आप सब 'पाखी' को बहुत प्यार करते हैं...

मंगलवार, मार्च 26, 2013

सोमवार, मार्च 25, 2013

अक्षिता (पाखी) का हैप्पी बर्थ-डे

आज का दिन तो हमारे लिए बहुत स्पेशल है। आज हमारा हैप्पी बर्थ-डे है। इस दिन के लिए पूरे एक साल इंतजार करना होता है। कित्ता अच्छा होता यदि हर महीने में ही बर्थ-डे सेलिब्रेशन होता।

इस बार हम अपना बर्थ-डे इलाहाबाद से दूर गोरखपुर में सेलिब्रेट कर रहे हैं। चूँकि पापा को यहाँ आना था, सो हमारे लिए भी अच्छा मौका था घूमने और मस्ती करने का।
अपूर्वा भी बहुत हैप्पी है। अब तो ये भी हर चीज को समझने लगी है और इंजॉय करती है।
 इस बार मौसा -मौसी भी हमारे बर्थ-डे सेलिब्रेशन में शामिल हो रहे हैं। अवि-आर्य भी अब बड़े हो गए हैं। कल से ही हमारे साथ खूब धमाल कर रहे हैं। बड़ी दी के तो जलवे हैं।

हमारे हैप्पी बर्थ-डे पर आप सभी के प्यार, स्नेह और शुभकामनाओं का इंतजार रहेगा !!


शनिवार, मार्च 23, 2013

नन्ही ब्लागर अक्षिता (पाखी) 'हिंदुस्तान टाइम्स वुमेन अवार्ड' के लिए नामिनेट


आप सभी की शुभकामनाओं से मुझे 'हिंदुस्तान टाइम्स वुमेन अवार्ड' (HT Women Award) - 2013 के लिए 'पावरफुल पेन (Powerful Pen) के तहत नामिनेट किया गया है। इसके तहत उत्तर प्रदेश से कुल 88 लोग नामिनेट हुए हैं, जिनमें 'पावरफुल पेन' (Powerful Pen) कटेगरी में मात्र 17 लोग नामिनेट हैं। इसका रिजल्ट 31 मार्च को घोषित किया जायेगा और अवार्ड विनर्स को ताज विवंता, लखनऊ में आयोजित एक कार्यक्रम में सम्मानित किया जायेगा। अवार्ड हेतु विनर्स का चयन पब्लिक पोल और जज़ेज के एक पैनल द्वारा किया जायेगा। इस हेतु मेरा कोड है- 70.


आप सभी से अनुरोध है कि मुझे वोट करने हेतु अपने मोबाईल फोन पर HTW 70 टाईप कर 54242 पर SMS करें। (HTW व 70 के बीच एक स्पेस रखें )

एक मोबाईल से एक ही SMS वोट संभव होगा। अत: अपने फ्रेंड्स से भी मुझे वोट करने के लिए रिक्वेस्ट करें.
आशा है आप सभी का स्नेह और आशीर्वाद मुझे मिलेगा !!

शुक्रवार, मार्च 22, 2013

आप भी पानी बचाएं...

सोचिए, अगर हमारी जिंदगी में पानी नहीं होता तो। है न कठिन सवाल। पर जवाब तो देना ही पड़ेगा। बिना पानी के हम कैसे जीवित रहेंगें। हम जो भी खाते हैं, उन सबकी कुकिंग के लिए पानी बहुत जरुरी है। फिर दिन में कित्ता पानी हम पी जाते हैं। न पियो तो लगता है कि गला सूख जायेगा और फिर .....! पानी हम सबके लिए जरुरी है। पेड-पौधे और फूल भी तो तभी मुस्कुराते हैं, जब उन्हें पानी मिलता है। बिना पानी के तो वे भी सूखकर ख़त्म हो जाते हैं। इसीलिए तो हर साल 22 मार्च को 'विश्व जल दिवस' भी मनाया जाता है, ताकि हम इसके प्रति सचेत रहें !!
 
