. यह रहा हमारा राष्ट्रीय तिरंगा झंडा. आप सभी लोगों को भी स्वतंत्रता दिवस की बधाइयाँ.



शनिवार, अगस्त 13, 2011

हम बहनों की प्यारी राखी...


अले वाह, इस बार तो राखी पर मजा आ गया. मैंने अपनी छोटी बहना तान्या को राखी बांधी और उसने मुझे. कल ही पापा के साथ ममा के पसंद के ताजा-ताजा बेसन के लड्डू और बर्फी लाई थी, खाने का मजा ही कुछ और रहा.

मैं तो अपनी सिस्टर को खूब प्यार करती हूँ और वह मुझे. मैंने उसे राखी बांधी तो निकालकर उसे मुँह में डालने लगी. अभी तो हर चीज उसे बस खाने वाली लगती है.

मैंने तान्या को कैडबरी का एक चाकलेट भी दिया, अपने लिए तो दो-दो पहले से ही लेकर रख लिए थे.

यह देखिये जब मैंने तान्या को बोला कि तुम्हारी चाकलेट भी ले लेती हूँ तो कैसे गुस्सा होकर रोने लग गई. फिर मनाने के लिए अपनी भी एक चाकलेट उसे दी. तो यह रही हम बहनों की प्यारी मस्ती भरा रक्षाबंधन का त्यौहार..आपका रक्षाबंधन कैसा रहा !!

!! रक्षा बंधन पर्व की बधाइयाँ !!


!! रक्षा बंधन पर्व की बधाइयाँ !!








बुधवार, अगस्त 10, 2011

पापा का ’बर्थ-डे’ आया..

आज मेरा पापा श्री कृष्ण कुमार जी का जन्म-दिन है. जन्म-दिन पर पढ़िए ये प्यारी सी कविता-





पापा का ’बर्थ-डे’ है आया,
सब बच्चे मिल करो धमाल।
जमके खूब खाओ तुम सारे,
हो जाओ फिर लाल-लाल।

हैप्पी ’बर्थ-डे’ मिलकर गाओ,
मस्ती करो और मौज मनाओ।
पाखी और अपूर्वा भी अब

सब मिलकर बैलून फुलाओ।

आईसक्रीम और केक भी खाओ,
कोई भी ना मुँह लटकाओ।
कितना प्यारा बर्थ-डे केक,
हैप्पी बर्थ-डे मिलकर गाओ।





!! पापा को जन्म-दिन पर खूब बधाई और प्यार !!

(ऊपर देखिये पापा की बचपन की फोटो, पहचान में आए कि नहीं )

रविवार, अगस्त 07, 2011

हैपी फ्रैंडशिप-डे


!! आज फ्रैंडशिप-डे है. आप सभी को इस दिन पर ढेर सारी बधाई और प्यार !!

सोमवार, अगस्त 01, 2011

पाखी की ड्राइंग..कैसी लगी !


यह रही मेरी नई ड्राइंग. अब जल्दी से बताइए कि कैसी लगी आपको. और हाँ, ये भी तो बताना है की इस ड्राइंग में आपने क्या-क्या देखा !!

शनिवार, जुलाई 30, 2011

ममा का जन्मदिन आया...

आज 30 जुलाई को ममा का जन्म-दिन है. आज तो पार्टी वाला मस्ती भरा दिन है. मेरी भी छुट्टी और पापा की भी. आज तो खूब धमाल करेंगें. तन्वी तो पहली बार ममा के बर्थ-डे पर है. फिर हम तो चले आज ममा का हैपी बर्थ-डे सेलिब्रेट करने. और चलते-चलते यह बाल-गीत....



प्यारा-प्यारा दिन ये आया,
ममा का जन्मदिन लाया।
ढेर सारी केक-मिठाई,
और खूब चाकलेट लाया।




ममा ने काटा बर्थ-डे केक,
फूँक मार मोमबत्ती बुझाई।
सबने गाया हैप्पी बर्थ-डे,
जन्मदिन की दी बधाई।



रंग-बिरंगे प्यारे-प्यारे,
सजे हुए गुब्बारे न्यारे।
मस्ती करूँ, धमाल करूँ,
गिफ्ट मिले हैं कितने सारे।



मैंने तो एक कार्ड बनाया,
फूलों से फिर उसे सजाया।
ममा को दी खूब बधाई,
ममा ने फिर गले लगाया।

