गर्मी की छुट्टियों में मैं खूब मस्ती कर रही हूँ. ढेर सारी जगहें घूमी हूँ. पिछले दिनों सारनाथ और बनारस गई तो इस बार गोरखपुर, लुम्बिनी (नेपाल) और कुशीनगर. लुम्बिनी में बुद्ध जी का जन्म हुआ था, सारनाथ में उन्होंने धर्मोपदेश दिया था और कुशीनगर में वे सदा के लिए सो गए थे. लुम्बिनी (नेपाल ) के बहाने तो मेरी पहली विदेश यात्रा भी हो गई..है न मजेदार.
तो चलिए, आपको भी अपने साथ लुम्बिनी की यात्रा कराती हूँ.
लीजिये, हम पहुँच गए लुम्बिनी विश्व-शांति के मुख्य द्वार पर. यहाँ अन्दर जाकर बुद्ध जी के जन्म-स्थल के दर्शन होंगें.
कड़ी धूप में अन्दर पहुँचाना इतना आसान नहीं है, सो रिक्शा की यात्रा. अपने जीवन में पहली बार मैंने रिक्शे की सवारी की..बहुत मजेदार.
यहीं पर बुद्ध जी का जन्म 623 ईसा पूर्व में हुआ था. उनकी माता जी का नाम था- माया. बुद्ध जी का बचपन का नाम था-सिद्धार्थ. अन्दर उस जगह को चिन्हित किया गया है, जहाँ बुद्ध जी का जन्म हुआ था. वहां पर फोटो खींचना मना है.
बुद्ध जी के जन्म-स्थल के बाहर सम्राट अशोक द्वारा एक स्तम्भ भी बनवाया गया है.
बुद्ध जी के जन्म-स्थल के आसपास हुई खुदाई और प्राप्त अवशेषों के दृश्य.
बुद्ध जी को चाहने वाले पूरी दुनिया में हैं. उनके जन्म-स्थल लुम्बिनी में विभिन्न देशों द्वारा तमाम बुद्धिस्ट मंदिर बनवाये गए हैं. इनकी संख्या तीस से ऊपर होगी.मुझे तो सबसे खूबसूरत थाईलैंड द्वारा बनवाया गया मंदिर लगा.
थाई मंदिर के अन्दर बुद्ध जी की प्रतिमा भी काफी खूबसूरत है.
जर्मनी द्वारा बनाये गए बुद्ध मंदिर पर बहुत सुन्दर दृश्य चित्रित किये गए हैं.
जर्मन बुद्ध मंदिर के सामने खूबसूरत तालाब है और सामने लुम्बिनी उद्यान महाचैत्य...वाकई अनुपम दृश्य.
तो कैसी लगी आपको मेरी यह लुम्बिनी-यात्रा. अप भी जल्द से वहां घूम आइये. मेरा अगला पड़ाव है- कुशीनगर. शीघ्र ही आपको वहां की भी यात्रा कराउंगी.
आप सब 'पाखी' को बहुत प्यार करते हैं...
शुक्रवार, जून 15, 2012
रविवार, जून 10, 2012
गुरुवार, जून 07, 2012
सोमवार, जून 04, 2012
पर्यावरण दिवस पर लें संकल्प
इस साल पर्यावरण दिवस पर मैंने संकल्प लिया है कि हर साल एक नया पौधा लगाकर उसकी देख-रेख करूँगीं.
पेड़-पौधों को नियमित पानी भी दूंगीं, तभी तो वे हरे-भरे रहेंगें.और यदि पेड़-पौधे हरे-भरे रहेंगें तो हमारा जीवन भी हरा-भरा रहेगा.
मैंने यह भी सोचा है कि पेड़-पौधों से अनावश्यक पत्तियाँ या फूल नहीं तोडूंगी और अपने दोस्तों को भी इस ओर प्रेरित करूँगीं.
..तो अब आप लोगों से भी अनुरोध करुँगी कि, आप भी ऐसा कीजियेगा.
