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बुधवार, अगस्त 29, 2012

अंतर्राष्ट्रीय हिंदी ब्लागर सम्मलेन, लखनऊ में अक्षिता (पाखी)

'अंतर्राष्ट्रीय हिंदी ब्लागर सम्मलेन' एवं 'परिकल्पना सम्मान समारोह' में नन्हीं ब्लागर अक्षिता (पाखी) भी ममा-पापा और अपूर्वा के साथ पहुंची. 27 अगस्त, 2012 को उमानाथ बाली प्रेक्षागृह, कैसर बाग, लखनऊ में भव्यता के साथ संपन्न हुआ यह सम्मेलन तस्लीम एवं परिकल्पना समूह द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया गया था। पिछले साल हिंदी भवन, नई दिल्ली में प्रथम 'अंतर्राष्ट्रीय हिंदी ब्लागर सम्मलेन' एवं 'परिकल्पना सम्मान समारोह' हुआ था, जिसमें उत्तरांचल के तत्कालीन मुख्यमंत्री डा. रमेश पोखरियाल निशंक मुख्या अतिथि थे और साथ में अशोक चक्रधर, डा. रामदरश मिश्र, प्रभाकर श्रोतिय जैसे विद्वत -जनों की गौरवमयी उपस्थिति.उस समय अक्षिता (पाखी) को 'वर्ष के श्रेष्ठ नन्हा ब्लागर' अवार्ड से सम्मानित किया गया था,पर एन वक़्त पर एयर-इण्डिया के पायलट्स की हड़ताल के चलते अक्षिता (पाखी) कार्यक्रम में शामिल न हो सकी. उस समय अक्षिता पोर्टब्लेयर,अंदमान में थी. इस बार कार्यक्रम लखनऊ में था और अब अक्षिता इलाहबाद में थी, सो भला कैसे चूक सकती थी.