गुरुवार, जुलाई 28, 2011

पाखी का गुलाब

अंडमान-निकोबार में इस पूरे महीने 62 वाँ वन-महोत्सव मनाया जा रहा है. इस अवसर पर मेरे स्कूल में भी कई कार्यक्रम हुए. यह महोत्सव 30 जुलाई को ख़त्म होगा. आज हम लोगों को स्कूल में इस महोत्सव के बारे में बताया गया और ग्रीन इण्डिया व ग्रीन आइलैंड्स को लेकर हम सभी लोगों ने पौधारोपण किया।


हम सभी बच्चे आज अपने साथ एक-एक पौधा ले गए और स्कूल में लगाया. किसी ने फलों का, किसी ने फूलों का, किसी ने पत्तियों वाले पौधे लगाये. मैंने तो एक गुलाब का पौधा लगाया।


आखिर गुलाब फूलों का राजा जो होता है. जब तक मैं अंडमान में हूँ, तब तक तो इस पौधे पर गुलाब के ढेर सारे फूल भी आ जाएंगें और उन्हें देखना कित्ता अच्छा लगेगा !!

...आप भी ढेर सारे पौधे लगाइए. तभी तो चारों तरफ हरियाली रहेगी और हमें शुद्ध हवा और आक्सीजन मिल सकेगी !!

सोमवार, जुलाई 25, 2011

ये रहे मेरे साफ्ट टॉयज


आपको टॉयज अच्छे लगते हैं. मुझे तो बहुत अच्छे लगते हैं. आपने साथ-साथ तन्वी के टॉयज भी तो हैं, फिर ढेर सारी मस्ती. ऐसी ही एक दिन की मस्ती को पापा ने कैमरे में कैद कर लिया.






आप बताईए, कैसी लगी मेरी यह मस्ती और मेरे साफ्ट टॉयज !!

बुधवार, जुलाई 20, 2011

कित्ती स्वादिष्ट है यह लीची..

लीची तो मुझे बहुत भाती है. पर यहाँ अंडमान में ज्यादा नहीं मिलती. गर्मी की छुट्टियों में एक दिन ममा-पापा के साथ हेलीपैड से बाहर निकल रही थी कि लीची वाला दिख गया.




फिर क्या था, ढेर सारी लीची खरीदकर लाई.





खूब स्वाद ले-ले कर खाए.





कित्ती स्वादिष्ट है यह लीची..

शुक्रवार, जुलाई 15, 2011

ये ब्लॉग अच्छा लगा : पाखी माने पक्षी या चिड़िया - अक्षिता पाखी


कल एक चिङिया उङती हुयी मेरे ब्लाग पर आयी । मैंने कहा - हल्लो डियर लिटिल बर्ड ।

तब चिङिया ने कहा - मैं चिङिया नहीं हूँ । मेरा नाम चिङिया है । पाखी माने पक्षी या चिड़िया ।

मैंने कहा - डियर ! आप चिङिया हो । तभी तो आपका नाम पाखी है । अब चिङिया को खरगोश कहते सुना है किसी से ?

पाखी ने कहा - ओफ़्फ़ोह अंकल ! वैसे तो मैं एक प्यारी बच्ची हूँ । पर मैं दिन भर चिङिया की तरह इधर उधर फ़ुदकती हूँ ना । इसलिये मम्मी ने मेरा नाम पाखी रख दिया ।

अच्छा ! मैंने आश्चर्य से कहा - और आपके पापाजी का नाम क्या है ?

पाखी - अंकल ! माय फ़ादर नेम इज श्री कृष्ण कुमार यादव । ( उफ़ ! अब इस बच्ची को कौन समझाये कि मुझे इंगलिश बिल्कुल भी नहीं आती )

मैंने कहा - फ़िर आपकी ममा का नाम जरूर राधा यादव होगा । स्योर !

पाखी ने झुँझलाकर माथे पर हाथ मारा । और बोली - उफ़ ! अंकल लगता है । आपने शेक्सपियर को नहीं पढा कि ..नाम में क्या रखा है ?

मैंने कहा - अगर नाम में कुछ नहीं रखा । तो फ़िर मैं आपको कैसे बुलाऊँगा । और आप मुझे कैसे बुलाओगी ? सब लोग एक दूसरे को कैसे बुलायेंगे ?