..तो अब आप लोगों से भी अनुरोध करुँगी कि, आप भी ऐसा कीजियेगा.
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शनिवार, जून 02, 2012
अक्षिता (पाखी) का एक और प्रयास...
आजकल स्कूल की छुट्टियाँ हैं, सो मस्ती ही मस्ती है. इसीलिए मेरे ब्लॉग पर बहुत कुछ नहीं हो पा रहा है. इस बीच एक अच्छी चीज यह हुई है मैं हिंदी और अंग्रेजी के अक्षरों को मिलाकर लिखने लगी हूँ. सिर्फ लिखती ही नहीं हूँ, बल्कि उनका चित्र भी बनाती हूँ। मुझे तो इंतजार है, कब मैं जल्दी से जो चाहूँ, वह लिख सकूँ।
मेरे इस पेज पर पानी गिराने का कार्य किया है मेरी प्यारी सी बहन अपूर्वा ने..आखिर उसका भी तो कुछ योगदान होना चाहिए !!
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रविवार, मई 20, 2012
सारनाथ में एक दिन...
अपने बनारस-भ्रमण के दौरान मैं 16 मई को सारनाथ घूमने गई. धूप से बचने के लिए हम सुबह ही सुबह वहां पहुँच गए. कुछेक चित्र वहाँ के शेयर कर रही हूँ-
अशोक स्तम्भ के शिला-पट्ट के समक्ष.
यहीं पर लगा था अशोक स्तम्भ. पर अशोक स्तम्भ अब संग्रहालय में सुरक्षित रखा है.
मूल गंध कुटी - यह भगवान बुद्ध के ध्यान-साधना स्थल पर निर्मित मंदिर का भग्नावशेष है.
चारों तरफ फैले स्तूपों के भग्नावशेष.
धूप बढ़ने लगी है. जल्दी -जल्दी चलते हैं..
धमेख स्तूप - यहीं भगवान बुद्ध ने अपना प्रथम धर्मोपदेश दिया था.
सारनाथ में बौद्ध अनुयायी काफी संख्या में आते हैं. ऐसे ही एक बुद्धिस्ट के साथ.
...तो कैसी लगी आपको यह सारनाथ-यात्रा. अभी तो सारनाथ से जुडी और भी फोटो और बातें आपके साथ शेयर करनी हैं. जल्द ही नई पोस्ट के साथ फिर हाजिर हूँगी !!
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शुक्रवार, मई 18, 2012
गंगा आरती देखी, पर गंगा जी में बिखरी गन्दगी का क्या ??
इस समय हमारी गर्मी की छुट्टियाँ चल रही हैं. इन छुट्टियों के बहाने खूब घूम-फिर भी रही हूँ. 15 -17 मई मैं बनारस घूमने गई. हमारे परिवार के लिए बनारस का बहुत महत्वपूर्ण स्थान है. यहीं सारनाथ में ममा-पापा की सगाई और शादी हुई, तो अपूर्वा का जन्म भी यहीं हेरिटेज हास्पिटल में हुआ. एक लम्बे समय बाद आई तो बनारस में खूब घूमी.
5 मई की शाम मैं ममा-पापा और अपूर्वा के साथ गंगा जी घूमने गई. गंगा जी को इतने नजदीक से मैंने पहली बार देखा. वैसे गंगा जी तो इलाहबाद में भी हैं, पर दूर-दूर तक उनका पता भी नहीं चलता.
यहाँ मैंने गंगा आरती भी देखी. मुझे तो यह देखकर बहुत अच्छा लगा. कित्ते सारे लोग जमा थे.
गंगा-आरती देखने के लिए हम नाव से गए. इसी बहाने नौका-विहार का भी आनन्द लिया.
