आप सब 'पाखी' को बहुत प्यार करते हैं...

रविवार, जनवरी 20, 2013

वाह ताज ! काश मेरी मुट्ठी में आ जाये !!

पिछले दिनों मैं आगरा गई तो ताजमहल का भी दीदार किया। वाह, कितना सुन्दर है ये।
काश मेरी मुट्ठी में आ जाये !
ममा-पापा तो पहले भी ताज-नगरी घूम चुके हैं, पर मैं और अपूर्वा तो पहली बार आये।
ठण्ड तो है, पर घूमने का अपना अलग ही आनन्द है।
ताज में जूते या चप्पल पहनकर जाना मना है। आखिर गन्दगी जो फैलती है। पर जूते या चप्पल में इसे पहनकर जरुर जा सकते हैं। अपूर्वा सोच रही है की यह क्या बला है !
ताज की खूबसूरती देखते ही बनती है। कित्ती सुन्दर दीवारें।
ताजमहल की यह मीनार कित्ती ऊँची है। काश मैं इस पर चढ़ पाती ।
ताजमहल के पास यह मस्जिद।
वाकई अद्भुत ! ताजमहल परिसर में सूर्य अस्त होने का नजारा।
शाम ढलने लगी है। ठण्ड भी बढ़ने लगी है। अब यात्रा के अगले पड़ाव पर।

सोमवार, जनवरी 14, 2013

महाकुम्भ प्रयाग के संगम तट से

महाकुम्भ की पावन बेला में हम रात्रि में संगम तट का नजारा लेने पहुंचे। वाकई अद्भुत। रात्रि के करीब नौ बजे। एक तरफ तरफ़ रोशनी की लड़ियाँ, उस पर से संगम का मनोहारी दृश्य, अलसाये से नाविक और पक्षियों का झुण्ड। आज मकर संक्रांति पर प्रथम शाही स्नान।

!! आप सभी को मकर संक्रांति और कुम्भ पर्व पर ढेरों शुभकामनायें !!

बुधवार, जनवरी 09, 2013

अक्षिता और अपूर्वा ने भी देखा आगरा फोर्ट

आजकल हम लोगों के विंटर-हालीडे चल रहे हैं। इत्ती ज्यादा ठण्ड पड़ रही है कि घर से बाहर निकलने का मन ही नहीं करता। पर इससे थोड़े ही चलेगा। पिछले दिनों मामा जी को चोट लगी तो उन्हें देखने आगरा गई। और जब आगरा गई तो भला आगरा फोर्ट और ताजमहल को कैसे भूल सकती हूँ।फ़िलहाल इस पोस्ट में आगरा फोर्ट की बातें।
 हमारे गाइड ने आगरा फोर्ट के बारे में हमें ढेर सारी बातें बताईं . आगरा फोर्ट को यूनेस्को ने विश्व धरोहर स्थल घोषित किया है। इसे लाल किला भी कहा जाता है।
यह फोर्ट चारों तरफ से मजबूत चहरदीवारी से घिरा है, ताकि कोई इस पर अटैक न कर सके। यहीं से कई राजाओं ने शासन किया। 
  
मुगल सम्राट बाबर, हुमायुं, अकबर, जहांगीर, शाहजहां व औरंगज़ेब यहीं रहा करते थे। उन दिनों दिल्ली की बजाय आगरा ही देश की राजधानी थी।
 यहीं रहते हुए शाहजहाँ ने अपनी बेगम की याद में ताजमहल भी बनवाया, पर मुझे यह जानकर अच्छा नहीं लगा कि उन्हें उनके बेटे औरंगज़ेब ने इसी फोर्ट में कैद कर लिया।  
 
इसके पास ही विश्व प्रसिद्ध स्मारक ताजमहल भी स्थित है, जिसका दृश्य यहाँ से बहुत सुन्दर लगता है। पर कोहरे के चलते हम यह नहीं देख पाए।
हमें तो यह फोर्ट बहुत अच्छा लगा। मैं और अपूर्वा तो इसे पहली बार देखे।
पर ठण्ड के चलते हमारी हालत ख़राब हो रही थी। उस दिन तो और भी कड़ी ठण्ड थी।इसीलिए जल्दी से हमें वहां से निकलना पड़ा।
यह देखिये, यह दोनों बन्दर भी यहाँ दिख रहे हैं। दोनों ही ठण्ड से सिकुड़ रहे हैं।

सोमवार, दिसंबर 31, 2012

अलविदा-2012...नूतन वर्ष-2013 का स्वागत

 
!! अलविदा-2012 !!
 
