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सोमवार, दिसंबर 24, 2012

छुट्टियों के दिन

आजकल छुट्टियों के दिन चल रहे हैं। इस बीच क्रिसमस से लेकर नए साल तक का आगमन होगा। कई बार सोचती हूँ कि बाहर निकलूं, पर ठण्ड इत्ती ज्यादा पड़ रही है कि हिम्मत ही नहीं पड़ती। सूरज दादा तो मानो नाराज बैठे हैं कि वे अपना मुखड़ा नहीं दिखाएंगें, ताकि हम बच्चे छुट्टियों में कहीं निकल ही न पायें। यह तो कुछ ज्यादा ही ज्यादती हो गई।

छुट्टियाँ हैं, तो घर में बैठने से थोड़े ही काम चलेगा। परसों सटरडे को मैंने दबंग-2 मूवी देखी। अब चुलबुल पाण्डेय जी लालगंज (आजमगढ़) से कानपुर आ गए हैं। आजमगढ़ तो हमारा पैत्रिक आवास है और कानपुर में हमारा जन्म हुआ है। अब तो लगता है कि दबंग-3 में चुलबुल जी पक्का इलाहाबाद ट्रांसफर हो जायेंगे, आखिर हम इलाहाबाद में जो हैं। इस बीच अपने ननिहाल भी घूम आई। पहली बार गाजीपुर भी गई और ममा का कालेज देखा। गाजीपुर में हम अफीम-कोठी में टिके। वहाँ ढेर सारे बन्दर दिखे। कई बन्दर तो अफीम की फैक्ट्री से निकलने वाला पानी पीकर बेसुध पड़े थे। गाजीपुर में ही अंग्रेज गवर्नर जनरल लार्ड कार्नवालिस का भी मकबरा देखा।

(ब्रिटिश गवर्नर जनरल लार्ड कार्नवालिस का मकबरा, गाजीपुर)
 
इलाहाबाद में इस समय कुम्भ की खूब तैयारियां चल रही हैं। सारी सड़कें साफ-सुथरी नजर आती हैं। जब हम इलाहाबाद आए थे तो चारों तरफ खूब धूल और गंदगी दिखती थी। तब तो हम पापा जी से यही पूछते थे कि इत्ते गंदे शहर में कैसे रहकर उन्होंने पढाई की थी। खैर, अब तो अच्छा हो गया है। इस बार हम भी कुम्भ मेले को इंजॉय करेंगे। वहाँ पापा के कैम्प आफिस में बैठकर देखेंगे कि इतने सारे लोग कैसे इतनी ठण्ड में रहते हैं। कित्ते सारे साधु-संत अपना डेरा वहाँ डाले हुए हैं।

अभी तो हमें बनारस भी जाना है। बनारस घूमना हमें बहुत अच्छा लगता है, खासकर सारनाथ और गंगा-तट की गंगा आरती।

इलाहबाद में भी ढेर सारी घूमने की जगहें हैं। किला और संगम तो हम घूम चुके हैं। इसके अलावा आनंद भवन, कंपनी बाग़, संग्रहालय, सरस्वती घाट, खुसरो बाग़ सहित ढेर सारी जगहें घूमने के लिए हैं। और हाँ, इलाहाबादी अमरुद के बिना तो सब कुछ अधूरा है और आजकल इनका सीजन भी चल रहा है। तो मैं चली इलाहाबादी अमरुद खाने और आप भी जल्दी से इलाहाबाद घूम जाइये। एक साथ ही प्रयाग कुम्भ और इलाहाबादी अमरुद दोनों के दर्शन हो जायेंगें।

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