तो चलिए, हम लोग भी पानी को बचाने के लिए कदम उठाते हैं। वैसे मैं तो इसका विशेष ध्यान रखती हूँ। कितनी छोटी-छोटी बातें होती हैं, जिन्हें हम अपने जीवन में चाहें तो उपयोग कर पानी बचा सकते हैं। जैसे कि, मैं ब्रश करते समय पानी हर समय खुला नहीं रखती, नहाते समय भी ख्याल रखती हूँ कि पानी वेस्ट न हो। और पता है जब कभी हमारा वाटर टैंक ओवर फ्लो होने लगता है तो उसका सारा पानी बाहर गिरने की बजाय हमारे लान में जाता है, ताकि पानी बर्बाद न हो। ऐसी ही ढेर सारी छोटी-छोटी बातें हैं, जिनका ध्यान रखकर हम पानी बचा सकते हैं। मैं तो हर रोज ऐसे करती हूँ, आप क्या करते हैं......!!

बुधवार, मार्च 20, 2013

गौरैया ! तुम कभी दूर न जाना


आज 'वर्ल्ड स्पैरो डे' है। मेरे घर पर तो रोज स्पैरो (गौरैया) आती है। और पता है ! लॉन में मेरे स्विंग के ऊपर उसने अपना नेस्ट भी बनाया है। एक दिन मैंने उसे चूँ -चूँ करते सुना तो यह बात मुझे पता चली। अब तो हमने उसके लिए वहाँ वाटर-पॉट भी रख दिया है और उसे दान भी खिलाती हूँ। आज सुबह मैंने उसे बताया कि आज 'वर्ल्ड स्पैरो डे' है, पता नहीं वह मेरी बात समझी या नहीं, पर चूँ -चूँ जरुर करने लगी।
 
हम सभी को यह सोचना चाहिए कि स्पैरो हमारे लिए कितनी इम्पार्टेंट है। सिर्फ एक ही दिन क्यों, हर दिन उसके लिए सोचें।


स्पैरो को बचाने के लिए यह जरुर करें-

-जब गौरैया दिखे तो उसे प्यार से ट्रीट करें।
-घरों में कुछ ऐसे झरोखे रखें, जहां गौरैया घोंसले बना सकें।
-छत और आंगन पर अनाज के दाने बिखेरें।

-घर की मुंडेर पर मिट्टी के बरतन में पानी रखें।
-आंगन और छतों पर पौधे लगाएं ताकि पक्षी आकर्षित हों।

-जल चढ़ाने में चावल के दाने डालने की परंपरा  
-फसलों में कीटनाशकों का प्रयोग न करें।
-अनलेडेड पेट्रोल का इस्तेमाल न करें।


गुरुवार, मार्च 14, 2013

300 पोस्ट, 250 ब्लॉग-फ़ालोवर्स, 100 देशों में रीडर्स

इधर एक्जाम्स के चलते मैं अपने ब्लॉग पर खूब नहीं दिखी, पर अब तो आप सबसे ढेर सारी बातें करूँगीं। इस बीच मेरे ब्लॉग 'पाखी की दुनिया' पर 300 से ज्यादा पोस्ट प्रकाशित हो चुकी हैं और यह 312 वीं पोस्ट है। यही नहीं मेरे ब्लॉग-फ़ालोवर्स की संख्या भी 250 हो गई है। मेरे ब्लॉग के प्रति आप सबका प्यार, आशीर्वाद और स्नेह देखकर बहुत अच्छा लगता है।
 
वैसे आपकी जानकारी के लिए बता दूँ कि मेरा ब्लॉग 'पाखी की दुनिया' 24 जून, 2009 को ममा-पापा ने शुरू किया था। इस साल जून 2013 में इसे पूरे चार साल हो जाएंगे। इस बीच इसे लगभग 103 देशों में देखा-पढ़ा जा चुका है।
'पाखी की दुनिया' को पढ़ने और प्यार देने के लिए आप सभी को ढेर सारा धन्यवाद। आप सब अपना आशीर्वाद यूँ ही देते रहिएगा !!