 I नूतन वर्ष-2013 का स्वागत है।
 
!!आप सभी को नव वर्ष पर बधाइयाँ !!
 
**नया साल आप सभी के जीवन में नया उल्लास और नई खुशियाँ लेकर आए**

रविवार, दिसंबर 30, 2012

अपूर्वा की ड्राइविंग

अपूर्वा बड़ी हो रही हैं। अब तो दो साल, दो माह से भी बड़ी हो गईं। हमने बताया ही था कि अब चीजों को समझने लगी हैं और खूब जिद भी करने लगी हैं। ड्राइवर अंकल को कार चलते देखकर अपूर्वा का मन भी कार-ड्राइविंग के लिए मचलता है। अब देखिये अपूर्वा की कार-ड्राइविंग।


अब लगता है, जल्द ही अपूर्वा हमें लांग-ड्राइविंग पर ले जायेंगीं।

गुरुवार, दिसंबर 27, 2012

दो साल दो महीने की हो गईं अपूर्वा

ये हैं हमारी सिस्टर अपूर्वा। आज 27 दिसंबर, 2012 को  पूरे दो साल दो महीने की हो गईं।
अब चीजों को समझने लगी हैं और खूब जिद भी करने लगी हैं।

अपूर्वा हमारी बेस्ट फ्रैंड भी हैं।

अपूर्वा को हमारी तरफ से ढेर सारी शुभकामनायें और प्यार।

!! आप भी अपना स्नेहिल आशीर्वाद देना न भूलियेगा !!  

बुधवार, दिसंबर 26, 2012

मिलिए तोता (Parrot) जी से

 
मिलिए इन तोता (Parrot) जी से। आजकल यह हमारे घर के लॉन में दिन भर मस्ती करते रहते हैं।
 
सुबह-सुबह क्रेडल पर बैठकर आनंद उठाते हैं।
 
यह देखिये, कित्ता अच्छा पोज दे रहे हैं।
मन किया तो पोल पर बैठकर धूप सेंकते हैं।
धूप और खिली तो जमकर बाथिंग-बाथिंग करते हैं।
 
!! है न मजेदार !! 

मंगलवार, दिसंबर 25, 2012

मैं भी सांता क्लाज बनूँ

आज क्रिसमस है। मेरे घर से तो चर्च बहुत सुन्दर दिखता है। कल रात में मैंने इसकी सजावट देखी, वाकई बहुत खूबसूरत। ठीक वैसे ही जैसे हम दीपावली पर घर सजाते हैं।
क्रिसमस पर मुझे सबसे अच्छा लगता है- संता क्लाज। मेरा भी मन करता है कि मैं संता क्लाज जैसी ड्रेस पहनूं और सभी को ढेर सारे गिफ्ट दूं।
क्रिसमस पर मैंने अपने स्कूल के लिए सुन्दर सी बेल बनाई थी और यह प्यारा सा क्रिसमस-ट्री भी मैंने बनाया है।
 
!! Wish u all a very-very Happy X-mas !! 

सोमवार, दिसंबर 24, 2012

छुट्टियों के दिन

आजकल छुट्टियों के दिन चल रहे हैं। इस बीच क्रिसमस से लेकर नए साल तक का आगमन होगा। कई बार सोचती हूँ कि बाहर निकलूं, पर ठण्ड इत्ती ज्यादा पड़ रही है कि हिम्मत ही नहीं पड़ती। सूरज दादा तो मानो नाराज बैठे हैं कि वे अपना मुखड़ा नहीं दिखाएंगें, ताकि हम बच्चे छुट्टियों में कहीं निकल ही न पायें। यह तो कुछ ज्यादा ही ज्यादती हो गई।

छुट्टियाँ हैं, तो घर में बैठने से थोड़े ही काम चलेगा। परसों सटरडे को मैंने दबंग-2 मूवी देखी। अब चुलबुल पाण्डेय जी लालगंज (आजमगढ़) से कानपुर आ गए हैं। आजमगढ़ तो हमारा पैत्रिक आवास है और कानपुर में हमारा जन्म हुआ है। अब तो लगता है कि दबंग-3 में चुलबुल जी पक्का इलाहाबाद ट्रांसफर हो जायेंगे, आखिर हम इलाहाबाद में जो हैं। इस बीच अपने ननिहाल भी घूम आई। पहली बार गाजीपुर भी गई और ममा का कालेज देखा। गाजीपुर में हम अफीम-कोठी में टिके। वहाँ ढेर सारे बन्दर दिखे। कई बन्दर तो अफीम की फैक्ट्री से निकलने वाला पानी पीकर बेसुध पड़े थे। गाजीपुर में ही अंग्रेज गवर्नर जनरल लार्ड कार्नवालिस का भी मकबरा देखा।