इस अवसर पर अक्षिता के मामा-पापा को ’दशक के श्रेष्ठ दम्पत्ति ब्लागर' के सम्मान से भी नवाजा गया. न्यू मीडिया और ब्लागिंग से जुड़े तमाम लोगों से साक्षात् मुलाकात अपने आप में एक अविस्मरनीय अनुभव था. रविन्द्र प्रभात और जाकिर अली 'रजनीश' ने अपने स्तर पर कार्यक्रम की शानदार मेजबानी की और लखनऊ की तहज़ीब से भी लोगों को रूबरू कराया. देश-विदेश से तमाम ब्लागर जुटे, चर्चाएँ हुईं, पुस्तकें-पत्रिकाएं विमोचित हुईं, सम्मान मिले, मुलाकातें हुईं...और अब रह गई खूबसूरत यादें. ऐसे ही कुछेक यादों को हमने भी अपने कैमरे में सहेजा और आप सभी के साथ शेयर कर रहे हैं.(दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का उदघाटन करते वरिष्ठ साहित्यकार उद्भान्त, साथ मे शिखा वार्ष्णेय,गिरीश पंकज,रणधीर सिंह सुमन और रवीन्द्र प्रभात)('दशक के श्रेष्ठ दम्पत्ति ब्लागर’ के रूप में नन्हीं ब्लागर अक्षिता के ममा-पापा आकांक्षा यादव-कृष्ण कुमार यादव को सम्मानित करने की उद्घोषणा करते परिकल्पना समूह के संयोजक रविन्द्र प्रभात)('दशक के श्रेष्ठ दम्पत्ति ब्लागर’ के रूप में नन्हीं ब्लागर अक्षिता के ममा-पापा आकांक्षा यादव-कृष्ण कुमार यादव को सम्मानित करते वरिष्ठ साहित्यकार उद्भ्रांत, पूर्व पुलिस महानिरीक्षक व कथा क्रम के संपादक शैलेन्द्र सागर. साथ में परिलक्षित हैं वरिष्ठ पत्रकार सुभाष राय और लन्दन की पत्रकार और ब्लागर शिखा वार्ष्णेय).('दशक के श्रेष्ठ दम्पत्ति ब्लागर’ के रूप में नन्हीं ब्लागर अक्षिता के ममा-पापा आकांक्षा यादव-कृष्ण कुमार यादव के सम्मान के बाद ब्लागिंग हेतु 'राष्ट्रीय बाल पुरस्कार' विजेता अक्षिता (पाखी) को बुके देकर सम्मानित करते पूर्व पुलिस महानिरीक्षक व कथा क्रम के संपादक शैलेन्द्र सागर)
('दशक के श्रेष्ठ दम्पत्ति ब्लागर’ के रूप में सम्मानित होते नन्हीं ब्लागर अक्षिता के ममा-पापा आकांक्षा यादव-कृष्ण कुमार यादव और साथ में अक्षिता (पाखी). मंच पर दिख रहे हैं- डॉ सुभाष राय, वरिष्ठ साहित्यकार उद्भ्रांत, कथा क्रम के संपादक शैलेंद्र सागर, सुश्री शिखा वार्ष्णेय)( 'दशक के श्रेष्ठ दम्पत्ति ब्लागर’ के रूप में सम्मानित होने के बाद नन्हीं ब्लागर अक्षिता के पापा कृष्ण कुमार यादव का संबोधन. साथ में परिलक्षित हैं कार्यक्रम के संचालक ब्लागर हरीश अरोड़ा)
('दशक के श्रेष्ठ दम्पत्ति ब्लागर’ के रूप में सम्मानित होने के बाद नन्हीं ब्लागर अक्षिता के पापा कृष्ण कुमार यादव का आभार-उद्बोधन और मंचस्थ दिख रहे हैं- डॉ सुभाष राय,सुश्री शिखा वार्ष्णेय,वरिष्ठ साहित्यकार उद्भ्रांत, कथा क्रम के संपादक शैलेंद्र सागर, डॉ अरविंद मिश्रा, गिरीश पंकज)(दशक के ब्लागर के रूप में सम्मानित होने के बाद सभी ब्लागर्स का समूह-फोटोग्राफ. क्रमश : कृष्ण कुमार यादव, आकांक्षा यादव, पूर्णिमा वर्मन, रविन्द्र प्रभात, बी. एस. पाबला, अविनाश वाचस्पति और रवि रतलामी. मंचस्थ दिख रहे हैं- हरीश अरोड़ा, डॉ सुभाष राय, अक्षिता (पाखी), सुश्री शिखा वार्ष्णेय, डॉ अरविंद मिश्रा, वरिष्ठ साहित्यकार उद्भ्रांत, कथा क्रम के संपादक व पूर्व पुलिस महानिरीक्षक शैलेंद्र सागर)(अपूर्वा के साथ नन्हीं ब्लागर अक्षिता की ममा आकांक्षा यादव, अनुभूति-अभिव्यक्ति वेब पत्रिका की संपादक पूर्णिमा वर्मन (संयुक्त अरब अमीरात), 'राष्ट्रीय बाल पुरस्कार' विजेता व पिछले साल 'श्रेष्ठ नन्हीं ब्लागर' से सम्मानित अक्षिता (पाखी), नन्हीं ब्लागर अक्षिता के पापा कृष्ण कुमार यादव (इलाहबाद परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाए) एवं बाल-साहित्यकार डा. जाकिर अली रजनीश)(देश-विदेश से पधारे तमाम ब्लागर्स)(जब ममा-पापा को सम्मान मिला हो तो बेटियों का इठलाना स्वाभाविक है) (अपूर्व परेशां हैं की वटवृक्ष के इस भरी-भरकम ब्लागर विशेषांक में ममा-पापा और बहना का नाम तो है, पर उनका क्यों नहीं...अब लगता है जल्द ही इन्हें भी ब्लागिंग के क्षेत्र में आना पड़ेगा)







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