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मंगलवार, जून 01, 2010

अंडमान में आया भूकंप

आपको पता है आज रात 1: 28 के करीब अंडमान-निकोबार में भूकम्प आया। इसकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर 6.6 मापी गई. इससे पहले 30 मार्च की रात 10:27 बजे के करीब डेढ़ मिनट भूकंप के झटके महसूस हुए थे. इसकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर पोर्टब्लेयर में 6.3 और मायाबंदर में 6.9 आंकी गई थी. उस समय जब भूकंप आया था तो अधिकतर भाग में बिजली नहीं थी और लोग सोने की तैयारी में थे. अचानक महसूस हुआ कि बेड, ए. सी. और खिड़कियाँ जोर-जोर से हिल रही हैं, चूँकि ईधर भूत-प्रेत की बातें उतनी प्रचलित नहीं हैं, सो उधर ध्यान ही नहीं गया. फिर लगा कि घर की पेंटिंग हो रही है और पीछे मजदूर सीढ़ी लगाकर छोड़ गए हैं. उसे ही कोई हिला रहा है. उस समय मैं बिस्तर पर खूब कूद रही थीं, सो एक बार यह भी दिमाग में आया कि बेड इसी के चलते हिल रहा है. अगले ही क्षण जब मम्मी-पापा ने बताया कि यह भूकम्प हो सकता है तो हम सब बेड पर एकदम बीचों-बीच में इस तरह बैठ गए कि कोई चीज गिरे भी तो हम लोगों के ऊपर न गिरे. लगभग डेढ़ मिनट तक हम लोग भूकम्प के हिचकोले खाते रहे. शरीर के रोंगटे खड़े हो गए थे. फिर शांत हुआ तो अन्य लोगों से फोन करके कन्फर्म किया कि वाकई ये भूकम्प ही था. क्योंकि यह हम लोगों का पहला भूकम्प-अनुभव था. फ़िलहाल बात आई और गई हो गई और हम लोग सो गए.

कल रात का भूकंप भी भयावह था. आधी रात्रि में सभी लोग सो रहे थे कि 1: 28 के करीब चीजें अचानक हिलने आरंभ हो गईं. कुछ लोगों को तो सोने में पता भी नहीं चला. मैं भी सो रही थी और मुझे भी पता नहीं चला. मम्मी की नींद अचानक खुल गई और उन्होंने पापा को भी जगाया. सुबह मुझे भी बताया. मम्मी-पापा सोच ही रहे थे कि बाहर निकलकर खुले में चला जाये तो सेफ होगा, पर इसी बीच भूकंप ख़त्म भी हो गया. मैं तो यह सब सोचकर ही डर गई, पर जब सब बीत जाता है तो कित्ता रोमांच पैदा होता है कि मानो झूला झूल रहे थे. सुबह जगकर चेक किया गया कि घर में कहीं दरार तो नहीं पड़ी, पर कुछ नहीं हुआ था. यहाँ तो घर भी ऐसे ही बनाये जाते हैं कि नुकसान न हो और भूकंप इत्यादि का उन पर प्रभाव न पड़े. सुबह टी. वी. पर देखा तो इस भूकंप तीव्रता 6.6 बताई जा रही थी. वैसे समुद्र के बीच में अवस्थित होने के कारण यहाँ भूकंप आम बात है और जल्दी कोई नुकसान भी नहीं होता. पर डर तो लगता ही है. अच्छा हुआ जो मैं मस्ती से सो रही थी, नहीं तो रात में कित्ता डर लगता !!
( और हाँ, सुबह-सुबह जगकर मैंने अपनी अल्मिरा, ट्वॉयज और सायकिल भी चेक की, कि सब सेफ तो हैं न. और अब हो रही है सायकिल पर टेडी-बियर को बिठाकर घुमाने की तैयारी)
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