गंगा जी के किनारे ढेर सारे घाट देखे. पर यहाँ का पानी तो बहुत गन्दा हो चुका है. जब हम अंडमान में थे तो पापा बताते थे कि यहीं बंगाल की खाड़ी में आकर गंगा जी मिलती हैं. वहाँ तो समुद्र का पानी कित्ता साफ था. पर बनारस में गंगा जी की दशा देखकर अच्छा नहीं लगा. पता नहीं जब तक मैं बड़ी हूंगी तो गंगा जी होंगी भी या नहीं. क्या ऐसा नहीं हो सकता कि हम गंगा जी की आरती के साथ-साथ उनकी साफ-सफाई के बारे में भी सोचें.
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रविवार, मई 13, 2012
मेरी ममा सबसे प्यारी

आज मदर्स डे पर मैंने सुबह जगते ही ममा को विश किया और उन्हें एक प्यारा सा कार्ड और चाकलेट दिया. साथ में प्यारे-प्यारे गुलाब के फूल भी दिया और अपनी एक ड्राइंग भी दी. आज संडे भी है, सो पापा भी घर पर रहेंगे. शाम को हम लोग ढेर सारी जगहें घूमने जायेंगे, और जब थक जायेंगे तो पापा हम लोगों को शानदार डिनर कराएँगे.वैसे तो ममा से प्यार जताने के लिए किसी खास दिन की जरुरत नहीं, पर आज का दिन तो सिर्फ ममा का है..आज के दिन के लिए ममा को ढेर सारा प्यार और बधाई. U r the best Mama.
मम्मी की दुलारी
मम्मी मेरी सबसे प्यारी,
मैं मम्मी की राजदुलारी।
मम्मी मुझसे प्यार जताती,
अच्छी-अच्छी चीजें लाती।
करती जब भी मैं मनमानी,
मम्मी याद दिलाती नानी।
फिर मम्मी करती है प्यार,
मेरा भी गुस्सा बेकार।
पीछे-पीछे मम्मी आती,
चाकलेट दे मुझे मनाती।
थपकी देकर लोरी गाती,
निंदिया प्यारी मुझको आती।।
(यह बाल-गीत ममा के संग्रह 'चाँद पर पानी' से लिया गया है )
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बुधवार, मई 09, 2012
जंगल में हुआ क्रिकेट और चाँद पर बरसा पानी
(आपने कई बार मेरे ब्लॉग 'पाखी की दुनिया' में ममा-पापा की बाल-रचनाएँ पढ़ी होंगीं. अब तो इन सबको मिलकर ममा-पापा का बाल-गीत संग्रह भी आ गया है. ममा का बाल-गीत संग्रह है- 'चाँद पर पानी' और पापा का है- 'जंगल में क्रिकेट'. पिछले दिनों इनका दिल्ली में विमोचन भी हुआ. हमने सोचा तो था कि विमोचन में जाएंगें, पर ऐनवक्त पर पापा की व्यस्तता के चलते न जा सके. इस कार्यक्रम की एक कवरेज आप भी पढ़िए )
"शेर चंद ने उठाया बल्ला, चीता फिर से गली में दुबका. हाथी ने दस्ताने बांधे, चिड़िया लगी है गेंद चमकाने. जंगल में यदि क्रिकेट खेला जाए तो कुछ ऐसा ही होगा. है ना ? और सोचिये चाँद पर यदि बरसेगा पानी तो कैसे कहेंगे दादा-दादी कहानी ? इन बातों पर लिखे गए गीत बच्चों को खूब पसंद आएँगे. दिल्ली में पिछले दिनों ऐसे ही दो बाल-गीत संग्रहों का विमोचन हुआ. "
राष्ट्रभाषा स्वाभिमान न्यास और भारतीय सांस्कृतिक सम्बन्ध परिषद् द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में पूर्व राज्यपाल डा. भीष्म नारायण सिंह और डा. रत्नाकर पाण्डेय (पूर्व सांसद) ने जंगल में क्रिकेट एवं चाँद पर पानी नामक दो पुस्तकों का विमोचन किया.चर्चित साहित्यकार और चिट्ठाकार कृष्ण कुमार यादव और आकांक्षा यादव द्वारा लिखी गई इन दोनों पुस्तकों में 30-30बाल-गीत संगृहीत हैं.