(ब्रिटिश गवर्नर जनरल लार्ड कार्नवालिस का मकबरा, गाजीपुर)
 
इलाहाबाद में इस समय कुम्भ की खूब तैयारियां चल रही हैं। सारी सड़कें साफ-सुथरी नजर आती हैं। जब हम इलाहाबाद आए थे तो चारों तरफ खूब धूल और गंदगी दिखती थी। तब तो हम पापा जी से यही पूछते थे कि इत्ते गंदे शहर में कैसे रहकर उन्होंने पढाई की थी। खैर, अब तो अच्छा हो गया है। इस बार हम भी कुम्भ मेले को इंजॉय करेंगे। वहाँ पापा के कैम्प आफिस में बैठकर देखेंगे कि इतने सारे लोग कैसे इतनी ठण्ड में रहते हैं। कित्ते सारे साधु-संत अपना डेरा वहाँ डाले हुए हैं।

अभी तो हमें बनारस भी जाना है। बनारस घूमना हमें बहुत अच्छा लगता है, खासकर सारनाथ और गंगा-तट की गंगा आरती।

इलाहबाद में भी ढेर सारी घूमने की जगहें हैं। किला और संगम तो हम घूम चुके हैं। इसके अलावा आनंद भवन, कंपनी बाग़, संग्रहालय, सरस्वती घाट, खुसरो बाग़ सहित ढेर सारी जगहें घूमने के लिए हैं। और हाँ, इलाहाबादी अमरुद के बिना तो सब कुछ अधूरा है और आजकल इनका सीजन भी चल रहा है। तो मैं चली इलाहाबादी अमरुद खाने और आप भी जल्दी से इलाहाबाद घूम जाइये। एक साथ ही प्रयाग कुम्भ और इलाहाबादी अमरुद दोनों के दर्शन हो जायेंगें।

शुक्रवार, दिसंबर 14, 2012

मछली जल की रानी है


पिछली पोस्ट में मैंने अपने एक्वेरियम के बारे में बताया था। कि कैसे मैंने ढेर सारी मछलियाँ रखी हैं और उनकी केयर भी करती हूँ। आज आपको मछली रानी को लेकर स्कूल में पढाई गई राइम बताती हूँ। इसे स्कूल में सुनकर हमें खूब हँसी आती थी।अब इसे हमने अपनी सिस्टर अपूर्वा को भी सिखा दिया है, वह भी खूब मन से गाती है। आप भी पढ़िए-


मछली जल की रानी है।
जीवन उसका पानी है।

हाथ लगाओ तो
डर जाती है।

बाहर निकालो तो
मर जाती है।

कुकर में डालो तो
पक जाती है।

दो दिन रखो तो
सड़ जाती है।

बुधवार, दिसंबर 12, 2012

12-12-12 का जादू

आज का दिन कितना खास है-12.12.12.
 
सोचिये यह कितने सालों में आता है।
 
चलिए हम सभी इस दिन को भरपूर इंजॉय करें.  
 
इस दिन के लिए आप सभी को बधाइयाँ।
 

सोमवार, दिसंबर 10, 2012

दैनिक भास्कर : 'पाखी की दुनि‍या' के अनोखे रहस्य, जानने को हुए बेताब


इलाहाबाद. इन्टरनेट बच्‍चों के बचपन का हिस्सा ही नहीं बनता जा रहा, बल्कि देश की बाल पीढ़ी इस क्षेत्र में भी अनूठे मकाम हासिल कर रही है। इसी की एक मिसाल हैं चाचा नेहरू के गृह नगर इलाहाबाद की नन्ही मासूम अक्षिता, जिसने ब्‍लॉगिंग की दुनिया में देश में सबसे कम उम्र की ब्‍लॉगर के रूप में अपनी पहचान बनाकर राष्ट्रीय बाल पुरस्‍कार हासिल किया है। जिस उम्र में बच्चे खिलौने की दुनिया में उलझे रहते है, उस उम्र में इलाहाबाद की अक्षिता की उंगलियां लैपटॉप के की-बोर्ड में इस कदर फिसलती हैं कि देखने वाले भी हैरत में पड़ जाते है । अक्षिता की इसी खूबी ने उसे देश की पहली सबसे लोकप्रिय बाल ब्‍लॉगर के मुकाम पर पहुंचा दिया है ।

