आप सब 'पाखी' को बहुत प्यार करते हैं...

गुरुवार, मार्च 08, 2012

रंग-रंगीली होली आई


आज होली का त्यौहार है. इस बार होली हम इलाहाबाद में मना रहे हैं. खूब रंग खेलेंगें और फिर ढेर सारी गुझिया और कचौरी भी तो खानी है. होली पर पापा ने हमारे लिए यह सुन्दर सी कविता भी रची है-

होली आई, होली आई,
रंग-रंगीली होली आई।
आओ पाखी, आओ तन्वी,
मिलजुल सभी मनाएं होली।

पाखी ने भर ली पिचकारी,
अब देखो किसकी है बारी।
उसने सबको ही रँग डाला,
लाल, गुलाबी, नीला, काला।

अब आई गुलाल की बारी,
संग में गुझिया की तैयारी।
सब मिलकर के गुझिया खाएं,
पाठ प्यार का रोज पढ़ाएं।


होली-पर्व पर अप सभो को रंग भरी बधाइयाँ और आपका प्यार और स्नेह तो मिलेगा ही !!
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