आप सब 'पाखी' को बहुत प्यार करते हैं...
सोमवार, नवंबर 28, 2011
शुक्रवार, नवंबर 25, 2011
यह जलेबी भी न...
जलेबी तो मुझे बहुत अच्छी लगती है. पर यहाँ अंडमान में जलेबी नहीं मिलती. दुकानदार से जलेबी मांगिये तो इमरती देते हैं. उन्हें जलेबी और इमरती का अंतर ही नहीं पता चलता....और जब से मैंने जलेबी बाई वाला गाना सुना है. तब से तो जलेबी को और मिस करने लगी हूँ.
इस बार दिवाली के बाद मैं ममा-पापा के साथ लखनऊ गई थी तो वहाँ करीब पंद्रह दिन रही. अलीगंज में राधेलाल मिष्ठान भंडार के यहाँ से रोज सुबह गरम-गरम जलेबी मंगवाती और खूब मजे लेकर खाती. ममा-पापा को तो अपने लिए अलग से मंगवाना पड़ता. वैसे ममा-पापा को जलेबी के साथ दही और कचौरी खूब भाती है.अपूर्वा (तान्या) तो दोनों तरफ हाथ साफ करती.
..अब फिर अंडमान आ गई हूँ. ममा से कई बार जलेबी की फरमाइश करती हूँ. अब मेरी फरमाइश पूरी हो रही है. आखिर, ममा गरम-गरम बढ़िया जलेबी बनाती है. अब तो अपूर्वा भी जलेबी खाने में मेरा साथ देने लगी है.
...तो आप भी जलेबी का लुत्फ़ उठाइए और मुंह में पानी आने से रोकिए...!!
मंगलवार, नवंबर 22, 2011
'पाखी की दुनिया' और बच्चों से जुड़े अन्य ब्लॉगों की चर्चा 'जनसंदेश टाइम्स' में...

भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पं0 जवाहरलाल नेहरू ने एक बार कहा था- ‘मैं हैरत में पड़ जाता हूँ कि किसी व्यक्ति या राष्ट्र का भविष्य जानने के लिए लोग तारों को देखते हैं। मैं ज्योतिष की गिनतियों में दिलचस्पी नहीं रखना। मुझे जब हिन्दुस्तान का भविष्य देखने की इच्छा होती है, तो बच्चों की आँखों और चेहरों को देखने की कोशिश करता हूँ। बच्चों के भाव मुझे भावी भारत की झलक दे जाते हैं।’
बच्चे सचमुच किसी भी राष्ट्र के भविष्य होते हैं। इसीलिए विद्वानों ने देश और समाज को संवारने के लिए बच्चों के वर्तमान को संवारने पर जोर दिया है। बच्चों के समुचित विकास के लिए जितना जरूरी यह है कि उन्हें जीने की बेहतर सुविधाएँ मिलें और उनकी शिक्षा-दीक्षा का समुचित प्रबंध हो, उतना ही जरूरी है कि उनके मानसिक विकास पर भी ध्यान दिया जाए।
बच्चों की इसी मानसिक खुराक को दृष्टिगत रखते हुए जहाँ देश के अलग-अलग भागों से ‘नंदन’, ‘बालहंस’, ‘चकमक’, ‘बालवाटिका’, ‘नन्हे सम्राट’, ‘बाल भारती’, ‘बालवाणी’ जैसी बाल पत्रिकाएँ निकल रही हैं, वहीं इंटरनेट पर बच्चों की मानसिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए अनेक ब्लॉगों का नियमित प्रकाशन भी हो रहा है। ऐसे तमाम ब्लॉगों में ‘बाल उद्यान’ (http://baaludyan.hindyugm.com) का प्रमुख स्थान है। यह ब्लॉग इंटरनेट पर हिन्दी लेखन को बढ़ावा देने के लिए सक्रिय संस्था ‘हिन्द युग्म’ का एक प्रयास है। इस ब्लॉग के संचालकों में जहाँ एक ओर तकनीक के महारथी शामिल हैं, वहीं बच्चों के लिए लिखने वाले बहुत से कवि, कहानीकार, पेंटर, गायक भी इससे जुड़े हुए हैं। यही कारण है कि इस ब्लॉग की विषय सामग्री में जितनी विविधता देखने को मिलती है, उतनी और कहीं नहीं मिलती।
ऐसा ही एक अन्य ब्लॉग है ‘नन्हा मन’ (http://nanhaman.blogspot.com), जहाँ पर बाल साहित्य की विभिन्न विधाओं की मनोरंजक रचनाएँ प्रकाशित होती हैं। कविता-कहानी के अतिरिक्त यहाँ एक ओर सैर-सपाटा जैसे घुमक्कड़ी का कॉलम है, तो दूसरी ओर पर्यावरण और बाघ बचाओ जैसे जनोपयोगी अभियानों से सम्बंधित प्रेरक सामग्री। इस ब्लॉग की संचालिका सीमा सचदेव ब्लॉग के उद्देश्यों के बारे में बताते हुए कहती हैं ‘हर मासूम चेहरे पर खुशी हमारा ध्येय है। बच्चों की हँसी, राष्ट्र की विजय है। हम सद्-विचारों को फैलाएँगे। नेता देश का, बच्चों को बनाएँगे।’ प्रसन्नता का विषय है कि इस अभियान से देश के कोने-कोने से लोग जुड़े हुए हैं। वे नियमित रूप से बच्चों के लिए उपयोगी सामग्री रच रहे हैं, देश के सुंदर भविष्य की कामना कर रहे हैं।
ऐसे ही दो अन्य रोचक और पठनीय ब्लॉग है, ‘नन्हे-मुन्ने’ (http://naneymuney.blogspot.com) और ‘बाल-संसार’ (http://balsansar.blogspot.com), जिनपर विविधतापूर्ण रोचक और पठनीय सामग्री उपलब्ध है। इनमें जहाँ ‘नन्हे मुन्ने’ उपरोक्त तमाम ब्लॉगों की तरह एक सामुहिक ब्लॉग है, वहीं ‘बाल संसार’ अजय विश्वास के व्यक्तिगत प्रयासों का नतीजा है। उन्होंने अपने अथक श्रम से इस ब्लॉग की जड़ों को सींचा है।
बच्चों से जुड़े तमाम ब्लॉगों की भीड़ में एक ऐसा ब्लॉग भी है, जो अपने पवित्र लक्ष्य के कारण विशिष्ट स्थान रखता है। ‘नन्हे पंख’ (http://nanhenpankh.blogspot.com) नामक यह ब्लॉग अक्षम बच्चों के संघर्ष को समर्पित है। अमलेन्दु अस्थाना द्वारा संचालित यह ब्लॉग बताता है कि भारत में मानसिक रूप से विकलाँग बच्चों की संख्या तीन प्रतिशत है। लेकिन इस संख्या को देखते हुए देश में इसके लिए काम करने वाले लोग काफी कम हैं। ‘नन्हे पंख’ एक तरह का वैचारिक ब्लॉग है, जो मानसिक विकलाँग बच्चों की आवाज को पूरे दमखम से उठाता है और उनके सम्बंध में चेतना जगाने का कार्य करता है।
एक ओर जहाँ इन्टरनेट पर बच्चों के लिए रोचक, मनोरंजक और ज्ञानवर्द्धक सामग्री से सुसज्जित ब्लॉगों की संख्या पिछले कुछ एक सालों में तेजी से बढ़ी है, वहीं दूसरी ओर ऐसे ब्लॉग भी तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं, जिनमें अभिभावक अपने बच्चों की गतिविधियों पर केन्द्रित सामग्री का प्रकाशन करते हैं। ऐसे ही कुछ चर्चित ब्लॉग हैं: ‘आदित्य’ (http://aadityaranjan.blogspot.com), ‘पाखी की दुनिया’ (http://www.pakhi-akshita.blogspot.com), ‘लविज़ा’ (http://blog.laviza.com), ‘माधव’ (http://madhavrai.blogspot.com), ‘अक्षयाँशी’ (http://riddhisingh.blogspot.com), ‘जादू’ व (http://jadoojee.blogspot.com), ‘नन्ही परी’ (http://nanhi-pari.blogspot.com)। ये तमाम ब्लॉग एक तरह से बचपन की ऑनलाइन डायरी के समान हैं, जहाँ पर बच्चों की गतिविधयाँ सचित्र रूप में दर्ज हो रही हैं। इनका एक लाभ जहाँ यह है कि अभिभावक अपने बच्चों की छोटी से छोटी गतिविधियों को भी ध्यान से निरख रहे हैं, वहीं दूसरी ओर वे बच्चों में सकारात्मक भावनाएँ भरने के लिए प्राण-पण से लगे हुए हैं।
शायद यह इन्हीं सद्प्रयासों का परिणाम है कि ‘पाखी की दुनिया’ के द्वारा अपनी सकारात्मक गतिविधियों को ब्लॉग पर दर्ज करा रही नन्हीं ब्लॉगर अक्षिता (पाखी) को वर्ष 2011 के राष्ट्रीय बाल पुरस्कार के लिए चयनित किया गया है। ब्लॉगिंग के इतिहास में यह पहली घटना है, जब ब्लॉगिंग जैसे कार्य के लिए किसी को सरकारी पुरस्कार मिल रहा है। आने वाले दिनों में इससे नि:संदेह सकारात्मक ब्लॉगिंग को बढ़ावा मिलेगा और ब्लॉगों पर बच्चों से सम्बंधित सामग्री का प्रतिशत बढ़ेगा।
रविवार, नवंबर 20, 2011
समाचार पत्रों में भी अक्षिता (पाखी) के 'राष्ट्रीय बाल पुरस्कार' की चर्चा