बुधवार, मार्च 13, 2013

जाड़े के बाद बसंत का मौसम....फ्लावर्ज़ भी खिलखिला उठे


वाह, लगता है मौसम बदल चुका है। ठण्ड अब भाग चुकी है और बसन्त का मौसम आ चुका है। कहाँ अंडमान में ठण्ड ही नहीं पड़ती थी और यहाँ इलाहाबाद में तो खूब ठंडी पडी।

 
 
 

पर अब तो चारों तरफ़ धूप खिली हुई है। सूरज दादा के साथ फ्लावर्स भी खूब मुस्कुरा रहे हैं। हमारे लान में तो गुलाब (rose), गेंदा (Marigold), डहलिया (Dahlia) के खूब सारे फ्लावर्स खिले हुए हैं। इनको खिला हुआ देखकर मुझे बहुत अच्छा लगता है .

शुक्रवार, मार्च 08, 2013

अक्षिता (पाखी) के स्कूल-एक्जाम्स ख़त्म...


अंतत : मेरे स्कूल-एक्जाम्स  ख़त्म हो गए। 7 मार्च को मेरा लास्ट पेपर था। मैंने अच्छे से  एक्जाम्  दिया और अब ढेर सारी छुट्टियाँ।
इन छुट्टियों के लिए मैंने खूब घूमने और मस्ती करने का प्लान बनाया है।
मेरा रिजल्ट रिजल्ट 3 अप्रैल को आएगा और फिर मैं क्लास 1 में चली जाऊँगी...... तब तक हालीडेज़ की मस्ती !! 

बुधवार, फ़रवरी 27, 2013

नन्हीं ब्लागर अक्षिता ने बेटी बचाओ अभियान के लिए दी पाँच हजार रूपये की भेंट


(नन्हीं ब्लागर अक्षिता ने बेटी बचाओ अभियान के लिए दी हीरालाल यादव जी को पाँच हजार रूपये की भेंट)

(सर्वधर्म सद्भावना यात्रा के तहत बेटी बचाओ, वन बचाओ, भाईचारा बचाओ का सन्देश लेकर अरुणांचल प्रदेश से अमृतसर तक बिना सीट की साईकिल से यात्रा कर रहे हीरालाल यादव)

मंगलवार, फ़रवरी 26, 2013

बिना सीट की साईकिल का जज्बा : बेटी बचाओ, वन बचाओ, भाईचारा बचाओ का सन्देश

सायकिल चलाना हम सभी को अच्छा लगता है। पर बिना सीट की साईकिल चलाना मुश्किल ही नहीं असंभव लगता है। पर इसे सच कर दिखाया है हीरा लाल यादव जी ने। एक दिन में तो कई बार वह 100 किलोमीटर तक साईकिल चलते हैं।
उद्देश्य है-लोगों को जागरूक करना। इस बार उन्होंने अपनी यात्रा आरंभ की अरुणांचल प्रदेश से अमृतसर तक। इलाहबाद पहुंचे तो हमारे घर भी मिलने आए। इससे पहले वह अंडमान में भी हमसे मिल चुके हैं।  
सर्वधर्म सद्भावना यात्रा के तहत बेटी बचाओ, वन बचाओ, भाईचारा बचाओ का सन्देश लेकर अमृतसर तक बिना सीट की साईकिल से यात्रा कर रहे हीरालाल यादव अंकल जी के जज्बे को मैं सलाम करती हूँ। उनके इस अभियान के लिए मैंने 'राष्ट्रीय बाल पुरस्कार' के तहत प्राप्त राशि में से पाँच हजार रूपये भी भेंट किये।

शनिवार, फ़रवरी 09, 2013

संगम-तट पर अपूर्वा का कुम्भ

 संगम-तट पर अपूर्वा खूब मस्ती कर रही हैं। देखिये इनकी शरारतें, जो कि तस्वीरों में कैद हो गई हैं।






कुम्भ पर्व के दौरान इस मौनी अमावस्या पर शनि और राहु जैसे ग्रहों की अद्भुत जुगलबंदी देखने को मिल रही है, जो श्रधालुओं को अमृत की प्राप्ति करायेंगें। ऐसा संयोग 147वर्ष बाद बन रहा है। संगम तट पर इस पुण्य बेला में स्नान के लिए करोड़ों श्रद्धालु आ रहे हैं। कईयों के लिए तो यह जीवन का अंतिम कुम्भ भी साबित होगा। वाकई इस समय कुम्भ-नगरी की छटा देखते ही बन रही है।
(पापा के फेसबुक से )

