आप सब 'पाखी' को बहुत प्यार करते हैं...

शनिवार, अक्तूबर 16, 2010

नवरात्र और दशहरा...धूमधाम वाले दिन आए

आज नवरात्र का अंतिम दिन है. कित्ती धूमधाम दिखती है चारों तरफ. कहीं माँ दुर्गा की मूर्तियाँ सजी हुई हैं तो बढ़िया-बढ़िया गाने भी बज रहे हैं. घर में तो आजकल फल, मिठाई और फूलों की पूछिये ही नहीं. मैं तो व्रत नहीं रहती पर व्रत वाले फल इत्यादि खाने में बहुत तेज हूँ. मंदिर में जाकर दर्शन भी करना नहीं भूलती. वहाँ तो बहुत भीड़ होती है. जिसे देखो सब माता जी का दर्शन करने आते हैं. मैंने तो माता जी की खूब पूजा की और आशीर्वाद भी माँगा।पिछले साल जब मैं कानपुर थी तो नवरात्र में मम्मी-पापा के साथ माता जी का दर्शन करने मन्दिर गई तो पुजारी जी ने मुझे एक नहीं दो-दो चुनरी ओढाई, गले में माला डाली और ढेर सारा प्रसाद दिया। वह तो मुझे कभी नहीं भूलता. कल तो दशहरा है. मैंने तो पूरी लिस्ट बना ली है कि क्या-क्या खरीदना है और क्या-क्या खाना है. इस मामले में हम बच्चों का कोई सानी नहीं. दशहरे में मुझे रावण से बहुत डर लगता है. उसकी हंसी कित्ती डरावनी होती है-हा..हा..हा..हा..पिछले साल जब मैं कानपुर में थी तो खूब बड़ा सा रावण देखा था और फिर उसे जला दिया गया..कित्ती आतिशबाजी हुई थी. मैंने तो डर कर अपने कान ही बंद कर लिए थे. अब देखिये इस बार क्या करती हूँ. आप सभी लोगों को नवरात्र और दशहरा की बधाई और ऐसे ही मुझे अपना प्यार और आशीर्वाद देते रहिएगा. मैं तो चली सुबह-सुबह मम्मा का हाथ बँटाने और फिर मिठाइयाँ खाने !!
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