अंडमान-निकोबार द्वीप समाचार (17 नवम्बर, 2011)

जनसत्ता, कोलकाता (15 नवम्बर, 2011)

Andaman Sheekha, Portblair (17Nov. 2011)

The Daily Telegrams, Portblair (20 Nov. 2011)

Andaman Express, Portblair (17 Nov. 2011)

The Echo of India, Portblair (10 Nov. 2011)

Aspect, Portblair (10 Nov. 2011)

The Daily Telegrams, Portblair (10 Nov. 2011)

अंडमान-निकोबार द्वीप समाचार (10 नवम्बर, 2011)
(The Echo of India, Portblair (23 Nov. 2011)
(संपूर्ण आवाज़, पोर्टब्लेयर, 28 नवम्बर 2011 में चर्चा)
***********************************************************
(हिंदुस्तान, वाराणसी, 2 दिसंबर 2011 में चर्चा)
(दैनिक जागरण, वाराणसी, 2 दिसंबर 2011 में चर्चा)
(अमर उजाला, वाराणसी, 2 दिसंबर 2011 में चर्चा)
(हिंदुस्तान, वाराणसी, 1 दिसंबर 2011 में चर्चा)
(हिंदुस्तान, वाराणसी, 1 दिसंबर 2011 में चर्चा)
शुक्रवार, नवंबर 18, 2011
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा जारी बुक आफ रिकार्ड्स में अक्षिता (पाखी)

'कला और ब्लागिंग' (Excellence in the Field of Art and Blogging) के क्षेत्र में उपलब्धि के लिए बाल दिवस, 14 नवम्बर 2011 को विज्ञान भवन, नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में भारत सरकार की महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती कृष्णा तीर्थ जी द्वारा अक्षिता (पाखी) को राष्ट्रीय बाल पुरस्कार (National Child Award) प्रदान किया गया. इस अवसर पर बुक आफ रिकार्ड्स के रूप में एक बुकलेट 'उत्कृष्ट उपलब्धि हेतु राष्ट्रीय बाल पुरस्कार-2011' भी जारी की गई. इसमें वर्ष 1996 से अभी तक पुरस्कृत सभी बच्चों के नाम राज्यवार दिए गए हैं. इस बार पुरस्कृत सभी बच्चों के बारे में एक-एक पेज पर Citation रूप में उनकी उपलब्धियों का विवरण है. अक्षिता (पाखी) के बारे में आप इन पेज को बड़ा करके पढ़ सकते हैं-
बुधवार, नवंबर 16, 2011
महिला और बाल विकास मंत्री कृष्णा तीरथ जी को भी पसंद आईं अक्षिता की बातें..