शुक्रवार, फ़रवरी 08, 2013

अब 'डाक-टिकट' पर अक्षिता


आपको डाक-टिकट अच्छे लगते हैं। मुझे तो बहुत अच्छे लगते हैं। पिछले दिनों इलाहाबाद में डाक-टिकट प्रदर्शनी लगी तो मैंने भी 'माई स्टैम्प' का फायदा उठाया और डाक-टिकट पर मेरी भी फोटो अंकित हो गई।

(इस सम्बन्ध में विशेष जानकारी के लिए पापा का यह आलेख पढ़ें, फिर आपकी फोटो भी डाक-टिकट पर-

भारतीय डाक विभाग डाक-टिकटों के क्षेत्र में नित नए और अनूठे प्रयोग कर रहा है. पिछले वर्षों में जहाँ चन्दन, गुलाब व जूही की सुगंध से सुवासित खुशबूदार डाक-टिकट और हालमार्क के साथ मिलकर सोने के डाक टिकट जारी किये गए, वहीँ अब 'माई स्टांप' या 'पर्सनालाईजड स्टैम्प' के साथ डाक-टिकट पर कोई व्यक्ति अपनी भी तस्वीर लगा सकता है. फ़िलहाल ये 17 से ज्यादा डाक-टिकटों के साथ उपलब्ध हैं. इनमें ताजमहल, पंचतंत्र, एयरो फ्लाईट, स्टीम इंजन, विभिन्न तरह के फूल एवं वाइल्ड लाइफ डाक-टिकटों के साथ 12 राशियों के डाक टिकट भी उपलब्ध हैं.
 दुनिया के कई देशों में 'माई स्टाम्प' सुविधा पहले से ही लागू है, पर भारत में पहली बार इसे विभाग द्वारा वर्ष 2000 में कोलकाता में 'इंदिपेक्स एशियाना' के आयोजन के दौरान जारी किया गया था. पर उस समय यह उतनी लोकप्रिय न हो सकी. पिछले वर्ष नई दिल्ली में विश्व डाक टिकट प्रदर्शनी (12-18 फरवरी 2011 ) के आयोजन के दौरान इसे पुन: लांच किया गया और लोगों ने इसे हाथों-हाथ लिया. नतीजन देखते ही देखते हजारों लोगों ने डाक टिकटों के साथ अपनी तस्वीर लगाकर इसका लुत्फ़ उठाया. उत्तर प्रदेश में 17 -19 दिसंबर, 2011 के दौरान लखनऊ में आयोजित राज्य स्तरीय डाक टिकट प्रदर्शनी में इसे जारी किया गया। इसके बाद इसे आगरा और हाल ही में 13-14 जनवरी 2013 को कुम्भ के दौरान इलाहाबाद में जारी किया गया। इस सु-अवसर का फायदा हमने भी उठाया और अपने पूरे परिवार को ही माई स्टैम्प के तहत डाक-टिकटों पर ला दिया।

आपकी जानकारी हेतु बता दूं कि इस सेवा का लाभ उठाने के लिए अपने शहर में स्थित फिलाटेलिक ब्यूरो में पंजीकरण कराना होता है. एक फार्म भरकर उसके साथ अपनी फोटो और 300 /-जमा करने होते हैं. एक शीट में कुल 12 डाक-टिकटों के साथ फोटो लगाई जा सकती है. इसके लिए आप अपनी अच्छी तस्वीर डाक विभाग को दे सकते हैं, जो उसे स्कैन करके आपका खूबसूरत 'माई स्टांप' बना देगा. यदि कोई तत्काल भी फोटो खिंचवाना चाहे तो उसके लिए भी प्रबंध किया गया है. 'माई स्टैम्प' को ही 'पर्सनालाईजड स्टैम्प' भी कहा जाता है. इस पर सिर्फ जीवित व्यक्तियों की ही तस्वीर लगाई जा सकती है. सम्बंधित व्यक्ति को फिलाटेलिक ब्यूरो में व्यक्तिगत रूप से जाना पड़ता है, यदि किसी कारणवश न जा सके तो सम्बंधित संदेशवाहक से अपना फोटो युक्त परिचय पत्र भेजना पड़ता है.

