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शुक्रवार, नवंबर 07, 2025

Harishchandra Chori, Shamlaji, Gujarat : legendary king Harishchandra was married here

गुजरात और राजस्थान सीमा पर स्थित शामलाजी में एक ऐसी जगह 'हरिश्चंद्र चोरी' है, जहाँ राजा हरिश्चंद्र का रानी तारामती से विवाह हुआ था – और वो जगह आज भी मौजूद है! गुजराती भाषा में ‘चोरी’ का अर्थ विवाह मंडप होता है, जहाँ दंपत्ति विवाह के समय पवित्र अग्नि के चारों ओर फेरे लगाते हैं। 



पिछले दिनों मम्मी-पापा और छोटी बहन अपूर्वा के साथ गुजरात स्थित शामला जी सपरिवार जाना हुआ तो स्थानीय लोगों ने बताया कि 'हरिश्चंद्र चोरी' अवश्य जाइएगा। फिर क्या था, हम सभी वहां पहुँच गए।  प्रकृति की खूबसूरती के बीच शाम को यहाँ का दृश्य देखते ही बनता है। आँखों के सामने राजा हरिश्चंद्र और रानी तारामती की कहानी चलचित्र की तरह घूम गई। पुरातत्व विभाग, गुजरात ने इसे बखूबी सहेज कर रखा है। 



यहाँ स्थित उत्कृष्ट 10वीं शताब्दी का तोरण गुजरात का सबसे प्राचीन तोरण माना जाता है। यह मंदिर भी उसी काल का है और यह विश्वास किया जाता है कि यहीं पर पौराणिक राजा हरिश्चंद्र का विवाह हुआ था। मंदिर के गर्भगृह के द्वार को बेल-बूटों, कमलपत्रों और एक ऐसी पवित्र लता से सजाया गया है, जिसके बारे में कहा जाता है कि वह मनोकामनाएँ पूरी करती है। द्वार के आधार पर बनी दो स्त्री मूर्तियाँ गंगा और यमुना नदियों का प्रतीक हैं।

राजा हरिश्चन्द्र  के बारे में हम सभी ने स्कूल के दिनों में खूब पढ़ा है। राजा हरिश्चन्द्र की कहानी सत्य, निष्ठा और धर्म के पालन पर आधारित है। अयोध्या के राजा हरिश्चन्द्र को महर्षि विश्वामित्र ने स्वप्न में राज्य दान करने की प्रतिज्ञा पूरी करवाने के लिए प्रेरित किया। इसके बाद, उन्होंने अपने परिवार के साथ राज्य छोड़ दिया और जब उन्हें विश्वामित्र ने दक्षिणा के रूप में सोने के सिक्के माँगे तो वे उस दक्षिणा को चुकाने के लिए अपना राज्य, पत्नी और पुत्र सब कुछ बेच देते हैं। राजा हरिश्चन्द्र को श्मशान में कर वसूलने का काम मिलता है और वहाँ वे अपने पुत्र रोहिताश्व की मृत्यु होने पर भी रानी तारामती से कर मांगते हैं। उनकी इस परीक्षा में सफल होने के बाद, भगवान और विश्वामित्र प्रसन्न होकर उन्हें उनका राज्य और परिवार वापस कर देते हैं।  

(Harishchandra Chori, Shamlaji (Associated with legend): The exquisite 10th century torana here is the oldest in Gujarat. The temple, attributed to the same period, is named in the belief that the legendary king Harishchandra was married here.The sanctum doorway is adorned with bands comprising a creeper, lotus leaves and the vine which is supposed to grant wishes. The two female figures at its base represent Ganga and Yamuna. 'Chori' in Gujarati means the marriage pavilion where a couple goes around the ritual fire during the wedding ceremony.)

-Akshitaa (Pakhi)


सोमवार, नवंबर 03, 2025

गौरवशाली पल: क्रिकेट इतिहास में पहली बार भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने जीता वर्ल्ड कप🏏🏆


बेटियों के सपनों को अगर पंख मिलेंगे,

                  वो एक दिन दुनिया भी जीत जाएंगी !!🎖️✨💫

क्रिकेट इतिहास में पहली बार भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने वर्ल्ड कप  🇮🇳🏏जीता। वर्ल्ड कप फाइनल में दक्षिण अफ्रीका को 52 रन से हराकर भारत देश की  बेटियों ने वो इतिहास रच दिया है, जिस पर हर भारतीय को गर्व है।

यह जीत सिर्फ एक ट्रॉफी 🏆की नहीं, बल्कि हर भारतीय लड़की के आत्मविश्वास, मेहनत और जज़्बे की जीत है।

मैदान पर हमारे खिलाड़ियों ने जिस दृढ़ निश्चय, एकजुटता और साहस का परिचय दिया, उसने पूरे देश का दिल जीत लिया।

आज भारत की हर बेटी के दिल में एक नई उड़ान, नया भरोसा और नई प्रेरणा जागी है — कि अगर हौसले बुलंद हों तो कोई भी सपना अधूरा नहीं रहता। यह पल हमारे खेल इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में अंकित रहेगा।

हमारे देश की  बेटियों ने अपने उत्कृष्ट प्रदर्शन से देश को गौरवान्वित किया है और हर दिल को अपार खुशी से भर दिया है। टीम का कभी हार न मानने वाला रवैया भारत की सच्ची भावना को दर्शाता है। यह ऐतिहासिक जीत अनगिनत युवा लड़कियों को अपने सपनों को साकार करने और देश को और गौरवान्वित करने के लिए प्रेरित करेगी। 

टीम इंडिया की इस शानदार सफलता पर  दिल से बधाई और शुभकामनाएं!