...अब मान गए न कि मैं सबकी लाडली हूँ !!
As written by rajnish ncle on his Blog During my times...
(Children’s day is celebrated on 14th November in India। This year it is full of surprises। I come to know about two little genius and both are girls. One is a four year old blogger and other is a 7 year old student who won goodle 4 doodle India competition. This little blogger’s name is Akshitaa (nickname Paakhi meaning bird). She lives in Andman and runs a Hindi language blog (Pakhi Ki Duniya- Meaning World of Pakhi) with the help of her parents. Her blog is full of photographs, drawings and activities. She is probably the youngest blogger of the country. Like her age she loves drawing and painting. Akshita is one of the 27 children who received Child Award for Exceptional Achievement on children day in New Delhi.)
बुधवार, नवंबर 09, 2011
अक्षिता (पाखी) को 'बाल-दिवस' पर 'राष्ट्रीय बाल पुरस्कार'
फ़िलहाल मैं लखनऊ में हूँ और 14 नवम्बर को दिल्ली में यह सम्मान ग्रहण करने के बाद 16 नवम्बर को पोर्टब्लेयर लौट रही हूँ.
इस उपलब्धि पर आप सभी के आशीर्वाद और स्नेह की आकांक्षी हूँ !!
बुधवार, नवंबर 02, 2011
गुरुवार, अक्टूबर 27, 2011
अपूर्वा का पहला जन्म-दिन और 200 वीं पोस्ट
आज तो मेरी सिस्टर अपूर्वा (तान्या) का पहला जन्म-दिन है. कित्ता तेजी से समय बीत गया, पता ही नहींचला. अपूर्वा (तान्या) का जन्म हुआ बनारस में, परवरिश पोर्टब्लेयर में और उसके पहले जन्म-दिन पर हम हवाई जहाज से कोलकात्ता से लखनऊ की यात्रा पर हैं. हवाई जहाज में जन्मदिन मनाने का मजा ही कुछ अलग होगा. फिर शाम को लखनऊ में पापा की तरफ से डिनर भी तो है !!
अपूर्वा को जल्दी से आप भी अपना शुभाशीर्वाद और प्यार दीजियेगा..
.और हाँ, मुझे भी क्योंकि 'पाखी की दुनिया' ब्लॉग की यह 200 वीं पोस्ट है. देखा, 200 वीं पोस्ट और बहना का जन्मदिन एक ही दिन सेलिब्रेट कर लिया न. कल तो दिवाली थी, वैसे भी आप सभी ने खूब मिठाइयाँ खाई होंगीं. आज भी इस ख़ुशी में मिठाइयाँ खाएं और हमें आशीर्वाद दें !!
मंगलवार, अक्टूबर 25, 2011
दीवाली आ गई...

कल तो दीपावली है. ढेर सारी फुलझड़ियाँ छुड़ाने का दिन. पटाखों से तो मुझे बहुत डर लगता है. उनकी आवाज़ सुनकर तो मैं अपने कान बंद कर लेती हूँ...