तो अब देर किस बात की, किसी को उपहार देने का इससे नायब तरीका शायद ही हो. इसके लिए जेब भी ज्यादा नहीं ढीली करनी पड़ेगी, मात्र 300 रूपये में 12 डाक-टिकटों के साथ आपकी खूबसूरत तस्वीर. अब आप इसे चाहें अपने परिवारजनों को दें, मित्रों को या फिर अपने प्रेमी-प्रेमिका को. डाक-टिकट पर आप अपनों की तस्वीर भी छपवा कर उसे भेज सकते हैं. मतलब, आप किसी से बेशुमार प्यार करते हैं, तो इस प्यार को बेशुमार दिखाने का भी मौका है. पांच रुपए के डाक-टिकट, जिस पर आपकी तस्वीर होगी, वह देशभर में कहीं भी भेजी जा सकती है.

'माई स्टाम्प' पर सिर्फ आप अपनी तस्वीर ही नहीं देखते, बल्कि वक़्त की नजाकत के अनुसार इसे विभिन्न डाक-टिकटों के साथ देख सकते हैं. मसलन, प्रेम को दर्शाने के लिए ताजमहल, बच्चों के लिए रंग-बिरंगे फूल और पञ्चतंत्र, एडवेंचर के लिए वाइल्ड लाइफ से जुड़ा डाक टिकट या फिर एयरो फ्लाईट और स्टीम इंजन. यही नहीं अपनी राशि के अनुरूप भी डाक-टिकट पसंद कर उस पर अपनी फोटो लगवा सकते हैं !!
  
                    ( माई स्टैम्प के तहत सिनेरेरिया (Cineraria) फूल के साथ अपूर्वा की तस्वीर)

मंगलवार, फ़रवरी 05, 2013

डाक-टिकटों की खूबसूरत दुनिया में अक्षिता


पिछले दिनों (13-14 जनवरी 2013) इलाहाबाद में 'डाक- टिकट प्रदर्शनी' (Philatelic Exhibition) का आयोजन उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र के महात्मा गाँधी कला वीथिका में हुआ तो मैं भी ममा-पापा के साथ देखने पहुँची। वाह, वहां तो ढेर सारे रंग-बिरंगे डाक टिकट लगे हुए थे। कहीं गाँधी जी पर जारी डाक टिकटों की सीरीज थी तो कहीं इलाहाबाद और आस-पास से जुड़े विषयों और लोगों पर जारी डाक टिकटें प्रदर्शित की गई थीं।
 
इस प्रदर्शनी में फिलेटलिस्टों द्वारा तमाम डाक टिकटों की प्रदर्शनी लगायी गयी। कुल 59 फ्रेमों में हजारों की संख्या में डाक-टिकट प्रदर्शित किए गये। इनमें इलाहाबाद से संबंधित विषयों पर जारी डाक-टिकट, डाक-टिकटों के माध्यम से सिनेमा के 100 वर्ष,राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी, रविंद्रनाथ टैगोर,नेहरु परिवार पर जारी डाक टिकट, भारतीय स्वतंत्रता संग्राम पर जारी डाक टिकट, मस्जिदों पर जारी डाक-टिकट से लेकर से लेकर जैव विविधता, रोटरी,अग्निशमन, रेड क्रास और एड्स, मलेरिया इत्यादि के विरूद्ध जागरूक करते तमाम रंग-बिरंगे डाक-टिकट प्रदर्शित किये गये।
 
 
इनमें सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि विदेशों द्वारा जारी दुर्लभ डाक-टिकट व डाक-स्टेशनरी भी शामिल थे। प्रदर्शनी में वरिष्ठ फिलेटलिस्टों के अलावा तमाम बच्चों ने भी अपने डाक-टिकटों का प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शनी देखने के बाद तो यही लगा कि हर डाक टिकट की अपनी एक कहानी है और इसे समझने की जरुरत है !!

रविवार, जनवरी 20, 2013

वाह ताज ! काश मेरी मुट्ठी में आ जाये !!