आपने भारत का नाम रोशन कर हर भारतीय का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है।

जय हिंद! जय भारत !🇮🇳🏆















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सोमवार, अक्टूबर 20, 2025

दीपावली है आत्मदीप का पर्व ✨🪔

 

शुभम् करोति कल्याणम्, 

आरोग्यम् धन संपदा

शत्रु-बुद्धि विनाशायः

दीप-ज्योति नमोस्तुते !

🪔✨दीपावली की ढेरों शुभकामनाएँ✨🪔


दीपावली है आत्मदीप का पर्व —

अपने भीतर की लौ को पहचानो।

दीप जले तो जलने दो,

मन में जो अंधकार है —उसे ढलने दो।

रोशनी तभी फैलेगी जब खुद भीतर उजाला होगा।

रोशनी का त्योहार, दीपों की जगमगाहट और खुशियों का उमंग लेकर, फिर से दीपावली का पावन अवसर आया है। इस दिवाली, हर अंधेरा आपके जीवन से दूर हो, और हर दिन एक नए उजाले से भर जाए। लक्ष्मी जी का वास, गणेश जी का आशीर्वाद, और आपके अपनों का प्यार आपके जीवन को खुशियों और सफलता से भर दे।

🌼 मिठाइयों की मिठास

🌼 दियों की चमक

🌼 पटाखों का धमाका

🌼 और रंगोली की खूबसूरती,

हम सभी के जीवन में सुख, शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि का प्रकाश सदा बना रहे।

प्रकाश-पर्व दीपावली पर हार्दिक शुभकामनाएं। 

🌸🪔🕯️🕉️🕯️🪔🌸

💫✨ll शुभ दीपावलीll✨💫















आप सभी को सपरिवार दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ।
💐🪔🕯️🕉️🕯️🪔💐
💫✨ll शुभ दीपावली ll✨💫

मंगलवार, अगस्त 05, 2025

अक्षिता (पाखी) के जीवन की एक नई शुरुआत: स्कूल लाइफ़ से कॉलेज लाइफ़ में प्रवेश

जीवन के एक नए सफर पर। स्कूल लाइफ़ से अब कॉलेज लाइफ़ में प्रवेश। कक्षा 12 तक की स्कूली शिक्षा देश के विभिन्न राज्यों के कुल 7 स्कूलों में प्राप्त करने के बाद CUET-2025 द्वारा दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित हिंदू कॉलेज में एडमिशन पश्चात अब BSC की विद्यार्थी। 

आरंभिक शिक्षा कानपुर, पोर्टब्लेयर, प्रयागराज, जोधपुर, लखनऊ, वाराणसी व अहमदाबाद में हुई। फ़िलहाल अब दिल्ली विश्विद्यालय में अध्ययनरत।  

जीवन के इस नए अध्याय के लिए आप सभी की शुभकामनाएं और शुभाशीष के लिए हार्दिक आभार ।💐🥰🎖️


5 August, 2025

सोमवार, जून 03, 2024

Shahi Qila Jaunpur Fort : A memorable trip with family

Shahi Qila, also known as Karar Fort or Jaunpur Fort, is a fort built during the 14th century in Jaunpur district of Uttar Pradesh. The fort is located close to the Shahi Bridge on the Gomti river. Constructed by Ibrahim Naib Barbak, a chieftain of Firoz Shah Tughlaq, it was built using the material owned by temples and palaces of the Rathore kings of Kannauj. The fort was destroyed multiple times by rulers, including the Lodhis and the British Empire. It went through extensive renovations and repairs during the rule of the Mughal Empire.
























जौनपुर का पुराना शाही किला एक खूबसूरत पर्यटन स्थल है। अब तो सिर्फ किला के अवशेष बचे हैं, पर इसके अंदर प्राकृतिक छटा देखते ही बनती है। जौनपुर शहर में गोमती नदी के तट पर स्‍थि‍त इस दुर्ग का निर्माण फि‍रोज शाह तुगलक ने 1362 ई. में कराया था। इस किले के प्रवेश द्वार की ऊंचाई 36 फुट है तथा किले के भीतर का गेट 26.5 फुट ऊंचा और 16 फुट चौड़ा है। किला के भीतर एक बड़ा गेट और एक मस्जिद, तुर्की हम्माम, अन्य इमारतें है। हम्माम पर बने ऊंचे,नीचे गुंबद बहुत सुंदर ढंग से बनाये गये हैं। यह एक संरक्षित इमारत है। इस दुर्ग से गोमती नदी एवं जौनपुर शहर का मनोहर दृश्‍य दि‍खायी देता है।