राष्ट्रभाषा स्वाभिमान न्यास और भारतीय सांस्कृतिक सम्बन्ध परिषद् द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में पूर्व राज्यपाल डा. भीष्म नारायण सिंह और डा. रत्नाकर पाण्डेय (पूर्व सांसद) ने जंगल में क्रिकेट एवं चाँद पर पानी नामक दो पुस्तकों का विमोचन किया.चर्चित साहित्यकार और चिट्ठाकार कृष्ण कुमार यादव और आकांक्षा यादव द्वारा लिखी गई इन दोनों पुस्तकों में 30-30बाल-गीत संगृहीत हैं.
इस अवसर पर पूर्व राज्यपाल डा. भीष्म नारायण सिंह ने कहा कि बाल-साहित्य बच्चों में स्वस्थ संस्कार रोपता है, अत: इसे बढ़ावा दिए जाने क़ी जरुरत है. पूर्व सांसद डा. रत्नाकर पाण्डेय ने इस युगल के बाल-गीत संग्रह क़ी प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि इसमें आज का बचपन है और बीते कल का भी और यही बात इन संग्रह को महत्वपूर्ण बनाती है. कार्यक्रम में राष्ट्रभाषा स्वाभिमान न्यास के संयोजक डा. उमाशंकर मिश्र ने कहा कि यदि युगल दंपत्ति आज यहाँ उपस्थित रहते तो कार्यक्रम कि रौनक और भी बढ़ जाती. गौरतलब है कि अपनी पूर्व व्यस्तताओं के चलते यादव दंपत्ति इस कार्यक्रम में शरीक न हो सके. आभार ज्ञापन उद्योग नगर प्रकाशन के विकास मिश्र द्वारा किया गया.
साभार : हिंदी होम पेज
साभार : हिंदी होम पेज
शुक्रवार, अप्रैल 27, 2012
अपूर्वा हुई डेढ़ साल की..बधाई !!
आज मेरी बहन अपूर्वा पूरे डेढ़ साल की हो गई. पता ही नहीं चला कि समय इत्ती तेजी से कैसे बीत गया. पहले अंडमान और अब इलाहाबाद..
कुछ भी हो अपूर्वा अब मेरी सबसे अच्छी दोस्त बन चुकी है. सुबह मेरे साथ जगती है, मुझे स्कूल छोड़ने जाती है और फिर घर में आकर सो जाती है. रोज मुझे लेने स्कूल भी जाती है. मेरे साथ खूब खेलती है, बातें करती है और ढेर सारा प्यार भी. मेरी बहन तो सबसे प्यारी है और मैं भी इसे खूब प्यार-दुलार करती हूँ.
अपूर्वा के आज डेढ़ साल की होने पर खूब सारा प्यार और बधाई ! आप भी अपूर्वा को अपना प्यार और आशीर्वाद देना न भूलिएगा !!
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हैप्पी बर्थ-डे,
Apurva
सोमवार, अप्रैल 23, 2012
....ताकि हर बच्चा पढ़ सके !!
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क्या आप जानते हैं कि हमारे देश में कई लोग ऐसे हैं, जो पढ़ना तो चाहते हैं पर उनके पास पुस्तक खरीदने के लिए पैसे ही नहीं. जब मैं अंडमान से इलाहाबाद आ रही थी तो वहाँ एक अनाथालय में गई थी। इन सभी के मम्मी-पापा नहीं थे। कुछ तो पढ़ना चाहते हैं, पर कोई मदद करने वाला नहीं। फिर मैंने उनके लिए कुछ किताबें खरीदीं और साथ में अपनी तमाम पुरानी पुस्तकों को भी लेकर उन सभी को दे दिया. उस दिन वे बहुत खुश हुए. यह काम मैंने कानपुर से अंडमान जाते समय भी किया था.
