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मंगलवार, अप्रैल 27, 2010

बुआ के घर आई इक नन्हीं परी

लगता है अब मैं बड़ी हो गई हूँ. अब आप पूछेंगे वो कैसे. दरअसल अब तक घर में मैं सबसे छोटी थी. मैं सबको दीदी-भैया कहती, पर अब कोई मुझे भी दीदी कहने वाली आ गई है. आज सुबह ही बुआ के घर एक प्यारी सी गुड़िया ने जन्म लिया है. इससे पहले बस बड़े मामा का बेटा अच्युत ही मुझसे छोटा था. अब दो-दो लोग छोटे हो गए हैं. इक घर में और इक ननिहाल में. अबकी गर्मी की छुट्टियों में घर जाउंगी तो अपने लिए दीदी सुनकर कित्ता अच्छा लगेगा..है न. अभी तक सभी लोग मुझे ही खेलाते थे, अब उस नन्हीं गुड़िया को मैं भी खिलाउंगी ...कित्ता मजा आयेगा. बुआ से तो अभी से मैंने कह दिया है, जब तक मैं न आ जाऊँ तब तक कहीं न जाना. पहले मैं गुड़िया के साथ खेलूंगी, उसे प्यार करुँगी, उसे खिलाउंगी..फिर वह कहीं जाएगी. तो अब आप भी मान गए न मैं अब बड़ी हो गई...आखिरकार बुआ के घर आई इक नन्हीं परी !!

( इस पोस्ट की चर्चा मेरा मन मुस्काया (चर्चा मंच - 140) के अंतर्गत भी देखें )

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