पिछले दिनों मैं आगरा गई तो ताजमहल का भी दीदार किया। वाह, कितना सुन्दर है ये।
काश मेरी मुट्ठी में आ जाये !
ममा-पापा तो पहले भी ताज-नगरी घूम चुके हैं, पर मैं और अपूर्वा तो पहली बार आये।
ठण्ड तो है, पर घूमने का अपना अलग ही आनन्द है।
ताज में जूते या चप्पल पहनकर जाना मना है। आखिर गन्दगी जो फैलती है। पर जूते या चप्पल में इसे पहनकर जरुर जा सकते हैं। अपूर्वा सोच रही है की यह क्या बला है !
ताज की खूबसूरती देखते ही बनती है। कित्ती सुन्दर दीवारें।
ताजमहल की यह मीनार कित्ती ऊँची है। काश मैं इस पर चढ़ पाती ।
ताजमहल के पास यह मस्जिद।
वाकई अद्भुत ! ताजमहल परिसर में सूर्य अस्त होने का नजारा।
शाम ढलने लगी है। ठण्ड भी बढ़ने लगी है। अब यात्रा के अगले पड़ाव पर।

सोमवार, जनवरी 14, 2013

महाकुम्भ प्रयाग के संगम तट से

महाकुम्भ की पावन बेला में हम रात्रि में संगम तट का नजारा लेने पहुंचे। वाकई अद्भुत। रात्रि के करीब नौ बजे। एक तरफ तरफ़ रोशनी की लड़ियाँ, उस पर से संगम का मनोहारी दृश्य, अलसाये से नाविक और पक्षियों का झुण्ड। आज मकर संक्रांति पर प्रथम शाही स्नान।

!! आप सभी को मकर संक्रांति और कुम्भ पर्व पर ढेरों शुभकामनायें !!

बुधवार, जनवरी 09, 2013

अक्षिता और अपूर्वा ने भी देखा आगरा फोर्ट

आजकल हम लोगों के विंटर-हालीडे चल रहे हैं। इत्ती ज्यादा ठण्ड पड़ रही है कि घर से बाहर निकलने का मन ही नहीं करता। पर इससे थोड़े ही चलेगा। पिछले दिनों मामा जी को चोट लगी तो उन्हें देखने आगरा गई। और जब आगरा गई तो भला आगरा फोर्ट और ताजमहल को कैसे भूल सकती हूँ।फ़िलहाल इस पोस्ट में आगरा फोर्ट की बातें।
 हमारे गाइड ने आगरा फोर्ट के बारे में हमें ढेर सारी बातें बताईं . आगरा फोर्ट को यूनेस्को ने विश्व धरोहर स्थल घोषित किया है। इसे लाल किला भी कहा जाता है।
यह फोर्ट चारों तरफ से मजबूत चहरदीवारी से घिरा है, ताकि कोई इस पर अटैक न कर सके। यहीं से कई राजाओं ने शासन किया। 
  
मुगल सम्राट बाबर, हुमायुं, अकबर, जहांगीर, शाहजहां व औरंगज़ेब यहीं रहा करते थे। उन दिनों दिल्ली की बजाय आगरा ही देश की राजधानी थी।
 यहीं रहते हुए शाहजहाँ ने अपनी बेगम की याद में ताजमहल भी बनवाया, पर मुझे यह जानकर अच्छा नहीं लगा कि उन्हें उनके बेटे औरंगज़ेब ने इसी फोर्ट में कैद कर लिया।  
 
इसके पास ही विश्व प्रसिद्ध स्मारक ताजमहल भी स्थित है, जिसका दृश्य यहाँ से बहुत सुन्दर लगता है। पर कोहरे के चलते हम यह नहीं देख पाए।
हमें तो यह फोर्ट बहुत अच्छा लगा। मैं और अपूर्वा तो इसे पहली बार देखे।
पर ठण्ड के चलते हमारी हालत ख़राब हो रही थी। उस दिन तो और भी कड़ी ठण्ड थी।इसीलिए जल्दी से हमें वहां से निकलना पड़ा।
यह देखिये, यह दोनों बन्दर भी यहाँ दिख रहे हैं। दोनों ही ठण्ड से सिकुड़ रहे हैं।