आज विश्व पुस्तक दिवस है..आप भी कुछ ऐसा ही कीजिये ताकि हर बच्चा पढ़ सके. अपने घर में पुरानी हो चुकी पुस्तकें रद्दी में बेचने की बजाय उन लोगों तक पहुँचा दीजिये, जिन्हें वाकई इसकी जरुरत हैहै।
और चलते-चलते "विश्व पुस्तक दिवस" पर यह कविता। इसे मेरे पापा ने लिखा है.....
प्यारी पुस्तक, न्यारी पुस्तक
ज्ञानदायिनी प्यारी पुस्तक
कला-संस्कृति, लोकजीवन की
कहती है कहानी पुस्तक।
अच्छी-अच्छी बात बताती
संस्कारों का पाठ पढ़ाती
मान और सम्मान बड़ों का
सुन्दर सीख सिखाती पुस्तक।
सीधी-सच्ची राह दिखाती
ज्ञान पथ पर है ले जाती
कर्म और कर्तव्य हमारे
सद्गुण हमें सिखाती पुस्तक।
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रविवार, अप्रैल 22, 2012
विश्व पृथ्वी दिवस : अपूर्वा की एक नन्ही सी कोशिश
आज विश्व पृथ्वी दिवस है. पृथ्वी जब तक सुरक्षित है, हम सभी सुरक्षित हैं. इसीलिए हमें पेड़-पौधों की रक्षा करनी चाहिए, क्योंकि ये धरा के आभूषण हैं. लोग कहते भी हैं कि पहले तो पेड़ काटो नहीं और यदि काटना ही पड़े तो एक की जगह दो पेड़ लगाना चाहिए।
लगता है हमारी छोटी बहन अपूर्वा को भी यह बात पता है कि आज विश्व पृथ्वी दिवस है. वह सुबह से ही गमले में एक सूखी टहनी को लगाने का प्रयास कर रही है.
आखिर जब चारों तरफ हरियाली हो तो फिर यह एक टहनी सूखी कैसे रह सकती है.इसे गमले में लगा देती हूँ.
शायद यह दूसरे हरे-भरे पौधों का साथ पाकर फिर से हरा-भरा हो जाये.ऐसा ही कुछ अपूर्वा सोच रही है.
चलिए, हम सब लोग भी कुछ ऐसा ही प्रयास करते हैं. शायद पृथ्वी और हरी-भरी हो उठे.

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गुरुवार, अप्रैल 19, 2012
नन्हीं कलम नाम है, लेकिन काम बड़ों का करती हूँ....
नन्हीं कलम नाम है,
लेकिन काम बड़ों का करती हूँ.
पथ में जो कुछ दिखता है,
शीतल जल से भरती हूँ.
आज इसी शीर्षक से मुझ पर एक रिपोर्ट दैनिक जागरण ने कवर की है. इस पर मेरे ब्लॉग के बारे में भी बताया गया है. आप भी इसे उपरोक्त इमेज पर क्लिक करके पढ़ सकते हैं.
बुधवार, अप्रैल 18, 2012
'बच्चों की दुनिया' को छोड़ गया आदित्य....
'आदित्य' एक दिन 'बच्चों की दुनिया' को छोड़कर यूँ ही चला जायेगा, किसी ने भी नहीं सोचा था. आदित्य तो हमेशा उर्जावान और प्रकाशमान रहता है, पर इस आदित्य को पता नहीं किसकी नजर लग गई कि वह 8 अप्रैल, 2012 को ना सिर्फ ब्लागिंग जगत बल्कि इस दुनिया को ही अलविदा कह गया. अभी 10 मार्च को तो उसने अपना जन्म-दिन सेलिब्रेट किया था. उसके ब्लॉग पर अंतिम पोस्ट पढ़ी तो बड़ा अजीब सा लगा, समझ में ही नहीं आया कि क्या कहूँ...भगवान जी ने भला उसे अपने पास क्यों इत्ती जल्दी क्यों बुला लिया...?? कहते हैं कि लोग भगवान जी के पास जाकर फिर से नए रूप में धरती पर आते हैं, पर उसमें आदित्य कौन होगा, यह भला कैसे पता चलेगा ??..आदित्य का जाना वाकई दुखद है..हमारी तरफ से विनम्र श्रद्धांजलि !!***************************************************
आदित्य के ब्लॉग की अंतिम पोस्ट : अलविदा दोस्तों..