अक्षिता का ब्लॉग "पाखी की दुनिया" बच्चो ही नहीं, बड़ो के बीच भी बेहद लोकप्रिय है। यही वजह है की उसे ब्‍लॉगिंग के क्षेत्र में "राष्ट्रीय बाल पुरस्‍कार" से केंद्र सरकार की तरफ से नवाज़ा गया है। अक्षिता का यह ब्लॉग उसकी सोच और कल्पना का मूर्त रूप है। अक्षिता की सोच को ब्लॉग के माध्यम से उकेरने की जिम्मेदारी खुद अक्षिता के माता-पिता ने ली है। वह उसके द्वारा कहे गये शब्दों, उसकी कल्पना व सोच को शब्दों का रूप देकर इस ब्लॉग को मेंटेन करते हैं। अपने ब्लॉग को लेकर अक्षिता का कहना है कि वह इसके माध्यम से अपनी बाते पूरी दुनिया तक पहुंचाना चाहती है। इलाहाबद के एक स्कूल में KG-2 कक्षा में पढ़ने वाली अक्षिता को यह शौक विरासत से मिला है। 

अक्षिता के मां- बाप भी देश में ब्‍लॉगिंग के क्षेत्र में एक जाना पहचना नाम हैं। अक्षिता के पिता कृष्ण कुमार यादव प्रशासनिक अधिकारी हैं और मां आकांक्षा यादव एक कालेज में प्रवक्ता के बाद फ़िलहाल स्वतंत्र अध्ययन-लेखन में प्रवृत्त हैं। दोनों के ब्लॉग ब्‍लॉगिंग की दुनिया में काफी लोकप्रिय हुए हैं। उन्हें देश का पहला ब्‍लॉगर दंपति  का पुरस्‍कार मिल चुका है। अक्षिता की प्रेरणा भी उसके ब्‍लॉगर मम्मी-पापा हैं। दोनों ही इस ब्लॉग को सजाने और संवारने की पूरी जिम्मेदारी उठाते हैं। अक्षिता की सभी तस्वीरों को इस ब्लॉग पर देखा जा सकता है।

अक्षिता के पिता कृष्ण कुमार यादव का कहना  है कि वह पहले से एक ब्लॉग चलाते थे। उनको ब्लॉग लिखता देख उनकी बेटी ने भी ब्लॉग बनाने की जिद की। राष्ट्रीय बाल पुरस्‍कार-2012 के अलावा अक्षिता ने हिन्दी साहित्य निकेतन का परिकल्पना सम्मान भी सन 2010 में हासिल किया था ।

अक्षिता अपने ब्लॉग "पाखी की दुनिया" (http://pakhi-akshita.blogspot.in/) में केवल अपनी की गई पेंटिंग और अपनी परिकल्पना ही बच्‍चों से शेयर नहीं करती, बल्कि अपने ब्लॉग के जरिये वह बच्‍चों में पर्यावरण की समझ विकसित करने के लिए अपने ही अंदाज में बाल अभियान चला रही है ।

- आशीष राय

साभार : दैनिक भास्कर (16 नवम्बर, 2012)

शनिवार, दिसंबर 08, 2012

रंग-बिरंगी मछलियाँ

रंग-बिरंगी मछलियाँ भला किसे नहीं अच्छी लगतीं। मुझे तो बहुत अच्छी लगती हैं। अंडमान में समुद्र में तो ढेर सारी रंग-बिरंगी मछलियाँ दिखती थीं। ग्लास-बोट से उन्हें देखना बहुत रोमांचक लगता था।
यहाँ इलाहाबाद में भी मैंने एक्वेरियम में ढेर सारी मछलियाँ रखी हैं। उन्हें मैं रोज अपने हाथों से खिलाती हूँ।
कित्ता अच्छा लगता है, जब सारी मछलियाँ मुझे देखते ही ग्रुप में आगे आ जाती हैं कि अब मैं उन्हें उनका फ़ूड दूंगीं।
मुझे तो गोल्ड-फिश बहुत प्यारी लगती हैं।
इसके अलावा मेरे एक्वेरियम में एन्जिल, शुभांगिनी, शार्क जैसी मछलियाँ भी हैं। अपूर्वा भी इनके साथ खूब इन्जॉय करती है।