अच्छा अंकल ! पाखी चुटकी बजाकर बोली - आपका नाम राजीव है । और राजीव माने कमल । तो क्या आप कमल हो गये । मीन एक फ़्लावर । ( उफ़ ! अब इस स्वीट बच्ची को कैसे बताऊँ कि पर्यायवाची शब्दों का पेज मैंने चूरन रखने के लिये किताब से फ़ाङ ही दिया था )

इसलिये मैंने टापिक बदलते हुये कहा - खैर छोङो । एक बात बताओ । आप तो पाखी हो । इसलिये समुद्र के ऊपर से हनुमान जी की तरह उङकर हमारे सबके ब्लाग पर आ जाती हो । लेकिन हम सभी ब्लागर आपके ब्लाग पर जाने के लिये समुद्र कैसे पार करें ?

पाखी दो मिनट तक सोचती रही । और फ़िर खुश होकर बोली - अंकल ! आप विक्रम वैताल वाले वैताल के द्वारा आ जाना ।
और फ़िर मुझे आगे बोलने का अबसर दिये बिना " फ़ुर्र " से टाटा बाय बाय करते हुये पोर्ट ब्लेयर को उङ गयी ।

और ये है । प्यारी नन्ही अक्षिता पाखी का परिचय -

मेरा नाम अक्षिता है । सब मुझे प्यार से पाखी नाम से बुलाते हैं । मेरा ये निकनेम अच्छा है ना । आप भी मुझे पाखी कहकर बुला सकते हैं । पाखी माने पक्षी या चिड़िया । मैं भी तो एक चिड़िया ही हूँ । जो दिन भर इधर उधर फुदकती रहती हूँ । मेरा जन्म 25 मार्च को हुआ । अब इसे अपने दिमाग की डायरी में नोट कर लीजिये । तभी तो आप मुझे जन्मदिन की बधाई देंगे । और ढेर सारे गिफ्ट भी । और हाँ..खूब सारा प्यार और आशीर्वाद भी । मुझे अच्छा लगता है - खेलना । नृत्य करना । चित्र बनाना । आइसक्रीम खाना और ढेर सारी शरारतें करना । मेरे ममा श्रीमती आकांक्षा पापा श्री कृष्ण कुमार यादव हैं । मेरा ददिहाल आजमगढ़ और ननिहाल सैदपुर (गाजीपुर) में है । फ़िलहाल ममा पापा के साथ पोर्टब्लेयर (अंडमान) में हूँ । मेरी छोटी बहन तन्वी भी है । मैं LKG में पढ़ती हूँ । 'पाखी की दुनिया' में आप पायेंगें मेरी ढेर सारी बातें । घूमना फिरना । मेरी क्रिएटिविटी । मेरी फेमिली और स्कूल की बातें और भी बहुत कुछ । यह ब्लॉग 24 जून 2009 को आरंभ हुआ । अब तो यहाँ भी खूब फुदक फुदक करुँगी । इनका ब्लाग - पाखी की दुनिया

( 'ये ब्लॉग अच्छा लगा' ब्लॉग पर राजीव कुलश्रेष्ठ अंकल जी द्वारा 'पाखी की दुनिया' के बारे में लिखी गई पोस्ट साभार)


...यहाँ BLOG WORLD .COM पर भी राजीव कुलश्रेष्ठ अंकल जी ने मेरे बारे में लिखा है, आभार और प्यार !!

सोमवार, जुलाई 11, 2011

बेटियों को मारो नहीं...


आज विश्व जनसंख्या दिवस है. 2011 में तो मैं पहली बार जनसंख्या में शामिल हुई. मैं ही नहीं, 2001 के बाद पैदा सभी बच्चे पहली बार इस जनसंख्या में शामिल हुए. यह तो हम सभी के लिए ख़ुशी की बात है !

...पर इक दुःख की बात भी है कि बेटों कि अपेक्षा बेटियों की संख्या घटी है. इसलिए नहीं कि बेटियाँ पैदा ही नहीं हुईं, बल्कि इसलिए कि कई लोग बेटियों को पसंद नहीं करते और उन्हें पेट में ही मार डालते हैं. वे क्यों नहीं सोचते कि आखिर, हम बेटियों के बिना तो दुनिया सूनी है.

..इस 'विश्व जनसंख्या दिवस' पर यदि सब लोग यही संकल्प लें कि बेटियों को मारेंगें नहीं, तो ही इस दिन की सार्थकता है !!

शुक्रवार, जुलाई 08, 2011

पाखी की नई ड्राइंग


!! यह रही मेरी नई ड्राइंग. इसे देखकर बताइयेगा कि कैसी है और आपने क्या-क्या देखा इसमें !!