बहुत दिनों बाद पुनः एक नई और अंतिम कहानी के साथ आपके समक्ष प्रस्तुत हो रहा हूँ आशा है मैं आप सभी के दिलों में हमेशा के लिए अपनी जगह बना पाऊँगा...
एक बहुत ही छोटा सा प्यारा सा बच्चा था ३ साल का. वह कभी भी मुसीबतों से घबराता नहीं था. हमेशा मुस्कराता हुआ उसका चेहरा सबको खुश कर देता था. वह अपने घर की एकमात्र संतान जो बिस्तर में ३ साल से था क्योंकि उसकी ब्रेन की दवाइयाँ चल रही थी. उन दवाइयों की वजह से और दिमाग में आने वाले झटकों के कारण वह पूरी तरह से विकसित नहीं हो पा रहा था. इसके बावजूद घर के सभी सदस्य आशा के साथ उसके स्वस्थ होने की उम्मीद में थे. सभी उससे बहुत बहुत प्यार करते थे।
नाना जी, दादा जी और बड़े पापा उसके सबसे प्यारे थे. मम्मी पापा का लाडला, नाना-नानी का दोस्त, बाकि बच्चों का दुलारा वह बच्चा ८ अप्रैल को अस्पताल जाते जाते रास्ते में ही अपना शरीर त्याग दिया. और सबको अकेला छोड़ वह दूसरी शरीर यात्रा के लिए निकल पड़ा.
उस प्यारे से छोटे बच्चे के परिजन उसके अगले शरीर यात्रा में सुन्दर और स्वस्थ शरीर की कामना करते हुए उसे आशीर्वाद दिए।
आप सभी से निवेदन है कि आप भी इस दिवंगत आत्मा के सुन्दर भविष्य के लिए प्रार्थना करें।
क्या आप जानना चाहोगे यह प्यारा बच्चा कौन है?
यह, मैं.... याने आदित्य... आपका प्यारा दोस्त हूँ.....
आप सभी से बिछुड़ते मुझे बहुत दुःख हो रहा है पर एक सुन्दर और स्वस्थ शरीर की कल्पना से मुझे आशा की एक किरण नज़र आ रही है.
एक ऐसा स्वस्थ शरीर मुझे चाहिए जिससे मैं इस सुन्दर सृष्टि के लिए और मानवता के लिए कार्य कर सकूँ.......
आप सभी ने मुझे बहुत सा प्यार और आशीर्वाद दिया उन सबके लिए मैं आप सभी का शुक्र गुजार हूँ.....
आप सभी स्वस्थ और प्रसन्न रहें इसी कामना के साथ आपका प्यारा आदित्य आप सभी से विदा लेता है।
अलविदा प्यारे दोस्तों!
आपका प्यारा, नन्हां आदित्य
मंगलवार, अप्रैल 17, 2012
वाह..क्या आम हैं !!
जब हम आपने घर में शिफ्ट हुए तो आम के पेड़ों पर सिर्फ बौर थीं, और आज जाकर देखा तो खूब सारे आम आ गए हैं.
!! मेरे मुंह में तो इन्हें देखकर ही पानी आ रहा है !!
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रविवार, अप्रैल 08, 2012
ये रहा अक्षिता (पाखी) का सन-ग्लास
मंगलवार, अप्रैल 03, 2012
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