और हाँ, इस दिन तो तो लक्ष्मी-गणेश जी की पूजा भी होगी और फिर ढेर सारी मिठाइयाँ भी. लक्ष्मी-गणेश जी के स्वागत के लिए ही तो घर में खूब सफाई भी होती है.
पूजा के बाद ढेर सारे दिए जलाये जायेंगे..कित्ता अच्छा लगता है. मानो सारे तारे ही जमीं पर आ गए हों. उस पर से झिलमिल करती झालरें और मोमबत्तियां...वाह ! मम्मा बता रही थीं की इसी दिन भगवान श्री राम अयोध्या लौटे थे और इस ख़ुशी में अयोध्यावासियों ने दीये जलाकर उनका स्वागत किया था, तभी से दीपावली मनाई जाती है. मैं तो चली दीपावली की तैयारियाँ करने..मतलब ममा का साथ देने।आप सभी को दीपावली की खूब बधाइयाँ और प्यार !!
रविवार, अक्टूबर 23, 2011
मैं बड़ी हो रही हूँ.
गुरुवार, अक्टूबर 20, 2011
आपको आइसक्रीम खाना अच्छा लगता है...
मेरे स्कूल के सामने भी इक शॉप है. पहले तो मुझे इसके बारे में नहीं पता था, पर अब पता चल गया है. स्कूल से निकलो, आइसक्रीम खाओ. वैसे रास्ते में अनुमोद और उमा बेकरी भी तो हैं.
...अले, आपने तो बताया ही नहीं कि आपको कौन सा फ्लेवर पसंद है . जब आपसे मुलाकात होगी तो आपकी पसंद की आइसक्रीम खा लेंगें !!
मंगलवार, अक्टूबर 18, 2011
अंतर्राष्ट्रीय सायकिल यात्री हीरालाल यादव के साथ पाखी
सफलता का गुरः कोई काम नामुमकिन नही है.
सबसे बड़ी बाधाः जब लोग इस अभियान के ’फायदे’ पर बहस करते हैं.
सबसे बड़ी ताकतः फल की दुकान चलाने वाली उनकी पत्नी शकुन्तला, जो अक्सर दौरे पर रहती है.
जिंदगी का सबसे अहम क्षणः 30 जुलाई 99 का दिन जब कारगिल में सैनिकों ने उनकी अगवानी की और उन्हें सगे भाई से ज्यादा सगा कहा.
****************************************************
अन्तराष्ट्रीय सायकिल यात्री हीरालाल यादव अंकल जी पोर्टब्लेयर में हमारे घर आए. उन्होंने पापा के बारे में पढ़ा था और फिर मुंबई से फोन पर संपर्क किया. अब वे यहाँ हमारे मेहमान के रूप में पोर्टब्लेयर में हैं.
वे यहाँ अंडमान में अपने चित्रों की एक प्रदर्शनी भी लगा रहे हैं. उनकी प्रदर्शनी का विषय है-युद्धबंदी सैनिक, बालिका भ्रूण-हत्या, पर्यावरण. इसे वे 'संवेदना जागृति कला प्रदर्शनी' नाम से देश भर में लगते हैं. यह उनकी 177 वीं कला प्रदर्शनी होगी. भारत के विभिन्न प्रान्तों के अलावा मारीशस में भी वे कला-प्रदर्शनी लगा चुके हैं.
***********************************************************************
(हीरालाल यादव अंकल जी पर लखनऊ से प्रकाशित मासिक पत्रिका 'दस्तक टाइम्स' (मई, 2011) की एक रिपोर्ट भी यहाँ पढ़ सकते हैं)


************************************************************************
(पोर्टब्लेयर से प्रकाशित अख़बार "Andaman Sheekha" में प्रकाशित एक रिपोर्ट ''Hira Lal Yadav: A man in a noble, but difficult mission'' भी देखें-)
The man who travelled across the length and breadth of India to meet families of Indian Prisoners of War (PoW), locked in Pakistan Jail and Martyrs, is in Andaman now with his noble mission of sensitizing all Indians about the pain and sufferings of POWs and Martyrs.
The man who left hundreds of people crying and weeping with his heart touching poems on Indian POWs and Martyrs is now planning to hold an Exhibition at Port Blair’s Andaman House, where he will display letters written by POWs and Martyrs of Operation Vijay and other wars on 17 and 18 October 2011.
Mr. Yadav had travelled several states to meet families of Indian Soldiers and collect important letters in his seatless bicycle, which he rides to feel himself the pain and sufferings, experienced by our Indian Jawans.
Father of Major Unni Krishnan, Martyr of Mumbai’s 26/11 operation, who had drove away the Chief Minister of Keral from his house, had proudly cycled with Mr. Yadav from New Delhi’s India gate to Gate of India at Mumbai to support his cause.
"It is pathetic to see how much people remember soldiers who sacrifice their lives for the sake of our country. My motive is simple. To generate enough publicity and make students and the public aware so that the POWs are released," said Mr. Yadav while talking to Andaman Sheekha today. Hope people will make best of Mr. Yadav’s visit and his exhibition.
********************************************
.......तो देखा, आज मैंने एक अच्छे व्यक्ति से आपको मिलवाया ना. यह कभी भी आपके यहाँ भी जा सकते हैं!!
रविवार, अक्टूबर 16, 2011
अपूर्वा (तान्या) के नए बाल कब आएंगें..
देखिये, कित्ते ध्यान से सोच रही है कि मेरे बाल कहाँ चले गए.
यह संस्कार पोर्टब्लेयर में हैडो स्थित गणेश जी के मंदिर में संपन्न हुआ.
मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद अपूर्वा के बाल हमने समुद्र में प्रवाहित कर दिए.
बाल उतरवाते समय तो अपूर्वा खूब रोई. बड़ी मुश्किल से उसे चुप कराया गया.
मुंडन से पहले ली गई घर पर फोटो.
अब तो इंतजार है कि अपूर्वा (तान्या) के नए बाल कब आएंगें !!

